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स्टेट पी.सी.एस.

  • 20 Dec 2025
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राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

भेजा-बकौर कोसी पुल परियोजना

चर्चा में क्यों?

उत्तरी बिहार में निर्माणाधीन 13.3 किलोमीटर लंबा भेजा–बकौर कोसी पुल अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है, जिससे बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में गुणात्मक सुधार, यात्रा दूरी में कमी और क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की संभावना है।

मुख्य बिंदु

  • परियोजना स्थान: भेजा–बकौर कोसी पुल का निर्माण बिहार में कोसी नदी पर किया जा रहा है।
  • कोसी नदी: कोसी को प्रायः बिहार का शोक” कहा जाता है। यह नदी तिब्बती पठार से उद्गमित होकर नेपाल से प्रवाहित होती हुई बिहार के कटिहार ज़िले में कुरसेला के पास गंगा नदी में मिल जाती है।
  • रणनीतिक संपर्क: इस पुल के चालू होने से यात्रा दूरी में लगभग 44 किलोमीटर की कमी आएगी, जिससे मधुबनी और सुपौल के बीच NH-27 के माध्यम से पटना के साथ सीधा संपर्क स्थापित होगा।
  • क्षेत्रीय वाणिज्य: परियोजना से नेपाल और उत्तर-पूर्वी भारत के लिये निर्बाध परिवहन मार्ग उपलब्ध होने की संभावना है, जिससे सीमा-पार व्यापार तथा क्षेत्रीय वाणिज्य को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • योजना: यह परियोजना सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा भारत माला परियोजना (चरण-I) के अंतर्गत विकसित की जा रही है।
  • निवेश: परियोजना की अनुमानित लागत 1101.99 करोड़ रुपए है।
  • परियोजना पूर्णता की समयसीमा: इसे वित्त वर्ष 2026–27 के दौरान पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • धार्मिक और पर्यटन स्थल: पुल के माध्यम से भगवती उच्चैठ, बिदेश्वर धाम, उग्रतारा मंदिर तथा सिंघेश्वर स्थान जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक आसान कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।
  • परिवर्तनकारी प्रतीक: यह पुल उत्तरी बिहार में दशकों से चली आ रही बाढ़, भौगोलिक अलगाव और अविकास की स्थिति से निकलकर बेहतर संपर्क, समावेशी विकास तथा क्षेत्रीय एकीकरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तनकारी प्रतीक है।

झारखंड Switch to English

झारखंड के विद्यार्थियों ने इंस्पायर प्रदर्शनी में प्रतिनिधित्व किया

चर्चा में क्यों?

झारखंड के 15 विद्यार्थियों को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय-स्तरीय इंस्पायर पुरस्कार–मानक प्रदर्शनी में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिये चयनित किया गया है

मुख्य बिंदु

  • कार्यक्रम एवं आयोजक: यह आयोजन भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत संचालित इंस्पायर पुरस्कार–मानक (Million Minds Augmenting National Aspirations and Knowledge) पहल का एक अभिन्न हिस्सा है।
  • चयन प्रक्रिया: विद्यार्थियों का चयन राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी-सह-परियोजना प्रतियोगिता में सहभागिता और प्रदर्शन के उपरांत किया गया है।
  • चयनित विद्यार्थियों की संख्या: झारखंड के विभिन्न ज़िलों से कुल 15 विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे।
  • मंच: राष्ट्रीय स्तर की इंस्पायर प्रदर्शनी युवा नवोन्मेषकों को अपनी परियोजनाओं के प्रदर्शन का अवसर प्रदान करती है तथा उन्हें देश के अन्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने का मंच उपलब्ध कराती है।
  • उद्देश्य: इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों में, विशेष रूप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में, वैज्ञानिक सोच, रचनात्मक चिंतन तथा नवाचार की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना है।
  • व्यापक योजना: इंस्पायर पुरस्कार–मानक कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को मौलिक विचारों और समाधान विकसित करने हेतु प्रेरित करने की एक प्रमुख योजना है, जिनका चयन क्रमशः ज़िला, राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के माध्यम से किया जाता है।
  • इंस्पायर पुरस्कार- मानक (MANAK), इसके घटकों में से एक है।


मध्य प्रदेश Switch to English

मध्य प्रदेश में NHRC का स्वत: संज्ञान

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश के सतना ज़िले के एक अस्पताल में रक्त आधान के उपरांत छह बच्चों के HIV पॉजिटिव पाए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है।

मुख्य बिंदु 

घटना के बारे में

  • मध्य प्रदेश के सतना ज़िला अस्पताल में थैलेसीमिया का उपचार करा रहे छह बच्चे कथित रूप से रक्त आधान के पश्चात HIV पॉजिटिव पाए गए हैं, जिससे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने अवलोकन किया है कि यदि यह घटना सत्य पाई जाती है, तो यह बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और संरक्षण के अधिकारों का उल्लंघन होगा।
  • प्रणालीगत समस्या: देश के अन्य भागों में भी इसी प्रकार की घटनाएँ सामने आना राष्ट्रीय स्तर पर रक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल में संभावित संरचनात्मक कमज़ोरियों की ओर संकेत करता है।
  • नोटिस जारी: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
  • जाँच जारी है: मध्य प्रदेश में स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिये जाँच कर रहे हैं कि क्या अन्य अस्पताल भी ऐसे मामलों से जुड़े हो सकते हैं, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

HIV के बारे में: 

  • ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) एक रेट्रोवायरस है, जिसकी आनुवंशिक सामग्री सिंगल-स्ट्रैंडेड RNA (ssRNA) होती है, और यह मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर आक्रमण करता है।
  • प्रभाव: यह वायरस मुख्य रूप से CD4 (टी-हेल्पर) कोशिकाओं, जो एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिकाएँ हैं को नष्ट करता है, जिससे प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर हो जाता है।
  • रोग की प्रगति: यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो HIV संक्रमण एड्स (AIDS) में परिवर्तित हो सकता है।
  • संचरण: यह संक्रमण रक्त आधान, यौन संपर्क, माँ से शिशु में संक्रमण तथा दूषित सुइयों के माध्यम से फैल सकता है।
  • उपचार: एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) वायरस को नियंत्रित करती है और रोग की प्रगति को धीमा या रोकती है।
  • उपचार की स्थिति: HIV का पूर्ण उपचार उपलब्ध नहीं है, किंतु प्रारंभिक और नियमित उपचार से जीवन प्रत्याशा तथा जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC): 

  • यह मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक निकाय है, जिसे मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्द्धन का दायित्व सौंपा गया है।

उत्तराखंड Switch to English

उत्तराखंड की पंचायती राज संस्थानों को अनुदान

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिये 15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के अंतर्गत उत्तराखंड की पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को 94.236 करोड़ रुपये की अनुदान राशि जारी की।

मुख्य बिंदु 

  • अनुदान आवंटन: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिये उत्तराखंड के ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLB)/पंचायती राज संस्थाओं (PRI) को 15वें वित्त आयोग के तहत 94.236 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं।
  • अप्रतिबंधित अनुदान: इसमें वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रतिबंधित अनुदान की दूसरी किस्त शामिल है, जो 13 ज़िला पंचायतें, 95 ब्लॉक पंचायतें और 7,784 ग्राम पंचायतें सम्मिलित करती है।
  • अतिरिक्त राशि जारी करना: वित्त वर्ष 2024-25 की पहली किस्त से रोकी गई 13.60 लाख रुपये की राशि 15 नव पात्र ग्राम पंचायतों को जारी कर दी गई है।
  • मंत्रालयों की भूमिका: पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) अनुदानों की सिफारिश करते हैं, जिन्हें वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष के दौरान दो किस्तों में जारी करता है।
  • अप्रतिबंधित अनुदानों का उद्देश्य: ये अनुदान RLB/PRI को ग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषयों के अंतर्गत स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने की अनुमति देते हैं, जिसमें वेतन और स्थापना व्यय शामिल नहीं हैं।
  • बद्ध अनुदान: बद्ध अनुदान स्वच्छता, खुले में शौच मुक्त वातावरण का रखरखाव, अपशिष्ट प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी आवश्यक सेवाओं के लिये निर्धारित किये जाते हैं।
  • वित्त आयोग: यह संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है, जो संघ और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण, कर हस्तांतरण तथा अनुदान सहायता पर सिफारिश करने के लिये उत्तरदायी है।

राजस्थान Switch to English

कलानुभाव: दिल्ली में राजस्थान शिल्प प्रदर्शनी

चर्चा में क्यों? 

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) अजय कुमार सूद ने नई दिल्ली के कुंज में आयोजित कलानुभाव प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जिसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और आजीविका कार्यक्रमों के तहत विकसित राजस्थान के हस्तशिल्प नवाचारों को उजागर किया गया।

मुख्य बिंदु 

  • मुख्य आकर्षण: कलानुभाव प्रदर्शनी में राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और आजीविका कार्यक्रमों के अंतर्गत विकसित प्रमुख हस्तशिल्प, हथकरघा, कारीगरों द्वारा किये गए नवाचार तथा डिज़ाइन पंजीकृत उत्पाद प्रदर्शित किये गए हैं।
  • स्थान: यह कार्यक्रम नई दिल्ली के द कुंज में आयोजित किया गया, जो कारीगरों को अपनी कृतियों को प्रदर्शित करने का एक विशेष मंच प्रदान करता है।
  • उद्देश्य: प्रदर्शनी का उद्देश्य कारीगरों को सशक्त बनाना, उनके उत्पादों की बाज़ार तक पहुँच बढ़ाना और भारत के शिल्प क्षेत्र को गाँवों से वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाना है।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्लस्टर पहल: जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर (JCKIC), कलानुभाव.इन और AR/VR टूल्स जैसे विज्ञान-प्रौद्योगिकी-सक्षम हस्तक्षेपों के माध्यम से कारीगरों की आजीविका को सशक्त करने, डिज़ाइन पंजीकरण को बढ़ावा देने तथा GI समर्थन प्रदान करने पर केंद्रित है।
  • राष्ट्रीय प्राथमिकता संरेखण: यह प्रदर्शनी भारत में क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने और कारीगर पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिये समन्वित विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार प्रयासों का समर्थन करती है।

उत्तर प्रदेश Switch to English

गोरखपुर में भारत का पहला वन विश्वविद्यालय

चर्चा में क्यों?

उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर में भारत के पहले समर्पित वन विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की, जिसमें लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसका उद्देश्य वानिकी, वन्यजीव और पर्यावरण शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

मुख्य बिंदु

  • स्वीकृति और लागत: राज्य सरकार ने वन विश्वविद्यालय के लिये डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को स्वीकृति दी है, जिसकी अनुमानित लागत 500 करोड़ रुपये है।
  • स्थान: यह विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के निकट लगभग 125 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। 
  • शैक्षणिक लक्ष्य: यह विश्वविद्यालय वानिकी, कृषि वानिकी, सामाजिक वानिकी, बागवानी, वन्यजीव अध्ययन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विज्ञान में विशिष्ट डिग्री तथा डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रदान करेगा
  • पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण: शैक्षणिक ढाँचा कक्षा आधारित अध्ययन को क्षेत्र-आधारित व्यावहारिक अनुसंधान के साथ एकीकृत करेगा, जिससे छात्रों को वनों और संरक्षण स्थलों में प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा।
  • अवसंरचना योजना: परिसर में अलग छात्रावास, कक्षाएँ, प्रयोगशालाएँ, प्रशासनिक ब्लॉक, ऑडिटोरियम और अध्यापकों के लिये आवासीय सुविधाएँ होंगी।
  • राष्ट्रीय महत्त्व: यह विश्वविद्यालय वन शिक्षा, संरक्षण अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिये राष्ट्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जिससे भारत की पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास क्षमता में वृद्धि होगी।
  • UP ISFR 2023 रिपोर्ट: रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भारत में हरित आवरण (वन + वृक्ष आवरण) में दूसरी सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें 559.19 वर्ग किमी का विस्तार हुआ और कुल हरित आवरण राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का 9.96% तक पहुँच गया।

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