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प्रश्न :
प्रश्न. नैतिकता व्यक्तिगत, संगठनात्मक और सामाजिक तीनों स्तरों पर सक्रिय रूप से कार्य करती है। इन विभिन्न नैतिक आयामों की समीक्षा कीजिये और विश्लेषण कीजिये कि किसी एक स्तर पर नैतिक विफलता किस प्रकार समग्र नैतिक शासन को कमज़ोर कर सकती है। (150 शब्द)
08 Jan, 2026 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्नउत्तर :
हल करने का दृष्टिकोण:
- उत्तर की शुरुआत इस तर्क को रेखांकित करते हुए कीजिये कि नैतिकता कई स्तरों पर कार्य करती है।
- मुख्य भाग में विस्तार से समझाएँ कि नैतिकता प्रत्येक स्तर पर कैसे संचालित होती है।
- इसके बाद यह तर्क प्रस्तुत कीजिये कि किसी एक स्तर पर विफलता किस प्रकार समग्र नैतिक शासन में गिरावट का कारण बन सकती है।
- अंत में सभी स्तरों पर नैतिकता को सशक्त बनाने के उपाय बताएँ।
- तद्नुसार उचित निष्कर्ष दीजिये।
परिचय:
शासन में नैतिकता किसी एकांत या अलगाव में कार्य नहीं करती है, बल्कि यह व्यक्तिगत, संगठनात्मक और सामाजिक जैसे कई परस्पर जुड़े स्तरों पर कार्य करती है। प्रत्येक स्तर नैतिक आचरण, जनविश्वास और संस्थागत सत्यनिष्ठा को आकार देने में एक-दूसरे को सुदृढ़ करता है। जब किसी एक स्तर पर नैतिकता कमज़ोर पड़ जाती है तो इसका क्रमिक प्रभाव पूरे नैतिक शासन को कमज़ोर कर देता है।
मुख्य भाग:
विभिन्न स्तरों पर नैतिकता
- व्यक्तिगत स्तर पर नैतिकता: व्यक्तिगत स्तर पर नैतिकता नागरिकों और लोकसेवकों के व्यक्तिगत मूल्यों, नैतिक तर्क, सत्यनिष्ठा एवं अंतरात्मा से संबंधित होती है।
- व्यक्तिगत नैतिकता दैनिक निर्णयों का मार्गदर्शन करती है जैसे सार्वजनिक कार्यों में ईमानदारी, निर्णय लेने में निष्पक्षता और भ्रष्टाचार का विरोध।
- उदाहरण के लिये, एक सिविल सेवक द्वारा दबाव के बावजूद रिश्वत ठुकराना उसकी सत्यनिष्ठा और नैतिक साहस को दर्शाता है। सार्वजनिक संस्थानों में अनियमितताओं का खुलासा करने वाले व्हिसलब्लोअर भी मज़बूत व्यक्तिगत नैतिकता का परिचय देते हैं, जो व्यक्तिगत जोखिम से ऊपर जनहित को प्राथमिकता देते हैं।
- संगठनात्मक स्तर पर नैतिकता: संगठनात्मक नैतिकता सरकार के विभागों, निगमों और सार्वजनिक निकायों जैसे संस्थानों के भीतर मौजूद नैतिक संस्कृति, मानदंडों एवं प्रणालियों को संदर्भित करती है।
- इसमें आचार संहिता, नेतृत्व का व्यवहार, पारदर्शिता तंत्र और जवाबदेही की व्यवस्था शामिल होती है।
- उदाहरण के लिये, कोई संगठन यदि पारदर्शी खरीद प्रक्रियाओं को लागू करता है और व्हिसलब्लोअरों की रक्षा करता है तो वह अपने कर्मचारियों में नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देता है। इसके विपरीत, पक्षपात को सहन करना या आंतरिक निगरानी का अभाव ऐसा माहौल पैदा करता है जहाँ अनैतिक प्रथाएँ सामान्य होने लगती हैं।
- सामाजिक स्तर पर नैतिकता: सामाजिक नैतिकता में समाज के साझा मूल्य, सामाजिक मानदंड, सांस्कृतिक दृष्टिकोण और सामूहिक नैतिक अपेक्षाएँ शामिल होती हैं। ये निर्धारित करती हैं कि समाज किस व्यवहार को स्वीकार्य या अस्वीकार्य मानता है।
- उदाहरण के लिये, भ्रष्टाचार और लैंगिक भेदभाव की सामाजिक निंदा नैतिक शासन को मज़बूत करती है, जबकि रिश्वतखोरी या कर चोरी के प्रति सामाजिक सहनशीलता नैतिक मानकों को कमज़ोर कर देती है।
- मीडिया, शिक्षा प्रणाली एवं नागरिक समाज सामाजिक नैतिकता को विकसित और सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
किसी एक स्तर पर नैतिक विफलता कैसे नैतिक शासन को कमज़ोर करती है
- व्यक्तिगत नैतिक विफलता संस्थाओं को कमज़ोर करती है: जब सत्ता या ज़िम्मेदारी सॅंभालने वाले व्यक्ति अनैतिक व्यवहार करते हैं, जैसे कि रिश्वत लेना या शक्ति का दुरुपयोग करना तो यह संस्थागत विश्वसनीयता को कमज़ोर करता है।
- उदाहरण के लिये, नियामक एजेंसियों में भ्रष्ट अधिकारी नियमों के क्रियान्वयन को कमज़ोर कर देते हैं, जिससे जनता का विश्वास घटता है और शासन में प्रणालीगत विफलताएँ उत्पन्न होती हैं।
- संगठनात्मक नैतिक चूक व्यक्तिगत दुराचार को प्रोत्साहित करती है: यदि संगठनों में नैतिक नेतृत्व या जवाबदेही की व्यवस्था नहीं होती तो अच्छे इरादों वाले व्यक्ति भी अनैतिक प्रथाओं को अपनाने लगते हैं।
- सार्वजनिक संस्थानों में दंड-मुक्ति की संस्कृति भ्रष्टाचार को सामान्य बनाती है, जिससे नैतिक आचरण और व्हिसलब्लोइंग दोनों हतोत्साहित होते हैं।
- सामाजिक सहनशीलता अनैतिक आचरण को सामान्य बनाती है: जब समाज अनैतिक व्यवहार को सहन करता है या उसे तर्कसंगत ठहराता है तो संस्थाओं पर नैतिक रूप से कार्य करने का दबाव कम हो जाता है।
- रिश्वत जैसी प्रथाओं को ‘अनिवार्य बुराई’ मानना भ्रष्टाचार के प्रति सामूहिक प्रतिरोध को कमज़ोर करता है और अनैतिक शासन को जारी रहने देता है।
- स्तरों के बीच क्रमिक प्रभाव: किसी एक स्तर पर नैतिक चूक प्राय: अन्य स्तरों में भी पतन की शुरुआत कर देती है।
- उदाहरण के लिये, भ्रष्टाचार की व्यापक सामाजिक स्वीकृति संगठनात्मक प्रवर्तन को कमज़ोर कर देती है, जो आगे चलकर नैतिक व्यक्तियों का मनोबल गिराती है। इस प्रकार एक दुष्चक्र बनता है जो शासन की सत्यनिष्ठा को क्षीण करता है।
विभिन्न स्तरों पर नैतिकता को सशक्त बनाने के उपाय:
- व्यक्तिगत स्तर पर: स्कूलों एवं सिविल सेवाओं में नैतिक शिक्षा, नैतिक तर्क-वितर्क और मूल्य-आधारित प्रशिक्षण को शामिल किया जाए ताकि सत्यनिष्ठा तथा नैतिक साहस विकसित हो सके।
- संगठनात्मक स्तर पर: मज़बूत आचार संहिताएँ, पारदर्शी प्रक्रियाएँ और स्वतंत्र जवाबदेही तंत्र स्थापित किये जाएँ तथा नैतिक उल्लंघनों के प्रति शून्य सहनशीलता अपनाई जाए।
- सामाजिक स्तर पर: मीडिया, नागरिक शिक्षा और सामाजिक आंदोलनों के ज़रिये नैतिक मूल्यों को प्रोत्साहित किया जाए, भ्रष्टाचार को सामाजिक रूप से अस्वीकार्य बनाया जाए तथा नैतिक व्यवहार को सम्मान एवं प्रोत्साहन दिया जाए।
- क्रमिक विफलता की रोकथाम: निरंतर निगरानी, जनभागीदारी और आदर्श प्रस्तुत करके नेतृत्व करते हुए व्यक्तिगत, संगठनात्मक एवं सामाजिक स्तरों पर नैतिक मानकों का आपसी समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
निष्कर्ष
नैतिक शासन व्यक्तिगत, संगठनात्मक और सामाजिक नैतिकता के समन्वित कार्य पर निर्भर करता है। किसी एक स्तर पर कमज़ोरी पूरे शासन की नैतिक संरचना को कमज़ोर कर सकती है। इसलिये नैतिक मूल्यों, संस्थागत ढाँचे और सामाजिक मानदंडों को एक साथ मज़बूत करना लोकतांत्रिक शासन में सत्यनिष्ठा, जवाबदेही तथा जनविश्वास सुनिश्चित करने के लिये अत्यंत आवश्यक है।
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