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विविध

जुलाई 2021

  • 04 Sep 2021
  • 27 min read

PRS के प्रमुख हाइलाइट्स

  • संसद
    • संसद का मानसून सत्र 2021 
  • कोविड-19
    • आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली
  • समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास
    • अप्रैल-जून तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति
  • वित्त
    • अनुपूरक बजट  
    • फैक्टरिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2021
    • दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2021
    • जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (संशोधन) विधेयक, 2021
    • सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021
    • सीमित देयता भागीदारी (संशोधन) विधेयक, 2021
    • रिटेल डायरेक्ट योजना
  • परिवहन
    • सामुद्रिक सहायता विधेयक 2021
    • भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (AERA) संशोधन विधेयक, 2021 
    • अंतर्देशीय पोत विधेयक, 2021
    • भारतीय पोत परिवहन (Shipping) कंपनियों हेतु सब्सिडी योजना 
  • महिला एवं बाल विकास
    • किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021
  • कृषि
    • नारियल विकास बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2021 
    •  पशुधन क्षेत्र पैकेज
  • रक्षा
    • आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक, 2021
  • पर्यावरण
    • वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग 
  • विधि एवं न्याय
    • अधिकरण सुधार अध्यादेश, 2021 
    • 97वें संशोधन के प्रावधान रद्द
    • न्यायपालिका के लिये अवसंरचनात्मक सुविधाएँ
  • MSME
    • खुदरा और थोक व्यापार
  • शिक्षा
    • OBC और EWS के लिये आरक्षण 
    • सार्वभौमिक आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता हासिल करने हेतु राष्ट्रीय मिशन
    • अकादमिक बैंक के लिये विनियम
  • नवीन और अक्षय ऊर्जा
    • भारत में अक्षय ऊर्जा एकीकरण पर नीति आयोग की रिपोर्ट 

संसद

संसद का मानसून सत्र 2021 

19 जुलाई, 2021 से संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ। सत्र के दौरान 19 दिन बैठकें होंगी और यह 13 अगस्त, 2021 को समाप्त होगा। 

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कोविड-19

आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोविड-19 आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को बढ़ावा देने हेतु पैकेज के दूसरे चरण की घोषणा की है। पहले चरण की योजना की घोषणा मार्च 2020 में की गई थी। योजना के दूसरे चरण का उद्देश्य बाल चिकित्सा देखभाल पर ध्यान देने के साथ-साथ कोविड-19 की शीघ्र पहचान, रोकथाम और प्रबंधन के लिये स्वास्थ्य प्रणाली की तैयारी में तेज़ी लाना है। 

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समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

अप्रैल-जून तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति 

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index- CPI) मुद्रास्फीति अप्रैल 2021 के 4.2% से बढ़कर जून 2021 (वर्ष-दर-वर्ष) में 6.3% हो गई। CPI खुदरा स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को मापता है। CPI बास्केट में आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएँ जैसे- खाद्य पदार्थ, ईंधन, कपड़े, आवास और स्वास्थ्य सेवाएँ शामिल होती हैं। CPI बास्केट में खाद्य और पेय पदार्थों की हिस्सेदारी 46% है। खाद्य मुद्रास्फीति अप्रैल 2021 के 1.9% से बढ़कर जून 2021 में 5.2% हो गई।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) मुद्रास्फीति अप्रैल 2021 के 10.7% से बढ़कर जून 2021 (वर्ष-दर-वर्ष) में 12.1% हो गई। WPI लेनदेन के प्रारंभिक चरण में थोक बिक्री के लिये वस्तुओं की कीमतों में होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है।


वित्त

अनुपूरक बजट 

वर्ष 2021-22 के लिये पहली अनुपूरक अनुदान मांगों (DFG) को लोकसभा में पारित कर दिया गया। अनुपूरक DFG में 23,675 करोड़ रुपए की नकद राशि में वृद्धि का प्रस्ताव है जिसमें वर्ष 2021-22 के बजट अनुमान (34,83,236 करोड़ रुपए) की तुलना में व्यय में 0.7% की वृद्धि है। यह अतिरिक्त राशि विभिन्न क्षेत्रों में खर्च की जाएगी। इन क्षेत्रों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कोविड-19: कोविड-19 आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य प्रणाली पैकेज पर 15,750 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। पैकेज का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की आपातकालीन तैयारियों को मज़बूत करना है। इस धनराशि का उपयोग वेतन, अस्पतालों एवं चिकित्सा संस्थानों को अनुदान, चिकित्सा आपूर्ति, उपकरण और अन्य सुविधाओं की खरीद के लिये किया जाएगा। कुल राशि में से 12,207 करोड़ रुपए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अनुदान के रूप में दिये जाएंगे। पैकेज के अतिरिक्त महामारी की आपातकालीन तैयारियों और प्रतिक्रिया में होने वाले खर्च को पूरा करने हेतु भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) को 526 करोड़ रुपए प्रदान किये जाएंगे। 
  • बीमा: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के अंतर्गत कोविड-19 का इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को बीमा कवर (प्रति व्यक्ति 50 लाख रुपए तक) प्रदान करने में 714 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। 
  • एयर इंडिया को ऋण: एयर इंडिया को ऋण के रूप में 1,872 करोड़ रुपए दिये जाएंगे (आकस्मिक निधि से एयर इंडिया को प्रदान किये गए ऋणों और अग्रिमों के पुनर्भुगतान के माध्यम से)।
  • ब्याज से छूट: वर्ष 2020-21 में ऋण अधिस्थगन अवधि के दौरान उधारकर्त्ताओं के बकाया चक्रवृद्धि ब्याज (यानी, ब्याज पर ब्याज) की छूट के लिये 1,750 करोड़ रुपए खर्च किये जाने का अनुमान है।

अनुपूरक DFG में 23,675 करोड़ रुपए के वृद्धिशील नकद व्यय के अतिरिक्त 1,63,527 करोड़ रुपए के सकल व्यय को भी मंज़ूरी दी गई थी। इस सकल व्यय के लिये समेकित निधि से किसी अतिरिक्त नकद व्यय की आवश्यकता नहीं होती है और इसे सरकार द्वारा अपनी बचत या बढ़े हुए राजस्व तथा वसूली के माध्यम से पूरा किया जाएगा। सकल व्यय के 97% (यानी, 1,59,000 करोड़ रुपए) का उपयोग वर्ष 2021-22 के लिये GST क्षतिपूर्ति अनुदान के बदले राज्यों को बैक-टू-बैक ऋण प्रदान करने हेतु किया जाएगा। राज्यों को ऋण इसलिये प्रदान किया जा रहा है क्योंकि GST क्षतिपूर्ति उपकर संग्रह राज्यों की मुआवज़े की आवश्यकता को पूरा करने के लिये अपर्याप्त होगा।

फैक्टरिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2021 

फैक्टरिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2021 को संसद में पारित कर दिया गया। ipppppatwइसे सितंबर 2020 में लोकसभा में पेश किया गया था। यह विधेयक ‘फैक्टरिंग विनियमन अधिनियम, 2011’ में संशोधन करने का प्रयास करता है ताकि उन संस्थाओं के दायरे को बढ़ाया जा सके जो फैक्टरिंग व्यवसाय में संलग्न हो सकते हैं।

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दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2021

दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन विधेयक), 2021 को लोकसभा में पारित कर दिया गया। यह विधेयक दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 में संशोधन करता है। 

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जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (संशोधन) विधेयक, 2021

जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (संशोधन) विधेयक [Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (Amendment) Bill] 2021 को राज्यसभा में पेश किया गया है। विधेयक जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम अधिनियम, 1961 में संशोधन करता है। 

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सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021

सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021 को लोकसभा में पेश किया गया। विधेयक सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 में संशोधन करता है।

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सीमित देयता भागीदारी (संशोधन) विधेयक, 2021

सीमित देयता भागीदारी (संशोधन) विधेयक, 2021 को राज्यसभा में पेश किया गया।  विधेयक सीमित देयता भागीदारी अधिनियम 2008 में संशोधन करता है। अधिनियम  सीमित देयता भागीदारी ((Limited Liability Partnership) के रेगुलेशन का प्रावधान करता है। 

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रीटेल डायरेक्ट योजना

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ‘आरबीआई रिटेल डायरेक्ट’ योजना की घोषणा की है। यह व्यक्तिगत निवेशकों के लिये सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की सुविधा को आसान बनाने हेतु वन-स्टॉप समाधान है।

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परिवहन

सामुद्रिक सहायता विधेयक 2021

नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता विधेयक 2021 को राज्यसभा में पारित कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि लोकसभा ने इस विधेयक को मार्च 2021 में पारित कर दिया था। 

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भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (AERA) संशोधन विधेयक, 2021 

भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (AERA) संशोधन विधेयक, 2021 को लोकसभा में पारित कर दिया गया। यह विधेयक, भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 में संशोधन प्रस्तावित करता है।

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अंतर्देशीय पोत विधेयक, 2021

अंतर्देशीय पोत विधेयक (Inland Vessels Bill), 2021 को लोकसभा में पेश किया गया।  यह अंतर्देशीय पोत अधिनियम, 1917 का स्थान लेता है।

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भारतीय पोत परिवहन (Shipping) कंपनियों हेतु सब्सिडी योजना 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय पोत परिवहन (Shipping) कंपनियों को सब्सिडी प्रदान करने वाली एक योजना को मंज़ूरी दी है। 

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महिला एवं बाल विकास

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 को राज्यसभा में पारित कर दिया गया। यह विधेयक किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 में संशोधन करता है। 

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कृषि

नारियल विकास बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2021 

राज्यसभा में नारियल विकास बोर्ड (संशोधन) विधेयक [Coconut Development Board (Amendment) Bill], 2021 को पेश किया गया। विधेयक नारियल विकास बोर्ड अधिनियम, 1979 में संशोधन करता है। इस अधिनियम के अंतर्गत नारियल उद्योग के विकास के लिये नारियल विकास बोर्ड की स्थापना की गई है। यह विधेयक बोर्ड के संयोजन में संशोधन करने का प्रयास करता है ताकि उसके प्रबंधन और प्रशासन में सुधार किया जा सके। विधेयक की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बोर्ड का कामकाज: अधिनियम के अंतर्गत बोर्ड भारत में नारियल और उसके उत्पादों की मार्केटिंग में सुधार हेतु उपायों का सुझाव दे सकता है। विधेयक इस प्रावधान में यह और जोड़ता है कि बोर्ड भारत के बाहर भी नारियल एवं नारियल उत्पादों की मार्केटिंग हेतु सुझाव दे सकता है। 
  • अधिनियम में बोर्ड को इस बात की अनुमति दी गई है कि वह केंद्र एवं राज्य सरकारों की सलाह से उपयुक्त योजनाओं को वित्तपोषित कर सकता है जिससे नारियल का उत्पादन बढ़े और उसकी क्वालिटी में सुधार हो। यह उन क्षेत्रों पर लागू होता है जहाँ नारियल बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं। विधेयक इस प्रावधान में संशोधन करता है और इस वित्तपोषण का दायरा नारियल उत्पादन करने वाले सभी राज्यों तक बढ़ाता है। 
  • प्रबंधन में परिवर्तन: अधिनियम के अंतर्गत केंद्र सरकार बोर्ड के चेयरमैन को नियुक्त करती है और चेयरमैन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के तौर पर भी कार्य करता है। विधेयक इस पद को दो हिस्सों में बाँटता है- नॉन-एक्ज़ीक्यूटिव चेयरमैन और CEO। 

पशुधन क्षेत्र पैकेज

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विशेष पशुधन क्षेत्र पैकेज के अंतर्गत वर्ष 2025-26 तक पशुपालन और डेयरी से संबंधित विभिन्न योजनाओं को जारी रखने को मंज़ूरी दी।

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रक्षा

आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक, 2021 

लोकसभा में आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक, 2021 पेश किया गया। यह विधेयक जून 2021 को जारी किये गए एक अध्यादेश का स्थान लेता है। 

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पर्यावरण

वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग 

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग विधेयक, 2021 को लोकसभा में पेश किया है। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और उसके आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं के बेहतर समन्वय, अनुसंधान, पहचान और समाधान के लिये एक आयोग के गठन का प्रावधान करता है। 

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विधि एवं न्याय

अधिकरण सुधार अध्यादेश, 2021 

सर्वोच्च न्यायालय ने अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण और सेवा शर्तें) अध्यादेश [Tribunal Reforms (Rationalisation and Conditions of Service) Ordinance], 2021 के विभिन्न पहलुओं पर फैसला दिया है। अध्यादेश को अप्रैल 2021 में जारी किया गया था ताकि नौ ट्रिब्यूनल्स को भंग किया जा सके और उनके कार्यों को दूसरे मौजूदा न्यायिक निकायों (उच्च न्यायालय) को हस्तांतरित किया जा सके। 

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97वें संशोधन के प्रावधान रद्द

सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय के वर्ष 2013 के फैसले को बरकरार रखते हुए संविधान (97वाँ संशोधन) अधिनियम, 2011 के कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया है।

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न्यायपालिका के लिये अवसंरचनात्मक सुविधाएँ

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने न्यायपालिका हेतु बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिये केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) को आगामी पाँच वर्षों यानी वर्ष 2026 तक जारी रखने की मंज़ूरी दे दी है।

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MSME

खुदरा और थोक व्यापार 

खुदरा और थोक व्यापार गतिविधियों को MSME विकास अधिनियम, 2006 के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के रूप में वर्गीकरण के लिये पात्र गतिविधियों की सूची में वापस शामिल किया गया है। जून 2017 में इन गतिविधियों को इस सूची से बाहर कर दिया गया था। उद्यमों को वार्षिक कारोबार के समग्र मानदंड और संयंत्रों, मशीनरी या उपकरण में निवेश के आधार पर MSME के रूप में वर्गीकृत किया गया है।  

MSME मंत्रालय ने अधिसूचित किया कि खुदरा और थोक व्यापार MSME का लाभ केवल प्रायोरिटी सेक्टर लेडिंग तक ही सीमित रहेगा। प्रायोरिटी सेक्टर लेडिंग के अंतर्गत बैंकों (और कम-से-कम 20 शाखाओं वाले विदेशी बैंकों) को कृषि और MSME जैसे कुछ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को शुद्ध बैंक ऋण का 40% हिस्सा ऋण के रूप में देना आवश्यक है। सामान्य तौर पर MSME को ऋण पर ब्याज़ सब्सिडी, क्रेडिट गारंटी, प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिये पूंजी सब्सिडी, बाज़ार विकास सहायता और विलंबित भुगतान से संरक्षण जैसे लाभ प्राप्त होते हैं।


शिक्षा

OBC और EWS के लिये आरक्षण 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2021-22 से अखिल भारतीय कोटा योजना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिये 27% आरक्षण और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लिये 10% आरक्षण को मंज़ूरी दी।

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सार्वभौमिक आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता हासिल करने हेतु राष्ट्रीय मिशन

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य वर्ष 2025 तक प्राथमिक विद्यालयों में सार्वभौमिक आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता हासिल करना है। इसका तात्पर्य यह है कि कक्षा 3 तक प्रत्येक बच्चे को कॉम्प्रिहेंशन के साथ पढ़ने, लिखने, बुनियादी गणितीय क्रियाकलाप और बुनियादी जीवन कौशल सीखने में सक्षम होना चाहिये। 

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अकादमिक बैंक के लिये विनियम 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा में अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स की स्थापना और संचालन) विनियम, 2021 को अधिसूचित किया। विनियम एक अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स की स्थापना करता है जो सभी पंजीकृत उच्च शैक्षणिक संस्थानों (HEI) से विद्यार्थियों के एकैडमिक क्रेडिट का संग्रहण करने वाली एक ऑनलाइन इकाई होगी। यह एक क्रेडिट ट्रांसफर मैकैनिज्म को एनेबल करेगा जिसमें विद्यार्थी उनकी पसंद के समय, स्थान और सीखने के स्तर के अनुसार अपनी उच्च शैक्षिक डिग्री को प्राप्त कर सकेंगे। उल्लेखनीय है राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में ABC की स्थापना का प्रस्ताव किया गया था। एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • वैधता: पंजीकृत HEI में पाठ्यक्रम शुरू करने से प्राप्त क्रेडिट शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट सेवाओं का लाभ उठाने के लिये पात्र होंगे। विद्यार्थियों द्वारा अर्जित क्रेडिट क्रेडिटिंग के बाद यह अधिकतम सात वर्षों तक वैध रहेगा। एक बार क्रेडिट का उपयोग हो जाने के बाद उन्हें विद्यार्थी के खाते से डेबिट कर दिया जाएगा।
  • ABC की उपलब्धता: एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट निम्नलिखित के लिये उपलब्ध होगा: 
    (i) स्वयम और निप्टेल जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या किसी निर्दिष्ट विश्वविद्यालय में पूर्ण किये गए पाठ्यक्रम। 
    (ii) थ्योरी, प्रैक्टिकल और दक्षता आधारित क्रेडिट कोर्स, अगर अलग-अलग प्रस्तुत किये जाते हैं। 
    (iii) कॉन्टैक्ट, नॉन-कॉन्टैक्ट और फ्यूचरिस्टिक लर्निंग मोड्स सहित सभी लर्निंग मोड्स।
  • मान्यता: रेगुलेशंस एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट को विद्यार्थी द्वारा चुने गए सभी पाठ्यक्रमों के लिये क्रेडिट मान्यता और क्रेडिट रीडंप्शन देना अनिवार्य करते हैं। चुने गए पाठ्यक्रमों का किसी विशेष विषय के अंतर्गत होना ज़रूरी नहीं है। रेगुलेशंस में कहा गया है कि ABC के साथ अर्जित और जमा किये गए क्रेडिट का उपयोग संबंधित शिक्षा स्तर (प्रमाण पत्र, डिप्लोमा, डिग्री या स्नातकोत्तर डिप्लोमा) के रीडंप्शन के लिये किया जा सकता है।

नवीन और अक्षय ऊर्जा

भारत में अक्षय ऊर्जा एकीकरण पर नीति आयोग की रिपोर्ट 

नीति आयोग ने ‘भारत में रिन्यूएबल्स इंटिग्रेशन’ पर रिपोर्ट जारी की। रिन्यूएबल्स इंटिग्रेशन का अर्थ होता है, मेनस्ट्रीम पावर सिस्टम में अक्षय ऊर्जा के उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण को शामिल करना। रिपोर्ट अक्षय ऊर्जा क्षमता के बढ़ते हिस्से को एकीकृत करने के तरीकों का सुझाव देती है। रिपोर्ट में गौर किया गया है कि भारत में सोलर और विंड एनर्जी 2030 अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी (लक्ष्य 450 गीगावाट)। मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • अक्षय ऊर्जा एकीकरण की चुनौतियाँ: रिपोर्ट में भारत के राज्यों में अक्षय ऊर्जा एकीकरण को हासिल करने में निम्नलिखित मुख्य चुनौतियों को प्रस्तुत किया गया है: 
    (i) राज्यों के कुछ क्षेत्रों या कुछ राज्यों में सौर पवन ऊर्जा वाले स्थलों के केंद्रित होने के कारण सीमित अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन लाइन्स।
    (ii) नए मांग स्रोतों (जैसे एयर कंडीशनर और इलेक्ट्रिक वाहन) से चरम मांग में वृद्धि। 
    (iii) क्षेत्रीय स्तरों पर आवृत्ति और वोल्टेज स्तरों में बढ़ता उतार-चढ़ाव।
  • पावर सिस्टम फ्लेक्सिबिलिटी: रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि राज्य को पावर सिस्टम में फ्लेक्सिबिलिटी लाने के लिये सभी संभावित स्रोतों का फायदा उठाना चाहिये। उसका सिस्टम भी इतना कुशल होना चाहिये कि बिजली की मांग और आपूर्ति में बदलाव होने पर उत्पादन या खपत में बदलाव किया जा सके। फ्लेक्सिबिलिटी को सुनिश्चित करने के लिये रिपोर्ट में मुख्य विकल्पों का सुझाव दिया गया है: (i) बैटरी स्टोरेज, (ii) स्मार्ट मीटर्स, (iii) मांग का पूर्वानुमान लगाने वाले उपकरण (iv) अंतर-क्षेत्रीय ट्रांसफर और सीमा-पारीय ट्रांसमिशन लाइनें। इसके अलावा रिपोर्ट देश में बढ़ती अक्षय ऊर्जा और लचीलेपन के समाधान की भूमिका के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिये एक क्षेत्रीय स्तर मॉडल और एक राज्य स्तरीय मॉडल प्रदान करती है।
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