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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    मेटावर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास से उत्पन्न चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए इन चुनौतियों के समाधान हेतु उपाय बताइए। (250 शब्द)

    11 Jan, 2023 सामान्य अध्ययन पेपर 3 विज्ञान-प्रौद्योगिकी

    उत्तर :

    दृष्टिकोण:

    • मेटावर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को संक्षेप में समझाते हुए अपना उत्तर शुरू कीजिये।
    • मेटावर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए इनसे निपटने के उपाय सुझाइए।
    • तदनुसार निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    • मेटावर्स, तकनीक की एक ऐसी उभरती हुई अवधारणा है जिसमें ऐसी आभासी दुनिया का निर्माण होता है जिसमें लोग इसके निर्माता द्वारा परिभाषित नियमों के तहत व्यवहार कर सकते हैं। यह संवर्धित वास्तविकता, आभासी वास्तविकता और वीडियो सहित प्रौद्योगिकी के कई घटकों का संयोजन है।
    • इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तात्पर्य मशीनों में मानव बुद्धि का अनुकरण करना है जिसे मनुष्यों की तरह सोचने और सीखने के लिये प्रोग्राम किया जाता है। एआई प्रणाली को ऐसे कार्यों को करने के लिये डिज़ाइन किया जाता है जिनमें आमतौर पर मानव बुद्धि की आवश्यकता होती है जैसे अवधारणात्मक समझ, आवाज़ को पहचानना, निर्णय लेना और भाषा को समझना आदि।

    मुख्य भाग:

    • मेटावर्स को मिलने वाली लोकप्रियता के आलोक में इस तकनीक और एआई से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करना महत्त्वपूर्ण है। इनके द्वारा प्रस्तुत कुछ प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
    • सामाजिक और आर्थिक प्रभाव:
      • एआई और मेटावर्स में पारंपरिक उद्योगों को रूपांतरित करने के साथ लोगों के काम करने के तरीके को बदलने की क्षमता है जिससे नौकरी छूटने के साथ आय में असमानता हो सकती है।
    • नैतिक चिंताएँ:
      • एआई प्रणाली और मेटावर्स से पूर्वाग्रह, पारदर्शिता और जवाबदेहिता के बारे में सवाल उठते हैं। इसमें एक जोखिम यह भी है कि इन तकनीकों का उपयोग भेदभाव और असमानता जैसी सामाजिक समस्याओं को स्थायी बनाने या बढ़ाने के लिये किया जा सकता है।
    • प्रौद्योगिकी पर निर्भरता:
      • दैनिक गतिविधियों में एआई और मेटावर्स की लोकप्रियता बढ़ने से प्रौद्योगिकी पर लोगों के बहुत अधिक निर्भर होने का खतरा है जिससे महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल का नुकसान हो सकता है।
    • शासन:
      • मेटावर्स और एआई वैश्विक और सीमाहीन होने से इन्हें नियंत्रित और विनियमित करना मुश्किल हो जाता है। इससे इनके निरीक्षण और उत्तरदायित्व में कमी हो सकती है।
    • मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव:
      • मेटावर्स में अत्यधिक समय बिताने और एआई सिस्टम के साथ समन्वय करने से लोगों के मानसिक और भावनात्मक कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
    • तकनीकी चुनौतियाँ:
      • मेटावर्स और एआई सिस्टम के निर्माण और रखरखाव के लिये महत्त्वपूर्ण तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों की आवश्यकता होती है, जो इसके निर्माता और उपयोगकर्ताओं दोनों के लिये एक चुनौती हो सकती है।
    • शारीरिक स्वास्थ्य और कल्याण पर प्रभाव:
      • मेटावर्स के अधिक लोकप्रिय होने से एक जोखिम यह है कि उपयोगकर्ता आभासी दुनिया में अधिक से अधिक समय व्यतीत करेंगे जो संभावित रूप से उनके शारीरिक स्वास्थ्य और कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।
    • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा:
      • मेटावर्स में अधिक व्यक्तिगत डेटा को साझा किये जाने के कारण डेटा उल्लंघन के साथ अन्य सुरक्षा जोखिम का खतरा हो सकता है।

    मेटावर्स और एआई द्वारा उत्पन्न चुनौतियों के समाधान हेतु हमें निम्नलिखित उपायों को अपनाने की आवश्यकता है:

    • डिजिटल अंतराल को कम करना: आभासी दुनिया के तंत्र को डिजिटल साक्षरता, सुरक्षा और कल्याण को बढ़ावा देने वाले सशक्तीकारी और प्रवर्धनकारी प्रयासों के समर्थन की आवश्यकता होगी ताकि प्रतिभागी हानिकारक कंटेंट एवं व्यवहारों से सतर्क रहते हुए ऑनलाइन मंच पर सार्थक रूप से संलग्न हो सकें।
    • नीति समर्थन: सरकार के लिये यह सही समय है कि वह इसके क्रियान्वयन और सार्वजनिक सेवाओं के लिये मेटावर्स का लाभ उठाने के लिये उपयुक्त नीतिगत पृष्ठभूमि का सृजन करे।
      • सरकार को सूचना अभिगम्यता (Information Accessibility), सूचना उपयोग (Information Utilization) और सूचना ग्रहणशीलता (Information Receptiveness) पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
    • सुरक्षित और सुदृढ़ मेटावर्स पारितंत्र: इस प्रौद्योगिकी के तहत सुरक्षा, गोपनीयता और दृढ़ता के विशिष्ट तत्वों को संबोधित करने के लिये प्रभावी पारितंत्र को विकसित और विनियमित करने की प्रबल आवश्यकता है।
      • नागरिकों के अनुकूल मेटा-गवर्नेंस अवसंरचना के निर्माण के लिये किसी भी संभावित कानूनी बाधाओं को कम करने हेतु डिज़ाइनरों, बिजनेस मॉडल विशेषज्ञों और अधिवक्ताओं सहित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के सहयोग की आवश्यकता होगी। इसमें निजी क्षेत्र के हस्तक्षेप की भी आवश्यकता हो सकती है।
    • मेटा हेल्प डेस्क: ई-गवर्नेंस में ICT के माध्यम से लक्षित दर्शकों के लिये आवश्यक सूचनाएँ जारी की जाती हैं। किसी मंत्रालय/अन्य सरकारी एजेंसी विशेष में स्थापित मेटा-हेल्प डेस्क या मेटा-डिवीजन आवश्यक महत्त्वपूर्ण डेटा प्रदान करने में मदद कर सकते हैं।
    • पारदर्शी और सहमति-आधारित अनुप्रयोग: प्रौद्योगिकी कंपनियों को अपने डेटा प्रोसेसिंग और सुरक्षा अभ्यासों में अधिक ज़िम्मेदार और पारदर्शी होने की आवश्यकता होगी।
      • व्यक्तिगत डेटा एकत्र करते समय सहमति-आधारित मॉडल को बढ़ावा देना और डेटा न्यूनीकरण एवं उद्देश्य सीमा के सिद्धांतों का पालन करना, अनियंत्रित डेटा प्रोसेसिंग एवं इसके व्यावसायिक लाभ के लिये संग्रहण पर रोक लगाने के लिये महत्त्वपूर्ण होगा।
    • वैश्विक सहयोग: मेटावर्स के लगातार विकास के साथ हम संभावनाओं से परिपूर्ण डिजिटल रूप से अधिक उन्नत सीमा-रहित विश्व के निर्माण को देख सकते हैं।
      • हमें इस नए विकास के साथ उभरने वाली चुनौतियों के बारे में भी जागरूक रहना होगा और विश्व स्तर पर सार्वभौमिक विनियमों को अपनाने पर बल देना होगा।

    निष्कर्ष:

    मेटावर्स और एआई प्रौद्योगिकी ऐसी उभरती अवधारणाएँ हैं जो लोगों को आभासी दुनिया के साथ समन्वय करने और संलग्न करने का एक नया तरीका प्रस्तुत करती हैं। इन तकनीकों से कई चुनौतियाँ उत्पन्न होने के बावजूद इनके बेहतर विनियमन से लोगों को विभिन्न प्रकार की सहायता मिल सकती है।

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