प्रारंभिक परीक्षा
FATF ने ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (VASPs) के विरुद्ध भारत की कार्रवाइयों को रेखांकित किया
- 30 Mar 2026
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चर्चा में क्यों?
‘ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स के जोखिमों को समझना और कम करना’ विषय पर मार्च 2026 की FATF रिपोर्ट भारत द्वारा ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (oVASP) के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण के जोखिमों को कम करने के लिये उठाए गए सख्त नियामक और प्रवर्तन कदमों को उजागर करती है।
ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स पर भारत की कार्रवाइयों के संदर्भ में FATF द्वारा रेखांकित मुद्दे क्या हैं?
- वर्चुअल एसेट लैब: भारत एक विशेषीकृत केंद्र स्थापित कर रहा है जो अनारक्षित और उच्च जोखिम वाले क्रिप्टो प्लेटफॉर्म का पता लगाने के लिये स्वचालित वेब निगरानी, ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस और विश्लेषण करेगी।
- नियामक परिधि और FIU के निर्देश: वित्तीय आसूचना इकाई–भारत (FIU–IND) ने VASP के प्रिंसिपल ऑफिसर्स (PO) के लिये भारत में भौतिक रूप से स्थित होना अनिवार्य कर दिया है, ताकि धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA, 2002) के अनुपालन के लिये कानूनी जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
- ‘स्कैम कंपाउंड’ के विरुद्ध कार्रवाई: भारतीय एजेंसियाँ, जैसे– राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) म्याँमार-थाईलैंड सीमा, कंबोडिया और लाओस में साइबर अपराध केंद्रों की जाँच कर रही हैं, जहाँ तस्करी किये गए नागरिकों को क्रिप्टो से जुड़े स्कैम में शामिल होने के लिये विवश किया गया था।
- अनुपालनहीन संस्थाओं पर कार्रवाई: सहयोग पोर्टल (जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सरकारी एजेंसियों तथा सोशल मीडिया मध्यस्थों के मध्य समन्वय सुदृढ़ करने हेतु प्रारंभ किया गया) के माध्यम से प्राधिकारियों ने गैर-पंजीकृत एवं अनुपालनहीन अपतटीय प्लेटफॉर्मों से संबंधित 85 URL को अवरुद्ध करने के निर्देश दिये हैं।
- अंतर-एजेंसी समन्वय: वर्ष 2023 में राजस्व विभाग के अंतर्गत स्थापित वर्चुअल एसेट्स कॉन्टैक्ट सब-ग्रुप कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा विनियामक संस्थाओं के मध्य गुप्त सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाता है, जिससे क्रिप्टो-अपराधों की उभरती प्रवृत्तियों की पहचान की जा सके।
- विनियामक मध्यस्थता का निराकरण: रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 की वर्चुअल परिसंपत्ति कर व्यवस्था के कारण व्यापारिक मात्रा का स्थानांतरण अपतटीय संस्थाओं की ओर हुआ। इसके प्रत्युत्तर में भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि घरेलू उपयोगकर्त्ताओं को सेवाएँ प्रदान करने वाले ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (oVASPs), अपनी भौतिक उपस्थिति की परवाह किये बिना, स्थानीय स्तर पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराएँ।
- रेड फ्लैग संकेतक: FIU ने बैंकों और पेमेंट गेटवे सहित एक कार्यसमूह का गठन किया है, ताकि ऑफशोर वॉलेट्स से संदिग्ध जमा पैटर्न की पहचान करने के लिये रणनीतियाँ विकसित की जा सकें।
ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (oVASPs) क्या हैं?
- परिचय: oVASPs ऐसी संस्थाएँ हैं, जो आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों (जैसे– क्रिप्टोकरेंसी, स्टेबलकॉइन या नॉन-फंजिबल टोकन) से संबंधित सेवाएँ प्रदान करती हैं, हालाँकि इनका मुख्यालय या परिचालन उस देश के अधिकार क्षेत्र से पृथक् होता है।
- मुख्य कार्य: ये प्लेटफॉर्म आमतौर पर अपने उपयोगकर्त्ताओं के लिये निम्नलिखित भूमिका निभाते हैं:
- विनिमय (एक्सचेंज): आभासी परिसंपत्तियों (जैसे– बिटकॉइन से एथेरियम) या फिएट करेंसी और आभासी परिसंपत्तियों (जैसे– INR से USDT) के बीच व्यापार की सुविधा प्रदान करना।
- हस्तांतरण (ट्रांसफर): आभासी परिसंपत्तियों को एक पते या खाते से दूसरे में हस्तांतरित करना।
- सुरक्षित रखना/प्रशासन (सेफकीपिंग/एडमिनिस्ट्रेशन): निजी कुंजियों को संगृहीत और प्रबंधित करने के लिये डिजिटल वॉलेट सेवाएँ प्रदान करना।
- वित्तीय सेवाएँ: किसी जारीकर्त्ता के आभासी परिसंपत्ति के प्रस्ताव या बिक्री से संबंधित वित्तीय सेवाओं में भाग लेना।
- संबद्ध चुनौतियाँ: इन संस्थाओं को वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) और भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) जैसे नियामकों द्वारा उजागर किया जाता है, इसमें "रेगुलेटरी अर्बिट्रेज” प्राथमिक कारण है। यह तब होता है जब:
- क्षेत्राधिकार संबंधी अंतराल: डिजिटल प्लेटफॉर्म अक्सर उन देशों से संचालित होते हैं जहाँ एंटी मनी लॉन्ड्रिंग (AML) या आतंकरोधी वित्तपोषण (CFT) से संबंधित कानून अपेक्षाकृत शिथिल होते हैं।
- जवाबदेही का अभाव: इनके उपयोगकर्त्ता के देश में कोई भौतिक कार्यालय नहीं होता है, ये स्थानीय कर संबंधी कानूनों (जैसे– भारत की वर्ष 2022 की आभासी परिसंपत्ति कर व्यवस्था) और रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को दरकिनार कर सकते हैं।
- गुमनामी (Anonymity): ये प्रायः उच्च स्तर की गुमनामी प्रदान करते हैं, जिसका उपयोग "स्कैम कंपाउंड" द्वारा या अवैध आय को सीमाओं के पार ले जाने के लिये किया जा सकता है।
- संचालन का तरीका: अवैध आय को oVASPs के माध्यम से आभासी परिसंपत्तियों में परिवर्तित किया जाता है और बाद में अनुपालन करने वाले भारतीय VASPs के माध्यम से घरेलू वित्तीय प्रणालियों में भेजा जाता है। उदाहरण के लिये, कैरिबियन स्थित एक ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म ने एंटी मनी लॉन्ड्रिंग (AML) ब्लाइंड स्पॉट का फायदा उठाकर सीमापार धनराशि हस्तांतरित की और बाद में इसे भारत में ब्लॉक कर दिया गया।
- भारत में नियामक आवश्यकताएँ: PMLA, 2002 और हाल के FIU जनादेशों के तहत भले ही कोई VASP "ऑफशोर" हो, यदि वह भारतीय उपयोगकर्त्ताओं को सेवा प्रदान करता है तो उसे निम्नलिखित का पालन करना होगा:
- अनिवार्य पंजीकरण: इन्हें FIU-IND के साथ एक रिपोर्टिंग यूनिट के रूप में पंजीकरण करना होगा।
- प्रधान अधिकारी (PO): इन्हें कानूनी और ट्रांजेक्शन मॉनिटरिंग के लिये संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करने के लिये भारत में एक प्रधान अधिकारी नियुक्त करना आवश्यक है।
- KYC अनुपालन: इन्हें "अपने ग्राहक को जानें" (नो योर कस्टमर) की समीक्षा करनी होगी और संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (STR) अधिकारियों को प्रस्तुत करनी होगी।
वर्चुअल एसेट्स
- परिचय: वर्चुअल एसेट (VA) मूल्य का एक डिजिटल प्रतिनिधित्व है, जिसे डिजिटल रूप से व्यापार, हस्तांतरण या भुगतान अथवा निवेश के लिये उपयोग किया जा सकता है। ये विशिष्ट डिजिटल परिसंपत्तियाँ हैं, जो क्रिप्टोग्राफी और वितरित लेज़र प्रौद्योगिकी (ब्लॉकचेन) पर आधारित होती हैं।
- वर्चुअल एसेट्स में “फिएट” मुद्राओं (जैसे– भारतीय रुपया का डिजिटल रूप — ई-रुपया या बैंक ऐप में रखा गया अमेरिकी डॉलर) के डिजिटल रूप शामिल नहीं होते।
- सामान्य उदाहरण:
- क्रिप्टोकरेंसी: ऐसी डिजिटल मुद्राएँ जो विनिमय (जैसे– बिटकॉइन, इथेरियम) के माध्यम के रूप में उपयोग की जाती हैं।
- स्टेबलकॉइंस: ऐसे वर्चुअल एसेट्स जिनका मूल्य किसी अन्य परिसंपत्ति (जैसे– अमेरिकी डॉलर या सोना) से जुड़ा होता है, ताकि मूल्य में उतार-चढ़ाव (जैसे– USDT, USDC) को कम किया जा सके।
- नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs): ये अद्वितीय डिजिटल परिसंपत्तियाँ होती हैं, जो किसी विशिष्ट वस्तु, जैसे– डिजिटल कला या संगीत के स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- गवर्नेंस टोकन: ऐसे परिसंपत्ति टोकन जो धारकों को किसी विशिष्ट ब्लॉकचेन परियोजना या प्रोटोकॉल के भविष्य से जुड़े निर्णयों पर मतदान का अधिकार देते हैं।
- भारत में VDA: भारत में वित्त अधिनियम, 2022 के तहत वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) शब्द का उपयोग करती है।
- कराधान: भारत में किसी भी वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) के हस्तांतरण से होने वाली आय पर 30% कर लगाया जाता है।
- TDS: वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) के हस्तांतरण पर किये गए भुगतान पर 1% स्रोत पर कर कटौती (TDS) लागू होती है, ताकि लेन-देन के ट्रेल को ट्रैक किया जा सके।
- PMLA कवरेज: वर्ष 2023 से वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) लेन-देन धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अंतर्गत आते हैं। इसका अर्थ है कि क्रिप्टो एक्सचेंजों को ‘अपने ग्राहक को जानें’ (KYC) मानकों का पालन करना होता है और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट वित्तीय आसूचना इकाई–भारत को करनी होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. FATF 2026 रिपोर्ट में उल्लिखित 'वर्चुअल एसेट लैब' क्या है?
यह भारत की एक विशेष प्रणाली है जो AI, ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस और स्वचालित निगरानी का उपयोग करके अपंजीकृत तथा उच्च-जोखिम वाले अपतटीय वर्चुअल एसेट प्लेटफॉर्म का पता लगाती है।
2. भारत में VASP के प्रधान अधिकारी (POs) के लिये निवास की क्या आवश्यकता है?
FIU यह अनिवार्य करता है कि प्रिंसिपल ऑफिसर भारत में स्थित हों, ताकि लेन-देन की निगरानी और धन शोधन निवारण अधिनियम के अनुपालन के लिये प्रत्यक्ष कानूनी जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
3. 'सहयोग पोर्टल' डिजिटल सामग्री को विनियमित करने में किस प्रकार सहायता करता है?
गृह मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया यह प्लेटफॉर्म अवैध सामग्री के लिये मध्यस्थों को टेकडाउन नोटिस भेजने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है, इसका उपयोग पहले ही 85 गैर-अनुपालन करने वाले oVASP URL को ब्लॉक करने हेतु किया जा चुका है।
4. 'सहयोग पोर्टल' डिजिटल सामग्री को विनियमित करने में किस प्रकार सहायता करता है?
वर्चुअल एसेट्स मूल्य के निजी और विकेंद्रीकृत डिजिटल रूप होते हैं (जैसे बिटकॉइन), जबकि ई-रुपया जैसी CBDC केंद्रीय बैंक (RBI) द्वारा जारी की गई आधिकारिक और वैध मुद्रा होती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रश्न. ‘‘ब्लॉकचेन तकनीकी’’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2020)
- यह एक सार्वजनिक खाता है, जिसका हर कोई निरीक्षण कर सकता है, परंतु जिसे कोई भी एक उपभोक्ता नियंत्रित नहीं करता।
- ब्लॉकचेन की संरचना और डिज़ाइन ऐसी है कि इसका समूचा डेटा केवल क्रिप्टोकरेंसी के विषय में है।
- ब्लॉकचेन के आधारभूत वैशिष्ट्यों पर आधारित अनुप्रयोगों को बिना किसी व्यक्ति की अनुमति के विकसित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 1 और 3
उत्तर: (d)
प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये: (2018)
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कभी-कभी समाचारों में आने वाले शब्द |
संदर्भ/विषय |
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1. |
बेल II प्रयोग |
कृत्रिम बुद्धि |
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2. |
ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी |
डिजिटल/क्रिप्टोकरेंसी |
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3. |
CRISPR–Cas9 |
कण भौतिकी |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
