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भारतीय राजनीति

वित्त विधेयक 2020

  • 24 Mar 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये

वित्त विधेयक, धन विधेयक, अनिवासी भारतीय, उदारीकृत प्रेषण योजना

मेन्स के लिये:

सार्वजानिक वित्त से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

कोरोनावायरस (COVID-19) के खतरे के बीच लोकसभा ने सर्वसम्मति से वित्त विधेयक, 2020 (Finance Bill, 2020) को पारित कर दिया। 

वित्त विधेयक 2020 से संबंधित प्रमुख बिंदु

  • वित्त विधेयक 2020 के अनुसार, भारत में अनिवासी भारतीयों (Non-Resident Indians-NRIs) पर 15 लाख रूपए तक की आय सीमा तक टैक्स नहीं लगाया जाएगा। ध्यातव्य है कि यह सीमा तब लागू होगी जब वह वह व्यक्ति 120 दिनों या उससे अधिक समय तक भारत में रहकर एक डीम्ड रेजिडेंट (Deemed Resident) के रूप में अर्हता प्राप्त कर लेता है। 
    • इस प्रकार डीम्ड रेजिडेंट पर कर चुकाने की ज़िम्मेदारी केवल भारत में नियंत्रित व्यवसाय या भारत में स्थापित पेशे के संबंध में होगी और वह भी केवल तब जब ऐसी आय 15 लाख रुपए से अधिक हो। 
    • ध्यातव्य है कि 1 फरवरी, 2020 को प्रस्तुत किये गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आवासीय स्थिति (Residential Status) के आधार पर व्यक्तियों की कर-क्षमता का निर्धारण करने के लिये मापदंड और अवधि को संशोधित किया था। संशोधित नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति को तब भारत का साधारण निवासी (Resident) माना जाएगा, जब वह पिछले वित्तीय वर्ष में कम-से-कम 120 दिनों के लिये भारत में रहा हो, यह अवधि पूर्व में 182 दिन थी। 
  • वित्त विधेयक 2020 के अनुसार, यदि वित्तीय संस्थानों से शिक्षा के लिये धन उधार लिया जाता है और उसे उदारीकृत प्रेषण योजना (Liberalised Remittance Scheme-LRS) के माध्यम से विदेश में हस्तांतरित किया जाता है तो धन के स्रोत पर लगने वाले कर संग्रह (Tax Collected at Source-TCS) की दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 0.5 प्रतिशत कर दिया गया है।

उदारीकृत प्रेषण योजना 

(Liberalised Remittance Scheme-LRS) 

  • उदारीकृत प्रेषण योजना भारत के निवासियों को एक वित्तीय वर्ष के दौरान किसी दूसरे देश में निवेश तथा व्यय करने हेतु एक निश्चित राशि को प्रेषित करने की अनुमति प्रदान करती है। 
  • यह योजना RBI के तत्वावधान में फरवरी, 2004 में 25,000 डॉलर की सीमा के साथ प्रारंभ की गई थी। 
  • यदि किस व्यक्ति ने बीते तीन वर्षों में आयकर रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल नहीं किया है, तो उसके द्वारा 20 लाख से 1 करोड़ रुपए की नकद निकासी पर 2 प्रतिशत का टीडीएस (TDS) लागू किया जाएगा। इसके अलावा यदि वह व्यक्ति 1 करोड़ रूपए से अधिक की नकद निकासी करता है तो वह 5 प्रतिशत टीडीएस (TDS) हेतु उत्तरदायी होगा।
    • TDS की संकल्पना के अनुसार एक व्यक्ति, जो किसी अन्य व्यक्ति को निर्दिष्ट प्रकार का भुगतान करने के लिये उत्तरदायी हैं, को आय के स्रोत पर कर कटौती करनी होगी तथा इसे केंद्र सरकार के खाते में प्रेषित करना होगा।
  • वित्त विधेयक 2020 के तहत सरकार ने ग्लोबल पेंशन फंड (Global Pension Fund) को भी कर छूट की सीमा में शामिल कर दिया है।
    • इससे पूर्व सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में संप्रभु धन निधि द्वारा बुनियादी ढाँचे में किये गए निवेश पर पूंजीगत लाभ, संयोजन और ब्याज पर 100 प्रतिशत कर छूट की घोषणा की थी।
  • लाभांश आय पर 15 प्रतिशत का अधिभार लगाया गया है।
  • सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) को क्रमशः 18 रुपए और 12 रुपए प्रति लीटर कर दिया है। गौरतलब है कि इससे पूर्व यह पेट्रोल के लिये 10 रुपए प्रति लीटर और डीजल के लिये 4 रुपए प्रति लीटर था।

वित्त विधेयक (Finance Bill)

  • केंद्रीय बजट की प्रस्तुति के पश्चात् लोकसभा में प्रत्येक वर्ष वित्तीय विधेयक प्रस्तुत किया जाता है, जो कि भारत सरकार के वित्तीय प्रस्तावों पर प्रभाव डालता है।
  • वित्त विधेयक में उन सभी विधेयकों को शामिल किया जाता है, जो प्रत्यक्ष रूप से वित्त से संबंधित मामलों से संबंधित होते हैं, जैसे- सरकार के व्यय अथवा सरकार के राजस्व से संबंधित व्यय।
  • किसी भी कर को प्रत्यारोपित करने अथवा उसमें परिवर्तन करने जैसे विषय वित्त विधेयक के सामान्य विषय हैं। वित्त विधेयक मुख्यतः 3 प्रकार होते हैं:
    • धन विधेयक - अनुच्छेद 110
    • वित्त विधेयक (I) - अनुच्छेद 117 (1)
    • वित्त विधेयक (II) - अनुच्छेद 117 (2)
  • सामान्यतः यह कहा जाता है कि प्रत्येक धन विधेयक वित्त विधेयक होता है, किंतु प्रत्येक वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होता।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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