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विविध

जून 2021

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  • 06 Jul 2021
  • 23 min read

PRS के प्रमुख हाइलाइट्स

  • समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास
    • वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में चालू खाता घाटा 
    • रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट 
  • वित्त
    • रेगुलेटरी प्रावधानो में संशोधन
  • विदेशी मामले
    • ड्राफ्ट उत्प्रवास बिल, 2021 
  • कृषि
    • वर्ष 2021-22 में खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन 
  • रक्षा
    • आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश, 2021 
    • युद्ध इतिहास अभिलेखागार का  पुनर्वगीकरण 
  • बिजली
    • बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) (संशोधन) नियम, 2021 
  • शिक्षा
    • शिक्षक पात्रता परीक्षा योग्यता सर्टिफिकेट की वैधता सीमा 
    • विकलांग बच्चों के लिये ई-कंटेंट विकसित करने हेतु दिशानिर्देश 
  • पर्यटन
    • सतत्, ग्रामीण, मेडिकल और बिज़नेस पर्यटन हेतु ड्राफ्ट राष्ट्रीय रणनीति और रोडमैप 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में चालू खाता घाटा 

  • वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में भारत के चालू खाता संतुलन (Current Account Balance-CAB) में 8.1 बिलियन अमेरिकी डाॅलर (जीडीपी का 1%) की कमी दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2019-20 में इसी अवधि के दौरान 0.6 बिलियन अमेरिकी डाॅलर का अधिशेष (जीडीपी का 0.1%) दर्ज किया गया था।
  • वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में CAB में घाटा मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से हुआ था: 
    (i) उच्च व्यापार घाटा (देश के निर्यात और आयात का अंतर)
    (ii) वर्ष 2019-20 में इसी अवधि की तुलना में निम्न शुद्ध अदृश्य प्राप्तियांँ। 46  अदृश्य प्राप्तियों में ट्रेड इन सेवाओं (जैसे सॉफ्टवेयर और यात्रा सेवाएंँ) और निजी हस्तांतरणों, जैसे- विदेशों में नियुक्त भारतीयों के प्रेषणों से मिलने वाली प्राप्तियांँ शामिल हैं।
  • वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार 3.4 बिलियन अमेरिकी डाॅलर बढ़ गया। जबकि वर्ष 019-20 की चौथी तिमाही में 18.8 बिलियन अमेरिकी डाॅलर की वृद्धि हुई थी।

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट 

मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee-MPC) ने वर्ष 2021-22 का दूसरा द्विमासिक मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य जारी किया। इसके मुख्य निर्णयों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को ऋण देता है) 4% की दर पर बरकरार है। 
  • रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों से उधार लेता है) 3.35% पर अपरिवर्तनीय है।
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) 4.25% पर अपरिवर्तनीय है।

वित्त

रेगुलेटरी प्रावधानो में संशोधन

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India-SEBI) ने सेबी (लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस और डिस्क्लोज़र की शर्ते) रेगुलेशंस, 2015 में संशोधनों को मंज़ूरी दी। मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • स्वतंत्र निदेशकों  के तौर पर नियुक्ति की पात्रता: नियुक्ति हेतु वर्ष  2015 के रेगुलेशंस प्रमोटर ग्रुप कंपनी के कर्मचारियों हेतु दो वर्ष की कूलिंग अवधि निर्दिष्ट करते थे जिसे वर्ष 2021 के रेगुलेशंस में इसे तीन वर्ष कर दिया गया है।  
  • स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति/पुनर्नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया: वर्ष 2015 के रेगुलेशंस में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति, पुनर्नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया नहीं दी गई थी। वर्ष 2021 के संशोधनों में निर्दिष्ट किया गया है कि सभी लिस्टेड एंटिटीज़ के शेयरधारकों के विशेष प्रस्ताव के ज़रिये स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति, पुनर्नियुक्ति और हटाने का कार्य किया जाएगा।
  • संबंधित पक्ष के लेन-देन को मंज़ूरी: वर्ष 2015 के रेगुलेशंस में यह प्रावधान है कि संबंधित पक्ष के लेन-देन को पहले ऑडिट कमेंटी की अनिवार्य मंज़ूरी लेनी होगी। वर्ष 2021 के रेगुलेशंस में कहा गया है कि ऑडिट कमेंटी को सिर्फ स्वतंत्र निदेशकों की पूर्व मंज़ूरी लेना आवश्यक होगा।  

विदेशी मामले

ड्राफ्ट उत्प्रवास बिल, 2021 

विदेशी मामलों के मंत्रालय ने ड्राफ्ट उत्प्रवास (एमिग्रेशन) बिल, 2021 जारी किया है। यह भारतीय नागरिकों के विदेशी रोज़गार को नियंत्रित करने और भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा एवं कल्याण को बढ़ावा देने हेतु रेगुलेटरी व्यवस्था का प्रावधान करता है। ड्राफ्ट बिल प्रवासियों को ऐसे भारतीय नागरिकों के रूप में स्पष्ट करता है जो रोज़गार हेतु भारत से बाहर जाना चाहते हैं, या जा चुके हैं। ड्राफ्ट बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अथॉरिटीज़: ड्राफ्ट बिल दो अथॉरिटीज़ बनाने का प्रयास करता है: पहली ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन पॉलिसी एंड प्लानिंग (BEPP) और दूसरी ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन एडमिनिस्ट्रेशन (BEA)। 
    • पहली में एक चीफ ऑफ इमिग्रेशन पॉलिसी और अन्य अधिकारी होंगे। उसके कार्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: 
      (i) प्रवासियों के कल्याण से संबंधित मामलों में नीतियांँ बनाना।
      (ii) गंतव्य देशों के साथ श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा समझौतों पर बातचीत करना। 
    • दूसरी अथॉरिटीज़ में मुख्य एमिग्रेशन अधिकारी और अन्य अधिकारी शामिल होंगे जिनके कार्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: 
      (i) भारतीय प्रवासियों के डेटाबेस बनाना।  
      (ii) प्रवासियों के कल्याण के उपायों और कार्यक्रमों को लागू करना। 
    • ड्राफ्ट बिल राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नोडल कमेटीज़ बनाने का भी प्रावधान करता है। उसके कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं:
      (i) लोगों की तस्करी में शामिल इकाइयों को सज़ा दिलाने हेतु पहल करना।
      (ii) संभावित प्रवासियों हेतु यात्रा से पहले ओरिएंटेशन कार्यक्रम और दक्षता उन्नयन कार्यक्रम चलाना।

कृषि

वर्ष 2021-22 में खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2021-22 के लिये खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मंज़ूरी दी। धान (सामान्य) के लिये MSP 1,940 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष  के MSP (1,868 रुपए प्रति क्विंटल) की तुलना में 3.9% अधिक है। 

तालिका 1: वर्ष 2021-22 के लिये खरीफ फसलों का MSP (रुपए प्रति क्विंटल में)

फसल वर्ष 2020-21 वर्ष 2021-22 परिवर्तन (%)
धान (सामान्य) 1,868 1,940 3.9%
धान (ग्रेड ए)
1,888 1,960  3.8%
ज्वार (हाइब्रिड) 2,620 2,738 4.5%
ज्वार (मलडंडी) 2,640   2,758 4.5%
बाजरा  2,150 2,250  4.7%
रागी 3,295 3,377 2.5%
मक्का 1,850 1,870 1.1%
अरहर (तुअर) 6,000 6,300  5.0%
मूंँग 7,196  7,275 1.1%
उड़द 6,000 6,300 5.0%
मूंँगफली  5,275 5,550 5.2%
सोयाबीन (पीली) 3,880 3,950 1.8%
तिल
6,855 7,307   6.6%
रामतिल
6,695 6,930 3.5%
कपास (मध्यम रेशा) 5,515  5,726 3.8%
कपास (लंबा रेशा) 5,825 6,025  3.4%

रक्षा

आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश, 2021 

आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश, 2021 को जारी किया गया है। अध्यादेश केंद्र सरकार को आवश्यक रक्षा सेवाओं में संलग्न इकाइयों में हड़ताल, तालाबंदी और छंँटनी को प्रतिबंधित करने की अनुमति देता है। अध्यादेश की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आवश्यक रक्षा सेवाएंँ: आवश्यक रक्षा सेवाओं में निम्नलिखित में संचालित होने वाली कोई भी सेवा शामिल है: 
    (i) रक्षा संबंधी उद्देश्यों के लिये ज़रूरी वस्तुओं या उपकरणों के उत्पादन का काम करने वाला कोई इस्टैबलिशमेंट या उपक्रम, या 
    (ii) सशस्त्र बलों या रक्षा से जुड़ा इस्टैबलिशमेंट। इनमें ऐसी सेवाएंँ भी शामिल हैं, जो अगर रुक जाए तो ऐसी सेवाओं से संलग्न इस्टैबलिशमेंट या उनके कर्मचारियों की सुरक्षा पर असर पड़ेगा।  
  • हड़तालें: अध्यादेश के अंतर्गत हड़ताल का अर्थ है, एक साथ काम करने वाले लोगों के निकाय द्वारा काम रोकना। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं: 
    (i) सामूहिक रूप से कैज़ुअल लीव लेना।
    (ii) कितनी भी संख्या में लोगों को काम पर रखने या रोज़गार में संयोजित करने से इनकार करना।
    (iii) ओवरटाइम से इनकार करना, अगर वह कार्य आवश्यक रक्षा सेवाओं के रखरखाव के लिये ज़रूरी है।
    (iv) ऐसा कोई भी अन्य आचरण जिससे आवश्यक रक्षा सेवाओं में रुकावट आती है, या आने की आशंका है।
  • हड़तालों, तालाबंदी और छटनी पर प्रतिबंध: अध्यादेश के अंतर्गत केंद्र सरकार आवश्यक रक्षा सेवाओं में संलग्न इकाइयों में हड़तालों, तालाबंदी और छंटनियों पर प्रतिबंध लगा सकती है। सरकार निम्नलिखित के हित के लिये ज़रूरी होने पर ऐसे आदेश दे सकती है: 
    (i) भारत की संप्रभुता और एकता।
    (ii) किसी राज्य की सुरक्षा।
    (iii) सार्वजनिक व्यवस्था।
    (iv) जनता।
    (v) शालीनता।
    (vi) नैतिकता। प्रतिबंध के आदेश छह महीने तक लागू रह सकते हैं और छह महीने के लिये बढ़ाए जा सकते हैं।

युद्ध इतिहास अभिलेखागार का पुनर्वगीकरण 

  • रक्षा मंत्रालय ने युद्ध/अभियान इतिहास के अभिलेखन, पुनवर्गीकरण और संकलन पर नीति को मंज़ूरी दी है। नीति का उद्देश्य निम्नलिखित के लिये युद्ध इतिहास को उचित समय पर प्रकाशित करना है: 
    (i) घटनाओं का सटीक लेखा-जोखा देना और निराधार अफवाहों से निपटना।
    (ii) आकदमिक शोध और विश्लेषण के लिये विश्वसनीय सामग्री प्रदान करना।
  • नीति के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले सभी संगठन युद्ध डायरी, कार्यवाही पत्र और ऑपरेशनल रिकॉर्ड बुक्स सहित अपने सभी रिकॉर्ड्स को उसके इतिहास विभाग को हस्तांतरित कर देंगे ताकि इतिहास का उचित रखरखाव, अभिलेखन और लेखन किया जा सके। युद्ध/अभियान के पूरा होने के दो वर्ष के भीतर उसके इतिहास को संकलित करने के लिए कमेंटी बनाई जाएगी जिसकी अध्यक्षता मंत्रालय के संयुक्त सचिव द्वारा की जाएगी।
  •  इसमें सेवाओं, गृह और विदेशी मामलों के मंत्रालय तथा अन्य संबंधित संगठनों के प्रतिनिधि एवं अगर ज़रूरी हुआ, तो प्रमुख सैन्य इतिहास शामिल होंगे।
  • रिकॉर्ड्स का संकलन तीन वर्षों के भीतर पूरा हो जाना चाहिये। 
  • पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट 1993 के अनुसार, रिकॉर्ड्स के पुनर्वगीकरण की ज़िम्मेदारी संबंधित संगठनों की होगी। 
  • नीति के अनुसार, रिकॉर्ड्स को सामान्यतया 25 वर्षों में पुनर्वगीकृत किया जाना चाहिये। 

बिजली

बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) (संशोधन) नियम, 2021 

बिजली मंत्रालय ने बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) संशोधन नियम, 2021 को अधिसूचित किया है। ये नियम बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 में सोलर रूफ टॉप सिस्टम्स के प्रोज़्यूमर्स से संबंधित कुछ प्रावधानों में संशोधन करते हैं। मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • प्रोज़्यूमर्स की मीटरिंग: वर्ष 2020 के नियम निर्दिष्ट करते हैं कि ग्रिड इंटरैक्टिव रूफटॉप सोलर फोटोवॉलटेइक सिस्टम और संबंधित मामलों पर रेगुलेशंस में निम्नलिखित प्रावधान होने चाहिये:
    (i) 10 kW तक के लोड्स की नेट मीटरिंग।
    (ii) 10 kW से अधिक के लोड्स की ग्रॉस मीटरिंग।
  • वर्ष 2021 के नियम निर्दिष्ट करते हैं कि राज्य बिजली रेगुलेटरी आयोगों को नेट मीटरिंग/ग्रॉस मीटरिंग/नेट बिलिंग/नेट फीड-इन पर रेगुलेशंस जारी करना चाहिये। अगर रेगुलेशंस नेट मीटरिंग/ग्रॉस मीटरिंग/नेट बिलिंग/नेट फीड-इन का प्रावधान नहीं करेंगे तो राज्य सरकार निम्नलिखित की अनुमति दे सकती है: 
    (i) 500 kilowatt (kW) या स्वीकृत लोड तक, जो भी कम हो, पर प्रोज़्यूमर्स को नेट मीटरिंग।
    (ii) अन्य लोड्स के लिये नेट बिलिंग या नेट-फीड।
  • इसके अतिरिक्त राज्य आयोग नेट बिलिंग का लाभ उठाने की बजाय पूरी सोलर एनर्जी वितरण लाइसेंसी को बेचने के इच्छुक प्रोज़्यूमर्स को ग्रॉस मीटरिंग की अनुमति दे सकते हैं।  
  • बिजली की खपत या बिल की गई राशि का समायोजन: वर्ष 2021 के नियम निर्दिष्ट करते हैं कि प्रोज्यूमर द्वारा उत्पादित बिजली को बिजली की खपत या बिल की गई राशि के साथ समायोजित किया जाएगा। इसे ग्रिड इंटरैएक्टिव रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिये राज्य बिजली रेगुलेटरी आयोग द्वारा अधिसूचित किया जाएगा।

शिक्षा

शिक्षक पात्रता परीक्षा योग्यता सर्टिफिकेट की वैधता सीमा 

  • शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षक पात्रता परीक्षा योग्यता सर्टिफिकेट की वैधता सात वर्ष से बढ़ाकर आजीवन कर दी है।
  • यह नियम 2011 से लागू होगा। 
  • शिक्षक पात्रता परीक्षा किसी व्यक्ति के लिये वह अनिवार्य योग्यता है जिसके आधार पर वह स्कूल में शिक्षक की नियुक्ति हेतु पात्र होता है। 

विकलांग बच्चों हेतु  ई-कंटेंट विकसित करने हेतु दिशा-निर्देश 

 शिक्षा मंत्रालय ने विकलांग बच्चों (सीडब्ल्यूडीज़) के लिये ई-कंटेंट के विकास हेतु दिशा-निर्देशों को जारी किया।  दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विकलांग बच्चों की डिजिटल शिक्षा के लिये उच्च क्वालिटी के कंटेंट का विकास करना है। दिशा-निर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बौद्धिक विकार वाले विद्यार्थी: इन विद्यार्थियों की लर्निंग विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 
    (i) औसत क्षमता से कम समझ। 
    (ii) बार-बार निर्देश देने की रूरत।
    • इन विद्यार्थियों के ई-कंटेंट में बार-बार मेमोरी चेक्स और सीखी गई दक्षता की प्रैक्टिस और लागू करने के मौके शामिल होने चाहिये। उन्हें मौखिक साधनों की बजाय दूसरे तरीकों से खुद को अभिव्यक्त करने के मौके दिये जाने चाहिये (जैसे विद्यार्थियों को वीडियो दिखाकर उत्तर की तरफ इशारा करने को कहना)।
    •  मूल्यांकन प्रक्रिया में विद्यार्थी की प्रोफाइल और ज़रूरत के हिसाब से संशोधन किया जाना चाहिये। 
  • कई प्रकार की विकलांगताओं वाले विद्यार्थी: इसमें दो या उससे अधिक विकलांगता वाले विद्यार्थी शामिल हैं। उन्हें रोजमर्रा के काम के लिये असिस्टिव डिवाइस (जैसे व्हीलचेयर, विज़न और हेयरिंग एड्स) की ज़रूरत हो सकती है। ऐसे विद्यार्थियों के लिये ई-कंटेंट में सरल पाठ होने चाहिये। इनमें चरण-दर-चरण निर्देश होने चाहिये और जैसे-जैसे विद्यार्थी सीखने लगे, उसी हिसाब से धीरे-धीरे सपोर्ट हटाया जा सकता है।  
  • बधिर विद्यार्थियों के लिये साइन लैंग्वेज वीडियो का निर्माण: संपादन और विज़ुअल एड्स को शामिल करने के लिये साइनर के पीछे हरे स्क्रीन का इस्तेमाल किया जाना चाहिये। रिकॉर्डिंग कैमरा आई लेवल पर रखा जाना चाहिये। साइनर को फ्रेम के बीच में होना चाहिये। 
    • इसके अतिरिक्त दिशा-निर्देशों में ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (जैसे कम्यूनिकेशन और सोशियलाइज़ेशन में कठिनाई), मेंटल इलनेस, लर्निंग डिसेबिलिटीज़ (जैसे पढ़ने और लिखने में कठिनाई) और ब्लड डिसऑर्डर्स वाले विद्यार्थियों के लिये ई-कंटेंट का विवरण दिया गया है।

पर्यटन

सतत, ग्रामीण, मेडिकल और बिज़नेस पर्यटन हेतु ड्राफ्ट राष्ट्रीय रणनीति और रोडमैप 

पर्यटन मंत्रालय ने विभिन्न प्रकार के पर्यटनों के लिये ड्राफ्ट राष्ट्रीय रणनीति और रोडमैप जारी किया है। पर्यटन के ये प्रकार हैं

(i) सतत् पर्यटन।
(ii) ग्रामीण पर्यटन।
(iii) मेडिकल और वेलनेस पर्यटन।
(iv) बिज़नेस पर्यटन। 

ड्राफ्ट राष्ट्रीय रणनीतियों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • सतत् पर्यटन: सतत् पर्यटन का उद्देश्य पर्यटन के सकारात्मक असर, जैसे रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और नकारात्मक असर, जैसे वन्यजीवन में रुकावट को कम करना। राष्ट्रीय रणनीति में कहा गया है कि पर्यटन के सभी प्रकारों को स्थायित्व पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये। 
    • रणनीति विशेष रूप से इको-टूरिज़्म और एडवेंचर टूरिज़्म पर केंद्रित है। रणनीति में मार्केटिंग और प्रमोशन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और सतत् पर्यटन के लिये उत्पाद विकास जैसे क्षेत्रों पर एडवाइज़री भी शामिल है।
  •  ग्रमीण पर्यटन: इसका अर्थ ऐसा पर्यटन है जिसमें ग्रामीण जीवन, कला, संस्कृति और विरासत के दर्शन होते हैं। इस रणनीति की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 
    (i) उत्तम कार्यपद्धतियों को निर्धारित करना। 
    (ii) डिजिटल तकनीक को अपनाना।
    (iii) ग्रामीण पर्यटन के लिये क्लस्टर्स का विकास।
    (iv) ग्रामीण पर्यटन को मदद देने के लिये मार्केटिंग का प्रावधान।  
  • मेडिकल पर्यटन: इस प्रकार का पर्यटन मेडिकल कार्यक्रमों के ज़रिये स्वास्थ्य देखभाल, उसमें सुधार और उसे बहाल करने पर केंद्रित है। राष्ट्रीय रणनीति का उद्देश्य संस्थागत फ्रेमवर्क प्रदान करना, मेडिकल व वेलनेस पर्यटन के इकोसिस्टम को मज़बूत करना, ब्रांड विकसित करना, डिजिटलीकरण और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
  • एमआईसीई उद्योग: मीटिंग, इनसेंटिव्स,कॉन्फ्रेंस और एक्जीबिशंस (MICE) बिज़नेस पर्यटन का एक सेगमेंट है और इसमें ऐसे ईवेंट्स शामिल होते हैं जिनमें विशिष्ट उद्देश्य से लोगों का बड़ा समूह जमा होता है।
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