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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • रोस्टर सिस्टम क्या है? इससे जुड़े प्रमुख विवादों की चर्चा कीजिये। सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित रोस्टर अधिसूचना की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिये।

    18 Nov, 2020 सामान्य अध्ययन पेपर 2 राजव्यवस्था

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • रोस्टर सिस्टम को समझाएँ।
    • रोस्टर सिस्टम किन वजहों से विवाद में आया।
    • नए रोस्टर सिस्टम की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।
    • निष्कर्ष लिखें।

    रोस्टर सिस्टम मूलत: सुप्रीम कोर्ट के केसों के आवंटन से संबंधित है जिसके तहत मुख्य न्यायाधीश अपने विवेक से यह तय करता है कि कौन से केस की सुनवाई किस जज की बेंच करेगी।

    नवंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के पाँच जजों वाली संवैधानिक पीठ ने अपने अहम पैसले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ बताया। ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर थ्योरी’ के तहत चीफ जस्टिस को अधिकार है कि वह जजों के बीच केसों का आवंटन करे।

    सुप्रीम कोर्ट का कोई भी जज खुद से यह फैसला नहीं ले सकता कि वह किस केस की सुनवाई करना चाहता है और किस केस की नहीं। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के जज किसी विशेष मामले की सुनवाई के लिये अलग से बेंच बनाने के लिये चीफ जस्टिस को निर्देश भी नहीं दे सकते।

    विदित हो कि मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने के लिये जजों द्वारा कथित तौर पर रिश्वत लिये जाने के मामले को लेकर दायर याचिका पर जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस एस. अब्दुल नजीत की एक पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि याचिका पर शीर्ष अदालत के पाँच वरिष्ठतम जजों की संवैधानिक पीठ को सुनवाई करनी चाहिये। हालाँकि, प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने जस्टिस चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ का आदेश उलट दिया और कहा कि कौन-सी पीठ कब गठित की जानी चाहिये, यह निर्णय केवल मुख्य न्यायाधीश ही ले सकते हैं।

    ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में नया रोस्टर लागू किया गया है तथा जजों के बीच केसों के बँटवारे की लिस्ट को सार्वजनिक करते हुए सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डाला गया है। इसके तहत चीफ जस्टिस सभी PILs की सुनवाई खुद करेंगे। इसके अलावा चुनाव, आपराधिक, सामाजिक न्याय और संवैधानिक नियुक्तियों से जुड़े केसों की सुनवाई भी वे खुद ही करेंगे।

    जस्टिस जे. चेलमेश्वर की बेंच में लेबर मामले, भूमि अधिग्रहण मामले, क्रिमिनल मामले, कंज़्यूमर प्रोटेक्शन मामले आदि सुने जाएंगे।

    जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच में लेबर मामले, अप्रत्यक्ष कर, कंपनी लॉ, कंटेंप्ट, पर्सनल लॉ आदि से संबंधित मामले लिस्ट होंगे। जस्टिस मदन बी. लोकुर की अगुवाई वाली बेंच में सर्विस मैटर, सामाजिक न्याय से संबंधित मामलों, पर्सनल लॉ और उपभोक्ता संरक्षण से संबंधित मामलों की सुनवाई होगी।

    जस्टिस कुरियन जोसेफ की बेंच के सामने लेबर, रेंट एक्ट, सर्विस मैटर, वैवाहिक विवाद, पर्सनल लॉ आदि से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाएगी। यह माना जा रहा है कि नया रोस्टर सिस्टम न्यायपालिका में केस के आवंटन में पारदर्शिता लाएगा एवं विवादों पर विराम लगेगा।

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