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लक्षद्वीप में ‘महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण’ (OTEC) परियोजना
- 09 Mar 2026
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चर्चा में क्यों?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लक्षद्वीप में प्रस्तावित महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC) परियोजना का निरीक्षण किया। यह परियोजना गहरे समुद्री जल का उपयोग करते हुए OTEC आधारित विश्व के पहले विलवणीकरण संयंत्र के रूप में विकसित की जा रही है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: लक्षद्वीप की राजधानी कवरत्ती द्वीप।
- विकासकर्त्ता: इस परियोजना का विकास पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) द्वारा किया जाएगा।
- महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC): यह एक नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी है, जो समुद्र की सतह के गर्म जल और गहरे समुद्र के ठंडे जल के बीच तापमान के अंतर का उपयोग करके विद्युत उत्पन्न करती है।
- कार्य-प्रणाली: यह संयंत्र गर्म सतही समुद्री जल (लगभग 29°C) और लगभग 1,000 मीटर की गहराई से लाए गए ठंडे गहरे समुद्री जल (लगभग 5°C) के बीच मौजूद तापीय अंतर का उपयोग करता है।
- यह तकनीक उष्णकटिबंधीय महासागरों में सबसे प्रभावी होती है, जहाँ सतह और गहरे जल के बीच तापमान का अंतर अधिक होता है।
- द्वैध उत्पादन:
- विद्युत: लगभग 60–65 किलोवाट (kW) विद्युत उत्पन्न होने की अपेक्षा है।
- स्वच्छ जल: लो-टेम्परेचर थर्मल डीसैलीनेशन (LTTD) तकनीक के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 1 लाख लीटर (100 घन मीटर) पेयजल का उत्पादन होगा।
- अवसंरचना: इस परियोजना में उच्च घनत्व पॉलीएथिलीन (HDPE) से बनी लगभग 3.8 किमी लंबी पाइपलाइन का निर्माण शामिल है, जो गहरे ठंडे जल की परतों तक पहुँचेगी।