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कृषि

विशेष पशुधन क्षेत्र पैकेज

  • 15 Jul 2021
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये 

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति, पशुपालन, पशुपालन बुनियादी ढाँचा विकास कोष, डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड, डेयरी सहकारी समिति, किसान उत्पादक संगठन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, डेयरी विकास के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, पशुधन जनगणना एवं एकीकृत नमूना सर्वेक्षण

मेन्स के लिये 

पशुपालन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs- CCEA) ने विशेष पशुधन क्षेत्र पैकेज के कार्यान्वयन को मंज़ूरी दी है।

प्रमुख बिंदु 

पैकेज के विषय में:

  • उद्देश्य: पशुधन क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में लगे 10 करोड़ किसानों के लिये पशुपालन (Animal Husbandry) को अधिक लाभकारी बनाना।
  • कुल राशि: इस क्षेत्र में लगभग 55,000 करोड़ रुपए के बाहरी निवेश का लाभ उठाने के लिये केंद्र सरकार अगले पाँच वर्षों में पशुधन विकास पर 9,800 करोड़ रुपए खर्च करेगी।
    • इसमें राज्य सरकारों, राज्य सहकारी समितियों, वित्तीय संस्थानों, बाहरी वित्तपोषण एजेंसियों और अन्य हितधारकों द्वारा निवेश शामिल है।

योजनाओं का विलय:

  • वर्ष 2021-22 से शुरू होने वाले इस पैकेज को अगले पाँच वर्षों के लिये पशुपालन और डेयरी विभाग की योजनाओं के विभिन्न घटकों को संशोधित तथा पुन: व्यवस्थित करके डिज़ाइन किया गया है।
  • विभाग की सभी योजनाओं को तीन व्यापक श्रेणियों में मिला दिया जाएगा:
    • विकास कार्यक्रम: इसमें राष्ट्रीय गोकुल मिशन (Rashtriya Gokul Mission), डेयरी विकास के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम (National Programme for Dairy Development), राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission) और पशुधन जनगणना एवं एकीकृत नमूना सर्वेक्षण (Livestock Census and Integrated Sample Survey) उप-योजनाओं के रूप में शामिल हैं।
    • रोग नियंत्रण कार्यक्रम: इसका नाम बदलकर पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण (Livestock Health and Disease Control) कर दिया गया है, जिसमें वर्तमान पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना तथा राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (National Animal Disease Control Programme) शामिल हैं।
    • इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड: पशुपालन बुनियादी ढाँचा विकास कोष (Animal Husbandry Infrastructure Development fund) और डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (Dairy Infrastructure Development Fund) का विलय कर दिया गया है तथा डेयरी गतिविधियों में लगे डेयरी सहकारी समितियों (Dairy Cooperative) एवं किसान उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organization) को समर्थन करने वाली वर्तमान योजना भी इस तीसरी श्रेणी में शामिल है।

प्रभाव:

  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन स्वदेशी नस्लों के विकास और संरक्षण में मदद करेगा तथा ग्रामीण गरीबों की आर्थिक स्थिति में सुधार करने में भी योगदान देगा।
  • राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) योजना का लक्ष्य लगभग 8900 मिल्क कूलर स्थापित करना है, जिससे 8 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को लाभ मिलेगा और प्रतिदिन 20 लाख लीटर दूध अतिरिक्त रूप से खरीदा जाएगा।
    • NPDD के तहत जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी, जिससे 4500 गाँवों में नए बुनियादी ढाँचे को मज़बूती के साथ तैयार किया जा सकेगा।

भारत में पशुपालन:

  • बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिये पशुपालन पर निर्भर हैं। यह लगभग 55% ग्रामीण आबादी की आजीविका का समर्थन करता है।
  • आर्थिक सर्वेक्षण-2021 के अनुसार, कुल कृषि और संबद्ध क्षेत्र में पशुधन का योगदान सकल मूल्यवर्द्धन (स्थिर कीमतों पर) पर 24.32 प्रतिशत (2014-15) से बढ़कर 28.63% (2018-19) हो गया है।
  • भारत में दुनिया का सर्वाधिक पशुधन मौजूद है।
    • 20वीं पशुधन गणना के अनुसार, देश में पशुधन की कुल जनसंख्या 535.78 मिलियन है, जो पशुधन गणना-2012 की तुलना में 4.6% अधिक है।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM):

  • NLM को वित्तीय वर्ष 2014-15 में लॉन्च किया गया था और यह पशुधन उत्पादन प्रणालियों तथा सभी हितधारकों की क्षमता निर्माण में मात्रात्मक एवं गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
  • इस योजना को अप्रैल 2019 से श्वेत क्रांति- राष्ट्रीय पशुधन विकास योजना की उप-योजना के रूप में लागू किया जा रहा है।
  • मिशन को निम्नलिखित चार उप-मिशनों में व्यवस्थित किया गया है:
    • पशुधन विकास पर उप-मिशन।
    • उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में सुअर विकास पर उप-मिशन।
    • चारा विकास पर उप-मिशन।
    • कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और विस्तार पर उप-मिशन।

स्रोत: द हिंदू

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