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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न. भारत में उभरती प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा देने में सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) की भूमिका पर चर्चा कीजिये। (250 शब्द)

    11 Feb, 2026 सामान्य अध्ययन पेपर 3 विज्ञान-प्रौद्योगिकी

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण: 

    • उत्तर की शुरुआत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडलों की व्याख्या करते हुए कीजिये।
    • मुख्य भाग में यह स्पष्ट कीजिये कि नवाचार को बढ़ावा देने के लिये इनका लाभ कैसे उठाया जा सकता है।
    •  इस दृष्टिकोण की सीमाओं या कमियों का उल्लेख कीजिये।
    • तद्नुसार उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय: 

    विकसित भारत @2047 की यात्रा में सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) केवल बुनियादी ढाँचा विकसित करने का साधन न रहकर भारत की डीप-टेक क्रांति की प्रेरक शक्ति बनकर उभरी है।

    • वर्ष 2026 तक सड़कों के निर्माण जैसे पारंपरिक मॉडलों को रूपांतरित कर सॉवरेन क्लाउड, AI सुपर कंप्यूटर और अंतरिक्ष उपग्रह समूहों के निर्माण में अपनाया जा रहा है।

    मुख्य भाग: 

    उभरती प्रौद्योगिकियों के लिये PPP का उपयोग

    PPP ‘वैली ऑफ डेथ’ (प्रयोगशाला अनुसंधान और व्यावसायिक सफलता के बीच के अंतर) को कम करने का कार्य करते हैं।

    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (IndiaAI मिशन): सरकार GPU आधारित सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर उपलब्ध कराती है, जबकि निजी कंपनियाँ (जैसे Sarvam) लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) विकसित करती हैं।
      • इसके अतिरिक्त, PPP के माध्यम से सॉवरेन क्लाउड प्लेटफॉर्म भी बनाए जा रहे हैं, ताकि निजी क्षेत्र की एंक्रिप्शन तकनीकों का उपयोग करते हुए महत्त्वपूर्ण डेटा भारत के भीतर ही सुरक्षित रहे।
    • सेमीकंडक्टर्स (ISM 2.0): इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के तहत राज्य सरकार बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है, जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी निजी कंपनियाँ उच्च-मूल्य वाले फैब्रिकेशन (फैब्स) और असेंबली यूनिट्स का प्रबंधन करती हैं।
      • राज्य सरकार सार्वजनिक इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (EDA) प्लेटफॉर्म पर ‘टूल आवर्स’ भी उपलब्ध कराती है, जिससे निजी स्टार्टअप्स बिना भारी शुरुआती लागत के चिप डिज़ाइन कर सकें।
    • अंतरिक्ष: IN-SPACe एक सिंगल-विंडो PPP नियामक के रूप में कार्य कर रहा है और Skyroot या Agnikul जैसी निजी कंपनियों को ISRO के लॉन्च पैड तथा परीक्षण सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति देता है, जिससे निजी उपग्रह प्रक्षेपण के लिये ‘टाइम-टू-मार्केट’ कम होता है।
      • इसके अलावा, भारत सार्वजनिक–निजी भागीदारी के तहत पूरी तरह स्वदेशी वाणिज्यिक पृथ्वी अवलोकन (EO) उपग्रह समूह तैनात करने की तैयारी कर रहा है।
    • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): भारत ने एक अनूठा PPP मॉडल विकसित किया है, जिसमें सरकार ‘रेल’ (ओपन प्रोटोकॉल) बनाती है और निजी क्षेत्र ‘ट्रेन’ (उपभोक्ता ऐप्स) विकसित करता है।
      • उदाहरण: UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) का प्रबंधन NPCI (एक अर्द्ध-सार्वजनिक निकाय) करता है, लेकिन फिनटेक में नवाचार (PhonePe, Paytm, Google Pay) निजी क्षेत्र द्वारा इस सार्वजनिक ढाँचे पर आधारित होकर संचालित होता है।

    नवाचार में PPP दृष्टिकोण की सीमाएँ:

    • कम GERD भागीदारी: भारत में अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर कुल व्यय (GERD) अभी भी GDP का लगभग 0.64% ही है। विशेष रूप से इसमें निजी क्षेत्र का योगदान केवल लगभग 37% है, जबकि अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में यह 70% से अधिक है।
    • जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति: उच्च जोखिम और दीर्घकालिक प्रतिफल वाली परियोजनाएँ (जैसे क्वांटम या बायोटेक) प्राय: निजी पूंजी को आकर्षित करने में कठिनाई महसूस करती हैं, क्योंकि निवेशक त्वरित लाभ की अपेक्षा रखते हैं।
    • बौद्धिक संपदा (IP) स्वामित्व विवाद: सार्वजनिक धन से उत्पन्न बौद्धिक संपदा का स्वामित्व किसके पास होगा, इस पर होने वाले विवाद प्राय: सहयोग की प्रक्रिया को बाधित कर देते हैं।
    • नौकरशाही जटिलताएँ: जटिल खरीद प्रक्रियाएँ और सरकारी अनुबंधों में ‘L1’ (सबसे कम बोलीदाता) की मानसिकता, उभरती प्रौद्योगिकियों की ‘फेल-फास्ट’ (तेज़ी से प्रयोग और सीख) प्रकृति के अनुकूल नहीं हैं।

    साझेदारी को सुदृढ़ करने के उपाय:

    • परिणाम-आधारित वित्तपोषण: ‘इनपुट-आधारित’ वित्तपोषण से हटकर प्रमुख उपलब्धियों को प्रोत्साहित किया जाए (जैसे—सफल प्रोटोटाइप का विकास या पेटेंट दाखिल करना)।
    • स्पष्ट बौद्धिक संपदा (IP) ढाँचा: IP साझा करने के समझौतों का मानकीकरण किया जाए, ताकि निजी कंपनियाँ नवाचारों का व्यावसायीकरण कर सकें, जबकि राज्य सार्वजनिक हित के लिये  ‘लाइसेंस-शुल्क मुक्त उपयोग’ का अधिकार बनाए रखे।
    • नियामक सैंडबॉक्स: फिनटेक, ड्रोन तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में सैंडबॉक्स का विस्तार किया जाए, जिससे पूर्ण पैमाने पर लागू करने से पहले ‘हल्के-नियमन’ (लाइट-टच रेगुलेशन) के तहत निजी नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
    • डीप-टेक खरीद: सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में सुधार कर ‘सबसे कम कीमत’ के बजाय ‘नवाचार’ और ‘रणनीतिक मूल्य’ को प्राथमिकता दी जाए, ताकि सरकार स्वदेशी तकनीकों के लिये प्रथम खरीदार (First Buyer) की भूमिका निभा सके।

    निष्कर्ष:

    राज्य-नेतृत्व वाले R&D मॉडल से निजी-नेतृत्व वाले नवाचार चक्र की ओर बदलाव भारत की वर्तमान आर्थिक रणनीति की सबसे प्रमुख विशेषता है। सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPPs) का उपयोग करके भारत ‘श्रम-आधारित लागत लाभ’ (IT सेवाएँ) से आगे बढ़ते हुए ‘बौद्धिक संपदा (IP) आधारित नेतृत्व’ की दिशा में अग्रसर हो रहा है।

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