राजस्थान Switch to English
राजस्थान में भारतीय ऊन क्षेत्र पर चिंतन शिविर
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड (CWDB), वस्त्र मंत्रालय ने जनवरी 2026 में राजस्थान के अविकानगर में भारतीय ऊन क्षेत्र पर चिंतन शिविर का आयोजन किया।
मुख्य बिंदु:
- कार्यक्रम का नाम: भारतीय ऊन क्षेत्र की चुनौतियों, अवसरों और भविष्य की संभावनाओं पर 'चिंतन शिविर', जो ICAR-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य भारत की आयातित उत्तम श्रेणी की ऊन पर भारी निर्भरता को कम करना था, जिसके तहत:
- ऊन मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करना
- स्थायी भेड़ पालन और ऊन उत्पादन को बढ़ावा देना
- ऊन और तकनीकी वस्त्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना
- भारतीय ऊन के विपणन, ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देना
- ऊन प्रसंस्करण के लिये साझा सुविधा केंद्र (CFCs) का विस्तार करना
- मुख्य सिफारिशें:
- ऊन ब्रांडिंग और गुणवत्ता के लिये उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करना
- ऊन प्रसंस्करण में अवसंरचना और तकनीक को सुधारना
- किसानों, MSME और उद्योग के बीच संबंध मज़बूत करना
- मूल्य संवर्द्धन और निर्यात प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देना
- प्रदर्शनी: भेड़ की नस्लों, ऊन परिधान, तकनीकी वस्त्र, नवाचार और स्टार्ट-अप योगदान सहित प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
- महत्त्व: यह ग्रामीण आजीविका को सहारा देता है, भारत के ऊन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाता है और मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत पहल के साथ संरेखित है।
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और पढ़ें: ICAR, MSME, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत |

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
गुजरात ने ‘पोषण उड़ान 2026’ शुरू किया
चर्चा में क्यों?
गुजरात ने मकर संक्रांति उत्सव के दौरान ‘पोषण उड़ान 2026’ की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक उत्सवों और सामुदायिक सहभागिता का उपयोग करते हुए पूरे राज्य में पोषण तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है।
मुख्य बिंदु:
- पहल: ‘पोषण उड़ान 2026’ पूरे राज्य में जन-जागरूकता बढ़ाने के लिये पतंग उत्सव की लोकप्रियता का उपयोग करता है, जिसमें पोषण और स्वास्थ्य संदेशों वाली पतंगें उड़ाई जाती हैं।
- इसका उद्देश्य बच्चों, किशोरियों और माताओं के लिये संतुलित आहार तथा स्वास्थ्य के महत्त्व को रेखांकित करना है।
- एकीकरण: यह कार्यक्रम आँगनवाड़ी केंद्रों पर ICDS (एकीकृत बाल विकास सेवाओं) के अंतर्गत संचालित किया जाता है।
- कार्यान्वयन: यह राज्यव्यापी पोषण जागरूकता अभियान गुजरात के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित किया जाता है।
- फोकस: पहल का मुख्य ज़ोर आहार विविधता, जंक फूड के सेवन को घटाने, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता प्रथाओं पर है ताकि पोषण संबंधी परिणामों में सुधार हो सके।
- लक्षित समूह: जागरूकता अभियान में स्कूल के बच्चे, किशोरियाँ, गर्भवती और धात्री महिलाएँ तथा स्थानीय समुदाय के अभिकर्त्ता शामिल होते हैं।
- स्वास्थ्य हस्तक्षेप: माताओं और बच्चों के लिये हीमोग्लोबिन परीक्षण, आयरन एवं फोलिक एसिड (IFA) टैबलेट वितरण, BMI (शरीर द्रव्यमान सूचकांक) जाँच तथा व्यक्तिगत पोषण परामर्श जैसी गतिविधियाँ संचालित की गईं।
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और पढ़ें: मकर संक्रांति उत्सव, पोषण अभियान, ICDS, BMI |

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
तमिलनाडु में बनेगा भारत का पहला ‘सॉवरेन AI पार्क’
चर्चा में क्यों?
13 जनवरी, 2026 को तमिलनाडु सरकार ने सर्वम AI के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये, जिसके तहत चेन्नई में भारत का पहला सॉवरेन AI पार्क स्थापित किया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- फुल-स्टैक इन्फ्रास्ट्रक्चर: यह पार्क संपूर्ण AI जीवनचक्र की मेज़बानी करेगा, जिसमें GPU-आधारित विशिष्ट डेटा सेंटर, स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) और एप्लीकेशन-लेयर टूल शामिल होंगे।
- भारतीय भाषाओं पर केंद्रित AI: इस सुविधा का प्रमुख लक्ष्य भारतीय भाषाओं, विशेषकर तमिल भाषा के लिये इंडिक LLMs का विकास करना है ताकि गैर-अंग्रेज़ी भाषी आबादी के लिये डिजिटल अंतराल को कम किया जा सके।
- डेटा संप्रभुता: राज्य के भीतर ही डेटा एवं कंप्यूटिंग क्षमता की मेज़बानी करके यह परियोजना सुनिश्चित करती है कि नागरिकों और सरकार से संबंधित संवेदनशील जानकारी स्थानीय अधिकार क्षेत्र में ही सुरक्षित रहे तथा विदेशी निगरानी या अंतर्राष्ट्रीय कानूनी जटिलताओं से संरक्षित हो।
- रणनीतिक सहयोग: यह पार्क तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी (TNeGA) के सहयोग से प्रबंधित किया जाएगा, ताकि AI को सार्वजनिक सेवा वितरण में एकीकृत किया जा सके।
- ‘सॉवरेन AI’: सॉवरेन AI से तात्पर्य एक देश या राज्य की उस क्षमता से है जिसके माध्यम से वह अपने स्वयं के अवसंरचना, डेटा और मानव संसाधन का उपयोग करके AI विकसित कर सके।
- रणनीतिक स्वायत्तता: इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक अनुकूलन के लिये आवश्यक माना जाता है और यह ‘डिजिटल उपनिवेशवाद’ को रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- महत्त्व: यह पहल डिजिटल स्वायत्तता प्राप्त करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है और तमिलनाडु को उच्चस्तरीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता का वैश्विक केंद्र बनाने में सहायक होगी।
- यह परियोजना केंद्र सरकार के इंडिया AI मिशन के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य AI कंप्यूट एक्सेस को लोकतांत्रिक बनाना है।
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और पढ़ें: इंडिया AI मिशन, रणनीतिक स्वायत्तता, लार्ज लैंग्वेज मॉडल |

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
इंडिया पोस्ट ने लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर के तौर पर पहला ONDC ऑर्डर डिलीवर किया
चर्चा में क्यों?
डाक विभाग (इंडिया पोस्ट) ने एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, क्योंकि उसने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के लिये लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता के रूप में अपना पहला ऑनलाइन ऑर्डर सफलतापूर्वक डिलीवर किया है।
मुख्य बिंदु:
- लेन-देन: उद्घाटन ऑर्डर में श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर के एक स्थानीय विक्रेता से प्राप्त अखरोट की शिपमेंट शामिल थी, जिसे दिल्ली में एक उपभोक्ता तक डिलीवर किया गया।
- इंडिया पोस्ट की भूमिका: पारंपरिक डाक सेवाओं की सीमाओं से आगे बढ़कर इंडिया पोस्ट ने लॉजिस्टिक्स की मुख्य ज़िम्मेदारी सॅंभाली और दूरदराज़ क्षेत्रों से पिकअप लेकर महानगर में अंतिम गंतव्य वितरण तक पूरी मूल्य शृंखला का प्रबंधन किया।
- एकीकरण: डिलीवरी इंडिया पोस्ट के आंतरिक लॉजिस्टिक्स सॉफ्टवेयर को ONDC के ओपन प्रोटोकॉल के साथ निर्बाध रूप से एकीकृत करके संभव हुई, जिससे रीयल-टाइम ट्रैकिंग और स्वचालित डिस्पैच सुनिश्चित हुआ।
- लॉजिस्टिक्स फ्रेमवर्क: इंडिया पोस्ट को शामिल करने से ONDC को 1.6 लाख से अधिक डाकघरों तक पहुँच मिलती है, जिससे सबसे दूरदराज़ ग्रामीण विक्रेता भी राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच सकते हैं।
- समान अवसर: अब छोटे कारीगर और MSME उच्च-गुणवत्ता वाली लॉजिस्टिक्स सेवाओं का प्रतिस्पर्द्धी दरों पर लाभ उठा सकते हैं, जो पहले डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्रवेश करने में एक बड़ी बाधा था।
- स्थानीय का समर्थन (Vocal for Local): यह एकीकरण वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) पहल को मज़बूती देता है, क्योंकि यह क्षेत्रीय विशिष्टताओं के लिये भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला उपलब्ध कराता है।
- वित्तीय समावेशन: यह ग्रामीण उद्यमियों को डिजिटल भुगतान अपनाने और अपने व्यवसाय को औपचारिक बनाने के लिये प्रोत्साहित करता है, जिससे विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में योगदान मिलता है।
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और पढ़ें: MSME, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट, डिजिटल कॉमर्स के लिये ओपन नेटवर्क |

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
IOA ने नेशनल ओलंपिक एजुकेशन एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम लॉन्च किया
चर्चा में क्यों?
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने स्थानीय स्तर से लेकर उत्कृष्ट स्तर तक भारत की संपूर्ण ओलंपिक प्रणाली को मज़बूत करने के उद्देश्य से नेशनल ओलंपिक एजुकेशन एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम (NOEDP) को औपचारिक रूप से शुरू किया।
मुख्य बिंदु:
- समेकित ढाँचा: NOEDP को एक व्यापक राष्ट्रीय ढाँचे के रूप में तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) और राज्य ओलंपिक संघों (SOAs) के सहयोग से पूरे खेल पारितंत्र में संरचित शैक्षणिक पहलें लागू करना है।
- नेशनल ओलंपिक अकादमी (NOA) का पुनर्सक्रियण: इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आधार अहमदाबाद स्थित नेशनल ओलंपिक अकादमी (NOA) का औपचारिक पुनर्सक्रियण है। NOA भारत में ओलंपिक शिक्षा, अधिगम, अनुसंधान और संवाद का केंद्रीय केंद्र होगा।
- नेतृत्व: IOA की अध्यक्ष और दिग्गज धाविका पी. टी. उषा को NOA की अध्यक्ष के रूप में अनुमोदित किया गया है, जबकि ओलंपिक पदक विजेता एवं IOA के उपाध्यक्ष गगन नारंग को इसका निदेशक नियुक्त किया गया है।
- अंतर्राष्ट्रीय अनुरूपता: NOA, ओलंपिया स्थित इंटरनेशनल ओलंपिक अकादमी के साथ सहयोग करेगा ताकि भारत के कार्यक्रम वैश्विक मानकों के अनुरूप हों और ओलंपिक चार्टर का पालन सुनिश्चित करें।
- महत्त्व: ये पहलें एथलीट-केंद्रित ओलंपिक आंदोलन को मज़बूत करने पर भारत के नए फोकस को दर्शाती हैं, जिससे खिलाड़ियों को अपने करियर के दौरान नेतृत्व कौशल और शैक्षणिक सहायता प्राप्त हो सकेगी।

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