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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) द्वारा पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास की आवश्यकता के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित होता है। टिप्पणी कीजिये। (250 शब्द)

    21 Feb, 2024 सामान्य अध्ययन पेपर 3 विज्ञान-प्रौद्योगिकी

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) का संक्षिप्त परिचय दीजिये।
    • पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को संतुलित करने में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की भूमिका पर चर्चा कीजिये।
    • भारत में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की कमियों पर चर्चा कीजिये।
    • यथोचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा परिभाषित EIA का आशय विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन से पहले उनके पर्यावरणीय परिणामों का आकलन करना है। इसमें परियोजना विकल्पों की तुलना करना, पर्यावरणीय प्रभावों की भविष्यवाणी करना और शमन रणनीतियाँ तैयार करना शामिल है। यह पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत जारी किया जाता है।

    मुख्य भाग:

    पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास में सामंजस्य स्थापित करने में EIA की भूमिका:

    • व्यापक मूल्यांकन: EIA द्वारा व्यवस्थित रूप से प्रस्तावित परियोजनाओं के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन होता है, जिससे निर्णय निर्माताओं को पर्यावरणीय चिंताओं के साथ आर्थिक विकास लक्ष्यों को संतुलित करने हेतु महत्त्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
    • सूचित निर्णय लेना: प्रदूषण के साथ जीवों के आवास विनाश जैसे पर्यावरणीय परिणामों की मात्रा निर्धारित करके, EIA द्वारा नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने हेतु प्रेरित किया जाता है जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम किया जाता है।
    • हितधारक समन्वय: EIA में निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों एवं पर्यावरण विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारक शामिल होते हैं। इससे भागीदारीपूर्ण दृष्टिकोण सुनिश्चित होने के साथ विविध दृष्टिकोणों पर विचार होने से पर्यावरणीय हितों की रक्षा को ध्यान में रखा जाता है।
    • शमन उपाय: EIA के माध्यम से पर्यावरणीय क्षति को कम करने के लिये शमन उपायों एवं वैकल्पिक तरीकों की सिफारिश की जाती है। उदाहरण के लिये, इसके तहत पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों के उपयोग के साथ पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के संरक्षण का सुझाव दिया जा सकता है, जिससे सतत विकास प्रथाओं को बढ़ावा मिल सकता है।
    • सतत विकास को बढ़ावा देना: परियोजनाओं के डिज़ाइन में पर्यावरणीय दृष्टिकोण को शामिल करके, EIA द्वारा सतत विकास को बढ़ावा मिलता है जिससे आर्थिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन स्थापित होता है।

    भारत में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) में विद्यमान कमियाँ:

    • समय लेने वाली प्रक्रिया: EIA प्रक्रिया (जो कभी-कभी वैज्ञानिक मूल्यांकन पर अत्यधिक केंद्रित होती है) में अधिक समय लगने से परियोजना के कार्यान्वयन में देरी होती है।
    • सीमित सार्वजनिक भागीदारी: EIA नियमों में सार्वजनिक परामर्श को अनिवार्य बनाने के बावजूद इसमें प्रभावित समुदायों तथा हितधारकों के साथ सार्थक भागीदारी में कमी देखी जा सकती है।
    • अपर्याप्त बेसलाइन डेटा: पर्यावरणीय प्रभावों का सटीक आकलन करने के क्रम में EIA अक्सर बेसलाइन डेटा पर निर्भर होता है। हालाँकि कई मामलों में भारत में आधारभूत डेटा अधूरा या पुराना हो सकता है, जिससे आकलन में अशुद्धियाँ हो सकती हैं।
    • राजनीतिक हस्तक्षेप: EIA प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप के उदाहरण सामने आए हैं, जिससे निर्णय वैज्ञानिक साक्ष्य या पर्यावरणीय विचारों के बजाय निहित स्वार्थों से प्रभावित हो सकते हैं।

    भारत में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया में सुधार हेतु संभावित उपाय:

    • स्वतंत्र समीक्षा और निगरानी: एक स्वतंत्र समीक्षा और निगरानी से आर्थिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच अधिक न्यायसंगत संतुलन सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
      • शमन उपायों और पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन का आकलन करने के लिये अनुमोदित परियोजनाओं की नियमित निगरानी एवं मूल्यांकन आवश्यक है।
    • डेटा संग्रह एवं विश्लेषण को बढ़ाने हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग करना: सटीक आधारभूत डेटा और बेहतर पर्यावरणीय प्रभाव आकलन सुनिश्चित करने के लिये व्यापक डेटा संग्रह एवं विश्लेषण विधियों में निवेश करना आवश्यक है।
      • इसमें संपूर्ण पर्यावरण सर्वेक्षण करने के साथ रिमोट सेंसिंग एवं GIS जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करना शामिल हो सकता है।ना
    • पारदर्शिता और सार्वजनिक भागीदारी: परियोजना दस्तावेजों के साथ लिये जाने वाले निर्णयों को लोगों के लिये सुलभ बनाकर EIA प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ा आवश्यक है।
      • सार्वजनिक परामर्श, सुनवाई एवं फीडबैक तंत्र के माध्यम से स्थानीय समुदायों, गैर सरकारी संगठनों तथा विशेषज्ञों सहित हितधारकों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
    • निरंतर सुधार: सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ सफलता की कहानियों को साझा करके EIA समुदाय में निरंतर सुधार के साथ सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देना आवश्यक है।

    निष्कर्ष:

    निर्णय निर्माताओं को विकास गतिविधियों के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में जानकारी प्रदान करके और हितधारक समन्वय एवं शमन उपायों को बढ़ावा देकर, EIA से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि आर्थिक विकास को ऐसे तरीके से आगे बढ़ाया जाए जो पर्यावरणीय रूप से सतत तथा सामाजिक रूप से उत्तरदायी हो।

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