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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • केंद्रीय बजट 2021 में बैंकों की स्थिति को बहाल करने के लिये एक राष्ट्रीय बैड बैंक की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है। बैंकिंग क्षेत्र के तनाव को कम करने के लिये प्रस्तावित इस उपाय की आलोचनात्मक विवेचना कीजिये।

    31 Mar, 2021 सामान्य अध्ययन पेपर 3 अर्थव्यवस्था

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण

    • बेड बैंकों की अवधारणा पर चर्चा के साथ उत्तर शुरू कीजिये।
    • बेड बैंकों के विपक्ष में तर्क दीजिये।
    • उपयुक्त निष्कर्ष लिखिये।

    परिचय

    बैड बैंक एक ऐसी इकाई है जो बैड लोन या गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के एग्रीगेटर के रूप में कार्य करता है और उन्हें बैंकिंग क्षेत्र से रियायती मूल्य पर खरीदता है, फिर उनके पुनर्भरण/रिकवरी और समाधान/रिज़ॉल्यूशन की दिशा में काम करता है।

    बैड बैंक एक परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी (Asset Reconstruction Company- ARC) के समान है, जहाँ वह बैंकों से इन ऋणों को स्थानांतरित करते हुए अधिकतम संभव राशि वसूलने का प्रबंधन करता है।

    प्रारूप

    बैड बैंकों के पक्ष में तर्क

    • बैंकों को उधार देने का प्रावधान: बैड बैंक के तहत वसूल किये वाले महत्त्वपूर्ण उधार लाभ शामिल हैं:
      • पूंजी को पूरी तरह से प्रावधानित खराब परिसंपत्तियों (Provisioned Bad Assets) से कम मूल्य पर मुक्त किया जाता है।
      • संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee) के कारण पूंजी सुरक्षा प्राप्तियों से मुक्त हो जाती है।
      • नकद प्राप्तियाँ जो बैंकों में वापस आती हैं और उधार के लिये लीवरेज की जा सकती हैं, को बैलेंसशीट के सामान्य प्रावधानों से मुक्त किया गया है।
    • अंतर्राष्ट्रीय मिसाल: एक बैड बैंक की अंतर्राष्ट्रीय सफलता की कई कहानियाँ उसके मिशन को सकारात्मकता प्रदान करती है और यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत में इन उद्देश्यों को पूरा नहीं किया जा सकता है।
      • वर्ष 2008 के वित्तीय संकट के बाद अमेरिका ने संकटग्रस्त परिसंपत्ति राहत कार्यक्रम (TARP) लागू किया, जिसने इस संकट से निकलने में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सहायता प्रदान की।
      • इस प्रकार की अवधारणा एक बैड बैंक के विचार के समरूप ही बनाई गई थी।
    • क्रेडिट फ्लो पोस्ट-कोविड का पुनरुद्धार: कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि एक बैड बैंक 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की NPA पूंजी मुक्त करने में मदद कर सकता है, ये बैड लोन के कारण आर्थिक रूप से संकटग्रस्त होते हैं।

    बैड बैंक के विपक्ष में तर्क

    • स्थायी समाधान नहीं: यह तर्क दिया जाता है कि एक बैड बैंक बनाने से केवल समस्या का स्थानांतरण हो रहा है।
      • NPA समस्या को हल करने के लिये बुनियादी सुधारों के बगैर बैड बैंकों का बिना किसी वसूली के बैड लोन का गोदाम बनने की संभावना है।
    • कठिन राजकोषीय स्थिति: इसके अलावा एक महत्त्वपूर्ण चिंता बैड बैंक के लिये पूंजी के संग्रहण की है। महामारी की मार झेल रही अर्थव्यवस्था में संकटग्रस्त संपत्तियों के लिये खरीदार ढूँढना मुश्किल है और सरकार भी एक कठिन वित्तीय स्थिति से गुज़र रही है।
    • स्पष्ट प्रक्रिया का अभाव : इसके अलावा यह निर्धारित करने के लिये कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं है कि किस मूल्य और किन ऋणों को बैड बैंक में स्थानांतरित किया जाना चाहिये। यह सरकार के लिये राजनीतिक चुनौतियाँ पैदा कर सकता है।
    • नैतिक जोखिम: रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का मानना ​​है कि बैड बैंक स्थापित करने से बैंकों के बीच नैतिक जोखिम की समस्या भी पैदा हो सकती है, इससे वे अपने लापरवाहपूर्ण ऋण देने के तरीकों को जारी रखेंगे, जिससे NPA समस्या और भी बढ़ जाएगी।

    निष्कर्ष

    जब तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रबंधन राजनेताओं और नौकरशाहों के प्रति निष्ठावान रहेंगे, तब तक उनकी व्यावसायिकता में कमी बनी रहेगी और बाद में इस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

    इसलिये बैड बैंक एक अच्छा विचार है, लेकिन बैंकिंग प्रणाली में अंतर्निहित संरचनात्मक समस्याओं जैसी मुख्य चुनौती से निपटने और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बेहतर बनाने के लिये सुधार किया जाना ज़रूरी है।

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