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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न: भले ही आयुर्वेद वर्तमान में लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है, फिर भी इसके मार्ग में कुछ बाधाएँ हैं। चर्चा कीजिये। (150 शब्द)

    28 Sep, 2022 सामान्य अध्ययन पेपर 3 विज्ञान-प्रौद्योगिकी

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • अपने उत्तर की शुरुआत आयुर्वेद के बारे में संक्षिप्त जानकारी देकर कीजिये।
    • आयुर्वेद से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिये।
    • आगे की राह बताते हुए अपना उत्तर समाप्त कीजिये।

    परिचय

    आयुर्वेद भारत की पारंपरिक चिकित्सा लगभग 3,000 वर्षों से प्रचलन में है और लाखों भारतीयों की स्वास्थ्य देखभाल की ज़रूरतों को पूरा कर रही है। आयुर्वेद, लंबे समय से कुछ क्षेत्रों को संबोधित करने के लिये चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिन पर ध्यानाकर्षण करने की आवश्यकता है। आयुर्वेद के विकास के लिये सरकार द्वार कुछ पहलें की गई हैं, जैसे: राष्ट्रीय आयुष मिशन, आहार क्रांति मिशन, आयुष क्षेत्र में नए पोर्टल, NCCR पोर्टल और आयुष संजीवनी ऐप आदि।

    प्रारूप

    आधुनिक विश्व में आयुर्वेद के सामने प्रमुख चुनौतियाँ :

    • परंपरागत विचार:
      • शारीरिक व्यायाम के लाभों पर आयुर्वेद कहता है, "आराम की भावना, बेहतर फिटनेस, आसान पाचन, आदर्श शरीर-वज़न और शारीरिक सुंदरता नियमित व्यायाम से प्राप्त होने वाले लाभ हैं।"
        • हालाँकि एक ही अभ्यास में शामिल शारीरिक और रोग संबंधी अनुमानों के लिये इस तरह की निरंतर वैधता का दावा नहीं किया जा सकता है।
      • मूत्र के विषय में आयुर्वेद कहता है कि आंँतों से छोटी नलिकाएँ, मूत्र को मूत्राशय में ले जाती हैं। मूत्र निर्माण की इस सरलीकृत योजना की गुर्दे की कोई भूमिका नहीं होती है।
        • इस पुराने विचार का वर्तमान चिकित्सा शिक्षा में इतिहास के एक उपाख्यान के अलावा कोई स्थान नहीं हो सकता है।
    • आपातकालीन मामलों में अप्रभावी उपचार:
      • तीव्र संक्रमण और शल्य चिकित्सा सहित अन्य आपात स्थितियों के उपचार में आयुर्वेद की अपर्याप्तता तथा चिकित्सीय में सार्थक शोध की कमी ने आयुर्वेद की सार्वभौमिक स्वीकृति को सीमित कर दिया है।
      • आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान जटिल है और इसमें क्या करें और क्या न करें बहुत अधिक हैं।
      • आयुर्वेदिक औषधियाँ काम करने और ठीक करने में धीमी होती हैं। प्रतिक्रिया या पूर्वानुमान की भविष्यवाणी करना असंभव नहीं तो मुश्किल है।
    • एकरूपता का अभाव:
      • आयुर्वेद में चिकित्सा पद्धतियाँ एक समान नहीं हैं। ऐसा इसलिये है क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधे भूगोल और जलवायु एवं स्थानीय कृषि पद्धतियों के साथ भिन्न होते हैं।
      • आयुर्वेद के विपरीत आधुनिक चिकित्सा में रोगों को पूर्व निर्धारित समान मानदंडों के अनुसार वर्गीकृत और इलाज किया जाता है।
    • आयुर्वेदिक फार्मा द्वारा भ्रामक प्रचार:
      • आयुर्वेदिक फार्माकोपिया उद्योग ने दावा किया कि इसकी निर्माण पद्धतियांँ क्लासिक आयुर्वेद ग्रंथों के अनुरूप थीं।
      • आयुर्वेदिक औषधियों की बेहतर बाज़ार अपील के लिये, औषधि कंपनियों ने पर्याप्त वैज्ञानिक आधार के बिना अपने आयुर्वेदिक उत्पादों के बारे में कई औषधीय दावों का प्रचार किया।
      • इससे समुदाय में औषधियों के प्रति प्रयोग और बढ़ गया और जीवनशैली में सुधार की आवश्यकता वाली बीमारियों का इलाज पॉली-फार्मेसी के साथ किया गया।

    आगे की राह:

    • रिवर्स फार्माकोलॉजी:
      • इसे औषधियों में विकसित करने के लिये, ट्रांसडिसिप्लिनरी खोजपूर्ण अध्ययनों के माध्यम से प्रलेखित नैदानिक अनुभवों और अनुभवात्मक टिप्पणियों को लीड में एकीकृत करने के विज्ञान के रूप में परिभाषित किया गया है।
    • न्यू मिलेनियम इंडियन टेक्नोलॉजी लीडरशिप इनिशिएटिव (NMITLI):
      • यह सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, अकादमिक और निजी उद्योग की सर्वोत्तम दक्षताओं का तालमेल करके भारत की मज़बूत स्थिति बनाए रखने का प्रयास करता है।
    • केरल मॉडल का अनुकरण:
      • केरल आम जनसंख्या में प्रतिरक्षा में सुधार के तरीके के रूप में आयुर्वेद को बढ़ावा देता रहा है। यह आयुर्वेदिक योगों को बढ़ावा देता है और अपनी आबादी के सभी जनसांख्यिकी के लिये आयुर्वेद प्रथाओं की सिफारिश करता है।

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