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भारतीय अर्थव्यवस्था

पश्चिम एशिया युद्ध और भारत की विनिर्माण मंदी

  • 06 Apr 2026
  • 93 min read

प्रिलिम्स के लिये: HSBC भारत विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI), केप ऑफ गुड होप, MSMEs, होर्मुज़ जलडमरूमध्य, शाहेद ड्रोन, राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM), AI, IoT, रोबोटिक्स, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, BioE3 पॉलिसी (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिये बायोटेक्नोलॉजी), अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC), स्वेज़ नहर, RoDTEP, श्रम संहिता, ONDC, उद्यम, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC)।                             

मेन्स के लिये: HSBC भारत विनिर्माण PMI से जुड़े मुख्य तथ्य, भारत के लिये विनिर्माण क्षेत्र का महत्त्व, पश्चिम एशिया संघर्ष और भारत के विनिर्माण क्षेत्र पर इसका प्रभाव, भारत के विनिर्माण क्षेत्र को भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति सुदृढ़ बनाने के लिये आवश्यक कदम।

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

HSBC भारत विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) मार्च 2026 में घटकर 45 महीने के निचले स्तर 53.9 पर आ गया, जो पश्चिम एशिया संघर्ष और बढ़ती इनपुट लागतों के कारण औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय मंदी को दर्शाता है।

  • निर्माताओं को अगस्त 2022 के बाद से सबसे तेज़ इनपुट लागत वृद्धि का सामना करना पड़ा, जो एल्युमिनियम, स्टील, रसायन और ईंधन जैसे प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई।

सारांश

  • मार्च 2026 में पश्चिम एशिया संघर्ष और बढ़ती इनपुट लागतों के कारण भारत का विनिर्माण PMI घटकर 45 महीने के निचले स्तर 53.9 पर आ गया।
  • मुख्य प्रभावों में ऊँचे मालभाड़े, लंबे शिपिंग मार्ग, ऊर्जा कीमतों में तेज़ उछाल, कच्चे माल की कमी और MSMEs पर बढ़ता दबाव शामिल रहा।
  • ऊर्जा सुरक्षा और सुदृढ़ता सुनिश्चित करने हेतु ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, वैकल्पिक व्यापार मार्गों का सृजन तथा भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रभावों को न्यूनतम करने के लिये व्यापक संरचनात्मक सुधार अनिवार्य हैं।

पश्चिम एशिया में संघर्ष ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र को कैसे धीमा किया?

  • शिपिंग अधिभार का बोझ: भारतीय निर्यातकों के लिये मालभाड़ा दरों में 40% से 50% तक की वृद्धि हुई है। साथ ही, जहाज़ों को केप ऑफ गुड होप के मार्ग से पुनर्निर्देशित किये जाने के कारण डिलीवरी समय में 15–20 दिनों की बढ़ोतरी हुई है, जिससे MSMEs के कार्यशील पूंजी चक्र पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
  • ऊर्जा-आधारित इनपुट लागत मुद्रास्फीति: निर्माताओं को 45 महीनों में परिचालन व्यय में सबसे तेज़ वृद्धि का सामना करना पड़ा। कच्चे तेल (USD 110 प्रति बैरल से अधिक) और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल ने ऊर्जा-प्रधान उत्पादन को कई छोटे इकाइयों के लिये आर्थिक रूप से अव्यवहार्य बना दिया है।
  • MSME क्लस्टरों में संकट: मोरबी (सिरेमिक) और सूरत (कपड़ा) जैसे विनिर्माण केंद्रों में अप्रैल 2026 की शुरुआत में महत्त्वपूर्ण बंदी देखी गई, क्योंकि औद्योगिक गैस का सीमित आवंटन उच्च-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर मोड़ दिया गया था।
  • कच्चे माल की कमी (धातु एवं सीमेंट): स्टील स्क्रैप की कीमतों में 5–8% की वृद्धि हुई और सीमेंट कंपनियों को UAE तथा सऊदी अरब से पेटकोक आयात में बाधा (‘चोकिंग’) का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें अधिक महँगे घरेलू या अमेरिका से प्राप्त कोयले की ओर स्थानांतरित होना पड़ा।
  • रुपये का अवमूल्यन और आयातित मुद्रास्फीति: मार्च 2026 के अंत में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निम्न स्तर ₹95 पर पहुँच गया। इलेक्ट्रॉनिक्स, EV और रक्षा जैसे आयातित घटकों पर निर्भर निर्माताओं के लिये यह स्थिति ‘दोहरी मार’ साबित हुई है, जिसमें उच्च आधार कीमतों के साथ-साथ प्रतिकूल विनिमय दर का दबाव शामिल है।
  • उर्वरक सब्सिडी का दबाव: गल्फ देशों से अमोनिया और यूरिया के प्रमुख आयातक होने के कारण गैस की कीमतों में वृद्धि ने भारत सरकार को उर्वरक सब्सिडी के व्यय में वृद्धि करने के लिये बाध्य किया है, ताकि किसानों हेतु खुदरा कीमतों में वृद्धि को रोका जा सके अन्यथा इससे खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।

HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI

  • परिचय: यह महत्त्वपूर्ण व्यापक आर्थिक संकेतक है जो भारत के विनिर्माण क्षेत्र के स्वास्थ्य में माह-दर-माह परिवर्तन को मापता है।
    • इसे व्यापक रूप से एक "अग्रणी संकेतक" माना जाता है क्योंकि यह आधिकारिक सरकारी डेटा (जैसे- औद्योगिक उत्पादन सूचकांक या सकल घरेलू उत्पाद) जारी होने से पहले वर्तमान व्यावसायिक स्थितियों का एक स्नैपशॉट प्रदान करता है।
  • संकलन और कार्यप्रणाली: यह सूचकांक S&P ग्लोबल द्वारा पूरे भारत में लगभग 400 निर्माताओं के मासिक सर्वेक्षण प्रतिक्रियाओं के आधार पर संकलित किया जाता है। यह पाँच उप-सूचकांकों का एक भारित औसत है:
    • नए ऑर्डर (30%)
    • उत्पादन (25%)
    • रोज़गार (20%)
    • आपूर्तिकर्त्ताओं का वितरण समय (15%)
    • खरीदी गई वस्तुओं का स्टॉक (10%)
  • 50-अंक नियम: सूचकांक को 0 से 100 के पैमाने पर मापा जाता है:
    • 50 से ऊपर: पिछले महीने की तुलना में क्षेत्र में विस्तार को इंगित करता है।
    • 50 से नीचे: संकुचन या गिरावट को इंगित करता है।
    • ठीक 50: कोई परिवर्तन नहीं दर्शाता है।
  • भारत के लिये महत्त्व: मज़बूत PMI रीडिंग अक्सर मज़बूत औद्योगिक उत्पादन और सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के साथ सहसंबंधित होती हैं, जबकि तीव्र गिरावट बढ़ती इनपुट लागत, भू-राजनीतिक व्यवधानों या मांग में कमी जैसी उभरती प्रतिकूलताओं का संकेत दे सकती है।

भारत के लिये विनिर्माण क्षेत्र का क्या महत्त्व है?

  • आर्थिक वृद्धि और सकल घरेलू उत्पाद में योगदान: विनिर्माण औद्योगिक उत्पादन और उत्पादकता लाभ को चलाता है। राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM) के तहत, भारत का लक्ष्य 2035 तक क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान को लगभग दोगुना करके 13% से 25% तक पहुँचाना है।
  • बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है। NMM का उद्देश्य वर्ष 2035 तक 143 मिलियन नई नौकरियाँ सृजित करना है, ताकि प्रतिवर्ष कार्यबल में प्रवेश करने वाले लाखों युवाओं को आकर्षित किया जा सके।
    • अर्द्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विनिर्माण इकाईयाँ आवश्यक गैर-कृषि योग्य मज़दूरी प्रदान करती हैं, जिससे क्षेत्रीय असमानताओं एवं गरीबी को कम करने में मदद मिलती है।
  • व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा: विनिर्माण भारत के कुल निर्यात का लगभग 45% हिस्सा है। लक्ष्य 2035 तक 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का माल निर्यात हासिल करना है। इलेक्ट्रॉनिक्स (जहाँ भारत अब दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है) और रक्षा उपकरणों के उत्पादन को स्थानीय बनाकर, भारत अपने भारी आयात बिलों को कम कर सकता है एवं अपनी विदेशी मुद्रा का संरक्षण कर सकता है।
  • तकनीकी नवाचार: यह क्षेत्र AI, IoT और रोबोटिक्स को अपनाने के लिये एक उत्प्रेरक है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के समग्र तकनीकी प्रोफाइल को बढ़ाता है। एक मज़बूत घरेलू विनिर्माण आधार सुनिश्चित करता है कि भारत दवाओं और मशीनरी जैसी आवश्यक वस्तुओं के लिये वैश्विक आपूर्ति शृंखला "अवरोधों" से पंगु न हो।

भारत के विनिर्माण क्षेत्र को भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति सुदृढ़ बनाने के लिये किन कदमों की आवश्यकता है?

  • ऊर्जा और फीडस्टॉक का विविधीकरण: भारत को अपने कच्चे तेल की सोर्सिंग को गैर-होर्मुज आपूर्तिकर्त्ताओं (रूस, अमेरिका और ब्राज़ील सहित) में आक्रामक रूप से बदलने की आवश्यकता है।
  • वैकल्पिक समुद्री मार्ग: अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) में तेज़ी लाना और स्वेज नहर एवं पश्चिम एशियाई संकीर्ण मार्गों (चॉकप्वाइंट्स) को दरकिनार करने के लिये आर्कटिक मार्गों की खोज करना।
  • नियामक बफर: वैश्विक माल ढुलाई और बीमा प्रीमियमों में अचानक वृद्धि को बेअसर करने के लिये RoDTEP विस्तार और महत्त्वपूर्ण इनपुट पर अस्थायी बुनियादी सीमा शुल्क (BCD) छूट का उपयोग करना।
  • संरचनात्मक एवं डिजिटल सुधार: श्रम संहिता का उपयोग कर ऐसा प्रावधान लागू किया जाए जिससे निर्माता वैश्विक मांग चक्र के आधार पर अपनी कार्यशक्ति को बढ़ा या घटा सकें, ‘स्केलिंग के भय’ के बिना।
    • ONDC + Udyam मॉडल का उपयोग करना, ताकि MSME को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकृत किया जा सके, जिससे वे सीधे मूल उपकरण निर्माता (OEM) को आपूर्ति कर सकें और बाधित पारंपरिक व्यापार मध्यस्थों को बायपास कर सकें।
  • ‘सॉवरेन मैरीटाइम इंश्योरेंस’ फंड की स्थापना: वर्तमान में वैश्विक बीमाकर्त्ताओं द्वारा युद्ध जोखिम प्रीमियम में 40-50% की वृद्धि को नियंत्रित करने के लिये, भारत को एक राज्य-समर्थित समुद्री बीमा संस्थान स्थापित करना चाहिये।
    • यह भारतीय ध्वज वाले जहाज़ों और निर्यातकों को किफायती बीमा सुरक्षा प्रदान करेगा, जिससे शिपिंग पर लगाया गया ‘भू-राजनीतिक कर’ (Geopolitical Tax) ‘मेक इन इंडियाउत्पादों को वैश्विक बाज़ारों में असंयोज्य बनने से रोकेगा।
  • कूटनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: सुरक्षित ऊर्जा गलियारों और संयुक्त समुद्री गश्त सुनिश्चित करने के लिये गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देश, संयुक्त राज्य अमेरिका और क्वाड साझेदारों के साथ द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करें। ऐसे आपूर्ति शृंखला समझौते करें जो अनुकूलनशील और विश्वसनीय सोर्सिंग मार्गों को प्राथमिकता दें।

निष्कर्ष


वर्ष 2026 में पश्चिम एशिया में उत्पन्न संघर्ष भारत की औद्योगिक रणनीति के दृष्टिकोण से एक निर्णायक मोड़ के रूप में कार्य करता है। जबकि विनिर्माण क्षेत्र प्रबल बना हुआ है, ऊर्जा-संचालित मुद्रास्फीति और समुद्री व्यवधानों के द्विगुणित आघातों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि घरेलू उत्पादन को अस्थिर वैश्विक संवाहक बिंदुओं से अलग करने की तत्काल आवश्यकता है। भारत बायो-आधारित फीडस्टॉक्स, हॉर्मुज के बाहर ऊर्जा सोर्सिंग और सॉवरेन बीमा को प्राथमिकता देकर इस संकट को वास्तविक आत्मनिर्भर (Self-Reliant) संरचनात्मक दृढ़ता के अवसर में बदल सकता है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न: वर्ष 2026 में चल रहे पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत के विनिर्माण क्षेत्र, विशेषकर MSME क्लस्टरों पर प्रभाव का विश्लेषण कीजिये। ऐसे बाह्य आघातों को कम करने के लिये नीति उपाय सुझाइये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. मार्च 2026 में भारत का विनिर्माण PMI क्या था?
HSBC भारत विनिर्माण PMI 53.9 पर गिर गया (जो जून 2022 के बाद सबसे कम है)। 50 से ऊपर का मान विस्तार को दर्शाता है, लेकिन इस तीव्र गिरावट से औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय मंदी का संकेत मिलता है।

2. भारत के लिये होर्मुज़ जलडमरूमध्य रणनीतिक रूप से क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20% पेट्रोलियम का परिवहन करता है। ईरानी बलों द्वारा इसकी आभासी बंदी ने भारत के कच्चे तेल और LNG आयात को प्रभावित किया है, जिससे निर्माताओं के लिये ऊर्जा लागत में वृद्धि हुई है।

3. भारत के लिये राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM) का लक्ष्य क्या है?
NMM का उद्देश्य 2035 तक विनिर्माण का GDP में योगदान लगभग 13% से बढ़ाकर 25% करना और 143 मिलियन नई नौकरियाँ सृजित करना है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स

प्रश्न 1. कभी-कभी समाचारों में उल्लिखित पद ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ किसकी गतिविधियों के संदर्भ में आता है ?  (2018)

(a) चीन

(b) इज़रायल

(c) इराक 

(d) यमन

उत्तर: (b)


प्रश्न 2. भारत द्वारा चाबहार बंदरगाह विकसित करने का क्या महत्त्व है? (2017)

(a) अफ्रीकी देशों से भारत के व्यापार में अपार वृद्धि होगी।

(b) तेल-उत्पादक अरब देशों से भारत के संबंध सुदृढ़ होंगे।

(c) अफगानिस्तान और मध्य एशिया में पहुँच के लिये भारत को पाकिस्तान पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।

(d) पाकिस्तान, इराक और भारत के बीच गैस पाइपलाइन का संस्थापन सुकर बनाएगा और उसकी सुरक्षा करेगा।

उत्तर: (c)


प्रश्न. दक्षिण-पश्चिमी एशिया का निम्नलिखित में से कौन-सा एक देश भूमध्यसागर तक फैला नहीं है? (2015)

(a) सीरिया

(b) जॉर्डन

(c) लेबनान

(d) इज़रायल

उत्तर: (b)


मेन्स

प्रश्न. "भारत के इज़रायल के साथ संबंधों ने हाल में एक ऐसी गहराई एवं विविधता प्राप्त कर ली है, जिसकी पुनर्वापसी नहीं की जा सकती है।" विवेचना कीजिये। (2018) 

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