Study Material | Prelims Test Series
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प्रीलिम्स फैक्ट्स

  • 11 Sep, 2019
  • 7 min read
प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 11 सितंबर, 2019

राष्ट्रीय युवा सम्मेलन

(National Youth Summit)

7 सितंबर, 2019 को राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का उद्घाटन किया।

  • इस सम्मेलन का आयोजन पावन चिंतन धारा चैरिटेबल ट्रस्ट, गाजियाबाद की एक यूथ विंग ‘युवा जागृति मिशन’ ने किया।

नोट: कभी-कभी परीक्षा में राष्ट्रीय युवा सम्मेलन और राष्ट्रीय युवा महोत्सव को लेकर संशय की स्थिति बन जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए हमने दोनों पदों के संदर्भ में संक्षिप्त विवरण देने का प्रयास किया है।

राष्ट्रीय युवा महोत्सव

National Youth Festival

  • स्वामी विवेकानंद की वर्षगाँठ मनाने के लिये प्रत्येक वर्ष किसी एक राज्य में 12-16 जनवरी तक राष्ट्रीय युवा महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
  • 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है, इसे देश के युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर ध्यान देने के लिये मनाया जाता है। इस दिन 25 युवाओं और एक युवा संगठन को, जिन्होंने समाज सेवा में उत्कृष्ट कार्य किया हो, को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं।

‘ग्लोरी रन’

(Glory Run)

6 सितंबर, 2019 को चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (CAS) ने कारगिल से कोहिमा (K2K) अल्ट्रा-मैराथन “ग्लोरी रन” का उद्घाटन किया।

  • इस अभियान का उद्देश्य सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि के अलावा हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गए अभियान “फिट इंडिया मूवमेंट” और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ाना है।
  • इस अनोखे अभियान (कारगिल से कोहिमा अल्ट्रा-मैराथन “ग्लोरी रन”) का आयोजन कारगिल विजय (Kargil Victory) की 20वीं वर्षगाँठ मनाने और भारतीय वायुसेना की वास्तविक परंपरा एवं उद्देश्य “टच द स्काई विद ग्लोरी” (Touch the Sky with Glory) को आगे बढ़ाने के लिये किया जा रहा है।
  • K2K-ग्लोरी रन 21 सितंबर, 2019 से शुरू होकर 6 नवंबर, 2019 को पूरा होगा।
  • इस अभियान के दौरान वायुसेना के 25 जांबाज़ों की टीम औसतन 100 किलोमीटर प्रतिदिन दौड़ लगाते हुए 45 दिनों में 4500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगी।
  • इसका आयोजन वायुसेना द्वारा कारगिल वार मेमोरियल, द्रास (जम्मू-कश्मीर) से लेकर कोहिमा वार सिमेट्री, कोहिमा (नगालैंड) तक किया गया है।
  • इस अभियान के लिये कारगिल और कोहिमा का चयन इसलिये किया गया है क्योंकि कोहिमा और कारगिल भारत के पूर्वी और उत्तरी छोर के दो सीमावर्ती पोस्ट हैं जहाँ क्रमशः 1944 और 1999 में आधुनिक भारत की दो प्रमुख लड़ाइयाँ लड़ी गईं।
  • इस अभियान का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर सुरेश राजदान करेंगे जो SU-30 विमान के पायलट हैं। इस टीम में एकमात्र महिला अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट रिषभजीत कौर शामिल हैं।

28वाँ इंडो-थाई कॉरपेट

(28th Indo–Thai CORPAT)

भारतीय नौसेना और थाईलैंड की शाही नौसेना के बीच 5 सितंबर, 2019 को भारत-थाईलैंड की 28वीं समन्वयन गश्त (इंडो-थाई कॉरपेट) की शुरुआत हुई। इस गश्त का आयोजन 15 सितंबर तक किया किया जाएगा।

Indo–Thai CORPAT

  • इसमें भारतीय नौसेना पोत केसरी (Kesari) और थाईलैंड की शाही नौसेना पोत क्राबुरी (Kraburi) भाग ले रहे हैं। इसके अलावा दोनों नौसेनाओं के समुद्री गश्ती हवाई जहाज भी शामिल होंगे।
  • अंडमान-निकोबार कमान के भारतीय नौसेना के पोत और हवाई जहाज वर्ष 2003 से थाईलैंड की शाही नौसेना के साथ दो वर्षों में एक बार कॉरपेट में हिस्सा लेते रहे हैं।
  • इंडो-थाई कॉरपेट का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सामुद्रिक कानून समझौते का कारगर क्रियान्वयन है। इसके तहत प्राकृतिक संसाधनों और समुद्री पर्यावरण का संरक्षण, गैर-कानूनी रूप से मछली पकड़ने की गतिविधियों/मादक पदार्थों की तस्करी/समुद्री डाकुओं की गतिविधियों को रोकना, तस्करी, गैर-कानूनी आप्रवासन की रोकथाम तथा समुद्र में तलाशी और बचाव गतिविधियाँ आयोजित करना शामिल हैं।

जम्मू-कश्मीर की परिसंपत्तियों और देनदारियों के विभाजन हेतु समिति

गृह मंत्रालय ने सेवानिवृत्त IAS और पूर्व रक्षा सचिव संजय मित्रा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है जो लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के बीच जम्मू और कश्मीर की परिसंपत्तियों और देनदारियों के विभाजन पर निर्णय लेगी।

  • संजय मित्रा के अतिरिक्त इस समिति में सेवानिवृत्त IAS अरुण गोयल तथा वर्तमान महालेखा-नियंत्रक (Controller General of Accounts-CGA) गिरिराज प्रसाद गुप्ता भी शामिल हैं।
  • गृह मंत्रालय ने यह निर्णय जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 85 के तहत लिया है।
  • उल्लेखनीय है कि अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा 370 को समाप्त कर दिया था। साथ ही सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विभाजन दो केंद्रशासित क्षेत्रों- जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के रूप में करने का निर्णय लिया था।

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