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कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय द्वारा किये गए सुधार एवं संभावित प्रभाव

  • 26 Jun 2017
  • 13 min read

संदर्भ
देश में पिछले दिनों किसान आन्दोलनों ने पूरे देश के साथ-साथ नीति-निर्माताओं का ध्यान भी आकर्षित किया है। हालाँकि, यह विरोध प्रदर्शन मुख्यतः कृषि ऋणों की माफी की मांग से संबंधित है, लेकिन हमें यह देखने की ज़रूरत है कि आखिर इस प्रकार के विरोध प्रदर्शनों की असली वज़ह क्या है? ध्यातव्य है कि देश के कृषक समुदाय के गौरव के संरक्षण हेतु सरकार ने अनेक कार्यक्रम शुरू किये हैं। इसी संदर्भ में हम इन कार्यक्रमों एवं उनके संभावित लाभों की चर्चा करेंगे।

कार्यक्रम

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

सरकार ने पहले से चल रही ‘राष्‍ट्रीय कृषि बीमा योजना’ (NAIS) की कमियों को दूर करने हेतु वर्ष 2016 इस योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत खाद्यान्‍न एवं तिलहन फसलों के लिये खरीफ में अधिकतम 2 प्रतिशत, रबी में अधिकतम 1.5 प्रतिशत तथा वाणिज्‍यिक बागवानी-वाणिज्‍यिक फसलों के लिये अधिकतम 5 प्रतिशत प्रीमियम दरें तय की गई हैं। इसमें न सिर्फ खड़ी फसल बल्कि फसल पूर्व बुवाई तथा फसल कटाई के पश्‍चात् जोखिमों को भी शामिल किया गया है। इस योजना के तहत स्‍थानीय आपदाओं की क्षति का भी आकलन किया जाएगा तथा संभावित दावों का 25 प्रतिशत भुगतान तत्‍काल ऑनलाइन ही कर दिया जाएगा। 

  • राष्‍ट्रीय कृषि मण्‍डी

अभी तक देश के सभी राज्‍यों में अलग-अलग मण्‍डी कानून है। किसानों के लिये एकल मण्‍डी उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से राज्यों की सहमति के द्वारा तीन प्रमुख सुधार किये गए हैं, जो इस प्रकार हैं :- इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रेडिंग को मान्‍यता, एकल खिड़की पर मार्केट फीस एवं एकीकृत लाइसेंस पद्धति। वर्ष 2016 में राष्‍ट्रीय कृषि मण्‍डी की शुरुआत की गई थी, जो कि एक वेब आधारित ऑनलाइन व्‍यापार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्‍यम से किसान अपनी उपज देश भर की मण्‍डियों के माध्‍यम में बेच सकेंगे। 

  • मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड

वर्ष 2015-16 के पूर्व विभिन्‍न राज्‍य सरकारों द्वारा छोटे स्‍तर पर अलग-अलग मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड बनाये जाते थे तथा इसके लिये अलग से कोई राशि आवंटित नहीं की जाती थी। इस विषय की गंभीरता को देखते हुए पहली बार मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना प्रारंभ की गई, जिसमें एकीकृत मृदा नमूना एकत्रीकरण एवं परीक्षण पद्धति को अपनाया गया है। इस योजना के माध्‍यम से 12 मृदा स्‍वास्‍थ्‍य पैरामीटरों का विश्‍लेषण किया जाता है, जिससे किसान को अपनी खेत के उर्वरकों एवं सूक्ष्‍म पोषक तत्‍वों की सही जानकारी मिलेगी। इस योजना के माध्‍यम से न सिर्फ किसानों के लागत मूल्‍य में कमी आ रही है बल्कि सही पोषक तत्‍वों की पहचान एवं उपयोगिता को भी बढ़ावा मिलेगा। 

  • कृषि वानिकी

सरकार द्वारा मेड़ पर पेड़, खेत में पेड़ तथा फसलों के बीच (Intercropping) में पेड़ लगाने के उद्देश्‍य से पहली बार कृषि वानिकी उपमिशन योजना प्रारंभ की गई है। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, मृदा में जैविक पदार्थों को बढ़ाने और किसानों की आय को बढ़ाने में सहायता मिलेगी। 

  • राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन

यह योजना देश में वैज्ञानिक एवं समेकित तरीके से स्‍वदेशी गौवंश (Domestic Bovines) नस्‍लों के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु प्रारंभ की गई है। इसके माध्‍यम से 27 राज्‍यों में 35 परियोजनाओं का अनुमोदन किया गया है। इसके तहत 31 उच्‍च नस्‍ल के मादा गौवंश फार्म (Mother Bull Farm),  गायों के दुग्‍ध उत्‍पादकता की रिकॉर्डिंग, 30,000 कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों को प्रशिक्षण और साथ ही गौवंश के विशेष संरक्षण हेतु 14 गोकुल ग्राम (Bovine Development Centres) की स्‍थापना की जा रही है। इसके अतिरिक्‍त राष्‍ट्रीय स्‍तर पर स्‍वदेशी नस्‍लों के विशेष संरक्षण हेतु 2 कामधेनु ब्रीडिंग सेन्‍टर आंध्र प्रदेश एवं मध्‍य प्रदेश में स्‍थापित किए जा रहे हैं। इस मिशन से लगभग 7 करोड़ दुग्‍ध उत्‍पादक किसानों व 30 करोड़ गौवंश एवं भैंस वंश की उत्‍पादकता में सुधार की संभावना है।

  • राष्‍ट्रीय बोवाईन उत्‍पादकता मिशन

पशुपालकों की आय एवं दुग्‍ध उत्‍पादन एवं उत्‍पादकता में वृद्धि वर्ष 2016 से राष्‍ट्रीय बोवाईन उत्‍पादकता मिशन की नई योजना की शुरुआत की गई थी जिसके तहत देश में पहली बार 8.8 करोड़ दुधारु पशुओं को नकुल स्‍वास्‍थ्‍य पत्र एवं पशु यूआईडी (UID) जारी किए जाएंगे, जिससे उनके स्‍वास्‍थ्‍य एवं उत्‍पादकता की पूर्ण निगरानी एवं सामयिक उपचार हो सकेगा। मादा बोवाईन की संख्‍या में वृद्धि के उद्देश्‍य से उन्‍नत प्रजनन तकनीक (Advanced Breeding Techniques ) जैसे लिंग सोर्टेड बोवाईन वीर्य तकनीक (Sex Sorted bovine Semen), 50 भ्रूण स्‍थानांतरण केन्‍द्र (Embryo Transfer Techniques) और इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (In vitro Fertilization) केन्‍द्र खोले जाएंगे।
• देशी नस्‍लों के उत्‍पादन एवं उत्‍पादकता बढ़ाने के लिये राष्‍ट्रीय जेनोमिक केन्‍द्र की स्‍थापना की जा रही है जिसमें जिनोमिक तकनीक के माध्‍यम से कुछ ही वर्षों में देशी नस्‍लों को उच्‍च उत्‍पादकता हेतु स्‍वीकार्य बनाया जा सकेगा। 
•वर्ष  2016 में ही पहली बार उच्‍च नस्‍ल/उत्‍पादक पशुधन को बेचने व खरीदने के लिये ई-पशुधन हाट पोर्टल की सुरुवात की गयी।

  • नीली क्रान्‍ति

सरकार ने मछली उत्‍पादन, मत्‍स्‍य पालकों के संरक्षण के उद्देश्‍य से अंतर्देशीय मात्‍स्‍यिकी, जल कृषि, समुद्री मात्‍स्‍यिकी, मेरीकल्‍चर (Mericulture), मत्‍स्‍य किसानों के लिये बंदरगाहों के विकास जैसे अवयवों के साथ मात्‍स्‍यिकी के क्षेत्र की सभी योजनाओं को नीली क्रान्‍ति की एक छतरी (One Point) के नीचे लाया गया है। इसके फलस्‍वरूप विगत 3 सालों में मछली उत्‍पादन में 19.75 प्रतिशत की वृद्धि एवं बीमित मछुआरों की संख्‍या में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 

  • कृषि शिक्षा में स्‍टूडेंट रेडी कार्यक्रम

पूर्व में विभिन्‍न विषयों में हमारे चार वर्षीय कार्यक्रम थे, जिनमें कौशल विकास पर कम ध्यान दिया गया था तथा केवल 6 महीने का ग्रामीण प्रदर्शन (Rural Demonstrations) था। वर्तमान में ग्रामीण प्रदर्शन कार्यक्रम को एक वर्ष का कर दिया गया है, जिससे हमारे डिग्रीधारक जॉब मांगने वाले की बजाय जॉब प्रदाता बन सकेंगे। साथ ही उद्योग वातावरण के प्रदर्शन से छात्रों को उत्‍पादन प्रक्रियाओं का लाभकारी अनुभव होगा, जिससे कालांतर में छात्र कृषि उद्यमों में स्‍वरोजगार के लिये प्रोत्‍साहित हो सकेंगे।

  • कृषि शिक्षा को प्रोफेसनल डिग्री घोषित किया जाना

हाल ही में आई.सी.ए.आर. (Indian Council of Agricultural Research) द्वारा कृषि, बागवानी, मात्‍स्‍यिकी एवं वानिकी में 4 वर्ष की कृषि डिग्रियों को व्‍यवसायिक डिग्री के रुप में घोषित किया गया है। इससे छात्रों को विभिन्‍न स्‍नातकोत्‍तर उपाधि कार्यक्रम के लिये विदेशों में स्‍थित विश्‍वविद्यालयों में प्रवेश में मदद मिलती है। साथ ही इससे न सिर्फ कृषि रसायनों, औज़ारों एवं उपकरणों की डीलरशिप के आंवटन में प्राथमिकता मिलेगी, बल्कि प्रसंस्‍करण, मूल्‍यवर्द्धन और निर्यातोन्‍मुखी व्‍यवसाय करने हेतु बैंकों से ऋण प्राप्‍त करने में सहायता मिलेगी।

  • कार्मिक सूचना प्रबंधन प्रणाली एवं तैनाती तथा स्‍थानांतरण प्रणाली

उपर्युक्त दोनों कार्यों के लिये ऑनलाइन कंप्‍यूटरीकृत प्‍लेटफार्म तैयार किया जाएगा, जिसके माध्यम से न्‍यूनतम समय में वैज्ञानिकों की संख्‍या, उनकी वर्तमान स्थिति तथा मौजूद रिक्‍तियाँ इत्‍यादि की त्‍वरित जानकारियाँ मिलेंगी। इस प्‍लेटफार्म के माध्‍यम से 468 ऐसे वैज्ञानिकों के बारे में जानकारी मिली, जिनकी नियुक्ति अपने स्‍वीकृत पदों के अनुसार नहीं की गई थी। 

  • ई-शासन के लिये पोर्टल

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग द्वारा निम्‍नांकित पोर्टल बनाए गए हैं, जिसके फलस्‍वरूप पूर्ण पारदर्शिता, कार्यों का त्‍वरित निष्‍पादन, अंतिम उपयोगकर्ताओं का फीडबैक तथा संसाधनों एवं किसानों व सिविल सोसाइटी जैसे हितधारकों के बीच दूरी कम करने में मदद मिलेगी। इसके प्रमुख उदाहरण- ई-आरपी प्रणाली (ERP system), के.वी.के. ज्ञान पोर्टल, स्‍नातकोत्‍तर एवं शिक्षा हेतु प्रबंधन प्रणाली, शैक्षणिक एवं ई-लर्निंग मॉड्यूल, ई-संवाद, कृषि ई-ऑफिस तथा ई-कृषि मंडी हैं।

प्रशन: देश में हो रहे कृषक आंदोलनों के आलोक में कृषकों की समस्याओं पर प्रकाश डालिये और कृषकों की समस्याओं के समाधान हेतु सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की विवेचना कीजिए? ( 250 शब्दों में) 

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