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नई दिल्ली में द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन
चर्चा में क्यों?
बौद्ध दर्शन के वैश्विक प्रसार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में नई दिल्ली में द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु
- स्थल: भारत मंडपम, नई दिल्ली।
- आयोजक: यह शिखर सम्मेलन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
- विषय: ‘Collective Wisdom, United Voice, Shared Coexistence’ अर्थात सामूहिक ज्ञान, एकजुट आवाज़, पारस्परिक सहअस्तित्व।
- उद्देश्य: करुणा, ज्ञान, सद्भाव जैसे शाश्वत बौद्ध मूल्यों को उजागर करना और सामाजिक शांति, नैतिक नेतृत्व, पर्यावरण और कल्याण के संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित करना।
- चर्चा के प्रमुख क्षेत्र: सामाजिक सद्भाव, उद्यमिता एवं सम्यक आजीविका, स्वास्थ्य सेवा एवं सतत जीवन, बौद्ध शिक्षा और संघ की परंपराएँ।
- प्रदर्शनियाँ: पवित्र अवशेष, सांस्कृतिक जुड़ाव तथा विरासत से विश्व थीम के अंतर्गत भारत में बुद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार का समग्र प्रस्तुतीकरण।
- AI पहल: बौद्ध ज्ञान के प्रचार और अधिगम में सहायता के लिये ‘कल्याण मित्र के रूप में अपनाए गए एआई-आधारित बौद्ध भाषा मॉडल, नोरबू का परिचय।
- महत्त्व: यह सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संवाद, सांस्कृतिक कूटनीति और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका को और सशक्त करता है।
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और पढ़ें: वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC), भारत में बौद्ध धर्म |

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स्ट्राइप्ड टाइगर चंडीगढ़ की राजकीय तितली घोषित
चर्चा में क्यों?
चंडीगढ़ के राज्य वन्यजीव बोर्ड (SBWL) ने स्ट्राइप्ड टाइगर को आधिकारिक रूप से केंद्रशासित प्रदेश की राज्य तितली घोषित किया है, जो जैव विविधता की मान्यता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है।
मुख्य बिंदु
- चयन प्रक्रिया: वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा शहर की प्राकृतिक विरासत के लिये उपयुक्त प्रतीक चिह्न निर्धारित करने हेतु एक वर्ष तक चलने वाला चयन अभियान संचालित किया गया।
- स्ट्राइप्ड टाइगर का चयन ऑनलाइन सार्वजनिक मतदान के माध्यम से हुआ, जिसमें इसे कुल वोटों का लगभग 54% प्राप्त हुआ।
- इसने तीन अन्य चयनित प्रजातियों – ब्लू टाइगर, प्लेन टाइगर और जेज़बेल (Jezebel)
- को पीछे छोड़ दिया।
- चयन का आधार: अपनी आकर्षक उपस्थिति और अनुकूलनशीलता के कारण इसे चुना गया है तथा यह सुखना वन्यजीव अभयारण्य और सेक्टर 26 तितली पार्क सहित पूरे केंद्रशासित प्रदेश में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।
- स्ट्राइप्ड टाइगर तितली के मुख्य तथ्य:
- रूप-रंग: इस तितली के पंख चमकीले भूरे-नारंगी रंग के होते हैं जिन पर गहरी काली धारियाँ होती हैं, जो इसे बाघ-सदृश आकृति प्रदान करती हैं।
- रक्षा तंत्र: यह शिकारियों के लिये अरुचिकर (बेस्वाद) माना जाता है, यह विशेषता अमेरिकी मोनार्क तितली के समान है।
- स्थिति: यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के अंतर्गत सूचीबद्ध है।
- संरक्षण जागरूकता: इस घोषणा का उद्देश्य नागरिकों और विद्यार्थियों में जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरणीय चेतना को प्रोत्साहित करना है।
- नया वन्यजीव शिक्षण केंद्र: घोषणा के साथ ही, प्रशासक ने स्थानीय वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिये एक नए वन्यजीव शिक्षण केंद्र (जैसे कि एक जैविक पार्क या बाड़ा) की स्थापना का निर्देश दिया।

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने राष्ट्रीय वन प्रबंधन समिति की बैठक की अध्यक्षता की
चर्चा में क्यों?
19 जनवरी, 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) की 88वीं बैठक की अध्यक्षता की।
मुख्य बिंदु
- स्वीकृत प्रस्ताव: समिति में संरक्षित क्षेत्रों, टाइगर रिज़र्व और इको-सेंसिटिव ज़ोन के भीतर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित 70 प्रस्तावों पर विचार किया गया।
- रणनीतिक अवसंरचना: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण रणनीतिक सड़कों और अवसंरचना से संबंधित 17 रक्षा संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई, जिनमें से मुख्य रूप से लद्दाख और सिक्किम में थे।
- सार्वजनिक उपयोगिताएँ: चर्चा की गई परियोजनाओं में जल जीवन मिशन के तहत पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र, 4G टावरों के माध्यम से बेहतर कनेक्टिविटी, सड़क उन्नयन और पारेषण लाइनों से संबंधित परियोजनाएँ शामिल थीं।
- जल सुरक्षा: मध्य प्रदेश में एक मध्यम सिंचाई परियोजना पर विचार किया गया, जिसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र को पेयजल और सिंचाई जल उपलब्ध कराकर बुंदेलखंड क्षेत्र को लाभ पहुँचाना और साथ ही घड़ियालों सहित वन्यजीवों के लिये जल स्थितियों में सुधार करना था।
- प्रशासनिक एवं प्रक्रिया सुधार: समिति ने पूर्व निर्णयों पर की गई कार्रवाइयों की समीक्षा की तथा परिवेश पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
- निरंतर निगरानी: आगामी बैठकों में अनुपालन और निगरानी से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी, ताकि प्रभावी वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
SC-NBWL क्या है?
- स्थापना: इसकी स्थापना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत की गई है।
- नेतृत्व: जहाँ राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की पूर्ण अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, वहीं इसकी स्थायी समिति (Standing Committee) की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्री करते हैं।
- कार्य: यह संरक्षण से संबंधित विषयों पर केंद्र सरकार को परामर्श प्रदान करने वाला निकाय है तथा संरक्षित क्षेत्रों के भीतर या आसपास प्रस्तावित विकास परियोजनाओं की समीक्षा करता है।
और पढ़ें: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, जल जीवन मिशन

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