मुख्य परीक्षा
वर्षांत समीक्षा 2025: न्याय विभाग
- 09 Jan 2026
- 67 min read
चर्चा में क्यों?
न्याय विभाग की 2025 वार्षिक समीक्षा में बहु-आयामी रणनीति के माध्यम से भारत के कानूनी क्षेत्र को आधुनिक बनाने में अपनी प्रमुख उपलब्धियों को उजागर किया गया, जो न्यायिक नियुक्तियों, डिजिटल रूपांतरण, कानूनी सहायता के विस्तार और अवसंरचना विकास पर आधारित थी।
वर्ष 2025 में न्याय विभाग की मुख्य उपलब्धियाँ क्या हैं?
- न्यायिक क्षमता को मज़बूत करना: वर्ष 2025 में उच्च न्यायालयों में 157 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई, जिसमें इलाहाबाद (40), बॉम्बे (21), मध्य प्रदेश (15), और राजस्थान (15) अग्रणी हैं। साथ ही, 47 अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी किया गया और 13 की कार्यकाल अवधि बढ़ाई गई।
- इसके अतिरिक्त विशेषज्ञता के वितरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 12 नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई और विभिन्न उच्च न्यायालयों के बीच 44 न्यायाधीशों के स्थानांतरण (ट्रांसफर) किये गए।
- कानूनी पहुँच का विस्तार: टेली लॉ (Tele Law) ने 776 ज़िलों के 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को कवर करके व्यापक भौगोलिक पहुँच हासिल की है और 1.12 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुकदमे से पहले कानूनी परामर्श प्रदान किया है।
- ज़िला स्तरीय कार्यशाला और प्रशिक्षण: 638 ज़िलों में आयोजित कार्यशालाओं और प्रशिक्षण में 37,000 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और यह हमारा संविधान हमारा सम्मान अभियान (सांविधानिक मूल्यों को स्थापित करने के लिये) के साथ समाप्त हुआ, जिसने 70.70 लाख लोगों तक पहुँच बनाई।
- संवेदनशील समूहों के लिये कानूनी सहायता योजनाएँ: नई योजनाओं में वीर परिवार सहायता योजना (श्रीनगर में रक्षाकर्मी के परिवारों) और
- SPRUHA योजना (Supporting Potential and Resilience of the Unseen, Held-back and Affected) को कैदियों और अपराध पीड़ितों के आश्रितों के लिये लागू किया गया। इसके अलावा NALSA की 30वीं वर्षगाँठ के अवसर पर सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण मॉड्यूल भी लॉन्च किया गया।
- अदालतों का डिजिटल रूपांतरण: भारत वर्चुअल सुनवाई में वैश्विक अग्रणी बन गया है, जहाँ 3.91 करोड़ से अधिक सुनवाईयाँ आयोजित की जा चुकी हैं। नागरिकों की पहुँच को बढ़ाने के लिये 1,987 ई-सेवा केंद्र और ई-कोर्ट मोबाइल ऐप उपलब्ध हैं, जिसे 3.38 करोड़ बार डाउनलोड किया गया है।
- ई-कोर्ट्स फेज़–III परियोजना के अंतर्गत, 92 लाख से अधिक मामले इलेक्ट्रॉनिक रूप से दायर किये गए और 1,215 करोड़ रुपये ऑनलाइन अदालत शुल्क के रूप में एकत्र किये गए।
- न्याय वितरण में कार्यकुशलता की वृद्धि: 29 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 774 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (FTSCs) संचालित किये गए, जिनमें 398 विशेष POCSO अदालतें शामिल हैं। इन अदालतों ने अपनी स्थापना के बाद 3.6 लाख मामलों का निस्तारण किया है। वर्ष 2025 में इन अदालतों की निपटान दर 7.41 मामले/माह/अदालत रही, जो सामान्य अदालतों की दर (3.18 मामले/माह/अदालत) की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।
- अवसंरचना और निगरानी में प्रणालीगत सुधार: भौतिक अवसंरचना में थोडा सुधार देखने को मिला, जिसमें वर्ष 2014 के आधार स्तर क्रमशः 15,818 और 10,211 की तुलना में कोर्ट हॉल की संख्या बढ़कर 22,663 और आवासीय इकाइयों की संख्या 20,033 तक पहुँच गई।
- न्याय विकास पोर्टल 2.0 के माध्यम से वास्तविक समय में निगरानी सक्षम की गई है और 94.66% परियोजनाओं को जियो-टैग किया गया है, जबकि विश्व बैंक के बी-रेडी फ्रेमवर्क मूल्यांकन में भागीदारी का उद्देश्य विवाद समाधान में भारत की वैश्विक स्थिति में सुधार करना है।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA)
- परिचय: NALSA एक वैधानिक निकाय है, जिसका गठन वर्ष 1995 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत संपूर्ण भारत में विधिक सहायता कार्यक्रमों की निगरानी, मूल्यांकन और कार्यान्वयन के लिये किया गया था। इसने वर्ष 2025 में अपने 30 वर्ष पूरे किये हैं।
- भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) NALSA के संरक्षक-प्रमुख हैं।
- संवैधानिक अध्यादेश: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39A को कार्यान्वित करने के लिये निर्मित किया गया, जो राज्य को निशुल्क विधिक सहायता प्रदान करने का अधिदेश प्रदान करता है ताकि सभी नागरिकों, विशेष रूप से आर्थिक या अन्य अक्षमता वालों के लिये समान न्याय और अवसर सुनिश्चित किये जा सके।
- यह अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समता) और अनुच्छेद 22(1) (गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराए जाने के अधिकार) के तहत दायित्वों को भी बरकरार रखता है।
- प्राथमिक कार्य: विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत विधिक सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये नीतियाँ और सिद्धांत निर्धारित करना।
- संपूर्ण भारत में विधिक सहायता कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन करना।
- कानूनी सहायता योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करने के लिये राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों (SLSA) एवं गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को धन और अनुदान वितरित करना।
- एकीकृत नेटवर्क: NALSA एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का शीर्ष निकाय है, जिसकी परिकल्पना विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत कानूनी सहायता और सहयोग प्रदान करने के लिये की गई है। इस नेटवर्क में शामिल हैं:
- राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA): संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (संरक्षक-प्रमुख) के नेतृत्व में।
- ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA): संबंधित ज़िले के ज़िला न्यायाधीश की अध्यक्षता में।
- तालुका/उप-विभागीय विधिक सेवा समितियाँ: एक वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश के नेतृत्व में।
- उच्च न्यायालय विधिक सेवा समितियाँ और सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति।
- पात्र समूह: महिलाएँ और बच्चे, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST), आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS), औद्योगिक श्रमिक, विकलांग व्यक्ति और अन्य निर्दिष्ट श्रेणियाँ।
निष्कर्ष
वर्ष 2025 एक समग्र दृष्टिकोण द्वारा चिह्नित किया गया, जिसने क्षमता निर्माण (न्यायाधीश), टेक्नोलॉजिकल डेप्थ (ई-कोर्ट्स), ग्रासरूट रीच (टेली-लॉ), विशेष सहायता (नई योजनाएँ), भौतिक अवसंरचना और प्रक्रिया दक्षता (FTSC) को संयोजित किया। यह बहुआयामी प्रयास सभी नागरिकों के लिये न्याय को अधिक सुलभ, कुशल और समावेशी बनाने में पर्याप्त प्रगति के एक वर्ष का संकेत देता है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न: वर्ष 2025 में न्याय विभाग द्वारा भारत में न्यायिक क्षमता, विधिक सहायता और न्याय तक पहुँच को सुदृढ़ बनाने के लिये किए गए बहुआयामी प्रयासों का मूल्यांकन कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. Tele-Law पहल क्या है और वर्ष 2025 में इसका दायरा क्या रहा?
Tele-Law मुकदमेबाज़ी से पूर्व कानूनी परामर्श प्रदान करती है और 2025 में यह 776 ज़िलों में 2.5 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुँची, जिससे 1.12 करोड़ से अधिक नागरिकों को लाभ हुआ।
2. वर्ष 2025 में NALSA द्वारा कौन-सी प्रमुख कानूनी सहायता योजनाएँ शुरू की गईं?
रक्षाकर्मियों के लिये वीर परिवार सहायता योजना, मानव-वन्यजीव संघर्ष योजना और कैदियों व अपराध पीड़ितों के आश्रितों के लिये SPRUHA योजना शुरू की गई।
3. वर्ष 2025 में ई-कोर्ट्स फेज-III प्रोजेक्ट की मुख्य उपलब्धियाँ क्या हैं?
92 लाख से अधिक ई-फाइलिंग, 579 करोड़ पृष्ठों का डिजिटलीकरण, 3.91 करोड़ वर्चुअल सुनवाइयाँ और 1,987 ई-सेवा केंद्रों ने न्याय प्रदान करने में पहुँच और पारदर्शिता को बढ़ाया।
4. वर्ष 2025 में कितने फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय संचालित किये गए और उनका प्रभाव क्या रहा?
774 FTSC, जिनमें 398 POCSO कोर्ट शामिल हैं, ने 3,61,055 मामलों का निपटारा किया, जिनकी औसत दर 7.41 मामले/महीना/कोर्ट थी, जो रेगुलर कोर्ट से बेहतर प्रदर्शन है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. भारतीय न्यायपालिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021)
- भारत के राष्ट्रपति की पूर्वानुमति से भारत के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा उच्चतम न्यायालय से सेवानिवृत्त किसी न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर बैठने और कार्य करने हेतु बुलाया जा सकता है।
- भारत में किसी भी उच्च न्यायालय को अपने निर्णय के पुनर्विलोकन की शक्ति प्राप्त है, जैसा कि उच्चतम न्यायालय के पास है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
प्रश्न. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2013)
- इसका उद्देश्य समाज के कमज़ोर वर्गों को समान अवसर के आधार पर निशुल्क एवं सक्षम विधिक सेवाएँ प्रदान करना है।
- यह पूरे देश में कानूनी कार्यक्रमों और योजनाओं को लागू करने हेतु राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों के लिये दिशा-निर्देश जारी करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
मेन्स
प्रश्न. निशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने का हकदार कौन है? निशुल्क विधिक सहायता के प्रतिपादन में राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की भूमिका का आकलन कीजिये। (2023)
प्रश्न. भारत में उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों की नियुक्ति के संदर्भ में 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014' पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये। (2017)