प्रारंभिक परीक्षा
वर्चुअल डिजिटल एसेट्स हेतु दिशा-निर्देश
- 17 Jan 2026
- 49 min read
फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) ने भारत के क्रिप्टोकरेंसी ईकोसिस्टम में वित्तीय अपराधों को रोकने के लिये आभासी डिजिटल परिसंपत्ति (VDAs) सेवा प्रदाताओं हेतु नवीन एंटी-मनी लॉन्डरिंग (AML) और अपने ग्राहक को जानो (KYC) दिशा-निर्देश जारी किये हैं।
आभासी डिजिटल परिसंपत्ति के लिये नए FIU-IND दिशा-निर्देश क्या हैं?
- सुधारित सत्यापन: उपयोगकर्त्ता पंजीकरण के दौरान लाइवनेस डिटेक्शन (आँख झपकना/सिर हिलाना) के साथ अनिवार्य लाइव सेल्फी और भौगोलिक ट्रैकिंग (अक्षांश, देशांतर, समय-टैंप, IP) लागू की गई है ताकि स्थिर फोटो या डीपफेक धोखाधड़ी को रोका जा सके।
- बहु-स्तरीय KYC: इसमें PAN के साथ द्वितीयक पहचान-पत्र (आधार/पासपोर्ट/मतदाता पहचान- पत्र), ईमेल/मोबाइल के लिये OTP सत्यापन और रु. 1 के लेनदेन के माध्यम से “पैनी-ड्रॉप” बैंक खाता पुष्टीकरण आवश्यक है।
- जोखिम-आधारित निगरानी: उच्च-जोखिम वाले ग्राहकों के लिये KYC हर 6 महीने में और अन्य ग्राहकों हेतु वार्षिक रूप से अपडेट किया जाएगा, उन संस्थाओं के लिये उन्नत सत्यापन (Enhanced Due Diligence) आवश्यक है, जो टैक्स हैवन, FATF ग्रे/ब्लैक लिस्ट, राजनीतिक रूप से प्रभावित व्यक्ति (PEPs) या गैर-लाभकारी संगठन (NPOs) से जुड़ी हों।
- अस्पष्ट वित्तीय उपकरणों पर सख्त नियंत्रण: इनिशियल कॉइन ऑफरिंग (ICOs) और इनिशियल टोकन ऑफरिंग (ITOs) को पूरी तरह हतोत्साहित किया गया है और अनोनिमिटी (पहचानरहित स्थिति) बढ़ाने वाले क्रिप्टो टंबतंबलर्स और मिक्सर्स की सुविधा प्रदान करना निषिद्ध किया गया है।
- क्रिप्टो टंबलर्स और मिक्सर्स ऐसी सेवाएँ हैं जो कई उपयोगकर्त्ताओं की धनराशि को एक साथ मिलाकर और उसे अव्यवस्थित (स्क्रैंबल) करके पुनः वितरित करती हैं, जिससे सार्वजनिक ब्लॉकचेन लेज़र पर लेनदेन की पहचान और उसका पता लगाना कठिन हो जाता है।
- नियामक अनुपालन: क्रिप्टो एक्सचेंजों को PMLA रिपोर्टिंग एंटिटी के रूप में पंजीकरण करना, ग्राहक और लेनदेन के रिकॉर्ड 5 वर्षों तक बनाए रखना और संदिग्ध लेनदेन की जानकारी FIU को रिपोर्ट करना अनिवार्य है।
- क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो उपयोगकर्त्ताओं को क्रिप्टोकरेंसी को अन्य डिजिटल एसेट्स या पारंपरिक फिएट मुद्रा के साथ खरीदने, बेचने और ट्रेड करने की अनुमति देता है। उदाहरण: कॉइनबेस।
आभासी डिजिटल परिसंपत्ति (VDA) क्या हैं?
- परिचय: आभासी डिजिटल परिसंपत्ति (VDA) क्रिप्टोग्राफिक तकनीक द्वारा डिजिटल रूप में प्रदर्शित मूल्य हैं, जिन्हें भारत में तेज़ वृद्धि के संदर्भ में कराधान, वित्तीय सत्यनिष्ठा और मनी‑लॉन्ड्रिंग जोखिमों को नियंत्रित करने के लिये औपचारिक रूप से परिभाषित तथा विनियमित किया गया है।
- VDA के मुख्य प्रकार:
- क्रिप्टोकरेंसी: एक आदान-प्रदान के साधन के रूप में प्रयुक्त डिजिटल मुद्राएँ।
- नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs): ऐसे अद्वितीय डिजिटल एसेट्स जो कला, संग्रहणीय वस्तुओं या वर्चुअल सामान के स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- यूटिलिटी टोकन (Utility Tokens): ब्लॉकचेन ईकोसिस्टम के भीतर विशिष्ट सेवाओं या प्लेटफॉर्म तक पहुँच प्रदान करते हैं।
- एसेट/सिक्योरिटी टोकन (Asset/Security Tokens): वास्तविक दुनिया की संपत्ति में स्वामित्व या हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- भारत में कानूनी परिभाषा: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(47A) के तहत वैधानिक रूप से परिभाषित, जिसे वित्त अधिनियम, 2022 के माध्यम से शामिल किया गया।
- इसमें कोई भी जानकारी, कोड, संख्या या टोकन शामिल है (भारतीय और विदेशी मुद्रा को छोड़कर) जो क्रिप्टोग्राफिक माध्यम से उत्पन्न किया गया हो तथा डिजिटल मूल्य का प्रतिनिधित्व करता हो।
- यह स्पष्ट रूप से नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs) और केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किसी भी अन्य डिजिटल एसेट को कवर करता है। इसका मुख्य रूप से क्रिप्टोकरेंसी (जैसे– बिटकॉइन, इथेरियम), NFTs तथा इसी तरह के टोकन पर विस्तार होता है।
- भारत में नियामक और कराधान संबंधी ढाँचा:
- कराधान: VDA (वर्चुअल डिजिटल एसेट) के हस्तांतरण से प्राप्त आय पर 30% के एकसमान दर से कर (1 अप्रैल, 2022 से प्रभावी)। अधिग्रहण लागत के अलावा कोई कटौती अनुमत नहीं; नुकसान की भरपाई अथवा आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
- आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194S के तहत निर्दिष्ट ट्रांजेक्शन पर 1% TDS लागू।
- आतंकरोधी वित्तपोषण/मनी लॉन्ड्रिंग पर्यवेक्षण: मार्च 2023 से VDA गतिविधियाँ धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के अंतर्गत आती हैं। क्रिप्टो एक्सचेंज और वॉलेट प्रदाताओं को रिपोर्टिंग इकाई माना जाता है, उन्हें FIU-IND के साथ पंजीकरण करना अनिवार्य है।
- कराधान: VDA (वर्चुअल डिजिटल एसेट) के हस्तांतरण से प्राप्त आय पर 30% के एकसमान दर से कर (1 अप्रैल, 2022 से प्रभावी)। अधिग्रहण लागत के अलावा कोई कटौती अनुमत नहीं; नुकसान की भरपाई अथवा आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
वित्तीय आसूचना इकाई – भारत (FIU-IND)
- परिचय: FIU-IND भारत की केंद्रीय एजेंसी है, जो भारत में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण का सामना करने के लिये वित्तीय खुफिया जानकारी प्राप्त करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने के लिये ज़िम्मेदार है।
- संस्थागत स्थिति: यह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करती है और अपनी शक्तियाँ धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) से प्राप्त करती है। यह प्रत्यक्ष रूप से वित्तमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक आसूचना परिषद (EIC) को रिपोर्ट करती है।
- क्रिप्टो क्षेत्र में नियामक भूमिका: FIU-IND PMLA के तहत क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के लिये एकल-बिंदु नियामक है, जो अनिवार्य पंजीकरण, KYC अनुपालन और संदिग्ध ट्रांजेक्शन की रिपोर्टिंग की आवश्यकता को दर्शाती है।
- भारत में क्रिप्टोकरेंसी कानूनी निविदा नहीं है, लेकिन यह आय-कर कानून के अंतर्गत कर योग्य है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न. "ब्लॉकचेन तकनीकी" के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2020)
- यह एक सार्वजनिक खाता है जिसका हर कोई निरीक्षण कर सकता है, परंतु जिसे कोई भी एक उपभोक्ता नियंत्रित नहीं करता।
- ब्लॉकचेन की संरचना और अभिकल्प ऐसा है कि इसका समूचा डेटा केवल क्रिप्टोकरेंसी के विषय में है।
- ब्लॉकचेन के आधारभूत वैशिष्ट्यों पर आधारित अनुप्रयोगों को बिना किसी व्यक्ति की अनुमति के विकसित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2
(d) केवल 1 और 3
उत्तर: (d)
प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये: (2018)
कभी-कभी समाचारों में आने वाले शब्द संदर्भ/विषय
- बेल II प्रयोग — कृत्रिम बुद्धि
- ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी —डिजिटल/क्रिप्टो मुद्रा
- CRISPR – Cas9 — कण भौतिकी
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
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