इंदौर शाखा: IAS और MPPSC फाउंडेशन बैच-शुरुआत क्रमशः 6 मई और 13 मई   अभी कॉल करें
ध्यान दें:

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    सूचना का अधिकार अधिनियम में किये गए हालिया संशोधन सूचना आयोग की स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर गंभीर प्रभाव डालेंगे। विवेचना कीजिये। (150 शब्द) (UPSC GS-2 Mains 2020)

    12 Jan, 2021 सामान्य अध्ययन पेपर 2 राजव्यवस्था

    उत्तर :

    दृष्टिकोण

    • हाल ही में RTI अधिनियम में हुए संशोधन का उल्लेख कर उत्तर की शुरुआत कर सकते हैं।
    • इन संशोधनों से सूचना आयोग की स्वायत्तता पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा करें।
    • सहभागितापूर्ण लोकतंत्र में RTI अधिनियम के महत्त्व को बताते हुए अपने उत्तर को समाप्त करें।

    परिचय

    • केंद्रीय सूचना आयुक्तों (Central Information Commissioners) और राज्य सूचना आयुक्तों की शक्ति, वेतन तथा कार्यकाल में सूचना का अधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधन किया गया है।
    • सिविल सोसाइटी ने RTI कानून में किये गए संशोधनों के माध्यम से सूचना आयोग की स्वतंत्रता, जवाबदेहिता और स्वायत्तता पर होने वाले हमलों के संबंध में चिंता व्यक्त की है।

    संरचना

    RTI अधिनियम में संशोधन

    • यह संशोधन केंद्र सरकार को केंद्र और राज्यों दोनों में सूचना आयुक्तों के कार्यकाल, वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तों को तय करने का एकतरफा अधिकार देता है।
      • सिविल सोसाइटी का कहना है कि यह संशोधन सूचना आयोग की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है और इसे केंद्र सरकार के एकमात्र विभाग के रूप में कार्य करने के लिये मजबूर कर सकता है।
    • केंद्रीय सूचना आयुक्तों की स्थिति चुनाव आयुक्तों, राज्यों के मुख्य सचिवों और राज्य सूचना आयुक्तों के समान कर दी गई है।
      • हालाँकि इस संशोधन में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिश, जिसके तहत सूचना आयुक्त और CIC को क्रमशः चुनाव आयुक्त तथा मुख्य चुनाव आयोग के समान किया जाना था, की उपेक्षा की गई है।

    संशोधन का प्रभाव:

    • यह संशोधन सूचना आयोगों के कामकाज में कार्यपालिका को हस्तक्षेप की अनुमति देता है जो कि अर्द्ध-न्यायिक निकाय हैं।
      • यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को प्रभावित करेगा, जो कि इस स्वतंत्रता को रेखांकित करता है और लोकतांत्रिक संतुलन के लिये महत्त्वपूर्ण है।
      • न्याय और संवैधानिक गारंटी देने के लिये प्रतिबद्ध एक लोकतांत्रिक राज्य हेतु सरकार के विनियमन और निगरानी करने के लिये स्थापित स्वतंत्र संरचनाएँ महत्त्वपूर्ण होती हैं।
    • इसके अलावा यह संशोधन संघवाद के संवैधानिक सिद्धांतों को भी प्रभावित करता है, क्योंकि अब केंद्र सरकार राज्य सूचना आयोग की सेवा शर्तों को बदल सकती है।
    • केंद्र सरकार की एकतरफा शक्ति से सत्ता का केंद्रीकरण होगा, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अनुकूल नहीं है और यह भागीदारी लोकतंत्र में गिरावट का कारण बन सकती है।

    निष्कर्ष:

    • द्वितीय ARC ने RTI को शासन की मुख्य कुंजी माना है। RTI कानून सत्ता के दुरुपयोग, मनमानी, विशेषाधिकार और भ्रष्ट शासन के लिये एक सतत् चुनौती रहा है।
    • ये संशोधन सूचना आयोगों की स्वतंत्रता को कम कर सकते हैं और भारत में पारदर्शिता एवं जवाबदेहिता की संरचना को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिये सुशासन की प्राप्ति के लिये RTI अधिनियम के प्रावधानों को कमज़ोर करने के बजाय मज़बूत किये जाने की आवश्यकता है।

    To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.

    Print
close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2
× Snow