हरियाणा Switch to English
भारत की प्रथम हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा में शुरू
चर्चा में क्यों?
भारत की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन हरियाणा में जींद-सोनीपत मार्ग पर स्वच्छ रेल प्रौद्योगिकी और हरित गतिशीलता के क्षेत्र में एक प्रमुख पायलट परियोजना के रूप में शुरू होने जा रही है।
मुख्य बिंदु
- प्रौद्योगिकी: यह हरित हाइड्रोजन ईंधन सेल पर आधारित है, जिसमें विद्युत उत्पादन के दौरान केवल जलवाष्प उत्सर्जित होती है। इसके लिये हाइड्रोजन की आपूर्ति जींद स्थित संयंत्र से की जाएगी।
- पायलट प्रोजेक्ट: यह पहल भारतीय रेलवे की पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत रेल परिवहन रणनीति का अंग है, जो भविष्य में अन्य रेल कॉरिडोरों पर हाइड्रोजन-आधारित ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
- महत्त्व: यह भारत की प्रथम हाइड्रोजन-संचालित रेल सेवा है, जो शून्य-उत्सर्जन परिवहन को प्रोत्साहित करती है तथा डीज़ल पर निर्भरता में कमी लाती है। इसके माध्यम से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट आने की संभावना है और यह भारत के सतत परिवहन तथा नेट-ज़ीरो लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।
- सुरक्षा प्रावधान: ट्रेन को हाइड्रोजन निर्गमन पहचान प्रणाली, अग्नि-निरोधक तकनीक तथा अन्य उन्नत सुरक्षा उपकरणों से सुसज्जित किया गया है।
- आर्थिक प्रभाव: दीर्घावधि में हाइड्रोजन-आधारित ट्रेनों से डीज़ल इंजनों की तुलना में परिचालन लागत में कमी आने की संभावना है, जिससे सतत एवं लागत-प्रभावी क्षेत्रीय परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
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राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
दलाई लामा ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित
चर्चा में क्यों?
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने अमेरिका के लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें वार्षिक ग्रैमी पुरस्कार समारोह (2026) में अपना पहला ग्रैमी पुरस्कार जीता।
मुख्य बिंदु
- पुरस्कार और श्रेणी: दलाई लामा ने अपने एल्बम ‘मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा’ के लिये सर्वश्रेष्ठ ऑडियो बुक, कथन और कहानी कहने की रिकॉर्डिंग श्रेणी में ग्रैमी पुरस्कार जीता।
- यह उनका पहला ग्रैमी पुरस्कार था, जो उन्होंने 90 वर्ष की आयु में प्राप्त किया, जिससे संगीत के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में एक आध्यात्मिक गुरु के लिये यह अद्वितीय पहचान बन गई।
- समारोह में संगीतकार रूफस वेनराइट ने उनकी ओर से पुरस्कार स्वीकार किया।
- एल्बम की विषयवस्तु: यह एल्बम दलाई लामा की शांति, करुणा, जागरूकता और सार्वभौमिक ज़िम्मेदारी संबंधी शिक्षाओं को संगीत रचनाओं और कथन के साथ मिश्रित करता है, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक सद्भाव का संदेश फैलाना है।
- सहयोग: इस एल्बम में भारतीय शास्त्रीय संगीत के उस्ताद उस्ताद अमज़द अली खान और उनके बेटों अमान अली बंगश और अयान अली बंगश का योगदान शामिल है, जबकि इसका निर्माण ग्रैमी पुरस्कार विजेता कबीर सहगल ने किया है।
- वैश्विक मान्यता: यह उपलब्धि दलाई लामा की आवाज़ और शिक्षाओं की वैश्विक पहुँच को रेखांकित करती है, जो सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और कलात्मक सीमाओं से परे जाती है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया: इस उपलब्धि की व्यापक रूप से सराहना की गई, हालाँकि चीनी सरकार ने इसकी आलोचना भी की, जिसने दलाई लामा की स्थिति के संदर्भ में इसे राजनीतिक हस्तक्षेप बताया।
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वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को क्रैफ़ोर्ड पुरस्कार 2026 मिला
चर्चा में क्यों?
भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा भूविज्ञान में वर्ष 2026 का क्रैफोर्ड पुरस्कार प्रदान किया गया है, जिसे प्रायः ‘भूविज्ञान का नोबेल’ कहा जाता है, क्योंकि इसका महत्त्व उन क्षेत्रों में भी है जो नोबेल पुरस्कारों के अंतर्गत नहीं आते।
मुख्य बिंदु:
- प्रमुख योगदान: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने रामनाथन को “अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों (SLCP) और ग्रीनहाउस प्रभाव की भूमिका की वैज्ञानिक समझ को विस्तारित करने में उनके अग्रणी योगदान” के लिये चयनित किया।
- नॉन-CO₂ ग्रीनहाउस गैसों की खोज (1975): उन्होंने प्रथम बार यह प्रमाणित किया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), जो पूर्व में केवल ओज़ोन परत के क्षरण से सबंधित माने जाते थे, प्रभावशाली ग्रीनहाउस गैसों के रूप में भी कार्य करते हैं।
- वायुमंडलीय ब्राउन मेघ (ABC): उनके शोध में दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र के ऊपर बने कालिख और धूल के विशाल ब्राउन मेघ की उपस्थिति को रेखांकित किया गया।
- उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि ये कण (ब्लैक कार्बन) सूर्य विकिरण को अवशोषित कर वायुमंडल को गर्म करते हैं तथा साथ-ही-साथ पृथ्वी की सतह को ठंडा करते हैं, जिससे मानसूनी प्रवृत्तियाँ प्रभावित होती हैं।
- क्रैफोर्ड पुरस्कार:
- इसकी स्थापना वर्ष 1980 में उद्योगपति होल्गर क्रैफोर्ड और उनकी पत्नी अन्ना-ग्रेटा द्वारा की गई थी।
- पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (यही संस्था नोबेल पुरस्कार भी प्रदान करती है)।
- क्षेत्र : यह सम्मान उन क्षेत्रों में दिया जाता है जो नोबेल पुरस्कार की परिधि में सम्मिलित नहीं हैं, जैसे- गणित, खगोल विज्ञान, भूविज्ञान तथा जीव विज्ञान।

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पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0: त्रिपुरा की ग्राम पंचायत प्रथम
चर्चा में क्यों?
त्रिपुरा ने पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जारी पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्थानीय शासन में एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है।
मुख्य बिंदु:
- PAI 2.0 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: त्रिपुरा के सेपाहिजाला ज़िले के जम्पुइजाला आरडी ब्लॉक में स्थित जुगल किशोर नगर ग्राम समिति ने लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों के मूल्यांकन में 88.44 स्कोर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- त्रिपुरा पंचायतों का प्रदर्शन: राज्य का असाधारण प्रदर्शन यहीं सीमित नहीं रहा:
- दक्षिण नलचर ग्राम पंचायत (नलचर आरडी ब्लॉक, सेपाहिजाला) ने 88.14 अंकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया ।
- चेश्रीमाई ग्राम पंचायत (चारिलम आरडी ब्लॉक, सेपाहिजाला) ने 87.85 अंकों के साथ चौथा स्थान प्राप्त किया ।
- पूर्ण भागीदारी: त्रिपुरा ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिये अपनी सभी 1,176 ग्राम पंचायतों और ग्राम समितियों के डेटा को 100% जमा और सत्यापित करने का गौरव हासिल किया।
- पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0: यह भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की एक पहल है जो देश भर में 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है।
- सूचकांक सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के अनुरूप 9 विषयों में फैले 435 स्थानीय संकेतकों के आधार पर स्थानीय निकायों का मूल्यांकन करता है।
- प्रमुख संकेतक: इनमें पारदर्शिता, सेवा वितरण, विकेंद्रीकृत योजना, सामुदायिक भागीदारी और शासन के परिणाम शामिल हैं।
- उद्देश्य: इस सूचकांक का लक्ष्य राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप ज़मीनी स्तर पर लोकतंत्र और स्थानीय स्वशासन को मज़बूत करना है।


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