शासन व्यवस्था
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना
- 16 Jan 2026
- 95 min read
प्रिलिम्स के लिये: प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना, स्किल इंडिया मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0
मेन्स के लिये: युवा रोज़गार एवं कौशल विकास हेतु सरकारी योजनाएँ, प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा एवं कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ, भारत में शिक्षा-उद्योग कौशल अंतर
चर्चा में क्यों?
महालेखा नियंत्रक (CGA) के आँकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के तहत आवंटित निधियों के अल्प-उपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। योजना शुरू होने के मात्र एक वर्ष के भीतर ही यह स्थिति इसकी रूपरेखा, मांग तथा कार्यान्वयन से जुड़ी कमियों की ओर संकेत करती है।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) क्या है?
- परिचय: कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अंतर्गत प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) की घोषणा केंद्रीय बजट 2024-25 में की गई थी। इसका उद्देश्य 21-24 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की रोज़गार योग्यता बढ़ाने हेतु शीर्ष 500 कंपनियों में पाँच वर्षों के दौरान एक करोड़ इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराना है।
- लाभ: इस योजना के अंतर्गत ₹5,000 प्रतिमाह का न्यूनतम प्रशिक्षण भत्ता (स्टाइपेंड), ₹6,000 की एकमुश्त अनुदान राशि तथा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही, युवाओं को विविध क्षेत्रों एवं अग्रणी कंपनियों में कार्य-अनुभव प्राप्त होता है।
- इंटर्नशिप अवधि: इंटर्नशिप की अवधि 12 महीने है, जिसमें कम-से-कम आधा समय वास्तविक कार्यस्थल या नौकरी-आधारित अनुभव में बिताना अनिवार्य है; यह कक्षा आधारित प्रशिक्षण नहीं है।
- पात्रता: उम्मीदवार की आयु 21-24 वर्ष के बीच होनी चाहिये, न्यूनतम योग्यता कक्षा 10 उत्तीर्ण या उससे अधिक (ITI, पॉलिटेक्निक, स्नातक आदि) होनी चाहिये और उम्मीदवार पूर्णकालिक रोज़गार या नियमित शिक्षा में संलग्न नहीं होना चाहिये (डिस्टेंस या ऑनलाइन शिक्षा स्वीकार्य है)।
- अयोग्य उम्मीदवार: IIT, IIM, NLU, IISER के स्नातक, पेशेवर या स्नातकोत्तर डिग्री धारक (जैसे- CA, CMA, CS, MBA, MBBS आदि) तथा राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS) / राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना (NATS) के तहत प्रशिक्षित उम्मीदवार इस योजना के लिये पात्र नहीं हैं।
- यदि किसी परिवार की वार्षिक आय ₹8 लाख से अधिक हो (वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिये), परिवार में नियमित सरकारी कर्मचारी हों या आवेदक पहले से किसी सरकारी कौशल, अप्रेंटिसशिप या इंटर्नशिप कार्यक्रम में संलग्न हों, तो वे इस योजना हेतु पात्र नहीं होंगे।
- महत्त्व: प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) का उद्देश्य युवाओं की रोज़गार योग्यता बढ़ाना है, इसके लिये उन्हें संरचित एवं वास्तविक उद्योग आधारित अनुभव प्रदान किया जाता है।
- शीर्ष कंपनियों में व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षा और उद्योग के बीच मौजूद कौशल अंतर को कम करना।
- इंटर्नशिप तक सुलभता को बढ़ाना, ताकि यह केवल प्रतिष्ठित संस्थानों और शहरी केंद्रों तक सीमित न रहे।
- इंटर्नशिप के दौरान निम्न आय वर्ग के युवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनका समर्थन करना।
- उद्योग की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय आर्थिक विकास के अनुरूप कुशल कार्यबल का निर्माण करना।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) से संबंधित प्रमुख चिंताएँ क्या हैं?
- निवेश का कम उपयोग: नवंबर 2025 तक, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट का लगभग 4% ही खर्च किया है, जबकि इसके लिये ₹11,500 करोड़ से अधिक का आवंटन किया गया था, जिसमें लगभग 94% राशि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के लिये निर्धारित थी।
- बजट में हुआ अल्पव्यय योजना के कमज़ोर क्रियान्वयन और बजट की आकांक्षाओं व कार्यान्वयन क्षमता के बीच स्पष्ट अंतर को दर्शाता है।
- कम स्वीकृति दर: हालाँकि आवेदनों की संख्या अधिक है, केवल एक-तिहाई से भी कम इंटर्नशिप ऑफर स्वीकृत किये गए हैं। यह संकेत करता है कि यह योजना उम्मीदवारों की अपेक्षाओं को उचित रूप से पूरा नहीं कर रही है।
- आवेदकों की प्राथमिकताओं और इंटर्नशिप के स्थानों या भूमिकाओं के बीच असमानता योजना की रूपरेखा एवं समन्वय में कमियों को उजागर करती है।
- कम पूर्णता दर: कार्यक्रम को पूरा करने वाले इंटर्नों की संख्या बहुत कम है, जो प्रतिधारण, सहभागिता की गुणवत्ता और संस्थागत समर्थन पर सवाल उठाती है।
- अपर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहन: ₹5,000 का मासिक वज़ीफा बुनियादी जीवन-यापन की लागत को पूरा करने के लिये अपर्याप्त है, जिसके कारण यह योजना विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में कम आकर्षक बनती है।
- विश्वसनीयता पर संकट: एक करोड़ इंटर्नशिप के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य और कमज़ोर प्रारंभिक परिणामों के बीच तीव्र अंतर इस नीति की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े करता है।
भारत की प्रमुख कौशल विकास संबंधी पहलें क्या हैं?
- स्किल इंडिया मिशन: यह एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग-संबंधी प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल, पुनर्कौशल और उन्नयन कौशल (स्किल, रीस्किल और अपस्किल) प्रदान करना है। यह योजना रोज़गार योग्यता, उद्यमिता और भविष्य की आगामी ज़रूरतों के अनुसार कौशल विकसित करने पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत अब तक 6 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, हरित ऊर्जा और उद्योग 4.0 जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण शामिल है।
- कौशल भारत मिशन का पुनर्गठन (2022-26), प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (PMKVY 4.0), प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS) और जन शिक्षण संस्थान (JSS) योजना को एक एकीकृत केंद्रीय क्षेत्र योजना में समाहित करता है।
- कौशल भारत कार्यक्रम के तहत सभी पाठ्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे (NSQF) के साथ संरेखित हैं और डिजीलॉकर व नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क से एकीकृत हैं।
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY): वर्ष 2015 में शुरू की गई इस योजना के तहत रोज़गार योग्यता बढ़ाने हेतु निशुल्क अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
- चार चरणों में इस पहल (जुलाई 2025 तक) के अंतर्गत 1.63 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिसमें पुनःकौशल विकास, कौशल उन्नयन और पूर्व अर्जित कौशल की मान्यता पर विशेष बल दिया गया है।
- जन शिक्षण संस्थान (JSS): यह एक समुदाय-आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो निरक्षरों, नव-साक्षरों और स्कूल छोड़ चुके लोगों के लिये समुत्थानशीलता एवं कम लागत वाले प्रशिक्षण प्रदान करता है।
- वित्त वर्ष 2018-19 से 2023-24 के बीच 26 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया।
- प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS): इसका उद्देश्य 14-35 वर्ष की आयु के युवाओं को DBT के माध्यम से 25% स्टाइपेंड सहायता प्रदान कर अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देना है।
- मई 2025 तक, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 43.47 लाख उम्मीदवार प्रशिक्षण ले चुके हैं।
- रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (RSETI): ये बैंक-नेतृत्व वाले आवासीय प्रशिक्षण केंद्र हैं, जो ग्रामीण युवाओं के लिये उद्यमिता और स्वरोज़गार पर केंद्रित हैं।
- जून 2025 तक, RSETI के तहत 56.7 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
- दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY): यह NRLM के तहत ग्रामीण युवा बेरोज़गारी को कम करने हेतु एक मांग-आधारित, प्लेसमेंट-आधारित कौशल विकास योजना है।
- यह वेतन आधारित रोज़गार को बढ़ावा देने के साथ समावेशी ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करता है।
- PM विश्वकर्मा योजना: वर्ष 2023 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य 18 पारंपरिक शिल्पों में कार्यरत कारीगरों और शिल्पकारों का समर्थन करना है।
- PM विश्वकर्मा योजना कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट, ज़मानत-मुक्त ऋण, डिजिटल प्रोत्साहन और बाज़ार संपर्क प्रदान करती है।
- स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH): एक प्रौद्योगिकी-सक्षम प्लेटफॅार्म जो कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये आधार आधारित सत्यापन का उपयोग करता है।
- SIDH वास्तविक समय निगरानी का समर्थन करता है और कौशल प्रशिक्षण को शिक्षा तथा उद्यमिता प्रणालियों के साथ एकीकृत करता है।
- NSTI में उत्कृष्टता केंद्र: वर्ष 2025 में हैदराबाद और चेन्नई में स्थापित किये गए, ताकि उन्नत कौशल प्रशिक्षण को सुदृढ़ किया जा सके। ये केंद्र प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण और AI, रोबोटिक्स एवं हरित प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) को सशक्त बनाने हेतु कौन-से उपाय अपनाए जा सकते हैं?
- जीवन यापन लागत के मानकों के आधार पर स्टाइपेंड का पुन: निर्धारण: जर्मनी की डुअल व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली और भारत के NAPS से सीख लेकर, स्टाइपेंड को न्यूनतम जीवन यापन लागत के अनुसार क्षेत्र-विशिष्ट बनाया जाना चाहिये, ताकि प्रस्ताव स्वीकार्यता एवं इंटर्नशिप पूर्ण होने की दर बढ़ सके।
- सीखने के परिणाम और प्रमाणन को अनिवार्य बनाना: PMIS इंटर्नशिप में पूर्व निर्धारित कौशल परिणाम होने चाहिये और अंत में NSQF के अनुरूप राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिये, ताकि इंटर्नशिप वास्तविक रूप से मापनीय रोज़गार योग्यताओं में परिवर्तित हो सके।
- उद्योग की जवाबदेही को मज़बूत करना: चूँकि कंपनियों का चयन CSR खर्च के आधार पर किया जाता है, PMIS में परिणामों (इंटर्नशिप पूर्णता, कौशल अर्जन, प्लेसमेंट) की रिपोर्टिंग CSR खुलासों/प्रकटीकरण का हिस्सा बनाना चाहिये, जैसा कि भारतीय कल्याण योजनाओं के तहत सामाजिक ऑडिट मानकों में होता है।
- कौशल मानचित्रण के माध्यम से कैंडिडेट-कंपनी मैचिंग में सुधार: 'स्किल इंडिया डिजिटल' प्लेटफॉर्मों के अनुभव बताते हैं कि दोषपूर्ण कैंडिडेट-कंपनी मैचिंग से कर्मचारी प्रतिधारण (Retention) की दर में कमी आती है।
- PMIS में ऑफर जारी करने से पहले कौशल प्रोफाइलिंग, स्थान संबंधी प्राथमिकता और क्षेत्रीय उपयुक्तता को शामिल किया जाना चाहिये।
- NATS और अंतर्राष्ट्रीय युवा रोज़गार कार्यक्रमों की प्रथाओं के अनुरूप, कंपनियों को इंटर्नशिप की उच्च पूर्णता दर एवं इंटर्नशिप के बाद नियुक्ति के लिये प्रोत्साहन दिया जाना चाहिये।
- स्थानीय संस्थानों के माध्यम से जनसंपर्क का विकेंद्रीकरण: PMKVY की तरह ITI, पॉलिटेक्निक और ज़िला रोज़गार कार्यालयों का उपयोग कर शहरी एवं विशिष्ट संस्थानों से आगे व्यापक जागरूकता सुनिश्चित की जानी चाहिये।
निष्कर्ष
PMIS (प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना) का दृष्टिकोण अत्यंत सशक्त है, किंतु निधियों (Funds) के अल्प-उपयोग और सीमित भागीदारी के परिणाम इसके निष्पादन में मौजूद संरचनात्मक कमियों को दर्शाते हैं। स्टाइपेंड की विसंगति और इंटर्नशिप की गुणवत्ता में गिरावट ने इसके वास्तविक प्रभाव को संकुचित कर दिया है। वर्तमान में, इस योजना के पैमाने को बेहतर रोज़गार परिणामों में परिवर्तित करने हेतु तत्काल सुधारात्मक हस्तक्षेप अनिवार्य हैं।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. भारत इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और औपचारिक कौशल प्रशिक्षण को एक सुसंगत रोज़गार-योग्यता ढाँचे में कैसे एकीकृत कर सकता है? |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) क्या है?
PMIS, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की एक योजना है, जिसे बजट 2024–25 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य पाँच वर्षों में शीर्ष कंपनियों में एक करोड़ इंटर्नशिप उपलब्ध कराकर युवाओं की रोज़गार-योग्यता में सुधार करना है।
2. PMIS के लिये कौन पात्र है?
21–24 वर्ष आयु वर्ग के वे युवा, जिन्होंने न्यूनतम कक्षा 10 तक शिक्षा प्राप्त की है और जो न तो पूर्णकालिक रोज़गार में हैं और न ही नियमित शिक्षा में नामांकित हैं, इस योजना के पात्र हैं।
3. PMIS के तहत मुख्य लाभ क्या हैं?
₹5,000 का मासिक स्टाइपेंड, ₹6,000 की एकमुश्त सहायता, बीमा कवरेज तथा 12 महीनों का औद्योगिक अनुभव।
4. PMIS के क्रियान्वयन से जुड़ी प्रमुख चिंताएँ क्या हैं?
निधियों का गंभीर रूप से कम उपयोग, ऑफर स्वीकार करने की कम दर, इंटर्नशिप पूर्ण होने की कमज़ोर दर और अपर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहन।
5. PMIS को कैसे सशक्त बनाया जा सकता है?
स्टाइपेंड में संशोधन करके, कौशल प्रमाणन को अनिवार्य बनाकर, कैंडिडेट–कंपनी मैचिंग में सुधार करके, CSR की जवाबदेही को मज़बूत करके और आउटरीच को विकेंद्रीकृत करके।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)
- यह श्रम और रोज़गार मंत्रालय की प्रमुख योजना है।
- यह अन्य बातों के अलावा सॉफ्ट स्किल्स, उद्यमिता, वित्तीय और डिजिटल साक्षरता में प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा।
- इसका उद्देश्य देश के अनियमित कार्यबल की दक्षताओं को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे के अनुरूप बनाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
मेन्स
प्रश्न. "भारत में जनांकिकीय लाभांश तब तक सैद्धांतिक ही बना रहेगा जब तक कि हमारी जनशक्ति अधिक शिक्षित, जागरूक, कुशल और सृजनशील नहीं हो जाती।" सरकार ने हमारी जनसंख्या को अधिक उत्पादनशील और रोज़गार-योग्य बनने की क्षमता में वृद्धि के लिये कौन-से उपाय किये हैं? (2016)