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झारखंड स्टेट पी.सी.एस.

  • 28 Jan 2026
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WEF आंध्र प्रदेश में चौथा औद्योगिक क्रांति केंद्र स्थापित करेगा

चर्चा में क्यों?

 विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने आंध्र प्रदेश में चौथी औद्योगिक क्रांति के लिये एक नए केंद्र (C4IR) की स्थापना की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु:

  • वैश्विक विस्तार: WEF फ्राँस, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त अरब अमीरात और भारत में चौथी औद्योगिक क्रांति के पाँच नए केंद्र स्थापित करेगा।
  • भारतीय केंद्र: नया केंद्र आंध्र प्रदेश में स्थापित किया जाएगा।
    • भारतीय केंद्र, जिसे ऊर्जा और साइबर अनुकूलन केंद्र कहा जाएगा, ऊर्जा प्रणालियों तथा साइबर सुरक्षा रणनीतियों में नवाचार-आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देगा।
  • फोकस क्षेत्र: ये केंद्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा संक्रमण और साइबर अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
  • साझेदारी मॉडल: प्रत्येक केंद्र सरकारों, उद्योगों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर विस्तार-योग्य नीति ढाँचे, पायलट परियोजनाएँ तथा क्षेत्र-विशेष समाधान विकसित करेगा।
  • WEF 4IR नेटवर्क: नए केंद्र WEF के 4IR नेटवर्क का विस्तार करेंगे और उभरती प्रौद्योगिकियों को शासन तथा सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में सहायता करेंगे।
  • रणनीतिक महत्त्व: डिजिटल और ऊर्जा क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी शासन, सतत नवाचार तथा कार्यबल विकास के लिये क्षेत्रीय क्षमता को सुदृढ़ करता है।

और पढ़ें: विश्व आर्थिक मंच (WEF), चौथी औद्योगिक क्रांति (C4IR), AI


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त्रिपुरा में माताबारी पर्यटन सर्किट परियोजना

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने त्रिपुरा के डुम्बुर झील में ₹450 करोड़ की लागत वाले माताबारी पर्यटन सर्किट की आधारशिला रखी।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: माताबारी पर्यटन सर्किट का लक्ष्य त्रिपुरा में प्रमुख विरासत और प्राकृतिक स्थलों को जोड़ते हुए एक एकीकृत आध्यात्मिक–पर्यावरण पर्यटन गलियारा विकसित करना है।
  • लागत: ₹450 करोड़ की यह परियोजना पूर्वोत्तर में पर्यटन अवसंरचना के लिये बड़े पैमाने पर केंद्रीय निवेश को दर्शाती है।
    • पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) ₹276 करोड़ प्रदान कर रहा है।
  • मुख्य स्थल: त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, चबीमुरा शैल-नक्काशी स्थल और डुम्बुर झील।
    • प्रमुख सुविधाएँ: तैरते हुए घाट, पर्यावरण के अनुकूल रिसॉर्ट और पर्यटकों के लिये सुविधाएँ।
  • अतिरिक्त परियोजनाएँ: विभिन्न विकास क्षेत्रों को शामिल करते हुए ₹750 करोड़ की परियोजनाओं की घोषणा।
    • अगरवुड पहल: किसानों की आय और कृषि-वनिकी को बढ़ावा देने के लिये ₹80 करोड़ की अगरवुड मूल्य-शृंखला परियोजना।
    • हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: ग्रीन गोल्ड पहल के तहत 22 इंजीनियर्ड बाँस परियोजनाओं को मंज़ूरी।
  • रणनीतिक महत्त्व: ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और विकसित पूर्वोत्तर के विज़न को समर्थन देते हुए त्रिपुरा को क्षेत्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायता की।

और पढ़ें: पूर्वोत्तर क्षेत्र, एक्ट ईस्ट पॉलिसी, कृषि-वानिकी


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बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड ICC पुरुष T20 विश्व कप में शामिल

चर्चा में क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेज़बानी में होने वाले आगामी ICC पुरुष T20 विश्व कप 2026 में स्कॉटलैंड, बांग्लादेश की जगह लेगा।

मुख्य बिंदु:

  • विवाद: यह संकट बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) द्वारा सुरक्षा और संरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए अपनी राष्ट्रीय टीम को भारत भेजने से इनकार करने से उत्पन्न हुआ।
  • सुरक्षा आकलन: ICC ने आंतरिक और बाहरी विशेषज्ञों द्वारा स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन कराया, जिसमें निष्कर्ष निकला कि भारत में बांग्लादेशी दल के लिये “कोई विश्वसनीय या सत्यापित सुरक्षा खतरा नहीं” है।
  • प्रतिस्थापन: कई दौर की बातचीत और बांग्लादेश को भागीदारी की पुष्टि के लिये 24 घंटे की समय-सीमा देने के बाद भी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला, जिसके चलते ICC ने उन्हें बदलने का निर्णय किया।
  • स्कॉटलैंड की एंट्री: T20 इंटरनेशनल रैंकिंग में 14वें स्थान पर मौजूद स्कॉटलैंड वह सर्वोच्च रैंक वाली टीम थी, जो मूल रूप से क्वालीफाई करने से चूक गई थी।
    • ICC ने स्कॉटलैंड को ग्रुप C में रखा है, जहाँ वे इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़, इटली और नेपाल के साथ प्रतिस्पर्द्धा करेंगे।
  • महत्त्व: यह निर्णय सुनिश्चित करता है कि टूर्नामेंट की 20-टीम संरचना बिना किसी लॉजिस्टिक बाधा के बनी रहे।
    • यह ICC के उस रुख को भी उजागर करता है, जिसमें टूर्नामेंट की निष्पक्षता बनाए रखने और तय कार्यक्रमों का सख्ती से पालन करने पर ज़ोर दिया गया है।

और पढ़ें: अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) 


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सर्बानंद सोनोवाल ने विझिंजम बंदरगाह क्षमता विस्तार कार्यों का उद्घाटन किया

चर्चा में क्यों?

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह के क्षमता विस्तार कार्यों का उद्घाटन किया।

मुख्य बिंदु:

  • विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह: तिरुवनंतपुरम के निकट स्थित विझिंजम भारत का पहला गहरे जल वाला ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह है, जो अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग मार्गों के पास रणनीतिक रूप से स्थित है।
  • त्वरित की गई समय-सीमा: मूल रूप से वर्ष 2045 तक पूर्ण होने वाली परियोजना के बाद के चरणों को वर्ष 2024 में किये गए एक पूरक समझौते के माध्यम से लगभग 17 वर्ष पहले ही आगे बढ़ा दिया गया। अब पूरी परियोजना दिसंबर 2028 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • भारी निवेश: इस विस्तार में लगभग ₹16,000 करोड़ का अतिरिक्त निवेश शामिल है, जिससे कुल परियोजना लागत लगभग ₹30,000 करोड़ हो जाएगी।
  • अवसंरचना विस्तार:
    • बर्थ विस्तार: मौजूदा कंटेनर बर्थ को 2 किलोमीटर की निरंतर लंबाई तक बढ़ाया जाएगा, जिससे यह भारत का सबसे लंबा बर्थ बन जाएगा।
    • थ्रूपुट क्षमता: कुल परिचालन क्षमता पाँच गुना बढ़कर प्रतिवर्ष 1 मिलियन TEUs से 5.7 मिलियन TEUs हो जाएगी।
    • हैंडलिंग क्षमता: बंदरगाह को एक साथ पाँच मदर वेसल्स और 28,000 TEUs तक की क्षमता वाले भावी पीढ़ी के कंटेनर जहाज़ों को सॅंभालने के लिये सुसज्जित किया जाएगा।
  • परिचालन सफलता: 3 दिसंबर, 2024 को वाणिज्यिक परिचालन शुरू करने वाले चरण-I ने कुछ ही हफ्तों में 130% से अधिक क्षमता उपयोग दर्ज किया और 14.3 लाख से अधिक TEUs का संचालन किया।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह विस्तार मैरीटाइम विज़न 2030 और अमृत काल विज़न 2047 के तहत विश्व-स्तरीय समुद्री अवसंरचना विकसित करने की प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
    • इसका उद्देश्य कोलंबो जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब पर भारत की निर्भरता को कम करना है।

और पढ़ें: मैरीटाइम विज़न 2030, अमृत काल विज़न 2047


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CSIR-CRRI और JSW स्टील ने तमिलनाडु में स्टील स्लैग सड़कें बनाने के लिये साझेदारी की

चर्चा में क्यों?

औद्योगिक अपशिष्ट को उपयोगी अवसंरचना में बदलने की एक ऐतिहासिक पहल के तहत केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) ने तमिलनाडु में इस्पात निर्माण के उप-उत्पाद स्टील स्लैग का उपयोग कर सड़कें बनाने के लिये JSW स्टील लिमिटेड, सलेम वर्क्स के साथ साझेदारी की है।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: इस्पात निर्माण से निकलने वाले औद्योगिक उप-उत्पादों (अपशिष्ट) को सड़क निर्माण के लिये  उच्च गुणवत्ता वाले एग्रीगेट्स में परिवर्तित करना।
    • इससे सतत, पर्यावरण-अनुकूल सड़कें बनने की उम्मीद है और पर्यावरणीय प्रभाव में उल्लेखनीय कमी आएगी।
  • तकनीकी फोकस: परियोजना में CSIR-CRRI द्वारा विकसित पेटेंट प्राप्त स्टील स्लैग रोड तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिसे पहले गुजरात, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है।
  • वैलोरीकरण प्रक्रिया: यह सहयोग इलेक्ट्रिक ऑप्टिमाइज़ेशन फर्नेस (EOF) और लैडल रिफाइनिंग फर्नेस (LRF) से निकलने वाले स्टील स्लैग को बिटुमिनस सड़कों के लिये प्रसंस्कृत एग्रीगेट्स में तकनीकी-आर्थिक रूप से परिवर्तित करने पर केंद्रित है।
  • प्रदर्शन परियोजना: समझौते के हिस्से के रूप में, क्षेत्र के प्रदर्शन और स्थायित्व को प्रमाणित करने के लिये सलेम के पास एक प्रदर्शन सड़क खंड का निर्माण किया जाएगा।
  • संस्थागत नेतृत्व: समझौता ज्ञापन (MoA) पर CSIR की महानिदेशक और DSIR की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी की उपस्थिति में दोनों संगठनों के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ हस्ताक्षर किये गए।
  • सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा: औद्योगिक अपशिष्ट को निर्माण संसाधन के रूप में उपयोग कर भारत की संसाधन दक्षता और सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाता है।
    • पर्यावरणीय लाभ: कार्बन फुटप्रिंट तथा प्राकृतिक एग्रीगेट्स पर निर्भरता कम करने में सहायता करता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरणीय क्षरण में कमी आती है।
  • क्षेत्रीय प्रभाव: यह तमिलनाडु में स्टील स्लैग सड़क तकनीक का पहला प्रयोग है, जो आगे चलकर अन्य भारतीय राज्यों में इसके व्यापक प्रसार का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

और पढ़ें: सर्कुलर इकोनॉमी, CSIR


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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2026 में 131 लोगों को पद्म पुरस्कार दिये

चर्चा में क्यों?

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (2026) की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंज़ूरी दी, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं।

मुख्य बिंदु:

  • पद्म विभूषण 2026: पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवाओं के लिये दिया जाता है। वर्ष 2026 के प्राप्तकर्त्ता हैं—
    • धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत) – प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता
    • न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) के. टी. थॉमस – सार्वजनिक कार्य
    • एन. राजम – शास्त्रीय संगीत
    • पी. नारायणन – साहित्य और शिक्षा
    • वी. एस. अच्युतानंदन (मरणोपरांत) – सार्वजनिक कार्य
  • पद्म भूषण: उच्च कोटि की विशिष्ट सेवाओं के लिये 13 व्यक्तियों को पद्म भूषण प्रदान किया गया—
    • कला: सुश्री अलका याग्निक, श्री ममूटी, श्री शतावधानी आर. गणेश और श्री पीयूष पांडे (मरणोपरांत)।
    • सार्वजनिक कार्य: श्री शिबू सोरेन (मरणोपरांत), श्री भगत सिंह कोश्यारी, श्री वेल्लापल्ली नटेसन और श्री वी. के. मल्होत्रा (मरणोपरांत)।
    • उद्योग: श्री उदय कोटक (व्यापार एवं उद्योग)।
    • खेल: श्री विजय अमृतराज।
    • चिकित्सा: कल्लीपट्टी रामासामी पलानीस्वामी और डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु।
  • पद्म श्री: कुल 113 प्राप्तकर्त्ताओं में कई प्रमुख उपलब्धियों वाले और ‘अपरिचित नायकों’ को सम्मानित किया गया—
    • खेल: रोहित शर्मा (क्रिकेट), हरमनप्रीत कौर (क्रिकेट) और सविता पुणिया (हॉकी)।
    • शिक्षा और विज्ञान: पूर्व UGC प्रमुख मामिदला जगदीश कुमार और IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी।
    • अपरिचित नायक: अंके गौड़ा (जिन्होंने 20 लाख पुस्तकों वाला पुस्तकालय बनाया) और आर्मिडा फर्नांडीज (एशिया का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक संस्थापक)।
  • विविधता: 2026 की पद्म सूची में शामिल हैं—
    • 19 महिला पुरस्कारार्थी
    • 16 मरणोपरांत सम्मान
    • 6 विदेशी/NRI/PIO/OCI प्राप्तकर्त्ता 
  • महत्त्व: ये पुरस्कार भारत द्वारा समाज, संस्कृति, विज्ञान, खेल और सार्वजनिक जीवन में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों तथा स्थानीय स्तर के ‘अपरिचित नायकों’ के योगदान को मान्यता देने को रेखांकित करते हैं।

और पढ़ें: पद्म पुरस्कार


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