भारतीय अर्थव्यवस्था
फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026
- 14 Mar 2026
- 107 min read
प्रिलिम्स के लिये: फिसकल हेल्थ इंडेक्स, नीति आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP), राजकोषीय घाटा
मेन्स के लिये: राजकोषीय संघवाद और भारत की सार्वजनिक वित्त संरचना में राज्यों की भूमिका, भारतीय राज्यों में ऋण स्थिरता एवं राजकोषीय अनुशासन, राज्य वित्त में सुधार हेतु फिसकल हेल्थ इंडेक्स का महत्त्व
चर्चा में क्यों?
नीति आयोग ने भारतीय राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन का मूल्यांकन करने हेतु फिसकल हेल्थ इंडेक्स (Fiscal Health Index—FHI) 2026 का दूसरा संस्करण जारी किया है। यह इंडेक्स राजकोषीय स्थिरता का मूल्यांकन करने, राज्य वित्त की तुलना करने और सुधारों को दिशा देने के लिये एक डेटा-आधारित रूपरेखा प्रदान करता है।
- यह रिपोर्ट इसलिये महत्त्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वैश्विक सार्वजनिक ऋण 2024 में बढ़कर लगभग 102 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जिससे विश्वभर में सार्वजनिक वित्त पर दबाव बढ़ा है।
सारांश
- नीति आयोग द्वारा जारी फिसकल हेल्थ इंडेक्स (FHI) 2026, व्यय की गुणवत्ता, राजस्व एकत्रीकरण, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता - इन पाँच स्तंभों का उपयोग करके भारतीय राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है एवं इसमें उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों को शामिल करने के लिये कवरेज का विस्तार किया गया है, जो राजकोषीय अनुशासन तथा ऋण स्तरों में व्यापक भिन्नताओं को उजागर करता है।
- रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिये मज़बूत राज्य वित्त व्यवस्था महत्त्वपूर्ण है और कर एकत्रीकरण में सुधार, प्रतिबद्ध व्यय को नियंत्रित करने, पूंजीगत व्यय को बढ़ाने, राजकोषीय पारदर्शिता को मज़बूत करने एवं मध्यम अवधि की राजकोषीय योजना अपनाने जैसे उपायों की सिफारिश की गई है।
फिसकल हेल्थ इंडेक्स क्या है?
- परिचय: FHI, भारतीय राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन का आकलन और तुलना करने के लिये नीति आयोग द्वारा विकसित एक व्यापक रूपरेखा है।
- यह राज्यों का मूल्यांकन पाँच प्रमुख स्तंभों के आधार पर करता है: व्यय की गुणवत्ता, राजस्व एकत्रीकरण, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता।
- यह इंडेक्स नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा सत्यापित आँकड़ों का उपयोग करता है, जो सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
- इसका उद्देश्य सुधार हेतु मार्गदर्शन करना, साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को प्रोत्साहित करना और राज्यों के बीच समान मानकीकरण को सक्षम बनाना है।
- FHI 2026: यह वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2023-24 तक एक दशक में राजकोषीय प्रवृत्तियों का विश्लेषण करता है, जिससे राज्यों की प्रगति या गिरावट के बारे में एक दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य मिलता है।
- दूसरे संस्करण में सामान्य श्रेणी के 18 राज्यों के अलावा उत्तर-पूर्वी और हिमालयी क्षेत्र के 10 राज्यों को भी शामिल किया गया है, जिससे यह इंडेक्स भारत के विविध वित्तीय परिदृश्य को और अधिक व्यापक रूप से दर्शाता है।
- पूर्वोत्तर राज्यों के लिये उप-संकेतकों को परिष्कृत किया गया है ताकि उनकी विशिष्ट चुनौतियों जैसे- भौगोलिक दूरी, विरल जनसंख्या घनत्व, सीमित स्व-राजस्व क्षमता, उच्च प्रतिबद्ध व्यय और केंद्र सरकार से मिलने वाले हस्तांतरण पर अधिक निर्भरता को प्रतिबिंबित किया जा सके।
- निष्पक्ष और प्रासंगिक तुलना सुनिश्चित करने के लिये पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों को सामान्य श्रेणी के राज्यों से अलग स्थान दिया गया है।
- इस संस्करण में प्रमुख राज्यों के लिये वही पाँच मुख्य स्तंभ रखे गए हैं, साथ ही कथात्मक अंतर्दृष्टि और प्रवृत्ति विश्लेषण की गहराई में सुधार किया गया है।
- दूसरे संस्करण में सामान्य श्रेणी के 18 राज्यों के अलावा उत्तर-पूर्वी और हिमालयी क्षेत्र के 10 राज्यों को भी शामिल किया गया है, जिससे यह इंडेक्स भारत के विविध वित्तीय परिदृश्य को और अधिक व्यापक रूप से दर्शाता है।
FHI 2026 की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
18 प्रमुख राज्य
- अचीवर्स: ओडिशा, गोवा, झारखंड।
- नियंत्रित घाटे, स्थिर राजस्व और साल-दर-साल बेहतर होते स्कोर के कारण ओडिशा रैंकिंग में शीर्ष पर बना हुआ है।
- सफल राज्यों में कुछ सामान्य विशेषताएँ हैं: स्वयं के कर का हिस्सा 60% से अधिक, सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 4-5% पूंजीगत व्यय, सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 3% से कम राजकोषीय घाटा, सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 25% से कम मध्यम ऋण स्तर और नियंत्रित ब्याज भार।
- गोवा और ओडिशा में राज्य के स्वामित्व वाले राजस्व का अनुपात उच्च दर्ज किया गया है, जो मज़बूत कर आधार एवं अधिक राजकोषीय स्वायत्तता को दर्शाता है।
- फ्रंट रनर्स: गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक।
- गुजरात और महाराष्ट्र में ऋण का स्तर कम है तथा वे ब्याज के बोझ को नियंत्रित रखते हैं, जिससे राजकोषीय स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।
- परफॉर्मर्स: मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार, तमिलनाडु, राजस्थान।
- बिहार ने एस्पिरेशनल राज्य की श्रेणी से परफॉर्मर्स राज्य की श्रेणी में सुधार किया है, जो बेहतर घाटा प्रबंधन का संकेत है।
- कर्नाटक और तेलंगाना अग्रणी राज्यों की श्रेणी से बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में आ गए हैं, जो मामूली राजकोषीय चूक को दर्शाता है।
- तमिलनाडु 'परफॉर्मर' से 'एस्पिरेशनल' श्रेणी में गया है, जो उभरते वित्तीय दबावों का संकेत देता है।
- एस्पिरेशनल (सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य): पश्चिम बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश, पंजाब।
- इन राज्यों को लगातार राजस्व और राजकोषीय घाटे का सामना करना पड़ता है, जो अक्सर FRBM (राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन) मानदंडों का उल्लंघन करते हैं।
- ऋण का स्तर सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) के लगभग 35-45% के बीच है, जो राष्ट्रीय सीमा से काफी ऊपर है।
- राजस्व प्राप्तियों का लगभग 50-60% हिस्सा प्रतिबद्ध व्यय में खर्च हो जाता है, जिससे विकासात्मक व्यय के लिये बहुत कम संसाधन शेष रह जाते हैं।
- ब्याज भुगतान राजस्व प्राप्तियों के 15-20% से अधिक है, जिससे राजकोषीय अनुकूलन और भी कम हो जाता है।
- सभी प्रमुख राज्यों में पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल पर सबसे अधिक ऋण एवं ब्याज प्रतिबद्धताएँ हैं।
उत्तर-पूर्वी तथा हिमालयी राज्य
- अचीवर्स: अरुणाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड।
- अरुणाचल प्रदेश उच्च व्यय गुणवत्ता, विवेकपूर्ण ऋण प्रबंधन तथा नियंत्रित राजकोषीय घाटे के कारण प्रथम स्थान पर है। कुछ अवसरों पर इसने राजकोषीय अधिशेष भी दर्ज किया है।
- उत्तराखंड का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर स्व-राजस्व एकत्रीकरण के कारण मज़बूत रहा है, जिससे इसे अधिक राजकोषीय स्वायत्तता प्राप्त होती है।
- परफॉर्मर्स: असम, मेघालय, मिज़ोरम, सिक्किम तथा त्रिपुरा।
- त्रिपुरा ने ऋण स्थिरता के क्षेत्र में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि मिज़ोरम को अपेक्षाकृत कमज़ोर ऋण स्थिरता संकेतकों के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- सिक्किम में राजकोषीय विवेक की स्थिति अपेक्षाकृत कमज़ोर रही है, जबकि नागालैंड को राजस्व एकत्रीकरण तथा व्यय गुणवत्ता के संदर्भ में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
- एस्पिरेशनल: हिमाचल प्रदेश, मणिपुर तथा नागालैंड।
- हिमाचल प्रदेश और मणिपुर कमज़ोर राजस्व आधार, उच्च प्रतिबद्ध व्यय जैसे- वेतन तथा पेंशन तथा निरंतर राजकोषीय घाटों के कारण सूची के निचले स्थानों पर बने हुए हैं।
- इन राज्यों का ऋण स्तर लगभग GSDP के 40–50% के आस-पास है, जिससे ऋण सेवा दायित्व का दबाव बढ़ता है तथा राजकोषीय अनुकूलन सीमित होता है।
राज्यों की राजकोषीय स्थिति का क्या महत्त्व है?
- भारत की समष्टिगत आर्थिक स्थिरता: राज्य सरकारें भारत के कुल सरकारी ऋण का लगभग एक-तिहाई वहन करती हैं, जिससे उनकी राजकोषीय स्थिति राष्ट्रीय राजकोषीय स्थिरता के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाती है।
- जब राज्यों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ता है, तो इससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है, निजी निवेश में कमी आ सकती है और केंद्र सरकार को राहत पैकेज के साथ हस्तक्षेप करने के लिये मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे व्यापक अर्थव्यवस्था अस्थिर हो जाती है।
- भारत का कुल सार्वजनिक ऋण GDP का लगभग 82% है, इसलिये ऋण भार को नियंत्रण में रखने के लिये राज्यों द्वारा उत्तरदायी राजकोषीय प्रबंधन आवश्यक है।
- सार्वजनिक व्यय और विकास में बड़ी भूमिका: राज्य सरकारें स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढाँचे और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर व्यय का एक बड़ा हिस्सा वहन करती हैं, जो नागरिकों के कल्याण एवं विकास परिणामों को सीधे प्रभावित करता है।
- मज़बूत राजकोषीय स्थिति राज्यों को पूंजीगत व्यय में अधिक निवेश करने की अनुमति देती है, जिससे क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।
- बढ़ता ऋण और राजकोषीय दबाव: राज्यों का ऋण-से-जीएसडीपी अनुपात वर्ष 2013-14 में लगभग 16.7% से बढ़कर वर्ष 2022-23 में लगभग 23% हो गया, जो बढ़ते उधार दबाव को दर्शाता है।
- राज्यों का संयुक्त राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025 में GDP के लगभग 3.2% तक बढ़ गया, जो राज्य सरकारों पर बढ़ते राजकोषीय दबाव को दर्शाता है, जिसे यदि सावधानीपूर्वक प्रबंधित नहीं किया गया तो राजकोषीय स्थिरता को खतरा हो सकता है।
राज्य के वित्त को मज़बूत करने के लिये FHI 2026 द्वारा कौन-से नीतिगत उपाय अनुशंसित किये गए हैं?
- राजस्व में वृद्धि: GST कर आधार में विस्तार किया जाए, कर अनुपालन में सुधार किया जाए और राज्य के अपने कर राजस्व जैसे-संपत्ति कर, उत्पाद शुल्क एवं स्टाम्प शुल्क को मज़बूत करें। कर चोरी को कम करने के लिये डिजिटल कर प्रशासन और डेटा विश्लेषण में सुधार किया जाए।
- व्यय पर नियंत्रण: राजकोषीय अनुकूलन को बहाल करने के लिये "प्रतिबद्ध व्यय" (जैसे- अत्यधिक पेंशन और वेतन बिल) पर अंकुश लगाया जाए और सब्सिडी को युक्तिसंगत बनाया जाए।
- 16वें वित्त आयोग (2026-31) ने भी सब्सिडियों के युक्तिकरण की अनुशंसा की है, विशेषकर बिना शर्त नकद अंतरण के संदर्भ में, जो कुल सब्सिडी व्यय का लगभग 20.2% है।
- पूंजीगत व्यय में सुधार: दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिये पूंजीगत व्यय की संरचना तथा गुणवत्ता में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये।
- भविष्य की योजना: राज्यों को राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM) के लक्ष्यों का पालन करते हुए अपने राजकोषीय घाटे को GSDP के लगभग 3% के आस-पास बनाए रखना चाहिये।
- 16वें वित्त आयोग (2026–31) ने केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे को वर्ष 2030–31 तक GDP के 3.5% तक सीमित करने की भी अनुशंसा की है, ताकि राजकोषीय अनुशासन तथा सतत ऋण स्तर बनाए रखे जा सकें।
- पारदर्शिता में वृद्धि: बजट से बाहर के उधारों पर कड़े नियंत्रण लागू किये जाने चाहिये, नकदी प्रबंधन में सुधार किया जाए तथा बेहतर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के लिये CAG द्वारा सत्यापित आँकड़ों का उपयोग किया जाना चाहिये।
निष्कर्ष
फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 यह रेखांकित करता है कि मज़बूत राज्य वित्त भारत की समष्टिगत आर्थिक स्थिरता के लिये अत्यंत आवश्यक है। इस बेंचमार्किंग टूल के माध्यम से राज्य अपनी राजकोषीय कमज़ोरियों की पहचान कर सकते हैं, लक्षित सुधारों को लागू कर सकते हैं, क्षेत्रीय असमानताओं को कम कर सकते हैं तथा राजकोषीय शासन को सुदृढ़ कर सकते हैं, जिससे विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिल सके।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न प्रश्न. “राज्यों का वित्तीय स्वास्थ्य भारत की सकल आर्थिक स्थिरता के लिये केंद्रीय है।” फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 के संदर्भ में विश्लेषण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. फिस्कल हेल्थ इंडेक्स (FHI) क्या है?
FHI एक ढाँचा है जिसे नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा विकसित किया गया है। यह भारतीय राज्यों के वित्तीय प्रदर्शन का आकलन और तुलना करने के लिये उपयोग होता है, जिसमें राजस्व सृजन, व्यय की गुणवत्ता, वित्तीय अनुशासन एवं ऋण स्थिरता जैसे संकेतक शामिल हैं।
2. राज्यों का मूल्यांकन करने हेतु कौन‑से स्तंभ (pillars) प्रयोग किये जाते हैं?
यह सूचकांक राज्यों का मूल्यांकन पाँच स्तंभों (five pillars) के आधार पर करता है: व्यय की गुणवत्ता (Quality of Expenditure), राजस्व सृजन (Revenue Mobilisation), वित्तीय अनुशासन (Fiscal Prudence), ऋण सूचकांक (Debt Index) और ऋण स्थिरता (Debt Sustainability)।
3. फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य कौन‑से हैं?
प्रमुख राज्यों में, ओडिशा, गोवा और झारखंड को उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों के रूप में रैंक दिया गया है, क्योंकि इन राज्यों में प्रबल राजस्व सृजन, कम वित्तीय घाटा एवं मध्यम ऋण स्तर हैं।
4. FHI 2026 में उत्तर‑पूर्वी और हिमालयी राज्यों को अलग क्यों रैंक किया गया है?
इन राज्यों को संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ, विरल जनसंख्या, सीमित राजस्व क्षमता और उच्च सेवा वितरण लागत, इसलिये इनके मूल्यांकन के लिये संदर्भ-विशिष्ट दृष्टिकोण आवश्यक है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. शासन के संदर्भ में निम्नलिखित पर विचार कीजिये: (2010)
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अंतर्वाह को प्रोत्साहित करना
- उच्च शिक्षण संस्थानों का निजीकरण
- नौकरशाही का आकार कम करना
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के शेयरों की बिक्री/ऑफलोडिंग
भारत में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के उपायों के रूप में उपर्युक्त में से किनका उपयोग किया जा सकता है?
(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 2, 3 और 4
(c) केवल 1, 2 और 4
(d) केवल 3 और 4
उत्तर: (d)
प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा अपने प्रभाव में सबसे अधिक मुद्रास्फीतिकारक हो सकता है? (2021)
(a) सार्वजनिक ऋण की चुकौती
(b) बजट घाटे के वित्तीयन के लिये जनता से उधार लेना
(c) बजट घाटे के वित्तीयन के लिये बैंकों से उधार लेना
(d) बजट घाटे के वित्तीयन के लिये नई मुद्रा का सृजन करना
उत्तर: (d)
प्रश्न. निम्नलिखित में से किनको/किसको भारत सरकार के पूंजीगत बजट में शामिल किया जाता है? (2016)
- सड़कों, भवनों, मशीनरी आदि जैसी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण पर व्यय
- विदेशी सरकारों से प्राप्त ऋण
- राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को अनुदत्त ऋण तथा अग्रिम
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
मेन्स:
प्रश्न. 2017-18 के संघीय बजट के अभीष्ट उद्देश्यों में से एक 'भारत को रूपांतरित करना, ऊर्जावान बनाना और भारत को स्वच्छ करना' है। इस उद्देश्य प्राप्त करने के लिये बजट 2017-18 सरकार द्वारा प्रस्तावित उपायों का विश्लेषण कीजिये। (मुख्य परीक्षा, 2017)
प्रश्न. पूंजी बजट और राजस्व बजट के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिये। इन दोनों बजटों के संघटकों को समझाइये। (मुख्य परीक्षा, 2021)
प्रश्न. क्या आप इस मत से सहमत हैं कि स्थिर सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) की स्थायी संवृद्धि तथा निम्न मुद्रास्फीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है? अपने तर्कों के समर्थन में कारण दीजिये। (मुख्य परीक्षा, 2019)


