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स्टेट पी.सी.एस.

  • 28 Sep 2022
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उत्तर प्रदेश Switch to English

‘राज्य योजना आयोग’ हुआ अब ‘राज्य परिवर्तन आयोग’

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यानात्थ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में राज्य योजना आयोग का पुनर्गठन करते हुए इसका नाम बदलकर राज्य परिवर्तन आयोग कर दिया गया।

प्रमुख बिंदु

  • उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि राज्य परिवर्तन आयोग (एसटीसी) का नेतृत्व मुख्यमंत्री करेंगे जबकि वित्त मंत्री, दोनों डिप्टी सीएम, कृषि मंत्री, समाज कल्याण मंत्री, पंचायती राज विकास मंत्री, औद्योगिक विकास मंत्री, जल शत्ति मंत्री और शहरी विकास मंत्री इसके सदस्य होंगे।
  • एसटीसी के उपाध्यक्ष प्रसिद्ध अर्थशास्त्री या सामाजिक वैज्ञानिक होंगे। अन्य सदस्यों में मुख्य सचिव, अतिरित्त मुख्य सचिव और वित्त, कृषि, ग्रामीण विकास, चिकित्सा और स्वास्थ्य, औद्योगिक विकास और योजना सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव शामिल हैं।
  • आयोग में गैर-सरकारी सदस्य भी होंगे, जो सामाजिक क्षेत्र, कृषि और अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ होंगे। इन मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा, जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
  • ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि यह आयोग एक थिंक टैंक के रूप में कार्य करेगा और विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद नीतियाँ तैयार करेगा। राज्य जिन समस्याओं का सामना कर रहा है, उनकी आयोग द्वारा पहचान की जाएगी और उनके समाधान के तरीके खोजे जाएंगे। पीपीपी मॉडल के इस्तेमाल पर भी चर्चा की जाएगी। वर्तमान योजना और उनके परिणाम का मूल्यांकन आयोग द्वारा किया जाएगा।
  • गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में योजना आयोग की स्थापना 24 अगस्त, 1972 को हुई थी और इसने राज्य सरकार को आवश्यकता आधारित क्षेत्रों की पहचान करके नीतियाँ बनाने में मदद की।

उत्तर प्रदेश Switch to English

जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करने में मदद करने के लिये नई जैव-ऊर्जा नीति

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यानात्थ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने हेतु एक जैव-ऊर्जा नीति लागू करने का निर्णय लिया गया।

प्रमुख बिंदु

  • उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि जैव-ईंधन के उपयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता को गति देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया है। नई नीति पूर्व की नीतियों की कमियों को दूर कर प्रदेश में जैव ऊर्जा उद्यम स्थापित करने की संभावनाओं को अंतिम रूप देने के लिये बनाई गई है।
  • कृषि अपशिष्ट, कृषि उपज बाजार अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट, चीनी मिल अपशिष्ट, शहरी अपशिष्ट और बहुतायत में उपलब्ध अन्य जैविक अपशिष्ट जैव-ईंधन उत्पन्न करने में उपयोग किये जाएंगे।
  • जैव-ऊर्जा उद्यम प्रोत्साहन कार्यक्रम-2018 के अंतर्गत जैव-ऊर्जा उद्यमों को भूमि क्रय पर स्टांप शुल्क में शत-प्रतिशत छूट तथा उत्पादन प्रारंभ होने की तिथि से दस वर्ष तक एसजीएसटी की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति दी गई है।
  • नई नीति की अवधि पाँच वर्ष होगी। इस अवधि के दौरान राज्य में स्थापित होने वाली जैव-ऊर्जा परियोजनाओं (संपीड़ित बायोगैस, बायो-कोयला, बायो-एथेनॉल और बायो-डीजल) को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • इस नीति के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन पर 75 लाख रुपए प्रति टन से अधिकतम 20 करोड़ रुपए की दर से सब्सिडी दी जाएगी। बायो-कोयला उत्पादन पर यह सब्सिडी 75,000 रुपए प्रति टन और अधिकतम 20 करोड़ रुपए तथा बायोडीजल के उत्पादन पर 3 लाख रुपए प्रति किलोलीटर होगा।

उत्तर प्रदेश Switch to English

उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रोत्साहन नीति-2022

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रोत्साहन नीति-2022 को अनुमोदित किया गया। इस नीति में किसी तरह का संशोधन मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद ही किया जा सकेगा।

प्रमुख बिंदु

  • नई नीति के अंतर्गत स्थापित होने वाले नए एमएसएमई उद्यमों को पूंजीगत उपादान के रूप में 10 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक उपादान उपलब्ध कराया जा सकेगा। पूंजीगत उपादान (छूट) प्लांट व मशीनरी आदि पर निवेश के लिये मिलता है।
  • बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों में उपादान की यह सीमा 15-25 प्रतिशत तक और मध्यांचल व पश्चिमांचल में 10-20 प्रतिशत तक होगी। एससी-एसटी और महिला उद्यमियों के लिये दो प्रतिशत अधिक छूट दी जाएगी।
  • उपादान की अधिकतम सीमा 4 करोड़ रुपए प्रति इकाई निर्धारित की गई है। निवेश पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी और लिये गए ऋण पर 50 प्रतिशत तक ब्याज में छूट (उपादान) का प्रावधान किया गया है।
  • प्रदेश में 10 एकड़ से अधिक के एमएसएमई पार्क स्थापित करने के लिये भूमि खरीदने पर स्टांप शुल्क में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी और लिये गए ऋण पर 7 वर्षों तक 50 प्रतिशत ब्याज उपादान (अधिकतम दो करोड़ रुपए) उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, बहिस्राव के निस्तारण के लिये कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लान (सीईटीपी) के लिये 10 करोड़ रुपए तक की वित्तीय मदद भी दी जा सकेगी।
  • प्रदेश में स्थापित होने वाले नए सूक्ष्म उद्योगों के लिये पूंजीगत ब्याज उपादान के तहत ऋण पर देय वार्षिक ब्याज पर 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। यह ब्याज उपादान 5 वर्षों के लिये दिया जाएगा और अधिकतम सीमा 25 लाख रुपए प्रति इकाई होगी। एससी-एसटी और महिला उद्यमियों के लिये यह ब्याज उपादान 60 प्रतिशत तक होगा।
  • नीति के अनुसार, एमएसएमई इकाइयों को अधिक से अधिक स्रोतों से क्रेडिट उपलब्ध कराने के लिये स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध करने के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसी सभी इकाइयों को लिस्टिंग के व्यय का 20 प्रतिशत और अधिकतम 5 लाख रुपए की भरपाई की जाएगी। फ्लैटेड फैक्ट्री की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • औद्योगिक आस्थानों में भूखंडों और शेडों के आवंटन की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में एमएसएमई को प्रोत्साहन देने के लिये 5 एकड़ या उससे अधिक ग्राम सभा की भूमि पुनर्ग्रहीत कर निशुल्क उद्योग निदेशालय को स्थानांतरित की जाएगी।
  • एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर 5 किमी. की दूरी के अंतर्गत औद्योगिक आस्थानों के विकास के माध्यम से एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा। परंपरागत औद्योगिक क्लस्टरों में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट की समस्या के मद्देनज़र सीईटीपी को प्रोत्साहित करने का भी प्रावधान है।
  • गुणवत्ता मानक जैसे जीरो इफेक्ट-जीरो डिफेक्ट, डब्ल्यूएचओ जीएमपी, हॉलमार्क आदि प्राप्त करने के लिये कुल लागत का 75 प्रतिशत और अधिकतम 5 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता तथा जीआई रजिस्ट्रेशन और पेटेंट आदि प्राप्त करने के लिये दो लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता मिलेगी।
  • क्लीन एवं ग्रीन तकनीक को अपनाने के लिये एमएसएमई इकाइयों को अधिकतम 20 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
  • उद्यमिता विकास संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करते हुए उद्यमिता के पाठ्क्रयमों के आधार पर प्रदेश के युवाओं में उद्यमिता का प्रसार किया जाएगा।

राजस्थान Switch to English

प्रदेश के 716 विद्यालय पीएम श्री योजना में बनेंगे मॉडल स्कूल

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के आयुक्त एवं राज्य परियोजना निदेशक डॉ. मोहन लाल यादव ने बताया कि ‘पीएम श्री योजना’अर्थात् ‘प्राइम मिनिस्टर स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया योजना’के तहत राजस्थान में 716 स्कूलों का विकास और उन्नयन किया जाएगा।

प्रमुख बिंदु

  • डॉ. मोहन लाल यादव ने बताया कि पीएम श्री योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक से दो विद्यालय चयनित किये जाएंगे। एक विद्यालय प्रारंभिक शिक्षा व एक विद्यालय माध्यमिक शिक्षा का होगा। यह सभी स्कूल मॉडल स्कूल बनेंगे और इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की पूरी भावना समाहित होगी।
  • गौरतलब है कि प्रधानमंत्री द्वारा 5 सितंबर, 2022 को पीएम श्री योजना शुरू करने की घोषणा की गई थी। इस योजना के माध्यम से अपग्रेड किये गए स्कूलों में शिक्षा प्रदान करने का एक आधुनिक, परिवर्तनकारी और समग्र तरीका लाया जाएगा। इसमें नवीनतम तकनीक, स्मार्ट क्लास, खेल और आधुनिक अवसंरचना पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • पीएम श्री योजना के तहत अपग्रेड किये गए स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सभी घटकों की झलक दिखाई देगी और ये अनुकरणीय स्कूलों की तरह कार्य करेंगे। इसके अतिरिक्त अन्य स्कूलों का मार्गदर्शन भी करेंगे।
  • चयन प्रक्रिया त्रिस्तरीय होगी। यू-डाईस प्लस डाटा के आधार पर विद्यालयों का चयन होगा। निर्धारित मापदंडों को पूरा करने वाले विद्यालय चयनित होंगे। विद्यालयों द्वारा ऑनलाईन चैलेंज पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जाएगा, पोर्टल 1 अक्टूबर, 2022 से प्रारंभ होगा। राज्य द्वारा इनका भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
  • उक्त योजना 2022-23 से 2026-27 तक के लिये मंजूर हुई है तथा 5 वर्ष के लिये 27360 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान है। राजस्थान के लिये लगभग 1500 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान है।

मध्य प्रदेश Switch to English

राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार में मध्य प्रदेश को मिले 8 पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को विश्व पर्यटन दिवस पर नई दिल्ली में आयोजित पुरस्कार समारोह में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार 2018-19’ के तहत मध्य प्रदेश को 8 विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किये।

प्रमुख बिंदु

    • ‘सिविक मैनेजमेंट ऑफ ए टूरिस्ट डेस्टिनेशन इन इंडिया’ (कैटेगरी ए) के लिये देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर को पुरस्कार मिला। इस कैटेगरी में प्रदेश को अब तक 7 अवार्ड मिल चुके हैं। 2010-11 और 2011-12 में मांडू, 2012-13 में पचमढ़ी, 2013-14 में महेश्वर, 2015-16 में खरगोन (कैटेगरी बी) और 2016-17 में ओंकारेश्वर (कैटेगरी बी) सम्मानित हो चुके हैं।
    • ‘स्वच्छ पर्यटन स्थान-वेस्टर्न रीजन’ की श्रेणी में पहली बार पुरस्कार नगर निगम उज्जैन को मिला।
    • ‘बेस्ट मेंटेंड एंड डिसेबल्ड फ्रेंडली मॉन्यूमेंट’ के लिये शिव मंदिर, भोजपुर को अवार्ड मिला। इसके पहले 2017-18 में साँची स्तूप, 2014-15 में अमरकंटक मंदिर और 2013-14 में शिव मंदिर भोजपुर के लिये प्रदेश को यह सम्मान मिल चुका है।मध्य प्रदेश को मिले 8 राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार इस प्रकार हैं-
    • ‘बेस्ट एयरपोर्ट-रेस्ट ऑफ इंडिया’ के लिये देवी अहिल्या बाई एयरपोर्ट, इंदौर को लगातार तीसरी बार यह सम्मान मिला है।
    • ‘एक्सीलेंस इन पब्लिशिंग-हिंदी’ कैटेगरी के लिये मालवा के भित्ति चित्र को अवार्ड मिला है। इसके पहले 2015-16 में सिंहस्थ ब्रोशर के लिये यह सम्मान दिया गया था।
    • ‘बेस्ट टूरिज्म प्रमोशन पब्लिसिटी मटेरियल’ के लिये भोपाल ब्रोशर को यह अवार्ड मिला है। इसके पहले 2017-18 में लोनली प्लेनेट पॉकेट बुक्स और 2010-11 में एमपीएसटीडीसी के कॉर्पोरेट ब्रोशर के लिये यह सम्मान मिला है।
    • ‘बेस्ट वाइल्ड लाइफ गाइड, वेस्टर्न-सेंट्रल’ के लिये पेंच टाइगर रिज़र्व के गाइड श्री सुभाष भावरे को अवॉर्ड मिला है। 2017-18 में पन्ना से श्री मनोज कुमार द्विवेदी, 2016-17 में पन्ना से राधिका प्रसाद ओमरे और 2015-16 में सतपुड़ा से सईब खान को यह अवार्ड मिल चुका है।
    • ‘इंक्रेडिबल इंडिया बेड एंड ब्रेकफास्ट एस्टेब्लिशमेंट्स अप्रूव्ड बाय स्टेट गर्वमेंट’ के लिये मंडला ज़िले के कान्हा नेशनल पार्क स्थित गाँव पटपरा के होमस्टे ‘कोटयार्ड हाउस’को अवार्ड मिला है।
  • प्रदेश को ‘स्वच्छ पर्यटन स्थान- वेस्टर्न रीजन’(उज्जैन) और ‘इंक्रेडिबल इंडिया बेड एंड ब्रेकफास्ट एस्टेब्लिशमेंट अप्रूव्ड बाय स्टेट गर्वमेंट’(कोटयार्ड हाउस ‘होमस्टे, मंडला) कैटेगरी में पहली बार अवार्ड मिले है। ‘बेस्ट वाइल्ड लाइफ गाइड’के लिये लगातार चौथी बार मध्य प्रदेश के गाइड सम्मानित हुए हैं।

मध्य प्रदेश Switch to English

मंत्रि-परिषद ने दी 17 हज़ार 971 करोड़ से अधिक लागत की जल प्रदाय योजना की स्वीकृति

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्रि-परिषद द्वारा जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन के लिये 17 हज़ार 971 करोड़ 95 लाख रुपए लागत की प्रस्तावित 23 नवीन समूह जल प्रदाय योजनाओं तथा एक पुनरीक्षित समूह जल प्रदाय योजना की प्रशासकीय स्वीकृति का अनुमोदन किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • मंत्रि-परिषद ने 10×40 मेगावाट महेश्वर जल विद्युत परियोजना, ज़िला खरगोन के संबंध में समन्वय में मुख्यमंत्री से प्राप्त निर्णयों का अनुसमर्थन किया।
  • महेश्वर जल विद्युत परियोजना से विद्युत क्रय हेतु तत्कालीन मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (वर्तमान में एमपीपीएमसीएल) द्वारा क्रमश: 11 नवंबर, 1994 एवं 27 मई, 1996 को मेसर्स श्री महेश्वर हायडल पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसएमएचपीसीएल) के साथ निष्पादित विद्युत क्रय अनुबंध एवं इस अनुबंध के संशोधन को निरस्त किये जाने का निर्णय लिया गया।
  • मेसर्स एसएमएचपीसीएल एवं विद्युत मंडल (वर्तमान में एमपीपीएमसीएल) के मध्य परियोजना के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना के कार्यों के संबंध में 24 फरवरी, 1997 को निष्पादित अनुबंध को निरस्त किया गया।
  • मेसर्स एसएमएचपीसीएल द्वारा महेश्वर परियोजना के वित्त पोषण हेतु जारी किये गए 400 करोड़ रुपए के ओएफसीडी हेतु पीएफसी द्वारा दी गई गारंटी के परिप्रेक्ष्य में अमेंडेटरी एंड रिस्टेटेड एग्रीमेंट के प्रावधानों के अनुसार राज्य शासन द्वारा पीएफसी के पक्ष में दी गई काउंटर गारंटी को निरस्त किया गया।
  • पीएफसी, मेसर्स एसएमएचपीसीएल इत्यादि के साथ 16 सितंबर, 2005 को निष्पादित अमेंडेटेरी एंड रिस्टेटेड एग्रीमेंट (ए. एंड आर. अनुबंध) को मेसर्स एसएमएचपीसीएल द्वारा किये गये डिफाल्ट्स के दृष्टिगत निरस्त किया।
  • मेसर्स एसएमएचपीसीएल के साथ 27 मई, 1996 को निष्पादित इंप्लीमेंटेशन एग्रीमेंट एवं उनके विद्युत देयकों का भुगतान सुनिश्चित करने हेतु राज्य शासन द्वारा प्रदान की गई गारंटी को निरस्त किया गया।
  • महेश्वर परियोजना के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाईयों के निराकरण हेतु गठित टास्क फोर्स के अध्यक्ष द्वारा परियोजना के निराकरण हेतु सुझाए गए द्वितीय विकल्प यथा प्रकरण का निराकरण पीएफसी द्वारा एनसीएलटी में प्रस्तुत की गई आईबीसी पिटीशन में होने दिया जाये, को स्वीकार किये जाने का निर्णय लिया गया।
  • मंत्रि-परिषद ने ‘मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना’को और अधिक प्रभावी तथा व्यापक बनाने न्यूनतम परियोजना सीमा को एक लाख से कम कर 50 हज़ार रुपए किये जाने का निर्णय लिया।
    • योजना में अब हितग्राही को ब्याज अनुदान वार्षिक के स्थान पर त्रैमासिक आधार पर भुगतान किया जाएगा। विनिर्माण इकाई 50 लाख रुपए से अधिक होने अथवा सेवा/खुदरा व्यवसाय इकाई 25 लाख रुपए से अधिक होने पर भी योजना में परियोजनाएँ स्वीकार की जाएगी, जिसमें बैंक द्वारा प्रकरण स्वीकृति की दशा में हितग्राही को 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ अधिकतम 50 लाख अथवा 25 लाख रुपए तक की ऋण राशि पर ही प्राप्त हो और ऋण गारंटी शुल्क की प्रतिपूर्ति भी यथानुपात आधार पर हो। बैंक द्वारा दिया गया पूरा ऋण कोलेटरल फ्री होना चाहिये।
    • मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में अर्हता एवं वित्तीय सहायता के लिये आयु सीमा मूलत: 18 से 40 वर्ष रखी गई थी, जिसको संशोधित कर अब 18 वर्ष से 45 वर्ष करने के आदेश का अनुमोदन किया गया।

हरियाणा Switch to English

डॉ. सोनिया खुल्लर होंगी हरियाणा की नई स्वास्थ्य महानिदेशक

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को स्वास्थ्य विभाग की अतिरित्त मुख्य सचिव जी. अनुपमा ने डॉ. सोनिया खुल्लर को हरियाणा के स्वास्थ्य महानिदेशक के पद पर नियुक्त करने के आदेश जारी किये।

प्रमुख बिंदु

  • विदित है कि डॉ. सोनिया त्रिखा खुल्लर हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रह चुके सीनियर आईएएस अधिकारी डॉ. राजेश खुल्लर की पत्नी हैं। ये वर्तमान में हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग में जानी-मानी महिला रोग विशेषज्ञ हैं।
  • वर्तमान स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. वीणा सिंह की सेवानिवृत्ति की वज़ह से यह पद खाली हो रहा था, अब डॉ. सोनिया खुल्लर को इस पद की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। उनके पास आहरण और संवितरण अधिकारी की शक्तियाँ भी होंगी।

झारखंड Switch to English

कदमा जैव विविधता पार्क

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को टाटा स्टील ने जमशेदपुर में कदमा जैव विविधता पार्क का उद्घाटन किया। यह जमशेदपुर के आसपास ग्रीन ज़ोन को बढ़ाएगा।

प्रमुख बिंदु

  • यह पार्क 13.5 एकड़ में फैला हुआ है जहाँ 5650 पेड़ और 4650 झाड़ियाँ लगाई गई हैं, जो मौजूदा 300 पेड़ों के अतिरित्त है। पार्क में 2.3 किमी. पैदल चलने का मार्ग, एक योग और ध्यान क्षेत्र, पक्षी देखने के क्षेत्र, वर्षा जल संचयन तालाब, लिली तालाब, तितली क्षेत्र और फल और बाँस के बगीचे हैं।
  • पार्क में पेड़ों की देशी प्रजातियों के कई समूह हैं। इसमें पक्षी और गिलहरी के घोंसले, गहरे वन क्षेत्र, घास के मैदान और पार्क में पाए जाने वाले जीवों और वनस्पतियों की जानकारी प्रदान करने के लिये एक सूचना केंद्र भी है।
  • उल्लेखनीय है कि 2016 में टाटा स्टील ने एक जैव विविधता नीति शुरू की जिसका उद्देश्य ‘जैव विविधता का कोई शुद्ध नुकसान नहीं’है, जो भारतीय उद्योग में पहली ऐसी प्रतिबद्धता है। हाल के वर्षों में इस दिशा में कई पहल की गई हैं जैसे दलमा व्यू तालाब, सीआरएम बड़ा तालाब, गोलमुरी तालाब, जुगसलाई मक डंप, आईएसडब्ल्यूपी तालाब, आदि का विकास।

छत्तीसगढ़ Switch to English

चेंदरू ‘टाइगर बॉय’ सीटीबी स्मृति चिन्ह

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड (सीटीबी) के स्मृति चिन्ह के रूप में चेंदरू ‘टाइगर बॉय’और उनके बाघ मित्र टेंबू की एक प्रतिमा का अनावरण किया।

प्रमुख बिंदु

  • मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विश्व पर्यटन दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित पर्यटन सम्मेलन में बच्चों को पर्यटन से जोड़ने के लिये ‘टॉकिंग कॉमिक्स’का भी विमोचन किया। कॉमिक में चेंदरू और टेंबू को पर्यटन के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है।
  • उन्होंने ‘कथक भाव’पर आधारित राज्य गीत का एक वीडियो और राज्य में पर्यटन स्थलों की एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया। पुस्तक में राज्य के सभी पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी है। इसे टूरिस्ट गाइड के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में ‘मोगली’के नाम से चर्चित द टाइगर बॉय चेंदरू पूरी दुनिया के लिये किसी अजूबे से कम नहीं था। चेंदरू मंडावी नारायणपुर ज़िले के गढ़बेंगाल गाँव का रहने वाला एक आदिवासी परिवार से था।
  • चेंदरू पूरी दुनिया में 60 के दशक में बेहद ही मशहूर था। चेंदरू बचपन में हमेशा बाघ टेंबू के साथ ही खेला करता था और उसी के साथ अपना अधिकतर समय बिताता था। दोनों साथ ही खाना खाते थे और साथ ही खेलते थे।
  • चेंदरू और टाइगर की दोस्ती के किस्से को सुन स्वीडन के सुप्रसिद्ध फिल्म डायरेक्टर अरेन सक्सडॉर्फ सीधे बस्तर आ पहुँचे। चेंदरू और टेंबू के बीच दोस्ती से प्रभावित होकर 1957 में उन्होंने चेंदरू और उसके पालतू बाघ टेंबू को लेकर एक फिल्म बनाई जिसका नाम था ‘द जंगल सागा’। यह फिल्म अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खूब सफल रही। इस फिल्म ने पूरी दुनिया में धूम मचा दी। इस फिल्म के हीरो का रोल चेंदरू ने ही किया। गाँव में रहकर डायरेक्टर ने 1 साल में फिल्म की पूरी शूटिंग की। इस फिल्म ने चेंदरू को दुनिया भर में मशहूर कर दिया।
  • चेंदरू मंडावी ने साल 2013 में 78 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके चले जाने के बाद राजधानी रायपुर में जंगल सफारी में टेंबू और चेंदरू की मूर्ति स्थापित की गई साथ ही नारायणपुर में चेंदरू के नाम पर पार्क भी मौजूद है।

उत्तराखंड Switch to English

राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण-2022: गंगा शहरों की श्रेणी में हरिद्वार को स्वच्छता पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में उत्तराखंड के गंगा शहरों की श्रेणी में हरिद्वार को स्वच्छता पुरस्कार के लिये चयनित होने की जानकारी केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्रालय की ओर से शासन और शहरी विकास निदेशालय को पत्र भेजकर दी गई है।

प्रमुख बिंदु

  • राज्य में स्वच्छ भारत मिशन के मिशन प्रबंधक रविशंकर बिष्ट के अनुसार गंगा शहरों की श्रेणी में राज्य के 15 नगर निकाय शामिल थे। इनमें से हरिद्वार को पुरस्कार के लिये चयनित किया गया है। इसके अलावा देहरादून शहर में भी पिछले वर्ष के आकलन के आधार पर स्थिति में सुधार हुआ है।
  • देहरादून को तीन से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की विशेष उल्लेखित श्रेणी में शामिल किया गया है।
  • हरिद्वार और देहरादून के साथ ही राज्य में स्वच्छता पुरस्कार के लिये चयनित नगर निकायों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। इससे पहले चार निकायों डोईवाला, नरेंद्रनगर, रामनगर व लंढौर कैंट को स्वच्छता पुरस्कार के लिये चयनित किया गया था।
  • शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि सौ से कम निकायों वाले राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड को पहले तीन राज्यों में शामिल किया गया है।
  • इन निकायों को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) एक अक्टूबर को सम्मानित करेंगे।

उत्तराखंड Switch to English

उत्तराखंड को बेस्ट टूरिज्म डेस्टिनेशन अवार्ड

चर्चा में क्यों?

27 सितंबर, 2022 को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के तत्वावधान में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय पर्यटन अवार्ड कार्यक्रम में उत्तराखंड को बेस्ट टूरिज्म डेस्टिनेशन अवार्ड दिया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • विश्व पर्यटन दिवस पर उत्तराखंड को प्राप्त हुए बेस्ट टूरिज्म डेस्टिनेशन अवार्ड के साथ उसे पर्यटन के सर्वांगीण विकास के लिये भी प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के हाथों राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने ये पुरस्कार ग्रहण किये।
  • सतपाल महाराज ने बताया कि उत्तराखंड देश-विदेश के सैलानियों को प्रदेश में आने का निमंत्रण देता है और पर्यटन की सभी श्रेणियों में सुविधाएँ व अवसर यहाँ उपलब्ध हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में पहाड़ों की रानी मसूरी में हेलीकाप्टर के माध्यम से हिमालय दर्शन सेवा भी प्रारंभ की गई है।
  • उन्होंने पर्यटन दिवस के उपलक्ष्य में विभाग ने विभिन्न श्रेणियों में फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी की आनलाइन प्रतियोगिता प्रारंभ होने की जानकारी भी दी इसमें 25 लाख रुपए से अधिक के पुरस्कार दिये जाएंगे।
  • इसके अलावा यात्रा से जुड़े प्रभावशाली व्यत्तियों (ट्रैवल इन्फ्लुएंसर) के लिये आकर्षक योजना लांच की गई है। इसके तहत अंग्रेजी ही नहीं, क्षेत्रीय भाषाओं में भी वीडियो बनाने वाले इन व्यक्तियों को विभाग में सूचीबद्ध किया जाएगा।

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एसएमएस अलर्ट
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