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मेटावर्स - एक आभासी वास्तविकता

  • 02 Mar 2022
  • 11 min read

यह एडिटोरियल 11/02/2022 को ‘लाइवमिंट’ में प्रकाशित “Why Metaverse may Supersede the Internet” लेख पर आधारित है। इसमें ‘मेटावर्स’ के संबंध में चर्चा की गई है, जिसे इंटरनेट के नए संस्करण के रूप में देखा जा रहा है।

संदर्भ 

मेटावर्स (Metaverse) आभासी वास्तविकता (Virtual Reality), संवर्द्धित वास्तविकता (Augmented Reality) और वीडियो सहित कई प्रौद्योगिकियों का संयोजन है जहाँ उपयोगकर्त्ता एक डिजिटल ब्रह्मांड के भीतर रहते हैं। यह अवधारणा धीरे-धीरे अत्यधिक महत्त्व प्राप्त कर रही है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कई दिग्गज कंपनियों ने पहले ही इस प्रक्रिया में प्रगति को गति प्रदान कर दी है जिनमें फेसबुक और एपिक सबसे आगे चल रहे हैं। मेटावर्स किसी एक कंपनी या कुछ कंपनियों द्वारा निर्मित नहीं होने जा रहा है, बल्कि दुनिया भर के लाखों क्रिएटर्स के माध्यम से यह आकार लेगा। वास्तव में जैसा कि मार्क ज़ुकरबर्ग कहते हैं, भारत मेटावर्स का एक बड़ा हिस्सेदार बनने जा रहा है क्योंकि भारत के ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र (जो मेटावर्स के महत्त्वपूर्ण घटकों में से एक है) ने पिछले कुछ वर्षों में बहुत अधिक वृद्धि देखी गई है।

मेटावर्स क्या है?

  • मेटावर्स कोई नया विचार नहीं है; ‘साइंस फिक्शन’ लेखक नील स्टीफेंसन ने वर्ष 1992 में इस शब्द को गढ़ा था और यह अवधारणा वीडियो गेम कंपनियों के बीच आम है।
  • मेटावर्स सामाजिक संपर्क पर केंद्रित इंटरनेट का अगला संस्करण है।
    • इसे एक ‘सिम्युलेटेड’ डिजिटल वातावरण (Simulated Digital Environment) के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो वास्तविक दुनिया की नकल करते हुए समृद्ध उपयोगकर्त्ता संपर्क वाले स्थान के सृजन के लिये सोशल मीडिया से प्राप्त अवधारणाओं के साथ-साथ संवर्द्धित वास्तविकता (AR), आभासी वास्तविकता (VR) और ब्लॉकचैन तकनीकी का उपयोग करता है।
  • इसे लगातार विकसित होते पहलूओं वाली एक 3D आभासी दुनिया के रूप में समझा जा सकता है, जिसे इसके निवासियों द्वारा सामूहिक रूप से साझा किया जाता है; यह रियल-टाइम घटनाओं और ऑनलाइन अवसंरचना से युक्त एक आभासी दुनिया है।
  • सिद्धांतः यह वास्तविक दुनिया में होने वाली हर घटना को समाहित करता है और वास्तविक समय की घटनाओं और अद्यतित जानकारी को आगे ले जाता है। मेटावर्स में उपयोगकर्त्ता एक सीमारहित आभासी दुनिया में मौजूद रहता है।

मेटावर्स क्या अवसर प्रदान करता है?

  • आभासी समुदाय, गतिविधियाँ, घटनाएँ सभी एक से अधिक ऐप्स में साइन-इन करने की आवश्यकता के बिना सहज रूप से सुलभ होंगे।
  • उपयोगकर्त्ता केंद्रित दृष्टिकोण के लिये, मेटावर्स का एक प्रमुख पहलू जो इसके पक्ष में काम करेगा वह है बिना विसंगतियों के एक चरण से दूसरे चरण में सहज संक्रमण।
    • कोई व्यक्ति अपने वर्चुअल ऑफिस में स्वयं के वर्चुअल रूप में साइन-इन कर सकता है, क्लाइंट से मिल सकता है, छुट्टी मनाने जा सकता है या कोई खेल खेल सकता है और वह यह सब एक ही स्थान पर कर सकता है।
  • जब कोविड-19 महामारी हमें काम के लिये हमारे घरों तक सीमित कर रही है, मेटावर्स इसे दूसरे स्तर पर ले जाता है। यह दुनिया भर में अपने दोस्तों, परिवार, सहकर्मियों के साथ सहज ‘क्रॉस-प्लेटफॉर्म इंटरैक्शन’ की सुविधा प्रदान करता है।
  • गेमिंग उद्योग तक में ‘क्रॉस-प्लेटफॉर्म इंटरैक्शन’ अभी अपनी प्रारंभिक अवस्था में ही है। मेटावर्स के साथ ‘क्रॉस-प्लेटफॉर्म इंटरैक्शन’ दुनिया भर में निर्बाध वर्चुअल इंटरैक्शन के लिये एक  मानक बन जाएगा। इसकी सफलता से पते और पिन कोड अनिवार्य नहीं रहेंगे।
  • मेटावर्स के साथ वर्चुअल मार्केटप्लेस अब एक गंभीर व्यावसायिक मामला बन जाएगा।
    • ब्रांड अपने विज्ञापन के तरीके को बदल देंगे जो वर्तमान में देखे जाने वाले अतिक्रमणकारी पॉप-अप्स और विज्ञापनों के बजाय एक यादगार अनुभव होगा।

संबद्ध चुनौतियाँ 

  • कई महिलाओं ने उत्पीड़न की घटनाओं की सूचना दी है, जिसमें एक ‘बीटा टेस्टर’ महिला भी शामिल है जिसे किसी अजनबी द्वारा आभासी रूप से यौन तरीके से छूआ गया। गैंगरेप की भी घटना सामने आई है।
  • इससे गोपनीयता जैसे पुराने मुद्दे पर नए तरीके से विचार की आवश्यकता पड़ेगी, जबकि यह भी प्रबंधित करना होगा कि कौन किसके साथ क्या व्यवहार करता है।
    • ये मेटावर्स के शुरुआती दिन हैं। यदि सुरक्षा को इसके डिज़ाइन में अभी ही निहित नहीं किया गया तो आगे इसे सुरक्षित करना अत्यंत कठिन हो जाएगा।
  • दुनिया भर के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वैज्ञानिक दोहरी वास्तविकता (Dual Reality) के मनोवैज्ञानिक प्रभावों को लेकर भी चिंतित हैं।
    • वे आभासी दुनिया की ओर आगे बढ़ने के साथ अभी ही भावनात्मक गुणक (emotional quotient- EQ) की हानि, व्यक्तित्व के नुकसान और हमारी संवेदनाओं के कमज़ोर हो जाने का अनुमान कर रहे हैं।

आगे की राह

  • चिंताओं को दूर करना: तकनीकी बाधाएँ तो हमेशा होती हैं, लेकिन गोपनीयता संबंधी चिंताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। एक और चिंता आभासी दुनिया में मुद्रा की अवधारणा है। इन सभी चुनौतियों को ध्यान में रखने की ज़रूरत है।
    • मेटावर्स में सरकार की भागीदारी भी एक महत्त्वपूर्ण पहलू है क्योंकि यह मेटावर्स की पूरी गतिशीलता को बदल सकता है, चूँकि क्रिप्टोकरेंसी इसकी प्रेरक शक्तियों में से एक है।
  • प्रौद्योगिकियों को अपग्रेड करना: मेटावर्स को इंटरनेट 2.0 के रूप में देखा जा रहा है और इसकी ओर सुचारू रूप से आगे बढ़ने के लिये नई तकनीकी अवसंरचना के निर्माण एवं प्रोटोकॉल लिखे जाने की आवश्यकता है। फाइल-शेयरिंग प्रोटोकॉल के रूप में आज के इंटरनेट को मेटावर्स के लिये पुनर्कल्पित करने की आवश्यकता होगी।
  • मेटावर्स को एकीकृत करना: यदि फेसबुक और अन्य बड़ी इंटरनेट कंपनियाँ अपने स्वयं के मेटावर्स का निर्माण करती हैं और इन क्षेत्रों तक पहुँच के लिये अपने स्वयं के स्वामित्व वाले हार्डवेयर की बिक्री करती हैं तो इसके परिणामस्वरूप अलग-अलग दुनिया के समूह बन सकते हैं, जिससे डिजिटल नागरिकों को इस चयन के लिये विवश होना पड़ेगा कि वे अपना अधिकांश समय कहाँ बिताते हैं।
    • दूसरी ओर मेटावर्स में घनिष्ठ रूप से परस्पर संबद्ध दुनिया का एक समूह शामिल हो सकता है, जिनमें से कुछ पूरी तरह से अपने उपयोगकर्त्ताओं द्वारा नियंत्रित होते हैं।
    • यह एक ऐसा स्थान होगा जहाँ लोग अपने व्यक्तिगत डेटा, डिजिटल गुड्स और पसंदीदा सेवाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते समय अपने साथ ले जा सकते हैं।
  • मेटावर्स में सुरक्षा सुनिश्चित करना: अग्निशामक जैसी सुरक्षा सुविधाओं को ढूँढना आसान बनाकर और व्यवहार की निगरानी के लिये स्वयंसेवकों को तैनात कर मेटावर्स को और अधिक सुरक्षित बनाया जाना चाहिये।
    • संभावित आपराधिक व्यवहार के बारे में आगंतुकों को शिक्षित करने से भी उत्पीड़न को कम करने में मदद मिलेगी।
    • चूँकि पुलिस पहले से ही सोशल-मीडिया मामलों और ऑफलाइन दुनिया के मामलों के कार्य-बोझ में दबी हुई है, तकनीकी फर्मों को समय रहते मेटावर्स में उत्पीड़न को संबोधित करने हेतु अधिक कारगर समाधानों का प्रयास करना चाहिये।
    • आभासी वास्तविकता की विकास प्रक्रिया में महिलाओं की कमी निश्चित रूप से सहयोगी नहीं है और इस समस्या को दूर करने की आवश्यकता है।
  • मेटावर्स में भारत की भूमिका: सॉफ्टवेयर एवं सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के उत्पादन एवं निर्यात में भारत की दक्षता देश को मेटावर्स की आने वाली दुनिया में एक अनूठा लाभ प्रदान करेगी, जहाँ हमारा डिजिटल व्यक्तित्व भी हमारे भौतिक व्यक्तित्व की ही तरह महत्त्वपूर्ण होगा।
    • इस प्रकार डिजिटल इंडिया और इसके अंतर्गत आने वाले घटक (जैसे आधार, डिजिटल स्वास्थ्य आईडी और डिजिटल भुगतान प्रणाली) उस आरंभिक अवसंरचना का निर्माण करते हैं जो डिजिटल अर्थव्यवस्था और मेटावर्स की ओर आगे बढ़ने के लिये आवश्यक है।

अभ्यास प्रश्न: मेटावर्स की आभासी दुनिया में प्रवेश से प्राप्त अवसरों की चर्चा कीजिये और मेटावर्स से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डालिये।

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