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जैव विविधता और पर्यावरण

वर्षांत समीक्षा-2025: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

  • 05 Jan 2026
  • 88 min read

स्रोत: पी. आई. बी.

चर्चा में क्यों?

वर्षांत समीक्षा 2025 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने भारत की पर्यावरण संरक्षण, जलवायु समुत्थानशीलता और संस्थागत सुधारों में प्रमुख उपलब्धियों का विस्तार से विवरण प्रस्तुत किया।

  • दस्तावेज़ 2025 को राष्ट्र के सतत और पारिस्थितिक रूप से पुनर्स्थापकीय विकास की दिशा में संक्रमण को सुदृढ़ करने का वर्ष बताता है।

सारांश

  • भारत ने वन क्षेत्र, वन्यजीव अभयारण्य और शहरी हरित क्षेत्र को बढ़ाया, जिससे उसे वनों में वृद्धि के लिये वैश्विक पहचान प्राप्त की।
  • मुख्य सुधारों में ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम, वन संशोधन नियम, परिवेश 2.0 और पर्यावरणीय मंज़ूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना शामिल थे।
  • भविष्य की प्राथमिकताएँ कानूनी प्रवर्तन, सर्कुलर इकोनॉमी, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु-सहिष्णु ढाँचा और समुदाय-नेतृत्व वाले पारिस्थितिक तंत्र पुनर्स्थापना पर केंद्रित है।

वर्ष 2025 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की मुख्य उपलब्धियाँ क्या हैं?

  • वन संरक्षण और हरित आवरण: भारत ने वन क्षेत्र में वैश्विक रैंकिंग में 9वाँ स्थान प्राप्त किया (FAO 2025) और वार्षिक शुद्ध वन वृद्धि में विश्व में तीसरे स्थान पर बना रहा।
    • अरावली परिदृश्य पुनर्स्थापन के लिये विस्तृत कार्ययोजना जारी की गई और वर्ष 2025 में 36,025 हेक्टेयर क्षेत्र का पुनर्स्थापन किया गया।
  • वन्यजीव संरक्षण: नया माधव टाइगर रिज़र्व (मध्य प्रदेश) घोषित किया गया; छठा अखिल भारतीय बाघ आकलन अभियान शुरू किया गया। हाथी अभयारण्य 2025 में बढ़कर 33 हो गए (2014 में 26 थे)।
  • जलवायु परिवर्तन में नेतृत्व: जून 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधनों से स्थापित ऊर्जा क्षमता 50% पार कर गई, जो निर्धारित लक्ष्य (2030) से 5 साल पहले है। कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को लागू किया गया।
  • वायु गुणवत्ता और शहरी पर्यावरण: 103 शहरों में PM10 स्तर में कमी दर्ज की गई (2024-25 की तुलना में 2017-18 से), 22 शहरों ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा किया
    • नगर वन योजना के तहत वर्ष 2025 में 75 नई परियोजनाएँ स्वीकृत की गईं।
  • तटीय, आर्द्रभूमि एवं मैंग्रोव संरक्षण: MISHTI कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 में 4,536 हेक्टेयर मैंग्रोव क्षेत्र का पुनर्स्थापन किया गया। 
    • 11 नए रामसर स्थलों को जोड़ा गया, जिससे भारत की कुल संख्या 96 हो गई, जो एशिया में सबसे अधिक है। उदयपुर और इंदौर को भारत के पहले रामसर वेटलैंड शहरों के रूप में नामित किया गया है।
    • वर्ष 2025–26 तक 18 समुद्र तटों को ब्लू फ्लैग प्रमाणन प्राप्त हुआ।
  • अपशिष्ट प्रबंधन एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था: विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) पोर्टल पर 71,401 उत्पादक और 4,447 पुनर्चक्रणकर्ता पंजीकृत हैं (दिनांक 03.12.2025 तक)लगभग 375.11 लाख टन अपशिष्ट का पुनर्चक्रण किया गया।
  • पर्यावरणीय जागरूकता: मिशन LiFE के अंतर्गत 34 लाख से अधिक LiFE कार्यक्रमों के माध्यम से 6 करोड़ से अधिक प्रतिभागियों को जोड़ा गया तथा मेरी LiFE पोर्टल के अनुसार 4.96 करोड़ प्रतिज्ञाएँ ली गईं।

वर्ष 2025 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा किये गए प्रमुख सुधार क्या हैं?

  • GCP के लिये संशोधित ढाँचा: संशोधित ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (GCP) में अवनत वन भूमि के पुनर्स्थापन के लिये सार्वजनिक और निजी संस्थाओं की भागीदारी को बढ़ाया गया।
    • ग्रीन क्रेडिट केवल 5 वर्ष बाद जारी किये जाते हैं, जब ≥40% वितान (कैनोपी) घनत्व प्राप्त हो (5 वर्ष से अधिक आयु वाले प्रत्येक वृक्ष के लिये  1 क्रेडिट)।
  • वन (संरक्षण एवं संवर्द्धन) संशोधन नियम, 2025: अवनत/सरकारी/रिकॉर्डेड वन क्षेत्रों (≤0.4 वितान) में भूमि बैंक निर्माण का दायरा बढ़ाया गया।
    • महत्त्वपूर्ण/रणनीतिक/गहन/परमाणु खनिज खनन के अनुमोदन को सरल बनाया गया और इसके लिये प्रतिपूरक वनीकरण (CA) मानदंडों को बढ़ाया गया।
  • पर्यावरण संरक्षण (प्रदूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025: प्रदूषित स्थलों की पहचान, मूल्यांकन और सुधार के लिये रूपरेखा प्रदान की गई।
  • पर्यावरण ऑडिट नियम, 2025: सत्यापन और अनुपालन ऑडिट के लिये प्रमाणित तृतीय-पक्ष पर्यावरण ऑडिटर्स की कैडर पेश की गई, जिससे विश्वास आधारित अनुपालन को मज़बूत किया गया।
  • PARIVESH 2.0: PARIVESH 2.0 ने क्लियरेंस प्रबंधन में पूर्ण स्वचालन प्राप्त किया और वास्तविक समय निर्णय समर्थन के लिये GIS को एकीकृत किया। यह एक सिंगल-विंडो इंटरफेस के रूप में कार्य करता है, जो PM गति शक्ति NMP, राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS), CAMPA की डिजिटल भुगतान गेटवे और QCI-NABET के मान्यता पोर्टल से जुड़ा है।
  • पर्यावरणीय मंज़ूरी एवं कारोबार की सुगमता में सुधार: खनिज परियोजनाओं को ‘छोटे’ से ‘मुख्य’ श्रेणी में पुनर्वर्गीकृत किया गया तथा 5 हेक्टेयर तक के पट्टेदार क्षेत्र को EIA अधिसूचना, 2006 के तहत श्रेणी ‘B2’ में आँका गया।
    • औद्योगिक परिसरों/पार्कों और व्यक्तिगत उद्योगों के लिये ग्रीन बेल्ट आवश्यकताओं को प्रदूषण क्षमता के आधार पर युक्तिसंगत बनाया गया।

भारत में पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने हेतु किन उपायों की आवश्यकता है?

  • कानूनी व्यवस्था और प्रवर्तन को सशक्त बनाना: प्रदूषण की निगरानी के लिये AI आधारित सेंसरों को सुदृढ़ किया जाए, साथ ही नियामक संस्थाओं के स्वतंत्र ऑडिट के माध्यम से जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया जाए। इसके अतिरिक्त स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को एक स्वतंत्र मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी जाए तथा प्रदूषक भुगतान सिद्धांत जैसे नियमों को विधिक रूप से संहिताबद्ध किया जाएँ।
  • हरित वित्तपोषण एवं आर्थिक साधन: एक सुदृढ़ घरेलू कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग सिस्टम (CCTS) विकसित किया जाए और इस्पात, सीमेंट तथा ताप विद्युत जैसे उच्च प्रदूषणकारी क्षेत्रों के लिये ऑफसेट को अनिवार्य बनाया जाए, साथ ही संप्रभु हरित बॉण्डों का विस्तार किया जाए। इसके अलावा, यह अनिवार्य किया जाए कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) व्यय का कम-से-कम 50% पर्यावरणीय परियोजनाओं पर व्यय हो।
  • शहरी नियोजन: जलवायु-केंद्रित शहरी नियोजन को लागू किया जाए, जिसमें अनिवार्य ग्रीन बेल्ट, नेट-ज़ीरो भवन संहिता और मिश्रित भूमि उपयोग शामिल हों। इसके लिये स्पंज सिटी ढाँचे और प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) को ब्लू–ग्रीन अवसंरचना हेतु मास्टर प्लानों में संस्थागत रूप से शामिल किया जाए। AMRUT 2.0 और स्मार्ट सिटीज़ मिशन जैसी पहलों को सतत जल निकासी, शहरी वानिकी और नवीकरणीय ऊर्जा आधारित सार्वजनिक परिवहन के साथ एकीकृत किया जाए।
  • तटीय एवं वन क्षेत्रीय अनुकूलन विकसित करना: वन धन विकास केंद्रों को वनीकरण कार्यक्रमों के साथ एकीकृत किया जाए तथा अवनत पारिस्थितिकी तंत्रों के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन को प्राथमिकता दी जाए।
  • ऊर्जा, परिवहन, कृषि एवं उद्योग में संक्रमण: इलेक्ट्रिक वाहनों, हाइड्रोजन ईंधन-सेल वाहनों और बायो-CNG बसों को बढ़ावा देकर परिवहन क्षेत्र का डी-कार्बोनाइज़ेशन करना। परिशुद्ध कृषि, संरक्षण जुताई और जलवायु-सहिष्णु बीज किस्मों के माध्यम से जलवायु-स्मार्ट कृषि को प्रोत्साहित करना, साथ ही महत्त्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण हेतु घरेलू ‘अर्बन माइनिंग’ क्लस्टरों का विकास करना।

निष्कर्ष:

वर्ष 2025 में भारत के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने हरित आवरण, वन्यजीव संरक्षण और जलवायु कार्रवाई में उल्लेखनीय प्रगति को सुदृढ़ किया, साथ ही महत्त्वपूर्ण नियामक एवं डिजिटल शासन सुधारों की शुरुआत की गई, जिससे पारिस्थितिक स्थिरता को रूपांतरकारी आर्थिक विकास के साथ एकीकृत करने में देश को वैश्विक नेतृत्व की स्थिति प्राप्त हुई।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. भारत के पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण तथा जलवायु-सहिष्णु अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक नीतिगत उपायों का मूल्यांकन कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. FAO 2025 के अनुसार वन क्षेत्र के मामले में भारत की वैश्विक रैंकिंग क्या है? 
भारत वन क्षेत्र के मामले में विश्व स्तर पर 9वें स्थान पर है और वार्षिक शुद्ध वन लाभ (Annual Net Forest Gain) के संदर्भ में तीसरे स्थान पर है।

2. 2025 में भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में कौन-सा महत्त्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किया गया? 
जून 2025 में गैर-जीवाश्म ईंधनों से स्थापित क्षमता 50% से अधिक है। भारत ने अपने इस NDC लक्ष्य को वर्ष 2030 की निर्धारित समय-सीमा से पाँच साल पहले ही प्राप्त कर लिया है।

3. वर्ष 2025 में मिष्टी (MISHTI) कार्यक्रम के तहत कितने मैंग्रोव का पुनरुद्धार किया गया? 
वर्ष 2025 में MISHTI कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 4,536 हेक्टेयर मैंग्रोव क्षेत्र का पुनरुद्धार (Restoration) किया गया है।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः (2023)

  1. भारत में जैवविविधता प्रबंधन समितियाँ नागोया प्रोटोकॉल के उद्देश्यों को हासिल करने के लिये प्रमुख कुंजी है।   
  2. जैवविविधता प्रबंधन समितियों के अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत जैविक संसाधनों तक पहुँच के लिये संग्रह शुल्क लगाने की शक्ति सहित पहुँच और लाभ सहभागिता निर्धारित करने के लिये महत्त्वपूर्ण प्रकार्य हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c)


प्रश्न. भारतीय कृषि परिस्थितियों के संदर्भ में ‘संरक्षण कृषि’ की संकल्पना का महत्त्व बढ़ जाता है। निम्नलिखित में से कौन-कौन से संरक्षण कृषि के अंतर्गत आते हैं? (2018)

  1. एकधान्य कृषि पद्धतियों का परिहार  
  2. न्यूनतम जोत को अपनाना  
  3. बागानी फसलों की खेती का परिहार  
  4. मृदा धरातल को ढकने के लिये फसल अवशिष्ट का उपयोग 
  5. स्थानिक एवं कालिक फसल अनुक्रमण/फसल आवर्तनों को अपनाना

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) 1, 3 और 4

(b) 2, 3, 4 और 5

(c) 2, 4 और 5

(d) 1, 2, 3 और 5

उत्तर: (c)


मेन्स: 

प्रश्न. ‘’भारत में आधुनिक कानून की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पर्यावरणीय समस्याओं का संविधानीकरण है।" सुसंगत वाद विधियों की सहायता से इस कथन की विवेचना कीजिये। (150 शब्दों में उत्तर दीजिये)

प्रश्न.. भारत में जैवविविधता किस प्रकार अलग-अलग पाई जाती है? वनस्पतिजात और प्राणिजात के संरक्षण में जैवविविधता अधिनियम, 2002 किस प्रकार सहायक है? (2018)

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