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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति-शृंखला पुनर्संरेखण और घरेलू संरचनात्मक बाधाओं की पृष्ठभूमि में, समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिये कि भारत उच्च आर्थिक वृद्धि को बनाए रखते हुए व्यापक आर्थिक स्थिरता तथा समावेशी विकास कैसे सुनिश्चित कर सकता है। (250 शब्द)

    25 Mar, 2026 सामान्य अध्ययन पेपर 3 अर्थव्यवस्था

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण: 

    • उत्तर की शुरुआत भारत की वर्तमान आर्थिक प्रवृत्तियों को रेखांकित करते हुए कीजिये।
    • मुख्य भाग में यह तर्क प्रस्तुत कीजिये कि भारत किस प्रकार उच्च आर्थिक वृद्धि को बनाए रखते हुए व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है तथा समावेशी विकास को बढ़ावा दे सकता है।
    • तद्नुसार उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय: 

    भारत एक खंडित वैश्विक अर्थव्यवस्था में ‘उज्ज्वल बिंदु’ के रूप में उभर रहा है, फिर भी यह 7% से अधिक GDP वृद्धि दर बनाए रखने, राजकोषीय समेकन सुनिश्चित करने तथा K-आकार की पुनर्प्राप्ति के अंतराल को कम करने जैसी ‘त्रिस्तरीय चुनौती’ का सामना कर रहा है। इससे निपटने के लिये ‘प्रतिक्रियात्मक नीति’ से ‘संरचनात्मक अनुकूलन’ की ओर बदलाव आवश्यक है।

    मुख्य भाग: 

    उच्च वृद्धि को बनाए रखना (पुनर्संरेखण का लाभ उठाना एवं बाधाओं का समाधान करना)

    • आपूर्ति-शृंखला पुनर्संरेखण का लाभ उठाना: ‘चीन-प्लस-वन’ रणनीति का लाभ उठाते हुए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं को केवल असेंबली से आगे बढ़ाकर गहन-स्तरीय विनिर्माण (जैसे—अर्द्धचालक, विशेष रसायन) तक विस्तारित किया जाए।
      • वैश्विक संरक्षणवाद के बीच निर्यात बाज़ारों को सुरक्षित करने हेतु व्यापक मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को तीव्र किया जाए।
    • घरेलू संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना:
      • कारक बाज़ार सुधार: भूमि अधिग्रहण को सरल बनाना तथा नए श्रम संहिताओं को लागू कर वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करना।
      • लॉजिस्टिक्स एवं पूंजीगत व्यय: पीएम गति शक्ति के माध्यम से सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बनाए रखते हुए निजी निवेश को प्रोत्साहित करना तथा लॉजिस्टिक्स लागत को और कम करना।

    वृहद आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना

    • राजकोषीय संयम बनाम उत्पादक पूंजीगत व्यय
      • 4.3% तक की मार्गरेखा (Glide Path): वित्त वर्ष 2027 तक राजकोषीय घाटे के लक्ष्य का पालन करते हुए व्यय की गुणवत्ता को ‘सब्सिडी’ से ‘संपत्ति निर्माण’ (जैसे—रेलवे, बंदरगाह और डिजिटल अवसंरचना) की ओर स्थानांतरित करना।
      • कर उछाल (Tax Buoyancy): GST 2.0 (सरल दर संरचना और AI-आधारित ऑडिट) का उपयोग कर कर-से-जीडीपी अनुपात को बढ़ाना, बिना कर दरों में वृद्धि किये।
    • मुद्रास्फीति प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा
      • आपूर्ति-पक्षीय हस्तक्षेप: ‘ब्याज दरों में वृद्धि’ से आगे बढ़ते हुए खाद्य आपूर्ति-शृंखला में संरचनात्मक सुधार करना, जैसे—जलवायु-स्मार्ट कृषि और कोल्ड-स्टोरेज नेटवर्क, ताकि अस्थिर खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित किया जा सके।
      • बाह्य क्षेत्र की मजबूती: निर्यात गंतव्यों का विविधीकरण तथा रुपये-आधारित व्यापार को बढ़ावा देकर ‘डॉलर के हथियारीकरण (Dollar-weaponization)’ से अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करना।

    समावेशी विकास को प्रोत्साहित करना

    • ग्रामीण-शहरी विभाजन को कम करना 
      • कृषि-मूल्य संवर्द्धन: ग्रामीण कार्यबल को कृषि में ‘प्रच्छन्न बेरोज़गारी’ से निकालकर खाद्य प्रसंस्करण MSME की ओर स्थानांतरित करना, जिससे स्थानीय रोज़गार सृजित हों और पलायन का दबाव कम हो।
      • ऋण के लिये डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): अकाउंट एग्रीगेटर ढाँचे का उपयोग कर जनसंख्या के निचले 20% वर्ग को ‘बिना जमानत’ संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना।
    • मानव पूंजी: ‘कौशल-आधारित’ लाभांश
      • उद्योग 4.0 के लिये पुनः-कौशल: व्यावसायिक प्रशिक्षण को राष्ट्रीय क्रेडिट ढाँचे (NCrF) के अनुरूप ढालना, ताकि प्रतिवर्ष कार्यबल में प्रवेश करने वाले 12 मिलियन युवा AI और रोबोटिक्स के लिये ‘रोज़गार-उपयुक्त’ बन सकें।
      • महिला-नेतृत्व वाला विकास: ‘केयर इकॉनमी’ और सुरक्षा अवसंरचना में लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR) को बढ़ाना।

    निष्कर्ष

    वर्ष 2030 तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में भारत की सफलता इस तर्क पर निर्भर करेगी कि वह ‘वैश्विक पुनर्संरेखण’ को ‘घरेलू अवसर’ में किस प्रकार परिवर्तित करता है। उच्च वृद्धि को बनाए रखना केवल बड़े आँकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि यह व्यापक-संरचनात्मक संतुलन पर आधारित है, जहाँ राजकोषीय अनुशासन विश्वस्तरीय अवसंरचना के निर्माण को वित्तपोषित करता है और डिजिटल समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि ‘अंतिम छोर’ पर स्थित व्यक्ति को सबसे पहले लाभ मिले।

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