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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न. वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये सामाजिक लेखा परीक्षा लोगों के हाथ में एक शक्तिशाली उपकरण है। इस कथन के आलोक में इसकी प्रमुख कमियों की विवेचना कीजिए तथा इसमें सुधार के लिये सुझाव दीजिये। (150 शब्द)

    22 Sep, 2022 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • सामाजिक अंकेक्षण के बारे में संक्षिप्त जानकारी देकर अपने उत्तर की शुरुआत कीजिये।
    • सामाजिक अंकेक्षण से जुड़ी चुनौतियों की चर्चा कीजिये।
    • इसमें सुधार हेतु अपने सुझाव दीजिये।
    • आगे की राह बताते हुए अपना उत्तर समाप्त कीजिये।

    परिचय

    सामाजिक लेखा या सामाजिक अंकेक्षण किसी भी कार्यक्रम अथवा क्रिया, जिसका संबंध प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से समाज से होता है, के सामाजिक निष्पादन के मूल्यांकन से संबंधित प्रक्रिया है। इसका प्रयोग किसी कार्य के प्राथमिक स्तर अर्थात् उद्भव से लेकर क्रियान्वयन एवं उस क्रियान्वयन के दीर्घकाल तक के प्रभावों की स्वतन्त्र व निष्पक्ष जाँच और उस जाँच में परिलक्षित कमियों में सुधार का परीक्षण, औचित्यता के साथ किया जाता है ताकि समाज के हित में हर स्तर तक विकास हो सके।

    प्रारूप

    वर्तमान स्थिति

    • MGNREGA में सामाजिक अंकेक्षण की स्थिति पर 2017 में CAG द्वारा प्रस्तुत की गयी रिपोर्ट में 25 राज्यों में इस हेतु स्थापित की गयी सामाजिक अंकेक्षण इकाइयों (SAU) का मूल्यांकन किया गया था।
    • इस रिपोर्ट में यह पाया गया कि जहाँ कई राज्यों में सामाजिक अंकेक्षण इकाइयों की स्थापना नहीं की गई थी वहीं बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे अन्य राज्यों में वे राज्य सरकारों के ग्रामीण विकास विभाग के भीतर एक सेल के रूप में काम कर रहे थे जबकि नियमानुसार, उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करना चाहिये था।
    • यह भी देखा गया कि ऐसे अंकेक्षण करने वाले कर्मचारियों का भारी अभाव था तथा अधिकाँश राज्यों में इसके लिये वार्षिक कैलेंडर तक तैयार नहीं किया गया था।
    • इसके अलावा, ग्रामीण समुदायों की सहभागिता में कमी, ग्राम सभा की बैठकों का न होना, जन सुनवाई आदि न आयोजित किया जान जैसी कई समस्याएँ भी सामने आईं।

    सामाजिक अंकेक्षण के राह में आने वाली बाधाएं :

    • प्रशासनिक एवं राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी : ऐसा देखा गया है कि सत्ताधारी दल एवं नौकरशाही द्वारा सामाजिक अंकेक्षण के क्रियान्वयन में ढिलाई बरती जाती है और कई बार अपने भ्रस्ताचार को छिपाने के लिये इन्हें आगे बढ़ने से रोका भी जाता है।
    • SAU की स्वतंत्रता में कमी: सामाजिक अंकेक्षण इकाईयाँ अभी तक स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पा रही हैं तथा वे क्रियान्वयन एजेंसियों के अधीन हैं।
    • आगे की कार्यवाही नहीं: सामाजिक अंकेक्षण की निर्धारित मानकों का अनुपालन न करने की दिशा में कोई निश्चित कानूनी प्रक्रिया निर्धारित नहीं की गयी है।
    • इन्हें नीति निर्माताओं द्वारा मूलभूत आँकड़ों के रूप में नहीं देखा जाता है और न ही इनके आधार पर निवर्तमान योजनाओं में परिवर्तन किये जाते हैं।
    • जन जागरूकता की कमी: इस कारण जनता द्वारा अभी भी इन अंकेक्षणों में हिस्सा नहीं लिया जा रहा है। साथ ही पंचायती राज्य सस्थाओं द्वारा भी इन्हें पर्याप्त समर्थन प्राप्त नहीं हो रहा है।

    सामाजिक लेखा परीक्षा में सुधार के सुझाव:

    • नागरिक समूहों को सामाजिक लेखापरीक्षा को मज़बूत करने हेतु अभियान चलाने और राजनीतिक कार्यकारी तथा इसकी कार्यान्वयन एजेंसियों को जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है।
    • प्रत्येक ज़िले में सामाजिक अंकेक्षण विशेषज्ञों की टीम गठित की जानी चाहिये जो सामाजिक लेखापरीक्षा समिति के सदस्यों (हितधारकों) के प्रशिक्षण हेतु ज़िम्मेदार हो।
    • सामाजिक अंकेक्षण के तरीकों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किये जाने चाहिये जैसे कि सामाजिक लेखापरीक्षा रिपोर्ट तैयार करना और अंकेक्षण करना एवं उसे ग्राम सभा में प्रस्तुत करना।
    • सामाजिक अंकेक्षण की प्रणाली को एक संस्थागत ढांँचे की स्थापना करने के लिये सहक्रियात्मक समर्थन और अधिकारियों द्वारा किसी भी निहित स्वार्थ के बिना प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता होती है।

    निष्कर्ष

    सामाजिक अंकेक्षण प्रक्रिया का उपयोग सामाजिक जुड़ाव, पारदर्शिता और सूचना के संचार के लिये एक साधन के रूप में किया जाता है, जिससे निर्णयकर्त्ताओं, प्रतिनिधियों, प्रबंधकों और अधिकारियों की अधिक जवाबदेही सुनिश्चित होती है। इस प्रकार सामाजिक अंकेक्षण में नीतिगत उद्देश्यों एवं परिणामों के मध्य अंतराल को कम करने की ज़बरदस्त क्षमता होती है।

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