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छत्तीसगढ स्टेट पी.सी.एस.

  • 28 Sep 2023
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मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में नवनिर्मित ‘छत्तीसगढ़ निवास’ का किया वर्चुअल शुभारंभ

चर्चा में क्यों?

  • 27 सितंबर, 2023 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निवास कार्यालय से राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के द्वारका में नवनिर्मित ‘छत्तीसगढ़ निवास’ का वर्चुअल शुभारंभ कर छत्तीसगढ़वासियों को बड़ी सौगात दी।

प्रमुख बिंदु

  • इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों को नई दिल्ली में ठहरने के लिये छत्तीसगढ़ निवास के रूप में नया भवन मिल गया है। इससे प्रदेश के ज़रूरतमंदों सहित सभी के रुकने-ठहरने की दिक्कत दूर हो जाएगी।
  • गौरतलब है कि नई दिल्ली द्वारका के सेक्टर 13 में बने इस नए छत्तीसगढ़ निवास भवन की कुल लागत लगभग 60 करोड़ 42 लाख रुपए है। भवन में 61 कमरे, 13 स्यूट रूम, डायनिंग हॉल एंड वेटिंग सहित मीटिंग हॉल और कर्मचारियों के लिये आवासीय टावर का निर्माण किया गया है।
  • विभिन्न सरकारी, गैर-सरकारी कार्य एवं चिकित्सा हेतु छत्तीसगढ़ से दिल्ली जाने वाले निवासियों की सुविधा हेतु इसकी परिकल्पना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की थी।
  • विदित है कि पहले से ही छत्तीसगढ़ शासन के दो भवन ‘छत्तीसगढ़ भवन’चाणक्यपुरी व ‘छत्तीसगढ़ सदन’सफदरज़ंग हॉस्पिटल के पास नई दिल्ली में अवस्थित हैं, परंतु आधुनिक एवं छत्तीसगढ़ की बढ़ती हुई आवश्यकता की पूर्ति के लिये तीसरे भवन की ज़रूरत काफी दिनों से महसूस की जा रही थी।
  • उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली के द्वारका में नए ‘छत्तीसगढ़ निवास’के निर्माण की आधारशिला 19 जून, 2020 को मुख्यमंत्री ने वर्चुअल शिलान्यास कर रखी थी। यह पहला मौका है कि जब पहली बार इस प्रकार के महत्त्वपूर्ण अत्याधुनिक भवन का निर्माण छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ से बाहर सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है।
  • लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ निवास के निर्माण के लिये 43 हज़ार 803 वर्गफीट भूमि 22.50 करोड़ रुपए में क्रय की गई है। नवा छत्तीसगढ़ निवास छत्तीसगढ़ संस्कृति और परंपराओं की स्पष्ट झलक दे रहा है।
  • नवनिर्मित छत्तीसगढ़ निवास द्वारका के प्राइम लोकेशन में स्थित है। इसके आस-पास भव्य मॉल, फाइव स्टार होटल, खूबसूरत पार्क, नया उत्तर प्रदेश भवन, अरुणाचल भवन, दिल्ली का सबसे बड़ा इस्कॉन टेंपल आदि के अलावा कनेक्टिविटी की दृष्टि से भी इसकी लोकेशन शानदार है। द्वारका सेक्टर 13 का मेट्रो स्टेशन इस नवनिर्मित भवन के पास में ही है।


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मुख्यमंत्री ने किया निर्भया कमांड और कंट्रोल सेंटर का शुभारंभ

चर्चा में क्यों?

  • 27 सितंबर, 2023 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निवास कार्यालय से परिवहन विभाग द्वारा महिलाओं के सुरक्षित सफर के लिये निर्मित निर्भया कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (जीपीएस) का वर्चुअल शुभारंभ किया।

प्रमुख बिंदु

  • मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके अलावा परिवहन विभाग की दो अन्य महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का भी वर्चुअल शुभारंभ किया, जिसमें अनफिट वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने हेतु रायपुर व दुर्ग में ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर के साथ ही विभिन्न लिंकेज मार्गों से गुज़र रहे वाहनों की मॉनिटरिंग के लिये ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरा स्थापित करने से जुड़ी परियोजनाएँ शामिल हैं।
  • छत्तीसगढ़ में यात्री बसों में महिलाओं एवं स्कूल बसों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये निर्भया फ्रेमवर्क के अंतर्गत सभी स्कूल बस में पैनिक बटन लगाया जाएगा और व्हीकल ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से गाड़ियों की ट्रैकिंग कि जाएगी।
  • पैनिक बटन लगने से बस में किसी प्रकार की दुर्घटना, छेड़छाड़ होने पर पैनिक बटन दबाने से तुरंत निर्भया कमांड सेंटर और पुलिस विभाग के डायल 112 को सूचना मिल जाएगी।
  • इसके साथ ही बसों की लोकेशन, स्पीड आदि का भी पता चलता रहेगा। इससे बसें नियंत्रित गति से चलेंगी, जिससे हादसे की आशंका भी कम हो जाएगी। जीपीएस सिस्टम का कंट्रोल रूम डायल 112 के कार्यालय में बनाया गया है।
  • इस व्यवस्था के शुरू होने से जनता को किसी तरह के खतरे तथा अनहोनी से निपटने में काफी सहूलियत होगी। वर्तमान में प्रदेश में कुल 12 हज़ार बसें संचालित हो रही हैं, जो अलग-अलग रूट से प्रदेश के कोने-कोने तक जा रही हैं। इसी तरह राज्य में लगभग 6000 स्कूल बस भी संचालित हैं। बसों में पैनिक बटन और जीपीएस के लगने से बसों की पल-पल की जानकारी मिलेगी।
  • नवीन व्यवस्था के तहत स्कूल बस के रूट में भी मैप रहेगा, ताकि स्कूल बस यदि बच्चों को लेकर निर्धारित रूट के अलावा कहीं जाए तो ऑटोमेटिक अलर्ट आ जाए। इसके लिये कंट्रोल रूम में शिफ्ट के हिसाब से चार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जो लगातार सभी बस को मॉनिटर करते रहेंगे और इमरजेंसी की स्थिति में पुलिस विभाग को सूचित करेंगे।
  • क्या है जीपीएस?
    • ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, यानी जीपीएस एक ऐसा उपकरण है, जिसे अगर गाड़ी में फिट कर दिया जाए तो एक निर्धारित सर्वर पर गाड़ी की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। जीपीएस सिस्टम लगने से आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगेगा तथा बसों के सही रूट की जानकारी मिल सकेगी।
    • महिला और बच्चों की सुरक्षा के लिये राज्य की सभी स्कूल बस और यात्री बस को पैनिक बटन सुसज्जित जीपीएस के माध्यम से मॉनिटर किया जाएगा। इसके लिये निर्भया कमांड सेंटर बनाया गया है।
  • पैनिक बटन दबाते ही पुलिस को मिलेगी सूचना
    • परिवहन विभाग के आयुक्त दीपांशु काबरा ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिये परिवहन विभाग ने कई नवाचारी पहल की है। इसी कड़ी में सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के सुरक्षित यातायात को बढ़ावा देने के लिये निर्भया फंड के तहत भारत सरकार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश अनुसार व्हीकल ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म स्थापित किया गया है।
    • परियोजना के अंतर्गत राज्य में संचालित यात्री वाहनों में जीपीएस एवं पैनिक बटन लगेगा। किसी भी आपात् स्थिति में पैनिक बटन दबाने से तत्काल ही सूचना परिवहन विभाग के कमांड एवं कंट्रोल सेंटर के माध्यम से पुलिस विभाग के डायल 112 को प्राप्त हो जाएगी, जिससे महिलाओं एवं बच्चों का यात्री वाहनों में सफर सुरक्षित होगा और आपात् स्थिति में उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
  • वाहनों की तेज़ी से होगी फिटनेस की जाँच
    • परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश में वाहनों की बढ़ती संख्या और दुर्घटनाओं को देखते हुए रायपुर और दुर्ग में आटोमेटेड फिटनेस सेंटर की स्थापना की गई है। फिटनेस सेंटर में मेन्युअल की तुलना में अधिक वाहनों का फिटनेस टेस्ट किया जा सकता है।
    • फिटनेस सेंटर में माल वाहनों का फिटनेस टेस्ट ऑटोमेटेड मशीनों द्वारा किया जाएगा और टेस्ट में फेल होने वाले वाहनों को सड़क पर नहीं चलने दिया जाएगा। सड़कों में फिट वाहनों का परिचालन हो, इसमें ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर बड़ा मददगार साबित होगा और कम समय में अधिक-से-अधिक वाहनों का टेस्ट किया जा सकेगा।
    • गौरतलब है कि रायपुर और दुर्ग के बाद बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, कोरबा, रायगढ़, राजनांदगाँव में आटोमेटिक फिटनेस सेंटर स्थापित करने की कार्रवाई की जा रही है।
  • बिना वैध दस्तावेज़ वाले वाहनों पर होगी कार्रवाई
    • परिवहन विभाग द्वारा आज शुरू हुई तीसरी परियोजना आटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरा विथ ई-डिटेक्शन है। परियोजना अंतर्गत ऐसे वाहनों पर कार्यवाही की जाएगी, जो राजमार्ग में संचालित न होकर विभिन्न लॉकेज मार्गों से गुज़र रहे हैं।
    • इन लॉकेज मार्गों पर एएनपीआर कैमरा स्थापित किया जा रहा है, एएनपीआर कैमरे के माध्यम से प्राप्त होने वाली गाड़ियों की जानकारी को वाहन सॉफ्टवेयर के डाटाबेस से मिलान कर बिना वैध दस्तावेज़ के चलने वाली गाड़ियों पर ई-चालान किया जाएगा।
    • इस हेतु एनआईसी के सहयोग से ई-डिटेक्शन सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। ई-डिटेक्शन सॉफ्टवेयर के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा से भी जानकारी प्राप्त कर बिना वैध दस्तावेज़ के गुज़रने वाली गाड़ियों पर चालान कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

 


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मुख्यमंत्री ने बायो-एथेनॉल प्रदर्शन संयंत्र का किया लोकार्पण

चर्चा में क्यों?

  • 27 सितंबर, 2023 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में बायोफ्यूल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये दुर्ग ज़िले के ग्राम गोढ़ी में स्थापित अत्याधुनिक बायो एथेनॉल प्रदर्शन संयंत्र का वर्चुअल रूप से लोकार्पण किया।

प्रमुख बिंदु

  • भारत सरकार के सीएसआईआर और सीएसएमआरआई के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए) द्वारा इस संयंत्र की तकनीकी डिज़ाइन और ड्राईंग तैयार की गई है।
  • सीबीडीए द्वारा दुर्ग ज़िले के ग्राम गोढ़ी स्थित बायोफ्यूल कॉम्प्लेक्स परियोजना परिसर में स्थापित 1जी बायो-एथेनॉल प्रदर्शन संयंत्र में विशुद्ध रूप से जैवईंधन अनुसंधान एवं विकास गतिविधियॉँ जैसे कि जैवईंधन उत्पादन, प्रसंस्करण और रूपांतरण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में कार्य हेतु स्थापित किया गया है।
  • संयंत्र में स्थानीय कच्चा माल के रूप में छत्तीसगढ़ में उपलब्ध स्टार्च युक्त कंपाउंड जैसे कि अधिशेष धान, अनाज, जैसे गेहूँ, चावल के खराब दाने, जो के खाने योग्य न हों, गन्ने का रस, मोलासेस, मक्का आदि का उपयोग किया जाएगा।
  • गौरतलब है कि बायो-एथेनॉल संयंत्र में प्रारंभिक तौर पर मार्कफेड में उपलब्ध खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 के फीड 2 श्रेणी के अधिशेष धान का क्रय कर बायो-एथेनॉल उत्पादन का प्रयोगमूलक (अनुसंधान) कार्य जारी है। बायोफ्यूल कॉम्प्लेक्स परियोजना परिसर में एक अत्याधुनिक बायो-टेक्नोलॉजी प्रयोगशाला की स्थापना भी की गई है।
  • प्रयोगशाला में बायो-एथेनॉल का भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित मापदंड अनुसार गुणवत्ता परीक्षण, सह-उत्पाद का उपयोग की क्षमता बढ़ाने के लिये दक्षता सुधार और नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा जहाँ संभव हो पेटेंट पंजीकृत किये जाएंगे।

 


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कबीरधाम ज़िले के सरोधा-दादर को राष्ट्रीय स्तर पर रजत श्रेणी में मिला सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम का पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

  • 27 सितंबर, 2023 को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा इस वर्ष छत्तीसगढ़ के कबीरधाम ज़िले के सरोधा-दादर गाँव को राष्ट्रीय स्तर पर रजत श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम का पुरस्कार दिया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • सरोधा दादर को देश भर के 795 पर्यटन ग्रामों की प्रतियोगिता में विभिन्न मापदंडों के आधार पर सर्वश्रेष्ठ ग्राम के रूप में चुना गया है।
  • पर्यटन दिवस के अवसर पर नई दिल्ली भारत मंडपम् में आयोजित समारोह में सरोधा-दादर गाँव के मंगल सिंह धुर्वे ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।
  • गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कबीरधाम ज़िले में पर्यटन के विकास की संभावनाओं को विस्तार देने के लिये अलग-अलग प्रयास किये जा रहे हैं। ग्रामीण पर्यटन ग्राम सरोदा-दादर के विकास के अध्ययन के लिये कलेक्टर जनमेजय महोबे, ज़िला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल द्वारा राज्य के अलग-अलग ज़िलों में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने वाले इन्फ्लूएंसर को आमंत्रित कर भ्रमण कराया गया था। साथ ही कबीरधाम ज़िले में ग्रामीण पर्यटन के विकास की संभावनाओं के अध्ययन से अवगत भी कराया गया था।
  • पुरस्कार के लिये सरोधा-दादर का चयन देश भर के 31 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के 795 गाँवों में से किया गया है।
  • सरोधा-दादर को ग्रामीण पर्यटन के लिहाज से स्थानीय परिवेश और प्राकृतिक मूल्यों के साथ ही श्रेष्ठ गतिविधियों के कारण नौ विभिन्न खंडों में श्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर यह पुरस्कार दिया गया। इनमें प्राकृतिक और सांस्कृतिक संसाधनों के संरक्षण, आर्थिक आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सामाजिक आत्मनिर्भरता, अधोसंरचना तथा परिवहन संपर्क जैसे मापदंड शामिल थे।
  • पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरोधा-दादर की प्रविष्टि भेजने से पहले राज्य के भीतर ज़िले के अंदर ही प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें सात गाँवों को शामिल किया गया। इनमें से चौरा, डोंगरियाकला और सरोधा-दादर का चयन किया गया। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर तीन चरणों में स्पर्धा हुई।
  • आवेदन पत्र के साथ ही सरोधा-दादर पर केंद्रित पॉवरपॉइंट प्रस्तुति और वीडियो भी भेजा गया। इसके अलावा इस गाँव की विशेषताओं को प्रदर्शित करने वाले फोटोग्राफ भी भेजे गए।
  • अधिकारियों ने बताया कि सरोधा-दादर के आदिवासी परिवेश और ठेठ ग्रामीण वातावरण को सैलानियों के लिये आकर्षण का केंद्र मानते हुए इन्फ्लुएंसर मीट के अलावा, स्थानीय स्तर पर रोज़गार पैदा करने वाली पर्यटन संस्थाओं और एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी को भी विशेष रूप से प्रचारित किया गया।
  • साथ ही चिल्फी घाटी में प्रचलित हाथ से की गई कशीदाकारी और चित्रकारी का पर्याप्त प्रचार किया गया, जिसे स्पर्धा में विशेष महत्त्व मिला। इसी आधार पर सरोधा-दादर का चयन रजत वर्ग में देश के सर्वश्रेष्ठ ग्राम के रूप में संभव हुआ।
  • सरोधा-दादर को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम का पुरस्कार मिलने में यह तथ्य भी विशेष प्रभावी रहा कि यहाँ सैलानियों के लिये राज्य सरकार के प्रयासों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संसाधनों के संरक्षण को विशेषरूप से रेखांकित किया गया। यहाँ पर्यटन के माध्यम से ग्रामीणों में क्षमता और ज्ञान का विकास भी किया जा रहा है।
  • गौरतलब है कि ज़िला मुख्यालय कवर्धा से करीब 50 किमी. और चिल्फीघाटी से 5 किमी. दूर स्थित सरोधा-दादर पर्वतों और घाटियों के बीच समुद्र तल से करीब 3 हज़ार फीट ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ आमतौर पर पूरे साल यहाँ पर्यटक आते रहते हैं। अक्तूबर माह से उनकी संख्या में बढ़ोतरी होने लगती है। ठंड के मौसम में यहाँ का तापमान कभी-कभी शून्य से नीचे भी चला जाता है।
  • यहाँ भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा इंग्लैंड, स्विट्ज़रलैंड और ऑस्ट्रेलिया से भी सैलानी आते हैं। खासतौर पर चिल्फीघाटी और सरोदा-दादर में प्रकृति का आनंद लेने के लिये यहाँ पर्यटकों की आवाजाही बहुत अधिक रहती है। सरोधा-दादर में प्रकृति के सुंदर नज़ारों के कारण ग्रामीण पर्यटन की बहुत अधिक संभावना है।
  • सरोधा-दादर और पीड़ाघाट के पास एक वाच-टावर भी बनाया गया है, जहाँ से सैलानी पर्वत और घाटी के सुंदर दृश्य का आनंद ले सकते हैं। कवर्धा ज़िले में मुख्यरूप से बैगा आदिवासी निवास करते हैं, इनकी पारंपरिक जीवन-शैली और संस्कृति सैलानियों को विशेषरूप से अपनी ओर आकर्षित करती है।
  • छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में और धार्मिक महत्त्व के स्थलों को खासतौर पर पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कराया जा रहा है। इनमें ट्राइबल टूरिज्म सर्किट को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा राज्य शासन ने भी ट्राइबल टूरिज्म सर्किट को प्राथमिकता के साथ पूरा करने का लक्ष्य रखा है।


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राज्यस्तरीय मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति का गठन

चर्चा में क्यों?

  • 27 सितंबर, 2023 को भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ में आगामी विधानसभा आम निर्वाचन-2023 के लिये राज्यस्तरीय मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (Media Certification and Monitoring Committee) का गठन किया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले की अध्यक्षता में सात सदस्यीय एमसीएमसी का गठन किया गया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा समिति के गठन के संबंध में जारी आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है।
  • मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर को राज्यस्तरीय मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति का सदस्य-सचिव बनाया गया है।
  • पत्र सूचना कार्यालय (PIB)  रायपुर के उप निदेशक रमेश जयभाये, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया सदस्य डॉ. सुमन गुप्ता और मंत्रालय, नवा रायपुर में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक असीम कुमार थवाईत को समिति का सदस्य बनाया गया है। इनके साथ ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त प्रेक्षक और समिति द्वारा मनोनीत दक्ष प्रतिनिधि भी इसके सदस्य होंगे।
  • राज्यस्तरीय मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति विज्ञापनों के प्रमाणन के संबंध में ज़िला तथा अपर/संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दोनों से प्राप्त अपील पर निर्णय लेगी। समिति ज़िलास्तरीय मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति के निर्णय के विरुद्ध अपील पर पेड न्यूज़ (Paid News)  के सभी मामलों या स्वप्रेरणा से लिये गए मामलों की जाँच करेगी। पेड न्यूज़ के मामले सही पाए जाने पर समिति संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को अभ्यर्थियों को नोटिस जारी करने का निर्देश देगी।

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