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रैपिड फायर

भैरव बटालियन

  • 15 Jan 2026
  • 17 min read

स्रोत: द हिंदू 

भैरव बटालियन भारतीय सेना की नवगठित आधुनिक वॉर फेयर फोर्स, जयपुर में आयोजित सेना दिवस परेड में पहली बार शामिल हुई।

भैरव बटालियन

  • परिचयभैरव बटालियनें भारतीय सेना की तेज़ गति से कार्य करने वाली विशेष आक्रामक इकाइयाँ हैं। जिसे पैरा स्पेशल फोर्सेज़ और पैदल सेना इकाइयों के बीच परिचालन अंतर को समाप्त करने के लिये तैयार किया गया है।
    • भैरव बटालियन एक विशेषीकृत सैन्य संरचना है, जो रणनीतिक स्तर पर कार्यरत पैरा स्पेशल फ़ोर्सेस (SF) तथा सामरिक स्तर की घटक (घातक) प्लाटूनों के बीच मौजूद परिचालन अंतर को भरने का कार्य करती है। जहाँ घातक प्लाटून बटालियन स्तर पर सीमित क्षेत्र में आक्रामक अभियानों का संचालन करती हैं, वहीं पैरा स्पेशल फ़ोर्सेस शत्रु क्षेत्र के भीतर गहराई में जाकर दीर्घकालिक एवं रणनीतिक मिशनों को अंजाम देती हैं। इसके विपरीत, भैरव बटालियनें सीमावर्ती क्षेत्रों में उत्पन्न तत्काल परिस्थितियों अथवा अल्प सूचना पर प्रारंभ किये जाने वाले आक्रामक अभियानों के लिये त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता प्रदान करती हैं।
    • यह हाइब्रिड और प्रौद्योगिकी-संचालित युद्ध की मांगों को पूरा करने के लिये आधुनिकीकरण और बल के पुनर्गठन हेतु वर्ष 2025 की एक भारतीय सेना पहल है।
  • संरचना: प्रत्येक बटालियन एक सघन, एकीकृत संरचना है जिसमें पैदल सेना, तोपखाना, वायु रक्षा और सिग्नल से लगभग 200-250 कर्मी शामिल हैं। सेना "संस ऑफ द सॉइल" (मिट्टी के लाल) भर्ती अवधारणा लागू करती है, जिसमें तैनाती क्षेत्रों में बेहतर भूभाग और परिचित जलवायु के लिये स्थानीय सैनिकों को प्राथमिकता दी जाती है।
  • तैनाती: अब तक 15 भैरव बटालियन गठित की गई हैं, इसे 23-25 बटालियन तक विस्तारित करने की योजना है। इन्हें कॉर्प्स और विभाग-स्तरीय फॉर्मेशन के अधीन रखा जा रहा है, विशेषकर संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्रों - राजस्थान, जम्मू, लद्दाख और पूर्वोत्तर में।
  • मानवरहित और हाइब्रिड वॉर पर केंद्रित: ये इकाइयाँ सेना के मानवरहित युद्ध को बढ़ावा देने की दिशा में एक आधारशिला हैं, इन्हें दुश्मन के ठिकानों और शत्रु क्षेत्र के भीतर गहन ढाँचों को निशाना बनाने के लिये ड्रोन के उपयोग हेतु प्रशिक्षित किया गया है। इसका समर्थन करने के लिये सेना एक लाख से अधिक ड्रोन ऑपरेटिवों का एक पूल तैयार कर रही है।

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