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गिलोटिन प्रक्रिया

  • 19 Mar 2026
  • 13 min read

स्रोत: द हिंदू 

लोकसभा ने गिलोटिन प्रक्रिया का उपयोग करते हुए वर्ष 2026-27 के लिये 53 लाख करोड़ रुपए से अधिक के अनुदान की मांग को मंज़ूरी दी और अधिकांश मंत्रालयवार व्यय को विस्तृत संसदीय चर्चा के बिना पारित किया।

  • गिलोटिन का अर्थ: संसदीय अभ्यास में गिलोटिन का अर्थ है वित्तीय मामलों को समूहबद्ध और त्वरित तरीके से आगे बढ़ाना, जिसमें समय की कमी के कारण सभी लंबित अनुदान की मांग को बिना चर्चा के एक साथ मतदान के लिये रखा जाता है।
  • बजट प्रक्रिया का संदर्भ: बजट प्रस्तुत होने के बाद संसद लगभग तीन सप्ताह के अवकाश में चली जाती है, जिसके दौरान विभाग-संबंधित स्थायी समितियाँ अनुदान की मांग की समीक्षा करती हैं।
    • पुनः सत्र शुरू होने पर, बिज़नेस एडवाइज़री कमेटी (BAC) चयनित प्रमुख मंत्रालयों पर चर्चा का कार्यक्रम निर्धारित करती है।
  • गिलोटिन का आवेदन: समय की कमी या लगातार व्यवधानों के कारण, अध्यक्ष चर्चा के अंतिम दिन गिलोटिन प्रक्रिया लागू करते हैं और शेष सभी अनुदान की मांग को एक साथ मतदान के लिये रख दी  जाती है, चाहे उन पर चर्चा की गई हो या नहीं।
  • प्रभाव: गिलोटिन प्रक्रिया बजट को समय पर पारित करने और वित्तीय संकट को रोकने में सहायक होती है, लेकिन यह बड़े सार्वजनिक व्यय पर संसदीय जाँच को कम कर देती है, जिससे जवाबदेही को लेकर चिंताएँ उठती हैं।
  • गिलोटिन के बाद का चरण: गिलोटिन प्रक्रिया लागू होने के बाद, वित्त विधेयक और अप्रोप्रिएशन बिल पारित किये जाते हैं, जो भारत की संचित निधि से व्यय करने की अनुमति प्रदान करते हैं।
  • संस्थागत महत्त्व: यह प्रक्रिया केवल लोकसभा तक सीमित है, जिसके पास वित्तीय अधिकार (पर्स) का नियंत्रण होता है, जबकि राज्यसभा केवल अनुदान की मांगों पर चर्चा कर सकती है और सुझाव दे सकती है।

और पढ़ें: भारतीय विधायिका में गिलोटिन

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