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ध्यान दें:

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न. “प्रभावी नेतृत्व के लिये बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ भावनात्मक बुद्धिमत्ता भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है।” सार्वजनिक सेवा वितरण के संदर्भ में इस कथन की विवेचना कीजिये। (150 शब्द)

    25 Dec, 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण: 

    • अपने उत्तर की शुरुआत EI को परिभाषित करके कीजिये।
    • मुख्य भाग में, उपयुक्त उदाहरणों के साथ इसके महत्त्व पर तर्क दीजिये।
    • भावनात्मक बुद्धिमत्ता में सुधार के उपाय बताइये।
    • उचित निष्कर्ष लिखिये।

    परिचय: 

    भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EI) से तात्पर्य अपनी भावनाओं को समझने, प्रबंधित करने और नियंत्रित करने की क्षमता से है, साथ ही दूसरों की भावनाओं के प्रति समानुभूतिपूर्वक प्रतिक्रिया देने की क्षमता से भी है। लोक सेवा में, जहाँ नेतृत्व प्रतक्षतः शासन के परिणामों और नागरिकों के विश्वास को प्रभावित करता है, प्रभावी निर्णय लेने एवं मानवीय प्रशासन के लिये भावनात्मक बुद्धिमत्ता बौद्धिक क्षमता जितनी ही महत्त्वपूर्ण हो जाती है।

    मुख्य भाग:

    प्रभावी और उत्तरदायी लोक नेतृत्व को बढ़ाने में भावनात्मक बुद्धिमत्ता की भूमिका

    • नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देना: सरकारी कर्मचारी नियमित रूप से विविध और सुभेद्द जनसंख्या के साथ संपर्क में रहते हैं। उच्च भावनात्मक बुद्धिमत्ता प्रशासकों को प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं से परे नागरिकों की जरूरतों, शिकायतों एवं भावनाओं को समझने में सक्षम बनाती है।
      • उदाहरण: आपदा राहत या महामारी प्रतिक्रिया का दायित्व निभाने वाले ज़िला कलेक्टरों के लिये प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ लोक-व्यथा के प्रति समानुभूति और संवेदनशीलता भी अनिवार्य होती है।
    • दबाव में बेहतर निर्णय लेने की क्षमता: शासन में प्रायः परस्पर विरोधी हितों, सीमित जानकारी और लोक अन्वेक्षा जैसी जटिल परिस्थितियाँ शामिल होती हैं। भावनात्मक नियंत्रण नेताओं को शांत रहने, आवेगपूर्ण निर्णयों से बचने और समानुभूति तथा निष्पक्षता के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
      • उदाहरण: कोविड-19 लॉकडाउन जैसे संकटों के दौरान, भावनात्मक रूप से जागरूक नेतृत्व ने लोक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और मानवीय विचारों के बीच संतुलन बनाने में मदद की।
    • विवाद समाधान और आम सहमति निर्माण: लोक प्रशासन में प्रायः समुदायों, संस्थानों या राजनीतिक पक्षों के बीच अंतःक्रिया शामिल होती है। उच्च भावनात्मक बुद्धिमत्ता वाले नेता असहमति को प्रबंधित करने, तनाव को कम करने और आम सहमति बनाने में सक्षम होते हैं।
      • उदाहरण: सक्षम ज़िला मजिस्ट्रेट प्रायः भूमि अधिग्रहण या कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को दबाव के बजाय संवाद के माध्यम से हल करते हैं।
    • नैतिक नेतृत्व और जन विश्वास: भावनात्मक बुद्धिमत्ता सत्यनिष्ठा, करुणा और नैतिक निर्णय को मज़बूत करती है —जो नैतिक शासन के प्रमुख गुण हैं। जो नेतृत्वकर्त्ता अपने निर्णयों के भावनात्मक प्रभाव को समझते हैं, उनके स्वेच्छापूर्वक कार्य करने या सत्ता का दुरुपयोग करने की संभावना कम होती है।
      • उदाहरण: कल्याणकारी योजनाओं की प्रदायगी में समानुभूति प्रदर्शित करने वाले सरकारी कर्मचारी राज्य संस्थानों में विश्वास बढ़ाते हैं।
    • नौकरशाही के भीतर अभिप्रेरणा और टीम प्रबंधन: सार्वजनिक संगठन टीम वर्क और मनोबल पर निर्भर करते हैं। भावनात्मक रूप से बुद्धिमान नेता अभिप्रेरित करते हैं, तनाव का प्रबंधन करते हैं और समावेशी कार्य वातावरण निर्मित करते हैं, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है।
      • उदाहरण: सफल ज़िला प्रशासन प्रायः केवल तकनीकी विशेषज्ञता के बजाय मज़बूत मानव-प्रबंधन कौशल को दर्शाता है।
    • जटिलता और परिवर्तन के अनुकूल होना: तेज़ी से हो रहे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के इस युग में, प्रशासकों को अनिश्चितता, जन दबाव और नीतिगत बदलावों से निपटना होगा। EI शासन सुधारों के लिये आवश्यक लचीलापन, दृढ़ता और अनुकूल नेतृत्व को सक्षम बनाती है।

    लोक सेवा में भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EI) में सुधार के उपाय

    • संस्थागत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण: सिविल सेवा प्रशिक्षण (LBSNAA, राज्य ATI) में भावनात्मक बुद्धिमत्ता मॉड्यूल को नियमित रूप से शामिल करने से आत्म-जागरूकता, समानुभूति और पारस्परिक कौशल में वृद्धि हो सकती है। केस-आधारित शिक्षण, भूमिका-निर्वाह और व्यवहारिक अनुकरण इसके अभिन्न अंग होने चाहिये।
    • अनुभवात्मक अधिगम और क्षेत्र अनुभव: फील्ड पोस्टिंग, ज़मीनी स्तर पर अंतःक्रियाएँ और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम अधिकारियों को विविध सामाजिक वास्तविकताओं को समझने में मदद करते हैं, जिससे वास्तविक जीवन की स्थितियों में समानुभूति और भावनात्मक विनियमन मज़बूत होता है।
    • मार्गदर्शन और प्रतिपुष्टि तंत्र: वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संरचित मार्गदर्शन और 360-डिग्री प्रतिपुष्टि प्रणाली सिविल सेवकों को व्यवहार, संचार शैली और नेतृत्व प्रभावशीलता पर विचार करने में मदद कर सकती है।
    • तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य सहायता: तनाव प्रबंधन, ध्यान और भावनात्मक लचीलेपन पर नियमित कार्यशालाएँ बर्नआउट को रोक सकती हैं और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ा सकती हैं।
    • नैतिकता और मूल्य-आधारित प्रशिक्षण: नैतिक तर्क, समानुभूति और भावनात्मक जागरूकता को नैतिकता और सत्यनिष्ठा मॉड्यूल में एकीकृत करने से नैतिक निर्णय और करुणापूर्ण शासन को मज़बूती मिलती है।
    • प्रदर्शन मूल्यांकन को व्यवहारिक दक्षताओं से जोड़ना: प्रदर्शन मूल्यांकन में टीम वर्क, जवाबदेही और नेतृत्व जैसे भावनात्मक बुद्धिमत्ता से संबंधित संकेतकों को शामिल करने से भावनात्मक रूप से बुद्धिमान आचरण को संस्थागत रूप दिया जा सकता है।

    निष्कर्ष:

    बौद्धिक क्षमता लोक सेवकों को विश्लेषणात्मक और तकनीकी दक्षता प्रदान करती है, जबकि भावनात्मक बुद्धिमत्ता उन्हें इस ज्ञान को समानुभूति, निष्पक्षता और बुद्धिमत्ता के साथ लागू करने में सक्षम बनाती है। लोक सेवा में, जहाँ निर्णय सीधे मानव जीवन को प्रभावित करते हैं, प्रभावी नेतृत्व के लिये न केवल बौद्धिक उत्कृष्टता बल्कि भावनात्मक परिपक्वता भी आवश्यक है। बुद्धि लब्धि और भावनात्मक बुद्धिमत्ता मिलकर उत्तरदायी, नैतिक और जन-केंद्रित शासन की नींव बनाते हैं।

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