भारतीय अर्थव्यवस्था
MSME योजनाओं के अभिसरण पर नीति आयोग की रिपोर्ट
प्रिलिम्स के लिये: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs), सकल घरेलू उत्पाद (GDP), उद्यम पंजीकरण पोर्टल, उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (UAP), खादी और ग्रामोद्योग, ग्राम स्वराज, सतत विकास लक्ष्य, पारंपरिक उद्योगों के उन्नयन एवं पुनर्निर्माण के लिये कोष की योजना (SFURTI), सूक्ष्म एवं लघु उद्यम समूह विकास कार्यक्रम (MSE-CDP), एस्पायर (ASPIRE), एमएसएमई इनोवेटिव।
मेन्स के लिये: MSME और भारतीय अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका, विभिन्न MSME योजनाओं के अभिसरण की आवश्यकता तथा MSME योजनाओं के अभिसरण हेतु नीति आयोग की सिफारिशें
चर्चा में क्यों?
नीति आयोग ने “योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से MSME क्षेत्र में दक्षता प्राप्त करना” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिये सरकारी समर्थन की प्रभावशीलता को मज़बूत करने के लिये एक रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।
- यह 18 से अधिक MSME योजनाओं के समन्वय के लिये दो-तरफा दृष्टिकोण की सिफारिश करता है, जिसमें सूचना समन्वय और प्रक्रिया समन्वय शामिल हैं।
- पहला केंद्रीय और राज्य डेटा को एकीकृत करता है ताकि बेहतर निर्णय लिये जा सकें। दूसरा योजनाओं को एकीकृत करता है ताकि दोहराव कम हो, सेवा वितरण सुगम बने तथा एक समेकित MSME पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिले।
सारांश
- नीति आयोग 18 से अधिक MSME योजनाओं को समेकित करने का समर्थन करता है ताकि असंगति को समाप्त किया जा सके।
- यह क्षेत्र महत्त्वपूर्ण है, जो GDP में लगभग 30% और निर्यात में 45% का योगदान देता है।
- विभिन्न मंत्रालयों में विखंडित योजनाएँ दक्षता और पहुँच को कम करती हैं।
- NITI आयोग का समन्वय ढाँचा डेटा और प्रक्रियाओं को एकीकृत करके एक सरल, प्रभावी एवं परिणाम-केंद्रित MSME समर्थन प्रणाली बनाने का लक्ष्य रखता है।
MSME क्या हैं?
- परिचय: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) वे व्यवसाय हैं जिन्हें उनके संयंत्र एवं मशीनरी या उपकरण में निवेश तथा वार्षिक टर्नओवर के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। ये भारत की अर्थव्यवस्था के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
- MSME क्षेत्र पर सरकारी खर्च 2019-20 में 6,717 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 22,094 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
- वर्गीकरण: MSME क्षेत्र को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम, 2006 के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है, जो संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश तथा कारोबार के आधार पर किया जाता है। इस वर्गीकरण में संशोधन 1 अप्रैल, 2025 से लागू हुआ।

- आर्थिक योगदान: भारत की अर्थव्यवस्था में MSME क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 30% का योगदान देता है। साथ ही यह देश की 28.13 करोड़ की कार्यबल शक्ति में से 62% को रोज़गार प्रदान करता है और राष्ट्रीय निर्यात में 45% की बड़ी हिस्सेदारी रखता है।
- संवृद्धि और प्रदर्शन: यह क्षेत्र वर्ष 2000 से 2016 के बीच औसतन 8.6% की वृद्धि दर से बढ़ा, जो औद्योगिक क्षेत्र (7.6%) से बेहतर है और इसमें 6,000 अलग-अलग उत्पादों का उत्पादन करने की क्षमता है।
- औपचारिककरण पहल: भारत में 90% से अधिक MSME अब भी अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं और केवल 9% ही अवैध (अवर्जित) स्थिति से औपचारिक स्थिति में स्थानांतरित हुए हैं। औपचारिककरण को बढ़ावा देने के लिये सरकार ने उद्यम पंजीकरण पोर्टल तथा उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (UAP) की शुरुआत की है।
- उद्यम पंजीकरण पोर्टल स्वयं-पंजीकरण की सुविधा प्रदान करता है, जबकि उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (UAP) अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों (IMEs) को औपचारिक क्षेत्र में शामिल करने में मदद करता है। उद्यम पोर्टल पर 3.94 करोड़ MSME पंजीकृत हैं और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर 2.71 करोड़ अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यम हैं।
- संरचना और क्षेत्रीय उपस्थिति: अक्तूबर 2024 तक पंजीकृत MSME में से 25% विनिर्माण क्षेत्र में हैं, जबकि 75% सेवा गतिविधियों में संलग्न हैं। MSME का 51% ग्रामीण क्षेत्रों में और 49% शहरी क्षेत्रों में स्थित है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय से संबंधित प्रमुख संस्था:
- विकास आयुक्त कार्यालय (DC-MSME): MSME नीतियों और कार्यक्रमों को लागू करता है, नीतियों पर सलाह देता है, परामर्श प्रदान करता है, प्रौद्योगिकी उन्नयन को सुगम बनाता है एवं प्रशिक्षण के माध्यम से मानव संसाधन विकसित करता है।
- खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC): विक्रय योग्य वस्तुओं का उत्पादन करना, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं कच्चे माल की व्यवस्था करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योगों के माध्यम से ग्रामीण रोज़गार को प्रोत्साहित करता है।
- नारियल विकास बोर्ड (कोयर बोर्ड): निर्यात को बढ़ावा देना, अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए और श्रमिकों की जीवन स्थितियों में सुधार करना कोयर उद्योग का विकास करता है।
- राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC): विपणन सहायता, ऋण सुविधा, कच्चे माल की आपूर्ति और भारत भर में तकनीकी सेवा केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से MSME के विकास को प्रोत्साहित करता है।
- राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (NIMSME): एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है जो उद्यमियों और अधिकारियों के लिये क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रदान करता है ताकि MSME की क्षमताओं एवं प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाया जा सके।
- महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगीकरण संस्थान (MGIRI): पेशेवरों को ग्राम स्वराज की ओर आकर्षित करके, पारंपरिक कारीगरों को सशक्त बनाना और अनुसंधान एवं विकास तथा पायलट अध्ययनों के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करता है एवं सतत ग्रामीण औद्योगीकरण को गति प्रदान करता है।
प्रमुख MSME योजनाएँ:
MSME योजनाओं के अभिसरण की आवश्यकता क्यों है?
- एकाधिक योजनाएँ किंतु समान लक्ष्य: विभिन्न मंत्रालय और विभाग (जैसे- MSME मंत्रालय, ग्रामीण विकास, हस्तशिल्प, नारियल विकास बोर्ड) अतिव्यापन उद्देश्यों वाले कार्यक्रम चलाते हैं (जैसे- नारियल विकास, चर्म, हस्तशिल्प, ग्रामोद्योग के लिये)। इससे एक समान लक्षित लाभार्थी एकाधिक, गैर-समन्वित योजनाओं द्वारा सेवा प्राप्त करते हैं, जिससे संसाधनों की बर्बादी होती है।
- संसाधनों की दक्षता और प्रभाव में वृद्धि: योजनाओं के अभिसरण से बेहतर योजना बनाना संभव होता है और केंद्र व राज्य के वित्तीय संसाधनों का साझा उपयोग हो पाता है, जिससे बिखरे हुए निवेश से बचाव होता है। भौतिक और संस्थागत अवसंरचना के संयुक्त उपयोग से अनावश्यक दोहराव रुकता है एवं समग्र रूप से लागत-प्रभावशीलता बढ़ती है।
- लाभार्थियों के लिये पहुँच को सरल बनाना: योजनाओं के अभिसरण से MSME योजनाओं के संचालन हेतु एकीकृत मंच तैयार होता है, जिससे लाभार्थियों को विभिन्न एजेंसियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। यह समन्वित व्यवस्था समान प्रकृति की योजनाओं से उत्पन्न भ्रम को कम करती है, स्पष्ट जानकारी सुनिश्चित करती है और लाभार्थियों की सहभागिता बढ़ाती है।
- शासन और वितरण में सुधार करना: सूचना अभिसरण मंत्रालय के बिखरे हुए डेटा को एक एकीकृत व्यवस्था में लाता है, जिससे बेहतर लाभार्थी ट्रैकिंग और सूचित नीति-निर्माण संभव होता है। निरीक्षण और निगरानी के लिये यह एकीकृत तंत्र, साझा संसाधन पूल का उपयोग करते हुए, जवाबदेही एवं पारदर्शिता को बढ़ाता है।
- राष्ट्रीय और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संरेखित करना: रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्य 17 (लक्ष्यों के लिये साझेदारी) का उल्लेख करती है, जो प्रभावी शासन के लिये बहु-क्षेत्रीय सहयोग को महत्त्वपूर्ण बताता है। यह पूर्व समितियों (जैसे- MSME पर पीएम के टास्क फोर्स) की सिफारिशों को भी लागू करता है, जो लंबे समय से बिना किसी लाभ के लक्ष्य तक पहुँचाने के लिये एकल मंच का समर्थन करती रही हैं।
नीति आयोग की MSME योजनाओं के अभिसरण पर रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें क्या हैं?
- MSME के लिये केंद्रीकृत पोर्टल: रिपोर्ट एक AI-संचालित केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव करती है जो MSME योजनाओं, अनुपालन, वित्त और बाज़ार की बुद्धिमत्ता को एकीकृत करेगा। इसमें सूचना, प्रक्रिया, अनुपालन और बाज़ार अनुसंधान मॉड्यूल शामिल हैं, जिन्हें AI चैटबॉट्स, डैशबोर्ड एवं मोबाइल एक्सेस द्वारा समर्थित किया जाएगा ताकि MSME को वास्तविक समय में सहायता मिल सके।
- क्लस्टर विकास योजनाओं का अभिसरण: पारंपरिक उद्योगों के उन्नयन एवं पुनर्निर्माण के लिये कोष की योजना (SFURTI) को सूक्ष्म एवं लघु उद्यम - क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP) के साथ एकीकृत करना।
- MSE-CDP के तहत पारंपरिक उद्योगों के लिये एक समर्पित उप-योजना, एक एकीकृत शासन संरचना और शिल्प, कलाओं तथा लुप्तप्राय पारंपरिक उद्योगों के संरक्षण हेतु निर्धारित संसाधनों के साथ समेकित वित्तपोषण का प्रस्ताव है, जिससे पैमाना एवं दक्षता में सुधार हो सके।
- कौशल विकास कार्यक्रमों का अभिसरण: रिपोर्ट कौशल संबंधी पहलों को तीन-स्तरीय संरचना में तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव करती है जो उद्यमिता एवं व्यावसायिक कौशल, MSME तकनीकी कौशल और ग्रामीण एवं महिला कारीगरों के प्रशिक्षण को कवर करेगी।
- यह दृष्टिकोण अतिव्यापित योजनाओं का विलय करता है, संस्थानों के बीच समन्वय में सुधार करता है और समावेश तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु लक्षित कार्यक्रमों को बनाए रखता है।
- विपणन सहायता प्रकोष्ठ: MSME विपणन समर्थन को सुव्यवस्थित करने के लिये, रिपोर्ट घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय घटकों वाले एक समर्पित विपणन प्रकोष्ठ का प्रस्ताव करती है।
- घरेलू विंग राष्ट्रीय प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों तथा क्रेता-विक्रेता बैठकों में MSME की भागीदारी को सुगम बनाएगा, जबकि अंतर्राष्ट्रीय विंग विदेशों में आयोजित व्यापार मेलों, B2B आयोजनों और क्रेता-विक्रेता बैठकों के माध्यम से वैश्विक बाज़ार तक पहुँच में सहयोग प्रदान करेगा।
- MSME इनोवेटिव एवं नवाचार, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता को बढ़ावा देने की योजना (ASPIRE): रिपोर्ट में ASPIRE को MSME इनोवेटिव के अंतर्गत कृषि-ग्रामीण उद्यमों के लिये एक विशेष श्रेणी के रूप में एकीकृत करने की अनुशंसा की गई है। इसके तहत मौजूदा ASPIRE निधियाँ यथावत जारी रह सकती हैं, जबकि भविष्य में MSME इनोवेटिव के बजट में एग्रो-रूरल इनक्यूबेटर के लिये एक निश्चित हिस्सा निर्धारित किया जाए। यह एकीकरण उन्नत इनक्यूबेशन सुविधाओं तक पहुँच का विस्तार करता है, बिना किसी अनावश्यक प्रतिबंध के।
निष्कर्ष
नीति आयोग की रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि MSME योजनाओं का अभिसरण (Convergence) दक्षता बढ़ाने, दोहराव को कम करने और सेवा वितरण में सुधार के लिये अत्यंत आवश्यक है। डेटा, प्रक्रियाओं और संस्थागत प्रयासों के एकीकरण के माध्यम से अभिसरण एक एकीकृत, परिणामोन्मुख MSME पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर सकता है, जिससे सार्वजनिक निवेश का अधिकतम उपयोग एवं समावेशी आर्थिक विकास की गति तीव्र हो सकेगी।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न: भारत की अर्थव्यवस्था के लिये MSME क्षेत्र के महत्त्व की विवेचना कीजिये तथा भारत में MSME क्षेत्र को सशक्त बनाने हेतु MSME योजनाओं के अभिसरण के औचित्य को स्पष्ट कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. MSME भारत की अर्थव्यवस्था में कैसे योगदान देते हैं?
MSME देश के GDP में लगभग 27-30% का योगदान करते हैं, कार्यबल के 62% को रोज़गार प्रदान करते हैं तथा कुल निर्यात में लगभग 45% की हिस्सेदारी रखते हैं।
2. MSME योजनाओं के अभिसरण की आवश्यकता क्यों है?
विभिन्न मंत्रालयों में दोहराव और विखंडन को समाप्त करने, लाभार्थियों की पहुँच को सरल बनाने, संसाधनों के इष्टतम उपयोग तथा शासन में सुधार हेतु योजनाओं का अभिसरण आवश्यक है, जैसा कि प्रधानमंत्री की MSME टास्क फोर्स एवं SDG-17 में रेखांकित किया गया है।
3. MSME के औपचारिकीकरण हेतु प्रमुख सरकारी पोर्टल कौन-से हैं?
उद्यम पंजीकरण पोर्टल (2020) स्व-पंजीकरण की सुविधा प्रदान करता है, जबकि उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (2023), SIDBI के सहयोग से, अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों (IME) को औपचारिक क्षेत्र में एकीकृत करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न1. भारत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2023)
- 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (एम.एस.एम.ई.डी) अधिनियम, 2006 के अनुसार, जिनका संयंत्र और मशीनरी में निवेश 15 करोड़ से 25 करोड़ रुपये के बीच है, वे 'मध्यम उद्यम' हैं।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को दिये गए सभी बैंक ऋण प्राथमिकता क्षेत्रक के अधीन अर्ह हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (b)
प्रश्न 2. विनिर्माण क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करने के लिये भारत सरकार ने कौन-सी नई नीतिगत पहल की है/हैं? (2012)
- राष्ट्रीय निवेश तथा विनिर्माण क्षेत्रों की स्थापना।
- एकल खिड़की मंज़ूरी (सिगल विडो क्लीयरेंस) की सुविधा प्रदान करना।
- प्रौद्योगिकी अधिग्रहण तथा विकास कोष की स्थापना।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
प्रश्न 3. सरकार के समावेशित वृद्धि लक्ष्य को आगे ले जाने में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कार्य सहायक साबित हो सकता/सकते है/हैं? (2011)
- स्व-सहायता समूहों (सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स) को प्रोत्साहन देना।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन देना।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू करना।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
मेन्स
प्रश्न 1. "सुधार के बाद की अवधि में औद्योगिक विकास दर सकल-घरेलू-उत्पाद (जीडीपी) की समग्र वृद्धि से पीछे रह गई है" कारण बताइये। औद्योगिक नीति में हालिया बदलाव औद्योगिक विकास दर को बढ़ाने में कहाँ तक सक्षम हैं? (2017)
प्रश्न 2. आमतौर पर देश कृषि से उद्योग और फिर बाद में सेवाओं की ओर स्थानांतरित हो जाते हैं, लेकिन भारत सीधे कृषि से सेवाओं की ओर स्थानांतरित हो गया। देश में उद्योग की तुलना में सेवाओं की भारी वृद्धि के क्या कारण हैं? क्या मज़बूत औद्योगिक आधार के बिना भारत एक विकसित देश बन सकता है? (2014)

शासन व्यवस्था
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना
प्रिलिम्स के लिये: प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना, स्किल इंडिया मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0
मेन्स के लिये: युवा रोज़गार एवं कौशल विकास हेतु सरकारी योजनाएँ, प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा एवं कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ, भारत में शिक्षा-उद्योग कौशल अंतर
चर्चा में क्यों?
महालेखा नियंत्रक (CGA) के आँकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के तहत आवंटित निधियों के अल्प-उपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। योजना शुरू होने के मात्र एक वर्ष के भीतर ही यह स्थिति इसकी रूपरेखा, मांग तथा कार्यान्वयन से जुड़ी कमियों की ओर संकेत करती है।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) क्या है?
- परिचय: कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अंतर्गत प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) की घोषणा केंद्रीय बजट 2024-25 में की गई थी। इसका उद्देश्य 21-24 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की रोज़गार योग्यता बढ़ाने हेतु शीर्ष 500 कंपनियों में पाँच वर्षों के दौरान एक करोड़ इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराना है।
- लाभ: इस योजना के अंतर्गत ₹5,000 प्रतिमाह का न्यूनतम प्रशिक्षण भत्ता (स्टाइपेंड), ₹6,000 की एकमुश्त अनुदान राशि तथा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही, युवाओं को विविध क्षेत्रों एवं अग्रणी कंपनियों में कार्य-अनुभव प्राप्त होता है।
- इंटर्नशिप अवधि: इंटर्नशिप की अवधि 12 महीने है, जिसमें कम-से-कम आधा समय वास्तविक कार्यस्थल या नौकरी-आधारित अनुभव में बिताना अनिवार्य है; यह कक्षा आधारित प्रशिक्षण नहीं है।
- पात्रता: उम्मीदवार की आयु 21-24 वर्ष के बीच होनी चाहिये, न्यूनतम योग्यता कक्षा 10 उत्तीर्ण या उससे अधिक (ITI, पॉलिटेक्निक, स्नातक आदि) होनी चाहिये और उम्मीदवार पूर्णकालिक रोज़गार या नियमित शिक्षा में संलग्न नहीं होना चाहिये (डिस्टेंस या ऑनलाइन शिक्षा स्वीकार्य है)।
- अयोग्य उम्मीदवार: IIT, IIM, NLU, IISER के स्नातक, पेशेवर या स्नातकोत्तर डिग्री धारक (जैसे- CA, CMA, CS, MBA, MBBS आदि) तथा राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS) / राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना (NATS) के तहत प्रशिक्षित उम्मीदवार इस योजना के लिये पात्र नहीं हैं।
- यदि किसी परिवार की वार्षिक आय ₹8 लाख से अधिक हो (वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिये), परिवार में नियमित सरकारी कर्मचारी हों या आवेदक पहले से किसी सरकारी कौशल, अप्रेंटिसशिप या इंटर्नशिप कार्यक्रम में संलग्न हों, तो वे इस योजना हेतु पात्र नहीं होंगे।
- महत्त्व: प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) का उद्देश्य युवाओं की रोज़गार योग्यता बढ़ाना है, इसके लिये उन्हें संरचित एवं वास्तविक उद्योग आधारित अनुभव प्रदान किया जाता है।
- शीर्ष कंपनियों में व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षा और उद्योग के बीच मौजूद कौशल अंतर को कम करना।
- इंटर्नशिप तक सुलभता को बढ़ाना, ताकि यह केवल प्रतिष्ठित संस्थानों और शहरी केंद्रों तक सीमित न रहे।
- इंटर्नशिप के दौरान निम्न आय वर्ग के युवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनका समर्थन करना।
- उद्योग की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय आर्थिक विकास के अनुरूप कुशल कार्यबल का निर्माण करना।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) से संबंधित प्रमुख चिंताएँ क्या हैं?
- निवेश का कम उपयोग: नवंबर 2025 तक, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट का लगभग 4% ही खर्च किया है, जबकि इसके लिये ₹11,500 करोड़ से अधिक का आवंटन किया गया था, जिसमें लगभग 94% राशि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के लिये निर्धारित थी।
- बजट में हुआ अल्पव्यय योजना के कमज़ोर क्रियान्वयन और बजट की आकांक्षाओं व कार्यान्वयन क्षमता के बीच स्पष्ट अंतर को दर्शाता है।
- कम स्वीकृति दर: हालाँकि आवेदनों की संख्या अधिक है, केवल एक-तिहाई से भी कम इंटर्नशिप ऑफर स्वीकृत किये गए हैं। यह संकेत करता है कि यह योजना उम्मीदवारों की अपेक्षाओं को उचित रूप से पूरा नहीं कर रही है।
- आवेदकों की प्राथमिकताओं और इंटर्नशिप के स्थानों या भूमिकाओं के बीच असमानता योजना की रूपरेखा एवं समन्वय में कमियों को उजागर करती है।
- कम पूर्णता दर: कार्यक्रम को पूरा करने वाले इंटर्नों की संख्या बहुत कम है, जो प्रतिधारण, सहभागिता की गुणवत्ता और संस्थागत समर्थन पर सवाल उठाती है।
- अपर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहन: ₹5,000 का मासिक वज़ीफा बुनियादी जीवन-यापन की लागत को पूरा करने के लिये अपर्याप्त है, जिसके कारण यह योजना विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में कम आकर्षक बनती है।
- विश्वसनीयता पर संकट: एक करोड़ इंटर्नशिप के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य और कमज़ोर प्रारंभिक परिणामों के बीच तीव्र अंतर इस नीति की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े करता है।
भारत की प्रमुख कौशल विकास संबंधी पहलें क्या हैं?
- स्किल इंडिया मिशन: यह एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग-संबंधी प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल, पुनर्कौशल और उन्नयन कौशल (स्किल, रीस्किल और अपस्किल) प्रदान करना है। यह योजना रोज़गार योग्यता, उद्यमिता और भविष्य की आगामी ज़रूरतों के अनुसार कौशल विकसित करने पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत अब तक 6 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, हरित ऊर्जा और उद्योग 4.0 जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण शामिल है।
- कौशल भारत मिशन का पुनर्गठन (2022-26), प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (PMKVY 4.0), प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS) और जन शिक्षण संस्थान (JSS) योजना को एक एकीकृत केंद्रीय क्षेत्र योजना में समाहित करता है।
- कौशल भारत कार्यक्रम के तहत सभी पाठ्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे (NSQF) के साथ संरेखित हैं और डिजीलॉकर व नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क से एकीकृत हैं।
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY): वर्ष 2015 में शुरू की गई इस योजना के तहत रोज़गार योग्यता बढ़ाने हेतु निशुल्क अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
- चार चरणों में इस पहल (जुलाई 2025 तक) के अंतर्गत 1.63 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिसमें पुनःकौशल विकास, कौशल उन्नयन और पूर्व अर्जित कौशल की मान्यता पर विशेष बल दिया गया है।
- जन शिक्षण संस्थान (JSS): यह एक समुदाय-आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो निरक्षरों, नव-साक्षरों और स्कूल छोड़ चुके लोगों के लिये समुत्थानशीलता एवं कम लागत वाले प्रशिक्षण प्रदान करता है।
- वित्त वर्ष 2018-19 से 2023-24 के बीच 26 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया।
- प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS): इसका उद्देश्य 14-35 वर्ष की आयु के युवाओं को DBT के माध्यम से 25% स्टाइपेंड सहायता प्रदान कर अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देना है।
- मई 2025 तक, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 43.47 लाख उम्मीदवार प्रशिक्षण ले चुके हैं।
- रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (RSETI): ये बैंक-नेतृत्व वाले आवासीय प्रशिक्षण केंद्र हैं, जो ग्रामीण युवाओं के लिये उद्यमिता और स्वरोज़गार पर केंद्रित हैं।
- जून 2025 तक, RSETI के तहत 56.7 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
- दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY): यह NRLM के तहत ग्रामीण युवा बेरोज़गारी को कम करने हेतु एक मांग-आधारित, प्लेसमेंट-आधारित कौशल विकास योजना है।
- यह वेतन आधारित रोज़गार को बढ़ावा देने के साथ समावेशी ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करता है।
- PM विश्वकर्मा योजना: वर्ष 2023 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य 18 पारंपरिक शिल्पों में कार्यरत कारीगरों और शिल्पकारों का समर्थन करना है।
- PM विश्वकर्मा योजना कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट, ज़मानत-मुक्त ऋण, डिजिटल प्रोत्साहन और बाज़ार संपर्क प्रदान करती है।
- स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH): एक प्रौद्योगिकी-सक्षम प्लेटफॅार्म जो कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये आधार आधारित सत्यापन का उपयोग करता है।
- SIDH वास्तविक समय निगरानी का समर्थन करता है और कौशल प्रशिक्षण को शिक्षा तथा उद्यमिता प्रणालियों के साथ एकीकृत करता है।
- NSTI में उत्कृष्टता केंद्र: वर्ष 2025 में हैदराबाद और चेन्नई में स्थापित किये गए, ताकि उन्नत कौशल प्रशिक्षण को सुदृढ़ किया जा सके। ये केंद्र प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण और AI, रोबोटिक्स एवं हरित प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) को सशक्त बनाने हेतु कौन-से उपाय अपनाए जा सकते हैं?
- जीवन यापन लागत के मानकों के आधार पर स्टाइपेंड का पुन: निर्धारण: जर्मनी की डुअल व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली और भारत के NAPS से सीख लेकर, स्टाइपेंड को न्यूनतम जीवन यापन लागत के अनुसार क्षेत्र-विशिष्ट बनाया जाना चाहिये, ताकि प्रस्ताव स्वीकार्यता एवं इंटर्नशिप पूर्ण होने की दर बढ़ सके।
- सीखने के परिणाम और प्रमाणन को अनिवार्य बनाना: PMIS इंटर्नशिप में पूर्व निर्धारित कौशल परिणाम होने चाहिये और अंत में NSQF के अनुरूप राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिये, ताकि इंटर्नशिप वास्तविक रूप से मापनीय रोज़गार योग्यताओं में परिवर्तित हो सके।
- उद्योग की जवाबदेही को मज़बूत करना: चूँकि कंपनियों का चयन CSR खर्च के आधार पर किया जाता है, PMIS में परिणामों (इंटर्नशिप पूर्णता, कौशल अर्जन, प्लेसमेंट) की रिपोर्टिंग CSR खुलासों/प्रकटीकरण का हिस्सा बनाना चाहिये, जैसा कि भारतीय कल्याण योजनाओं के तहत सामाजिक ऑडिट मानकों में होता है।
- कौशल मानचित्रण के माध्यम से कैंडिडेट-कंपनी मैचिंग में सुधार: 'स्किल इंडिया डिजिटल' प्लेटफॉर्मों के अनुभव बताते हैं कि दोषपूर्ण कैंडिडेट-कंपनी मैचिंग से कर्मचारी प्रतिधारण (Retention) की दर में कमी आती है।
- PMIS में ऑफर जारी करने से पहले कौशल प्रोफाइलिंग, स्थान संबंधी प्राथमिकता और क्षेत्रीय उपयुक्तता को शामिल किया जाना चाहिये।
- NATS और अंतर्राष्ट्रीय युवा रोज़गार कार्यक्रमों की प्रथाओं के अनुरूप, कंपनियों को इंटर्नशिप की उच्च पूर्णता दर एवं इंटर्नशिप के बाद नियुक्ति के लिये प्रोत्साहन दिया जाना चाहिये।
- स्थानीय संस्थानों के माध्यम से जनसंपर्क का विकेंद्रीकरण: PMKVY की तरह ITI, पॉलिटेक्निक और ज़िला रोज़गार कार्यालयों का उपयोग कर शहरी एवं विशिष्ट संस्थानों से आगे व्यापक जागरूकता सुनिश्चित की जानी चाहिये।
निष्कर्ष
PMIS (प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना) का दृष्टिकोण अत्यंत सशक्त है, किंतु निधियों (Funds) के अल्प-उपयोग और सीमित भागीदारी के परिणाम इसके निष्पादन में मौजूद संरचनात्मक कमियों को दर्शाते हैं। स्टाइपेंड की विसंगति और इंटर्नशिप की गुणवत्ता में गिरावट ने इसके वास्तविक प्रभाव को संकुचित कर दिया है। वर्तमान में, इस योजना के पैमाने को बेहतर रोज़गार परिणामों में परिवर्तित करने हेतु तत्काल सुधारात्मक हस्तक्षेप अनिवार्य हैं।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. भारत इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और औपचारिक कौशल प्रशिक्षण को एक सुसंगत रोज़गार-योग्यता ढाँचे में कैसे एकीकृत कर सकता है? |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) क्या है?
PMIS, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की एक योजना है, जिसे बजट 2024–25 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य पाँच वर्षों में शीर्ष कंपनियों में एक करोड़ इंटर्नशिप उपलब्ध कराकर युवाओं की रोज़गार-योग्यता में सुधार करना है।
2. PMIS के लिये कौन पात्र है?
21–24 वर्ष आयु वर्ग के वे युवा, जिन्होंने न्यूनतम कक्षा 10 तक शिक्षा प्राप्त की है और जो न तो पूर्णकालिक रोज़गार में हैं और न ही नियमित शिक्षा में नामांकित हैं, इस योजना के पात्र हैं।
3. PMIS के तहत मुख्य लाभ क्या हैं?
₹5,000 का मासिक स्टाइपेंड, ₹6,000 की एकमुश्त सहायता, बीमा कवरेज तथा 12 महीनों का औद्योगिक अनुभव।
4. PMIS के क्रियान्वयन से जुड़ी प्रमुख चिंताएँ क्या हैं?
निधियों का गंभीर रूप से कम उपयोग, ऑफर स्वीकार करने की कम दर, इंटर्नशिप पूर्ण होने की कमज़ोर दर और अपर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहन।
5. PMIS को कैसे सशक्त बनाया जा सकता है?
स्टाइपेंड में संशोधन करके, कौशल प्रमाणन को अनिवार्य बनाकर, कैंडिडेट–कंपनी मैचिंग में सुधार करके, CSR की जवाबदेही को मज़बूत करके और आउटरीच को विकेंद्रीकृत करके।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)
- यह श्रम और रोज़गार मंत्रालय की प्रमुख योजना है।
- यह अन्य बातों के अलावा सॉफ्ट स्किल्स, उद्यमिता, वित्तीय और डिजिटल साक्षरता में प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा।
- इसका उद्देश्य देश के अनियमित कार्यबल की दक्षताओं को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे के अनुरूप बनाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
मेन्स
प्रश्न. "भारत में जनांकिकीय लाभांश तब तक सैद्धांतिक ही बना रहेगा जब तक कि हमारी जनशक्ति अधिक शिक्षित, जागरूक, कुशल और सृजनशील नहीं हो जाती।" सरकार ने हमारी जनसंख्या को अधिक उत्पादनशील और रोज़गार-योग्य बनने की क्षमता में वृद्धि के लिये कौन-से उपाय किये हैं? (2016)

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