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छत्तीसगढ़ स्टेट पी.सी.एस.

  • 11 Mar 2026
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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 छत्तीसगढ़ में

चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) 2026 के पहले संस्करण की घोषणा की है, जिसकी मेज़बानी छत्तीसगढ़ करेगा। इसका उद्देश्य पूरे देश में जनजातीय युवाओं के बीच खेलों को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है।

मुख्य बिंदु:

  • परिचय: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) का आयोजन 25 मार्च से 6 अप्रैल, 2026 तक किया जाएगा, जिसका उद्देश्य जनजातीय खिलाड़ियों की भागीदारी को बढ़ावा देना और भारत के जनजातीय क्षेत्रों में खेल विकास को सुदृढ़ करना है।
  • स्थान: इसका पहला संस्करण छत्तीसगढ़ में तीन शहरों—रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित किया जाएगा।
    • इन खेलों में सात पदक प्रतियोगिताएँ शामिल होंगी: एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, आर्चरी, स्विमिंग और रेसलिंग।
    • इसके अतिरिक्त मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) खेलों के रूप में शामिल किया जाएगा।
  • भागीदारी: भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाड़ी इसमें भाग लेने की संभावना है, जिससे जनजातीय खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिये एक राष्ट्रीय मंच मिलेगा।
  • आयोजन: इस कार्यक्रम का आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), भारतीय ओलंपिक संघ, विभिन्न राष्ट्रीय खेल महासंघों और छत्तीसगढ़ राज्य आयोजन समिति के संयुक्त सहयोग से किया जाएगा।
    • मैस्कॉट: इन खेलों का आधिकारिक मैस्कॉट ‘मोरवीर’ है, जो भारत के जनजातीय समुदायों के साहस और गौरव का प्रतीक है।
  • खेलो इंडिया योजना: ट्राइबल गेम्स खेलो इंडिया योजना का हिस्सा हैं, जो एक प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजना है और जिसका उद्देश्य खेलों में व्यापक भागीदारी को बढ़ावा देना तथा पूरे भारत में खेल उत्कृष्टता का विकास करना है।
  • महत्त्व: इस पहल का उद्देश्य जनजातीय समुदायों में खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें प्रोत्साहित करना, खेलों में समावेशिता को बढ़ावा देना तथा जनजातीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ना है।

और पढ़ें: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG)


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

बालेंद्र शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने के लिये तैयार

चर्चा में क्यों?

नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में 35 वर्षीय संरचनात्मक अभियंता (स्ट्रक्चरल इंजीनियर) और पूर्व रैपर बालेंद्र शाह (जिन्हें लोकप्रिय रूप से बालेन के नाम से जाना जाता है) नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।

मुख्य बिंदु:

  • निर्णायक जनादेश: राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए प्रतिनिधि सभा की 165 प्रत्यक्ष निर्वाचित सीटों में से 125 सीटें जीतीं। अनुमान है कि 275 सदस्यीय संसद में पार्टी को दो-तिहाई बहुमत प्राप्त होगा। 
  • ‘बालेन वेव’: बालेंद्र शाह ने झापा-5 में अपने पारंपरिक गढ़ में अनुभवी राजनेता और चार बार के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को लगभग 50,000 मतों के अंतर से पराजित किया।
  • ऐतिहासिक उपलब्धियाँ: बालेंद्र शाह मधेसी समुदाय से आने वाले पहले प्रधानमंत्री होंगे और साथ ही पारंपरिक राजनीति से बाहर के पहले व्यक्ति होंगे जो देश का नेतृत्व करेंगे।
  • परिवर्तन का उत्प्रेरक: यह चुनाव वर्ष 2025 के अंत में युवाओं के नेतृत्व में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद हुआ, जिनमें भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और डिजिटल सेंसरशिप के खिलाफ आवाज़ उठाई गई थी। इन प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप पिछली सरकार भंग कर दी गई और एक अंतरिम प्रशासन स्थापित किया गया।
  • RSP का उदय: वर्ष 2022 में स्थापित इस पार्टी ने ‘जनरेशन चेंज’ के नारे के साथ चुनाव लड़ा, जिसमें तकनीकी-आधारित शासन (टेक्नोक्रेटिक गवर्नेंस), पारदर्शिता और आर्थिक पुनरुत्थान पर ज़ोर दिया गया।
  • कूटनीतिक महत्त्व: यह जीत नेपाली कांग्रेस, CPN-UML और माओवादी दलों के बीच सत्ता के पारंपरिक परिवर्तन की राजनीति से एक बड़ा बदलाव दर्शाती है।
  • मुख्य नीतिगत लक्ष्य: नेपाल की GDP को 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने और प्रति व्यक्ति आय को 3,000 डॉलर तक दोगुना करने का संकल्प है।
    • रोज़गार: युवाओं के बड़े पैमाने पर विदेश पलायन को रोकने के लिये पाँच वर्षों में 1.2 मिलियन नौकरियाँ सृजित करने की प्रतिबद्धता है।

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

WHO: चिली अमेरिका महाद्वीप का पहला कुष्ठ रोग मुक्त देश

चर्चा में क्यों?

एक ऐतिहासिक जन-स्वास्थ्य उपलब्धि के रूप में चिली आधिकारिक तौर पर अमेरिका क्षेत्र का पहला देश बन गया है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कुष्ठ रोग (हैनसेन रोग) को जन-स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के लिये प्रमाणित किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • WHO द्वारा सत्यापन: यह घोषणा 10 मार्च, 2026 को एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय आयोग द्वारा की गई कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद की गई।
  • क्षेत्रीय उपलब्धि: चिली अमेरिका क्षेत्र (PAHO/WHO) का पहला देश है जिसने यह उपलब्धि हासिल की है, जिससे ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के लिये एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण स्थापित हुआ है।
  • उन्मूलन की परिभाषा: WHO के अनुसार, उन्मूलन का अर्थ है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रति 10,000 आबादी पर 1 से कम मामलों की प्रचलन दर होना।
  • निरंतर प्रयास: यह सत्यापन कई वर्षों तक चले मज़बूत निगरानी तंत्र, शीघ्र निदान और चिली की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से प्रदान की जाने वाली निशुल्क बहु-औषधि उपचार (MDT) के परिणामस्वरूप संभव हुआ।
  • वैश्विक कुष्ठ रोग रणनीति (2021–2030): इसका लक्ष्य ‘टुवर्ड्स ज़ीरो लेप्रोसी’ है, जिसमें शून्य संक्रमण, शून्य रोग और शून्य कलंक/भेदभाव पर ज़ोर दिया गया है।
  • जन-स्वास्थ्य अवसंरचना की पुष्टि: चिली की सफलता यह दर्शाती है कि कुष्ठ रोग सेवाओं को सामान्य प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में एकीकृत करना कितना प्रभावी हो सकता है।
  • कलंक में कमी: प्रमाणीकरण 'कुष्ठरोगी' शब्द से जुड़े प्राचीन सामाजिक कलंक को मिटाने में सहायता करता है, जिससे मानवाधिकारों को बढ़ावा मिलता है।

और पढ़ें: कुष्ठ रोग


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