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राजस्थान स्टेट पी.सी.एस.

  • 22 Apr 2026
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विश्व बैंक ने ‘वाटर फॉरवर्ड’ पहल शुरू की

चर्चा में क्यों? 

विश्व बैंक ने अप्रैल 2026 में ‘वाटर फॉरवर्ड’ नामक एक वैश्विक पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक 1 बिलियन से अधिक लोगों के लिये जल सुरक्षा में सुधार करना है।

मुख्य बिंदु:

  • पहल: विश्व बैंक समूह ने बढ़ते वैश्विक जल संकट से निपटने और विश्वभर में विश्वसनीय जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये ‘वाटर फॉरवर्ड’ पहल शुरू की।
    • विश्व बैंक ने स्वयं वर्ष 2030 तक लगभग 400 मिलियन लोगों तक जल सुरक्षा पहुँचाने का संकल्प लिया है, जबकि शेष लाभार्थियों को साझेदार संस्थाओं के माध्यम से सहायता दी जाएगी।
  • देश-नेतृत्व वाले जल समझौते: इस पहल के केंद्र में राष्ट्रीय जल समझौते हैं, जिनके माध्यम से सरकारें सुधार की प्राथमिकताओं की पहचान करती हैं, संस्थाओं को सुदृढ़ करती हैं और जल क्षेत्र के लिये निवेश योजनाएँ तैयार करती हैं।
  • भागीदारी: प्रारंभिक चरण में 14 देशों ने अपने राष्ट्रीय जल समझौतों की घोषणा की।
  • निवेश: यह पहल जल अवसंरचना, जल प्रबंधन प्रणालियों और जलवायु-अनुकूल जल सेवाओं में निवेश को तीव्र करने का प्रयास करती है।
  • उद्देश्य: इसका लक्ष्य सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती जल आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए सतत विकास को बढ़ावा देना है, साथ ही सूखा एवं बाढ़ जैसे जलवायु-संबंधित जल जोखिमों के प्रति अनुकूलन बढ़ाना है।

और पढ़ें: विश्व बैंक


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भारत का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क लेह, लद्दाख में स्थापित किया जाएगा

चर्चा में क्यों? 

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर सिंधु घाट, लेह में भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क की आधारशिला रखी, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की प्राचीन शैल-चित्र (रॉक आर्ट) विरासत का संरक्षण करना है।

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: लेह में सिंधु नदी के तट पर स्थित सिंधु घाट पर लद्दाख की प्रागैतिहासिक शैल-नक्काशियों (रॉक कार्विंग्स) के संरक्षण हेतु इस परियोजना की आधारशिला रखी गई।
  • उद्देश्य: इस पार्क का उद्देश्य सदियों पुराने पेट्रोग्लिफ्स (शैल-चित्र/नक्काशियाँ) का संरक्षण करना है, जो प्रारंभिक मानव जीवन, व्यापार मार्गों, आस्था प्रणालियों और पारिस्थितिक इतिहास को दर्शाते हैं। इनमें से कई पर्यटन, अवसंरचना विकास और पर्यावरणीय कारकों के कारण खतरे में हैं।
    • लद्दाख में सिंधु और ज़ांस्कर नदियों के किनारे लगभग 400 पेट्रोग्लिफ स्थल स्थित हैं, जो इसे दक्षिण एवं मध्य एशिया के सबसे समृद्ध शैल-कला क्षेत्रों में से एक बनाते हैं।
  • कार्यान्वयन: धरोहर स्थलों के संयुक्त संरक्षण और प्रबंधन के लिये अभिलेखागार, पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग तथा भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए।
    • संवेदनशील और अलग-थलग पड़े शैल-चित्रों को सावधानीपूर्वक संरक्षण पार्क में स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके तथा उन्हें शैक्षिक वातावरण में व्यवस्थित रूप से प्रदर्शित किया जा सके।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: इन पेट्रोग्लिफ्स को ‘ओपन-एयर म्यूज़ियम्स’ माना जाता है, जो प्रागैतिहासिक से ऐतिहासिक काल तक मानव सभ्यता का सतत अभिलेख प्रस्तुत करते हैं और लद्दाख को एक सांस्कृतिक तथा व्यापारिक संगम के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

और पढ़ें: मध्य एशिया, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)


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AICTE-VAANI योजना का तीसरा संस्करण लॉन्च किया गया

चर्चा में क्यों? 

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने अप्रैल 2026 में तकनीकी शिक्षा और उच्च अध्ययन में भारतीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये VAANI (भारतीय भाषाओं की उन्नति और संवर्धन के लिये जीवंत समर्थन) योजना के तीसरे संस्करण शुरू किये।

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: AICTE ने तकनीकी शिक्षा में भारतीय भाषाओं के उपयोग को सुदृढ़ करने और विभिन्न भाषायी समूहों के लिये शिक्षा को अधिक समावेशी एवं सुलभ बनाने के उद्देश्य से VAANI योजना शुरू की।
  • उद्देश्य: इस योजना का लक्ष्य उच्च शिक्षा में भाषा के अंतराल को कम करना है, ताकि छात्र अपनी मातृभाषा में तकनीकी ज्ञान तक पहुँच प्राप्त कर सकें।
  • वित्तीय सहायता: इस पहल के अंतर्गत AICTE प्रति वर्ष लगभग ₹4 करोड़ की राशि प्रदान करेगा, जिससे भारतीय भाषाओं में आयोजित लगभग 200 सम्मेलनों, संगोष्ठियों और कार्यशालाओं को समर्थन मिलेगा।
  • क्षेत्राधिकार: यह कार्यक्रम कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और एग्रोटेक जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों में 22 भारतीय भाषाओं में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा।
    • AICTE से अनुमोदित संस्थानों को स्वीकृत शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन हेतु एक निर्धारित समयावधि के भीतर एक समर्पित पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करने के लिये आमंत्रित किया जाएगा।

और पढ़ें: 22 भारतीय भाषाएँ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा


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पृथ्वी दिवस 2026: वैश्विक जलवायु अनुकूलन को सुदृढ़ बनाना

चर्चा में क्यों?

22 अप्रैल, 2026 को विश्व ने पृथ्वी दिवस की 56वीं वर्षगॉंठ मनाई। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर चरम मौसमी घटनाओं को बढ़ा रहा है, पृथ्वी दिवस 2026 का फोकस ‘परिपत्र अर्थव्यवस्था’ की ओर त्वरित संक्रमण और जैव विविधता की रक्षा के लिये प्लास्टिक अपशिष्ट के उन्मूलन पर केंद्रित रहा।

मुख्य बिंदु:

  • तिथि: 22 अप्रैल (वार्षिक आयोजन)
  • वर्ष 2026 की थीम: ‘हमारी शक्ति, हमारा ग्रह’ (Our Power, Our Planet)
  • थीम का उद्देश्य: यह थीम इस बात पर ज़ोर देती है कि पर्यावरणीय परिणामों को आकार देने और अधिक मज़बूत जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने में लोगों तथा समुदायों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
    • यह संदेश देता है कि वास्तविक परिवर्तन केवल नीतियों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सामूहिक जन-भागीदारी, स्थानीय नवाचार और नागरिक सहभागिता पर भी आधारित होता है।
  • वैश्विक समन्वयक: Earthday.org (पूर्व में अर्थ डे नेटवर्क)

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • उत्पत्ति (1970): पहला पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल, 1970 को संयुक्त राज्य अमेरिका में मनाया गया था। इसकी स्थापना सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने की थी और इसका आयोजन कार्यकर्त्ता डेनिस हेस द्वारा किया गया था।
  • प्रेरक कारण: इस आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1969 में कैलिफोर्निया के सांता बारबरा में हुए बड़े तेल रिसाव (ऑयल स्पिल) से हुई, जिसने पर्यावरणीय क्षरण के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ाया।
  • अंतर्राष्ट्रीय मान्यता (1990): पृथ्वी दिवस 1990 में वैश्विक स्तर पर पहुँच गया, जिसमें 141 देशों के 200 मिलियन लोगों ने भाग लिया और पर्यावरणीय मुद्दों को विश्व मंच पर प्रमुखता मिली।
  • पेरिस समझौता (2016): एक ऐतिहासिक कदम के रूप में, जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता वर्ष 2016 में पृथ्वी दिवस के अवसर पर हस्ताक्षर हेतु खोला गया।

वैश्विक महत्त्व 

  • नीति-समर्थन: यह कई सरकारों के लिये एक समयसीमा के रूप में कार्य करता है, जिसके तहत वे अपने अद्यतन राष्ट्रीय निर्धारित अंशदान (NDCs) और पर्यावरणीय कानूनों की घोषणा करते हैं।
  • ‘ग्रेट ग्लोबल क्लीनअप’: यह एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य आसपास के क्षेत्रों, समुद्र तटों और वनों से अरबों अपशिष्ट के टुकड़ों को हटाना है।
  • जलवायु साक्षरता: विश्वभर में स्कूल पाठ्यक्रमों में पर्यावरणीय और जलवायु शिक्षा को शामिल करने को बढ़ावा देना।
  • कैनोपी प्रोजेक्ट: यह एक व्यापक वनीकरण (पुनर्वनीकरण) अभियान है, जो जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों पर केंद्रित है।

और पढ़ें: राष्ट्रीय निर्धारित अंशदान (NDC)


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CBI ने AI चैटबॉट ‘अभय’ लॉन्च किया

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अप्रैल 2026 में ‘अभय’ नामक एक AI-संचालित चैटबॉट लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य नागरिकों को आधिकारिक नोटिसों की प्रामाणिकता की जाँच करने में सहायता करना और बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों से निपटना है।

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: CBI द्वारा आयोजित 22वें डी. पी. कोहली स्मृति व्याख्यान के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने ‘अभय’ चैटबॉट शुरू किया।
    • यह AI-संचालित नोटिस सत्यापन चैटबॉट ‘अभय’ जनता को CBI द्वारा कथित रूप से जारी किये गए नोटिसों की प्रामाणिकता की जाँच करने में सक्षम बनाएगा।
    • यह चैटबॉट प्रथम सुरक्षा पंक्ति के रूप में कार्य करता है, जिससे नागरिक किसी भी कार्रवाई से पहले दावों की पुष्टि कर सकें।
  • आवश्यकता: यह पहल ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों के बढ़ते मामलों के जवाब में लाई गई है, जहाँ ठग CBI या पुलिस अधिकारियों का रूप धारण कर नकली नोटिसों के माध्यम से पीड़ितों को धमकाकर धन की वसूली करते हैं।
  • उद्देश्य: इस परियोजना का लक्ष्य साइबर सुरक्षा को मज़बूत करना, जन-जागरूकता बढ़ाना और ऑनलाइन धोखाधड़ी से सुरक्षा हेतु तकनीकी सुरक्षा कवच प्रदान करना है।
  • डी. पी. कोहली:
    • जन्म: वर्ष 1907 में उत्तर प्रदेश में।
    • 1931 में पुलिस सेवा में शामिल हुए।
    • 1955 से दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) का नेतृत्व किया।
    • 1 अप्रैल, 1963 को CBI की स्थापना के बाद इसके संस्थापक निदेशक बने।
    • 1968 में सेवानिवृत्ति तक CBI निदेशक के रूप में कार्य किया।

और पढ़ें: भारत के मुख्य न्यायाधीश, डिजिटल अरेस्ट, CBI


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