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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न. भारत में सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया तीव्र गति से आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी के विस्तार तथा निरंतर बनी रहने वाली सामाजिक पदानुक्रमों की पारस्परिक अंतःक्रिया से रूपायित हो रही है। परीक्षण कीजिये कि यह अंतःक्रिया सामाजिक गतिशीलता और असमानता को कैसे प्रभावित करती है। (250 शब्द)

    23 Feb, 2026 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भारतीय समाज

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण: 

    • अपने उत्तर का आरंभ हाल के सामाजिक परिवर्तनों को उजागर करके कीजिये।
    • मुख्य भाग में, आर्थिक विकास, तकनीकी प्रसार और स्थायी सामाजिक पदानुक्रमों के सामाजिक परिवर्तन पर प्रभाव का विश्लेषण कीजिये।
    • सामाजिक गतिशीलता और असमानता पर इस परस्पर क्रिया के प्रभाव का गहनता से परीक्षण कीजिये।
    • तद्नुसार निष्कर्ष प्रस्तुत कीजिये।

    परिचय: 

    वर्तमान में भारत का सामाजिक रूपांतरण एक विरोधाभास द्वारा दर्शित होता है: तीव्र आर्थिक विस्तार और गहन डिजिटल प्रवेश, गहराई से स्थापित सामाजिक पदानुक्रमों (जाति, वर्ग और पितृसत्ता) के कठोर ढाँचे के भीतर हो रहा है।

    • यह त्रि-आयामी परस्पर क्रिया पारंपरिक ढाँचों को एकतरफा रूप से समाप्त नहीं करती, बल्कि एक जटिल रूपरेखा का निर्माण करती है, जहाँ कुछ के लिये सामाजिक गतिशीलता संभव होती है, जबकि अन्य के लिये संरचनात्मक असमानता के नए रूप गहराई से स्थापित हो जाते हैं।

    मुख्य भाग: 

    आर्थिक विकास: समृद्धि बनाम ध्रुवीकरण

    जहाँ भारत एक वैश्विक विकास इंजन बना हुआ है, वहीं इस विकास की प्रकृति विभिन्न सामाजिक समूहों के लिये उन्नति की सीमा निर्धारित करती है।

    • ‘K-आकार’ का सुधार और सामाजिक विचलन: महामारी के बाद की वृद्धि स्थिर हुई है, लेकिन K-आकार की प्रवृत्ति बनी हुई है।
      • धन पूंजी-गहन क्षेत्रों (प्रौद्योगिकी, फार्मा, हरित ऊर्जा) में केंद्रित हो रहा है, जो उच्च सांस्कृतिक पूंजी (अभिजात स्कूलिंग और अंग्रेज़ी में प्रवीणता) की मांग करते हैं, जबकि श्रम-गहन क्षेत्र (निर्माण, वस्त्र उद्योग) स्थिर बने हुए हैं।
    • धन-परिसंपत्ति अंतराल: विकास ने परिसंपत्तियों (रियल एस्टेट और शेयरों) की कीमतों को बढ़ा दिया है। चूँकि सामाजिक पदानुक्रम ऐतिहासिक रूप से भूमि स्वामित्व को निर्धारित करते थे, इसलिये पीढ़ियों के बीच धन का अंतर बढ़ रहा है।
      • पूर्व की विश्व असमानता रिपोर्ट 2022 के अनुसार, भारत में शीर्ष 10% जनसंख्या के पास कुल राष्ट्रीय आय का 57% हिस्सा था, जबकि निचले 50% की हिस्सेदारी वर्ष 2021 में 13% थी।

    प्रौद्योगिकी का प्रसार: समानता लाने वाला और विभाजक, दोनों

    प्रौद्योगिकी ने उन्नति के उपकरणों को आम लोगों तक पहुँचाया है, लेकिन इन उपकरणों से होने वाले लाभ असमान रूप से वितरित हैं।

    • ‘डिजिटल फ्लोर’ का उदय: इंडिया स्टैक (UPI, ONDC और आधार) ने एक ‘डिजिटल फ्लोर’ प्रदान किया है, जो SC/ST और OBC समुदायों को वित्तीय स्वायत्तता का एक स्तर देता है।
      • मानव मध्यस्थों को हटाकर, प्रौद्योगिकी बैंकिंग और कल्याण में ‘जाति-आधारित बाधा’ को कम करती है।
      • हालाँकि, डिजिटल निरक्षरता अभी भी एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
    • गिग अर्थव्यवस्था में एल्गोरिदमिक स्तरीकरण: गिग अर्थव्यवस्था (वर्ष 2026 में लगभग एक मिलियन गिग कार्यकर्त्ताओं को जोड़ने की संभावना) हाशिये पर रहने वाले समूहों के लिये कम बाधा वाली प्रवेश सुविधा प्रदान करती है।
      • हालाँकि, यह असमानता का एक नया रूप उत्पन्न करती है, जिसे एल्गोरिद्मिक प्रबंधन कहा जाता है।
      • कर्मचारियों के पास सामूहिक सौदेबाज़ी की शक्ति नहीं होती और प्लेटफॉर्म की ‘सुविधा’ अक्सर उर्ध्वगतिशीलता की कमी को छिपा देती है, जिससे एक ‘डिजिटल सर्वहारा वर्ग' (Digital Proletariat) का निर्माण होता है।
    • AI और ‘कौशल-प्रीमियम’ बाधा: जैसे-जैसे AI श्वेत-पेशा (white-collar) नौकरियों में एकीकृत हो रहा है, वे ‘प्रवेश-स्तर’ भूमिकाएँ, जिन्होंने पहले प्रथम-पीढ़ी के स्नातकों को सामाजिक उन्नति का अवसर प्रदान किया था, समाप्त होती जा रही हैं।
      • यह ‘योग्यता’ के मानक को ऐसे स्तर तक बढ़ा देता है, जिसे केवल उच्च-स्तरीय निजी शिक्षा प्राप्त व्यक्ति ही हासिल कर सकते हैं।

    स्थायी सामाजिक पदानुक्रम: ‘अदृश्य संरचना’

    जाति, धर्म और पितृसत्ता जैसी पारंपरिक संरचनाएँ समाप्त नहीं हो रही हैं, बल्कि उन्हें आधुनिक अर्थव्यवस्था में ‘पुनः कूटबद्ध’ किया जा रहा है।

    • सामाजिक पूंजी एक ‘गुप्त तर्क’ के रूप में: कॉरपोरेट और स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र में सामाजिक पूंजी (नेटवर्क) प्रायः मानव पूंजी (डिग्रियाँ) पर भारी पड़ती है।
      • सिफारिशें, मार्गदर्शन और वेंचर कैपिटल निवेश अब भी संकीर्ण सामाजिक नेटवर्कों के माध्यम से अनुपातहीन रूप से संचालित होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ‘वंशानुगत संपत्ति’ या अभिजात पूर्व छात्र संपर्कों से वंचित व्यक्तियों के सामने ‘काँच की छत’ जैसी बाधा उत्पन्न होती है।
    • अनौपचारिक क्षेत्र का ‘स्टिकी फ्लोर’: भारत का 90% से अधिक कार्यबल अब भी अनौपचारिक क्षेत्र में है।
      • सामाजिक पदानुक्रम यह निर्धारित करते हैं कि वंचित जातियाँ कम उत्पादकता, जोखिमपूर्ण और कलंकित अनौपचारिक कार्यों में अधिक प्रतिनिधित्व रखती हैं, जिससे इन क्षेत्रों से ‘बाहर निकलना’ सांख्यिकीय रूप से अत्यंत दुर्लभ हो जाता है।

    परस्पर क्रिया:

    • पितृसत्ता का ‘प्लेटफॉर्म आधारित रूपांतरण’ (लिंग, प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था): यद्यपि गिग अर्थव्यवस्था अनुकूलनशील प्रगति का आश्वासन देती है, परंतु अवैतनिक देखभाल कार्य का पितृसत्तात्मक बोझ और लैंगिक डिजिटल विभाजन महिलाओं की वास्तविक आर्थिक गतिशीलता को सीमित कर देता है।
      • परिणामस्वरूप, प्लेटफॉर्म एल्गोरिद्म अनजाने में पारंपरिक लैंगिक वेतन अंतराल और व्यावसायिक अलगाव को आधुनिक डिजिटल कार्यबल के भीतर पुनरुत्पादित करते हैं।
    • स्थानिक-डिजिटल बहिष्करण (शहरी-ग्रामीण, प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था): आर्थिक विकास बढ़ते हुए ‘स्मार्ट सिटी’ केंद्रों में केंद्रित हो रहा है, जहाँ प्रौद्योगिकी का प्रसार एक तीव्र गति वाली अर्थव्यवस्था का निर्माण करता है, जो ग्रामीण और निम्न-जातीय आंतरिक क्षेत्रों को पीछे छोड़ देता है।
      • यह परस्पर क्रिया एक ‘डिजिटल दीवार’ का निर्माण करती है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण जनसंख्या तकनीक के उत्पादक की बजाय मात्र उपभोक्ता बनकर रह जाती है और इस प्रकार भौगोलिक तथा वर्ग-आधारित असमानता राष्ट्रीय व्यापार संतुलन में संरचनात्मक रूप से अंतर्निहित हो जाती है।
    • स्वचालित बहिष्करण (वर्ग, प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था): पूंजी-गहन आर्थिक आधुनिकीकरण और AI का एकीकरण उन प्रवेश-स्तर की नौकरियों को तीव्र गति से स्वचालित कर रहा है, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से वर्गीय उर्ध्वगतिशीलता के लिये एक मार्ग प्रदान किया था।
      • चूँकि स्थायी वर्गीय पदानुक्रम उच्च-स्तरीय शिक्षा तक पहुँच को निर्धारित करते हैं, इसलिये हाशिये पर रह रहे गरीबों के पास अपेक्षित उन्नत डिजिटल कौशल का अभाव रहता है, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर संरचनात्मक ठहराव उत्पन्न होता है।

    सामाजिक गतिशीलता और असमानता पर इस परस्पर क्रिया का प्रभाव

    अंतर्संबंध

    परिणामी सामाजिक परिघटना

    असमानता पर प्रभाव

    विकास + पदानुक्रम

    अभिजात अधिग्रहण: विकास उन लोगों को लाभान्वित करता है, जिनके पास मौजूदा सामाजिक नेटवर्क होते हैं।

    सापेक्ष असमानता में वृद्धि

    प्रौद्योगिकी + विकास

    डिजिटल उछाल: छोटे व्यवसाय UPI/ONDC के माध्यम से तीव्र गति से विस्तार कर सकते हैं। 

    निरपेक्ष गरीबी में कमी। 

    प्रौद्योगिकी + पदानुक्रम

    पुनः कूटबद्ध पक्षपात: एल्गोरिद्म और भर्ती फिल्टर सामाजिक पूर्वाग्रहों को प्रतिबिंबित करते हैं। 

    सामाजिक स्तरीकरण बना रहता है।

    निष्कर्ष: 

    यद्यपि प्रौद्योगिकी और आर्थिक उदारीकरण ने उर्ध्वगतिशीलता के लिये नए अवसर प्रदान किये हैं, वे प्रायः पूर्व-विद्यमान सामाजिक विभाजनों पर अध्यारोपित होकर उन्हें और अधिक तीव्र कर देते हैं। इस परस्पर क्रिया को न्यायसंगत सामाजिक परिवर्तन की दिशा में ले जाने के लिये राज्य को केवल आर्थिक विकास को सुगम बनाने तक सीमित न रहकर डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं में सक्रिय निवेश करना होगा, उभरते क्षेत्रों में सकारात्मक कार्रवाई को दृढ़तापूर्वक लागू करना होगा तथा अनौपचारिक कार्यबल के लिये सामाजिक सुरक्षा जाल को सुदृढ़ करना होगा।

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