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भारतीय इतिहास

गणतंत्र दिवस 2026

  • 27 Jan 2026
  • 97 min read

प्रिलिम्स के लिये: भारतीय संविधान, पूर्ण स्वराज, वंदे मातरम्, भारत सरकार अधिनियम, 1935, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय

मेन्स के लिये: गणतंत्र दिवस और पूर्ण स्वराज का ऐतिहासिक महत्त्व, औपनिवेशिक शासन से संवैधानिक लोकतंत्र की ओर संक्रमण

स्रोत: पीआईबी 

चर्चा में क्यों?

गणतंत्र दिवस 2026 ने 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने की 77वीं वर्षगाँठ को चिह्नित किया और इसे ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ की थीम के तहत मनाया गया।

  • संविधानिक मूल्यों को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और जनभागीदारी के साथ जोड़ते हुए इस समारोह में राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और मंत्रालयों की 30 झाँकियाँ प्रदर्शित की गईं, जिन्हें स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम् और समृद्धि का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत  उप-विषयों के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया।
  • समारोह में नवगठित भैरव बटालियन एक विशेष आक्रमण पैदल सेना इकाई ने पहली बार परेड में भाग लिया। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय यूनियन का एक सैन्य दस्ता भी शामिल हुआ, जो यूरोप के बाहर किसी ऐसे आयोजन में उसकी पहली भागीदारी थी।

सारांश

  • गणतंत्र दिवस 2026 ने ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ की थीम के अंतर्गत संविधान की 77वीं वर्षगाँठ को चिह्नित किया, जिसमें सांस्कृतिक झाँकियों, जनभागीदारी और सैन्य प्रदर्शन के माध्यम से भारत की संवैधानिक विरासत का उत्सव मनाया गया।
  • इस अवसर पर पद्म पुरस्कार, वीरता पदक और रक्षा अलंकरणों के माध्यम से राष्ट्रीय सेवा और बलिदान को भी रेखांकित किया गया, जो भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, एकता और संस्थागत सुदृढ़ता को प्रतिबिंबित करते हैं।

गणतंत्र दिवस का ऐतिहासिक महत्त्व क्या है?

  • पूर्ण स्वराज प्रस्ताव: दिसंबर 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने लाहौर अधिवेशन (जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की) में ऐतिहासिक ‘पूर्ण स्वराज’ (पूर्ण स्वतंत्रता) प्रस्ताव पारित किया।
    • यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी, 1930 को पूरे भारत में ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन भारतीयों ने ब्रिटिश प्रभुत्व (डोमिनियन स्टेटस) को अस्वीकार करने और पूर्ण स्वशासन के लिये संघर्ष करने का संकल्प लिया।
    • 1930 से 1947 तक 26 जनवरी को ‘स्वतंत्रता दिवस’ अथवा ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ के रूप में मनाया जाता रहा।
  • स्वतंत्रता से गणराज्य की ओर संक्रमण: संविधान सभा की पहली बैठक दिसंबर 1946 में संविधान भवन (वर्तमान में संसद का केंद्रीय कक्ष) में हुई, जिससे भारत की संविधान-निर्माण प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
    • 15 अगस्त, 1947 को भारत ने औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की, किंतु संविधान के लागू होने तक वह ब्रिटिश डोमिनियन बना रहा और किंग जॉर्ज षष्ठम राष्ट्राध्यक्ष थे।
    • संवैधानिक परिवर्तन 26 नवंबर, 1949 को पूर्ण हुआ, जब संविधान सभा ने औपचारिक रूप से संविधान को अंगीकृत किया, यह तिथि प्रस्तावना में स्पष्ट रूप से अंकित है।
    • 26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ, यह तिथि 1930 की पूर्ण स्वराज की घोषणा के सम्मान में जानबूझकर चयनित की गई थी।
      • इसके साथ ही भारत सरकार अधिनियम, 1935 को प्रतिस्थापित कर दिया गया।
      • भारत औपचारिक रूप से एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
      • राष्ट्रपति ने ब्रिटिश सम्राट के स्थान पर राष्ट्राध्यक्ष का पद ग्रहण किया, जो गणराज्य के वास्तविक स्वरूप का प्रतीक था।
    • बाद में, 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा प्रस्तावना में समाजवादी और पंथनिरपेक्ष  शब्द जोड़े गए।

77वें गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शित झाँकियों की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?

  • असम: अशरिकांडी गाँव और उसकी सदियों पुरानी टेराकोटा (मृण्मूर्ति) शिल्प परंपरा को प्रदर्शित किया गया।
  • गुजरात: क्रांतिकारी मैडम भीकाजी कामा को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने जर्मनी में भारतीय ध्वज का पहला संस्करण फहराया (1907)। 
  • उत्तर प्रदेश: आधुनिक विकास के साथ बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया।
  • महाराष्ट्र: इसमें लोकमान्य तिलक द्वारा राष्ट्रीय एकता के लिये शुरू किये गए एक सामाजिक आंदोलन के रूप में गणेशोत्सव को प्रदर्शित किया गया।
  • पश्चिम बंगाल: इसमें राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को सम्मानित किया गया, जिसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। 
    • इसमें सुभाष चंद्र बोस, मातंगिनी हाज़रा और खुदीराम बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों को प्रदर्शित किया गया, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बंगाल की निर्णायक भूमिका को उजागर करता है।
  • पंजाब: श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के 350वें वर्ष पर उन्हें 'हिंद दी चादर' (भारत के रक्षक) के रूप में सम्मानित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
  • केरल: इसमें कोचीन वाटर मेट्रो (भारत का पहला वाटर मेट्रो) को प्रदर्शित किया गया और राज्य की 100% डिजिटल साक्षरता की उपलब्धि का उत्सव मनाया गया।
  • त्रि-सेवाएँ (सैन्य मामलों का विभाग): "ऑपरेशन सिंदूर - संयुक्तता के माध्यम से विजय" विषय के तहत भारत की एकीकृत सैन्य शक्ति को प्रदर्शित किया। 
  • संस्कृति मंत्रालय: इसमें वंदे मातरम् की 150 वर्ष की यात्रा को कलात्मक रूप से दर्शाया गया।
  • गृह मंत्रालय (NDMA और NDRF): वर्ष 2001 के भुज भूकंप के बाद हुए पुनर्निर्माण को याद किया।

77वें गणतंत्र दिवस के मुख्य आकर्षण क्या हैं?

  • पद्म पुरस्कार 2026: 131 पद्म पुरस्कार, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण, 113 पद्म श्री शामिल हैं।
  • सशस्त्र बल वीरता पुरस्कार: 70 सशस्त्र बल कर्मियों को वीरता पदक प्रदान किये गए, जिनमें अशोक चक्र, कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, सेना, नौसेना और वायुसेना पदक शामिल हैं।
  • सैन्य सम्मान: राष्ट्रपति ने 301 रक्षा सम्मान प्रदान किये, जिनमें परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक, सेना पदक को बार, सेना पदक (कर्त्तव्य के प्रति निष्ठा), नौसेना पदक, वायुसेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक को बार और विशिष्ट सेवा पदक शामिल हैं।
    • परम विशिष्ट सेवा पदक: असाधारण स्तर की विशिष्ट सेवा को मान्यता देते हैं।
    • उत्तम युद्ध सेवा पदक: युद्ध या संघर्ष के दौरान विशिष्ट सेवा के लिये दिये जाते हैं।
    • अति विशिष्ट सेवा पदक: असाधारण स्तर की विशिष्ट सेवा को मान्यता देते हैं।
    • युद्ध सेवा पदक: युद्ध या शत्रुता के दौरान विशिष्ट सेवा के लिये दिये जाते हैं।
    • सेना पदक को बार (कर्त्तव्यनिष्ठा): यह उस व्यक्ति को प्रदान किया जाने वाला अलंकरण है, जिसे पहले से सेना पदक मिल चुका हो और जो आगे भी कर्तव्यनिष्ठा के अतिरिक्त कार्य करता हो।
    • विशिष्ट सेवा पदक: उच्च श्रेणी की सेवा के लिये दिया जाने वाला अलंकरण; बाद के अवसरों पर दोबारा सम्मानित करने के लिये ‘बार’ प्रदान किया जाता है।
  • PTM और TM पदक: राष्ट्रपति ने भारतीय तटरक्षक कर्मियों के लिये राष्ट्रपति तटरक्षक पदक (PTM) और तटरक्षक पदक (TM) प्रदान किये। 
    • ये पदक उनके साहस के विशिष्ट कार्यों, कर्त्तव्य के प्रति असाधारण निष्ठा और विशिष्ट/योग्य सेवा को मान्यता देते हैं।
  • सेवा कर्मी: पुलिस, अग्निशमन सेवा, होम गार्ड और सिविल डिफेंस (HG और CD) एवं सुधारात्मक सेवाओं के कुल 982 कर्मियों को वीरता और सेवा पदक प्रदान किये गए हैं। 
    • पुलिस वीरता पदक: वर्ष में दो बार घोषित किये जाते हैं, ये पदक पुलिसकर्मियों द्वारा बहादुरी और अनुकरणीय आचरण को स्वीकार करते हैं। 
      • वीरता के लिये राष्ट्रपति पदक असाधारण साहस के लिये दिया जाता है, जब कोई व्यक्ति जान बचाने या अपराध को रोकने का कार्य करता है; हालाँकि वीरता के लिये पुलिस पदक ड्यूटी के दौरान दिखाई गई वीरता की घटनाओं को मान्यता देता है।
    • राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त विशिष्ट सेवा पदक (PSM): यह पदक विशेष रूप से विशिष्ट सेवा अभिलेखों के लिये प्रदान किया जाता है।
    • मेधावी सेवा पदक (MSM): यह पदक मूल्यवान सेवा के लिये दिया जाता है, जो समर्पण और कर्त्तव्य के प्रति निष्ठा से चिह्नित होता है।
  • जीवन रक्षा पदक पुरस्कार: किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति का जीवन बचाने के लिये किये गए सराहनीय मानवीय कार्य हेतु प्रदान किये जाते हैं।
    • ये पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिये जाते हैं: सर्वोत्तम, उत्तम और जीवन रक्षा पदक। समाज के सभी वर्गों से संबंधित व्यक्ति इसके लिये पात्र होते हैं, तथा यह सम्मान मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकता है।
    • सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक: अत्यंत खतरनाक परिस्थितियों में किसी का जीवन बचाने के लिये असाधारण साहस दिखाने पर प्रदान किया जाता है। 
    • उत्तम जीवन रक्षा पदक: अत्यधिक खतरे की स्थिति में साहस और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से किसी का जीवन बचाने के लिये प्रदान किया जाता है।
    • जीवन रक्षा पदक: गंभीर शारीरिक जोखिम वाली परिस्थितियों में साहस और त्वरित कार्रवाई कर किसी का जीवन बचाने के लिये प्रदान किया जाता है।

वंदे मातरम् के संबंध में प्रमुख बिंदु

  • उत्पत्ति एवं रचना: वंदे मातरम् (जिसे बंदे मातरम् भी कहा जाता है) की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह पहली बार वर्ष 1875 में बंगदर्शन  पत्रिका में प्रकाशित हुआ और बाद में आनंदमठ (1882) उपन्यास में शामिल किया गया।
    • रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा इसे संगीतबद्ध किया गया और यह भारत की सांस्कृतिक व राजनीतिक पहचान के एक सशक्त प्रतीक के रूप में उभरा, जो एकता, बलिदान तथा समर्पण की भावना को अभिव्यक्त करता है।
  • राष्ट्रीय दर्जा: 24 जनवरी, 1950 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यह घोषणा की कि जहाँ जन गण मन  भारत का राष्ट्रगान होगा, वहीं स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका के कारण वंदे मातरम्  को राष्ट्रीय गीत के रूप में समान सम्मान प्रदान किया जाएगा।
    • भारत के संविधान में राष्ट्रीय गीत का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है। हालाँकि अनुच्छेद 51A(क) नागरिकों से संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करने का आह्वान करता है।
  • स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका:
    • कांग्रेस द्वारा अंगीकरण: वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम्  प्रस्तुत किया।
      • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वाराणसी अधिवेशन (1905) में वंदे मातरम्  को अखिल भारतीय अवसरों के लिये अंगीकार किया गया।
    • जन-आंदोलन और प्रेस: मातृभूमि के प्रति भक्ति को बढ़ावा देने के लिये उत्तरी कलकत्ता में वर्ष 1905 में बंदे मातरम् संप्रदाय की स्थापना की गई।
      • वर्ष 1906 में बिपिन चंद्र पाल के नेतृत्व में अंग्रेज़ी दैनिक ‘बंदे मातरम्’ की शुरुआत की गई, जिसमें बाद में श्री अरविंद भी जुड़े। इस पत्र ने स्वदेशी, राष्ट्रीय एकता और प्रतिरोध के विचारों का प्रसार किया।
    • विभाजन-विरोधी और छात्र आंदोलन: वंदे मातरम्  का राजनीतिक नारे के रूप में पहला प्रयोग 7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में छात्र जुलूसों के दौरान किया गया और यह स्वदेशी एवं विभाजन-विरोधी आंदोलन का मुख्य उद्घोष बन गया।
      • इसकी व्यापक लोकप्रियता के कारण लॉर्ड कर्ज़न ने इसे गाने पर गिरफ्तारियों का आदेश दिया।
    • विदेशों में भारतीय क्रांतिकारियों पर प्रभाव:
      • वर्ष 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टटगार्ट में पहली बार भारत के बाहर तिरंगा झंडा फहराया। इस झंडे पर वंदे मातरम्  शब्द लिखे गए थे।
      • अगस्त 1909 में जब मदन लाल ढींगरा को इंग्लैंड में फाँसी दी गई, तो फाँसी देने से पहले उनके अंतिम शब्द थे—"बंदे मातरम्।"
      • अक्तूबर 1912 में गोपाल कृष्ण गोखले का केप टाउन में "वंदे मातरम्" का नारा  लगाते हुए एक भव्य जुलूस के साथ स्वागत किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को क्यों मनाया जाता है?
यह 1950 में संविधान के क्रियान्वयन का प्रतीक है और 1930 के पूर्ण स्वराज घोषणा की स्मृति को मनाया जाता है, जो स्वतंत्रता संग्राम को संवैधानिक शासन से जोड़ता है।

2. 77वें गणतंत्र दिवस (2026) का थीम क्या था?
इस वर्ष का थीम था "वंदे मातरम् के 150 वर्ष", जो राष्ट्रीय एकता, स्वतंत्रता और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करता है।

3. गणतंत्र दिवस पर घोषित पद्म पुरस्कारों का क्या महत्त्व है?
पद्म पुरस्कार कला, सार्वजनिक सेवा, विज्ञान, खेल और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में असाधारण नागरिक योगदान को पहचान देते हैं।

4. वीरता और सेवा पदक किस बात का संकेत देते हैं?
ये पुरस्कार सशस्त्र बल और नागरिक सेवाओं के कर्मियों द्वारा दिखाई गई साहस, कर्तव्य निष्ठा और विशिष्ट सेवा को सम्मानित करते हैं।

5. जीवन रक्षा पदक पुरस्कार क्या हैं?
ये पुरस्कार मानव जीवन की रक्षा में दिखाए गए असाधारण साहस को मान्यता देते हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs) 

प्रिलिम्स

प्रश्न. 26 जनवरी, 1950 को भारत की वास्तविक संवैधानिक स्थिति क्या थी? (2021)

(a) एक लोकतांत्रिक गणराज्य

(b) एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य

(c) एक संप्रभु धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य

(d) एक संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य

उत्तर: B


मेन्स

प्रश्न. ‘उद्देशिका’ (प्रस्तावना) में शब्द 'गणराज्य' के साथ जुड़े प्रत्येक विशेषण की चर्चा कीजिये। क्या वर्तमान परिस्थितियों में वे प्रतिरक्षणीय हैं? (2016)

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