रैपिड फायर
डार्क फ्लीट
- 19 Mar 2026
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चीन के लिये रवाना हो रहा एक प्रतिबंधित रूसी टैंकर (एक्वा टाइटन), जो 'डार्क फ्लीट' का हिस्सा था, को मध्य-मार्ग से भारत की ओर मोड़ दिया गया।
- डार्क फ्लीट: 'डार्क फ्लीट' या 'शैडो फ्लीट' पुराने, प्रायः बिना बीमा वाले वाणिज्यिक जहाज़ों के बेड़े को संदर्भित करता है, जिनका उपयोग विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के अधीन पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन के लिये किया जाता है, मुख्यतः रूस, ईरान और वेनेज़ुएला से।
- संचालन का तरीका:
- AIS निष्क्रिय करना: ये जहाज़ सैटेलाइट ट्रैकिंग से बचने के लिये "गो डार्क" हेतु नियमित रूप से अपनी स्वचालित पहचान प्रणाली (AIS) ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं।
- जहाज़-से-जहाज़ (STS) स्थानांतरण: ये मध्य-महासागर में जोखिम भरे हस्तांतरण में लिप्त रहते हैं ताकि प्रतिबंधित कच्चे तेल को गैर-प्रतिबंधित तेल के साथ मिलाया जा सके, जिससे इसकी वास्तविक उत्पत्ति छिप जाए।सुविधा के लिये ध्वज का प्रयोग: ये कमज़ोर समुद्री निगरानी वाले देशों (जैसे– पनामा, लाइबेरिया) के तहत पंजीकरण कराते हैं और स्वामित्व छुपाने के लिये प्रायः शेल कंपनियों का उपयोग करते हैं।
- समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) के अनुसार, सभी जहाज़ों को अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र को इंगित करने वाला एक ध्वज फहराना होता है, जो जहाज़ की राष्ट्रीयता निर्धारित करता है। हालाँकि, अंतर्राष्ट्रीय जल (उच्च समुद्र) में सीमित प्रवर्तन शैडो फ्लीट को नियामक धूसर क्षेत्रों का फायदा उठाने और निगरानी से बचने की अनुमति देता है।
- डार्क फ्लीट से संबंधित चिंताएँ: डार्क फ्लीट के उपयोग से कम पारदर्शिता, नियामक अंतराल, पर्यावरणीय जोखिम, वैश्विक प्रतिबंध प्रवर्तन तंत्र के कमज़ोर होने की चिंताएँ बढ़ती हैं और रियायती कच्चे तेल से लागत संबंधी लाभ के बावज़ूद भारत को भू-राजनीतिक जोखिमों और अनुपालन संबंधी चुनौतियों के संपर्क में लाता है।
- S&P ग्लोबल और यूक्रेनी खुफिया जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में रूस ने अपने शैडो टैंकर फ्लीट पर भारी निर्भरता दिखाई, जिसमें भारत मुख्य गंतव्य था, जिसने शैडो टैंकरों के माध्यम से रूसी कच्चे तेल की बिक्री का लगभग 5.4 मिलियन टन (या 55%) आयात किया।
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