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प्रश्न :
आप एक बाढ़–प्रभावित ज़िले के उप-मण्डलीय दण्डाधिकारी (SDM) हैं। हाल ही में आयी बाढ़ के कारण हज़ारों लोग विस्थापित हो गये हैं। राज्य सरकार ने आपातकालीन राहत कोष भेजा है, जो आवश्यकतानुसार की तुलना में काफी कम है। आपको निर्देश दिया गया है कि इस कोष का वितरण “आपातकाल एवं संवेदनशीलता के आधार पर” कीजिये
05 Dec, 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़
किंतु आपके समक्ष निम्नलिखित परिस्थिति है:
ग्राम A राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है। स्थानीय विधायक आप पर दबाव डालते हैं कि राहत कोष का बड़ा हिस्सा वहाँ आवंटित किया जाए। वे संकेत करते हैं कि “भविष्य का सहयोग” आपके निर्णय पर निर्भर करेगा।
ग्राम B अत्यधिक रूप से प्रभावित है, परंतु वहाँ सड़क संपर्क अत्यंत कमज़ोर है। वहाँ राहत पहुँचाने में अतिरिक्त समय एवं संसाधन लगेंगे।
ग्राम C में जनहानि अपेक्षाकृत कम है, परंतु वहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर रहते हैं, जिनके पास आधिकारिक राहत वितरण के लिये आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं।
आपका क्षेत्रीय स्टाफ निजी तौर पर यह सुझाव देता है कि आप लॉजिस्टिक्स (वाहन, ईंधन, भोजन आदि) के लिये कुछ धनराशि कोष से ही निकाल लें। आधिकारिक दिशा-निर्देश ऐसा करने की अनुमति नहीं देते, परंतु इन व्ययों के बिना दूरदराज़ क्षेत्रों में राहत पहुँचने में विलंब होगा।
मीडिया यह रिपोर्ट कर रहा है कि प्रशासन “धीमा और लापरवाह” है, जिससे आप पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
आपको सीमित संसाधनों का निष्पक्ष, कुशल तथा नैतिक तरीके से उपयोग करते हुए इस राहत को आवंटित करना है, साथ ही राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक सीमाओं और मानवीय सरोकारों के बीच संतुलन भी बनाए रखना है।
प्रश्न:
प्रश्न 1. इस स्थिति में निहित प्रमुख नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिये।
प्रश्न 2. SDM के रूप में आपके पास उपलब्ध विकल्पों का उल्लेख कीजिये तथा प्रत्येक विकल्प का मूल्यांकन नैतिक सिद्धांतों के आलोक में कीजिये।
प्रश्न 3. आपका अंतिम कार्यपथ क्या होगा? अपने निर्णय को उपयुक्त तर्कों, नैतिक सिद्धांतों तथा लोकसेवा के मूल्यों का संदर्भ देते हुए न्यायोचित ठहराइये।उत्तर :
परिचय:
यह प्रकरण ‘संसाधनों की कमी की स्थिति में वितरणात्मक न्याय’ (Distributive Justice under Scarcity) की एक उत्कृष्ट प्रशासनिक दुविधा को दर्शाता है। उप-विभागीय दंडाधिकारी (SDM) के रूप में मूल चुनौती यह है कि सीमित संसाधनों और असीम आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित किया जाए, साथ ही राजनीतिक दबाव, प्रक्रियागत बाधाओं तथा मानवीय आपातकाल का प्रबंधन किया जाए। यह स्थिति अधिकारी की भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सत्यनिष्ठा तथा विधि की भावना के प्रति प्रतिबद्धता की परीक्षा लेती है।
संबद्ध हितधारक
- राज्य (State): (SDM/प्रशासन) — विधि का पालन करते हुए जनसेवा का कर्त्तव्य।
- पीड़ित:
- ग्राम A (राजनीतिक रूप से प्रभावशाली)।
- ग्राम B (दूरस्थ, गंभीर रूप से प्रभावित)।
- ग्राम C (अवैध प्रवासी, अभिलेखविहीन)।
- राजनीतिक कार्यपालिका (Political Executive): स्थानीय विधायक (अनुचित प्रभाव डालते हुए)।
- क्षेत्रीय कर्मचारी (Field Staff): लॉजिस्टिक सीमाओं का सामना करते हुए।
- मीडिया (Media): एक प्रहरी/निगरानीकर्त्ता तथा दबाव समूह की भूमिका में।
प्रश्न 1. इस स्थिति में निहित प्रमुख नैतिक मुद्दों का अभिनिर्धारण कीजिये।
- राजनीतिक तटस्थता बनाम राजनीतिक दबाव (ग्राम A): विधायक द्वारा ग्राम A को प्राथमिकता देने की मांग निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करती है।
- विधायक के दबाव में आना ‘भविष्य के सहयोग’ (कॅरियर-सुरक्षा) को सुनिश्चित कर सकता है, परंतु इससे लोक सेवा के राजनीतिक तटस्थता के मूल्य से समझौता हो सकता है।
- ज़रूरतमंदों के बजाय प्रभावशाली लोगों को वरीयता देना ‘अंत्योदय’ (सर्वप्रथम अंतिम व्यक्ति की सेवा) के मूल सिद्धांत का उल्लंघन है।
- दक्षता बनाम समता (ग्राम B): ग्राम B तक पहुँचने में संसाधनों की अधिक खपत होती है तथा अधिक समय लगता है। विशुद्ध उपयोगितावादी दृष्टिकोण से (अधिकतम लोगों के लिये अधिकतम लाभ), संसाधनों को दूसरों के लिये संरक्षित करने हेतु ग्राम B को छोड़ देने का तर्क दिया जा सकता है।
- जॉन रॉल्स का सिद्धांत ‘सबसे वंचित’ को प्राथमिकता देने की अपेक्षा करता है। ग्राम B अत्यधिक प्रभावित है; केवल लॉजिस्टिक संबंधी लागतों के कारण उनकी अनदेखी करना कारगर तो है, लेकिन अनैतिक और अनुचित है।
- विधि का शाब्दिक अर्थ बनाम विधि की भावना (ग्राम C): प्रवासियों के पास दस्तावेज़ नहीं हैं। आधिकारिक नियमों के तहत संभवतः अवैध व्यक्तियों को सहायता देने पर रोक है ताकि जानकारी लीक होने से रोका जा सके।
- दस्तावेज़ों की कमी के कारण भूखे प्रवासियों को सहायता से वंचित करना वेबर के ‘लक्ष्य-विस्थापन’ (Goal Displacement) सिद्धांत का उदाहरण है, जहाँ नियम जीवन-रक्षा जैसे लक्ष्य से अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं।
- यहाँ नैतिक अनिवार्यता मानवाधिकार है, जो आपदा की स्थिति में प्रशासनिक प्रक्रिया से ऊपर होता है।
- साधन बनाम लक्ष्य (लॉजिस्टिक्स फंडिंग): कर्मचारी समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने (उद्दात्त उद्देश्य) हेतु ईंधन/वाहनों (अवैध साधन) के लिये राहत निधि को डायवर्ट करने का सुझाव देते हैं।
- कर्त्तव्यपरायण दृष्टिकोण: इस दृष्टिकोण के अनुसार धन का दुरुपयोग भ्रष्टाचार/अनियमितता है, चाहे उद्देश्य कितना ही नेक क्यों न हो; यह वित्तीय शुचिता का उल्लंघन है।
- उद्देश्यपरक दृष्टिकोण: प्रयोजनवादी दृष्टिकोण के अनुसार यदि धनराशि का उपयोग नहीं किया गया, तो सहायता नहीं पहुँचेगी तथा लोगों की जान जा सकती है। उद्देश्य की प्राप्ति के लिये कोई भी तरीका उचित है।
- जवाबदेही का संकट बनाम मीडिया की धारणा: मीडिया प्रशासन को धीमा बताती है।
- मीडिया को संतुष्ट करने के लिये अधिकारी पर दबाव है कि वह ऐसी कार्रवाइयाँ करे, जो तुरंत दिखें और मीडिया में अच्छी तस्वीर जाए। ग्राम A में जल्दी-जल्दी राहत बांटना आसान और कैमरे के लिये आकर्षक है, जबकि ग्राम B तक पहुँचना कठिन, समयसाध्य और कम दिखाई देने वाला कार्य है।
- यहाँ नैतिक कसौटी यह है कि अधिकारी दिखावे के बजाय कर्त्तव्य पर केंद्रित रहे तथा दबाव में विचलित न हो।
प्रश्न 2. SDM के रूप में आपके लिये उपलब्ध विकल्पों का उल्लेख कीजिये तथा नैतिक सिद्धांतों का उपयोग करते हुए प्रत्येक विकल्प का मूल्यांकन कीजिये।
विकल्प 1: सख्त अनुपालन और राजनीतिक सुरक्षा का मार्ग अपनाना।
कार्रवाई: विधायक की इच्छा के अनुसार ग्राम A को मुख्य धनराशि आवंटित करना, लॉजिस्टिक्स संबंधी लागतों के कारण ग्राम B को छोड़ देना और दस्तावेज़ों की कमी के कारण ग्राम C को सहायता से वंचित करना, लॉजिस्टिक्स संबंधी कार्यों के लिये राहत कोष का उपयोग करने के कर्मचारियों के अनुरोध को सख्ती से अस्वीकार करना।
मूल्यांकन
विश्लेषण
गुण
1. कॅरियर सुरक्षा: कार्यपालिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखता है।
2. प्रक्रियात्मक सुरक्षा: निधि के दुरुपयोग या अनधिकृत लाभार्थियों के संबंध में कोई लेखापरीक्षा आपत्ति नहीं है।
3. गति: सुलभ क्षेत्रों में त्वरित वितरण दृश्यमान मापदंडों को पूरा करता है।
अवगुण
1. निष्पक्षता का उल्लंघन: राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से सिविल सेवा की निष्पक्षता कमज़ोर होती है।
2. अपवर्जन त्रुटियाँ: सर्वाधिक कमज़ोर वर्ग (ग्राम B और C) सहायता से वंचित रह जाते हैं, जो ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत के विपरीत है।
3. नैतिक असंगति: मानवीय कर्त्तव्य निभाने में विफल रहने के कारण ‘अंतरात्मा के संकट की स्थिति’ उत्पन्न होती है।
नैतिक सिद्धांत
विधिवाद (विधि के अक्षरशः पालन पर अड़े रहना) मानवतावाद पर हावी हो जाता है। यह करुणा की विफलता को दर्शाता है।
विकल्प 2: ‘उद्देश्य साधन को उचित ठहराता है’ दृष्टिकोण
कार्ययोजना: विधायक को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करना, ग्राम B तक पहुँचने के लिये ईंधन एवं वाहनों पर अवैध रूप से राहत निधि का उपयोग करना, ग्राम C में बिना किसी दस्तावेज़ के सहायता वितरण करना।
मूल्यांकन
विश्लेषण
गुण
1. सामाजिक न्याय: सहायता सबसे अधिक ज़रूरतमंद और दूरस्थ आबादी तक पहुँचती है।
2. करुणा: प्रशासनिक प्रक्रिया की तुलना में मानव जीवन को प्राथमिकता देता है।
अवगुण
1. वित्तीय अनियमितता: राहत के लिये निर्धारित धन को लॉजिस्टिक्स मद में उपयोग करना तकनीकी रूप से गबन है, जिससे विभागीय जाँच का रास्ता खुलता है।
2. जवाबदेही का अभाव: बिना दस्तावेज़ीकरण के सहायता वितरित करना (भले ही यह नेक उद्देश्य हो) भ्रष्टाचार और रिसाव के लिये खामियाँ उत्पन्न करता है।
3. अवज्ञा: राजनीतिक कार्यपालिका के साथ संघर्ष का जोखिम, जिससे भविष्य के प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
नैतिक सिद्धांत
उपयोगितावाद (अधिकतम लोगों के लिये अधिकतम लाभ) लेकिन यह कर्त्तव्यशास्त्र (नियमों/प्रक्रिया का पालन करने का कर्त्तव्य) का उल्लंघन करता है।
विकल्प 3: रचनात्मक और सैद्धांतिक दृष्टिकोण (चुनी गई कार्यप्रणाली)
कार्रवाई:
ग्राम A (राजनीतिक दबाव): त्वरित और पारदर्शी आवश्यकता का आकलन करें। धनराशि का आवंटन वास्तविक क्षति के अनुपात में ही करें। विधायक को विनम्रतापूर्वक लेकिन दृढ़ता से सूचित करें कि सख्त केंद्रीय निगरानी के कारण मनमानी धनराशि का आवंटन संभव नहीं है।
ग्राम B (लॉजिस्टिक्स): अवैध रूप से धन का दुरुपयोग करने के बजाय आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करके निजी वाहनों/नावों को अधिगृहीत करें। वैकल्पिक रूप से, स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों/CSR पहलों के साथ साझेदारी करके लॉजिस्टिक्स लागत (कर्मचारियों के लिये ईंधन/भोजन) को वहन करें।
ग्राम C (प्रवासी): अस्थायी पहचान की अनुमति देने के लिये विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करें। स्थानीय बुज़ुर्गों या स्कूल शिक्षकों द्वारा पंचनामा (गवाह बयान) के माध्यम से पहचान सत्यापित करें, यह सुनिश्चित करते हुए कि जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के तहत सहायता उन तक पहुँचे, साथ ही लेखापरीक्षा के लिये दस्तावेज़ी रिकॉर्ड बनाए रखें।
मूल्यांकन
विश्लेषण
गुण
1. नैतिक सत्यनिष्ठा: वस्तुनिष्ठ आँकड़ों का उपयोग करके राजनीतिक दबाव का विरोध करता है।
2. समावेशिता: यह सुनिश्चित करती है कि ग्राम B और C को नवीन, कानूनी साधनों के माध्यम से सहायता प्राप्त हो।
3. शुचिता: लॉजिस्टिक्स संबंधी खर्चों के लिये दुरुपयोग की बजाय वैकल्पिक धन (NGO/अनुरोध) ढूंढकर वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करती है।
अवगुण
1. अधिक प्रयास: विकल्प 1 की तुलना में इसमें महत्त्वपूर्ण समन्वय और अतिरिक्त काम की आवश्यकता होती है।
2. राजनीतिक तनाव: विधायक भले ही असंतुष्ट हो सकते हैं, लेकिन यह निर्णय विधि के आधार पर उचित ठहराया जा सकता है।
नैतिक सिद्धांत
यह वेबर के तर्कसंगत सिद्धांतों (नियमों) और गांधीवादी आदर्श (सहानुभूति) के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह लोक सेवा में निष्पक्षता का समर्थन करता है।
तीसरा विकल्प नैतिक दृष्टि से सबसे सही और प्रशासनिक रूप से उपयुक्त है। यह निष्पक्षता, दक्षता और नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रश्न की मांग को पूरा करता है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रक्रिया (नियम) उद्देश्य (राहत) की शत्रु न बन जाए।
प्रश्न 3. आपका अंतिम कार्यपथ क्या होगा? अपने निर्णय को उपयुक्त तर्कों, नैतिक सिद्धांतों तथा लोक सेवा के मूल्यों का संदर्भ देते हुए न्यायोचित ठहराइये।
चरण 1: त्वरित साक्ष्य-आधारित वर्गीकरण (ग्राम A एवं विधायक से संबंधित)
- कार्यवाही: मैं तत्काल क्षेत्रीय टीमें तैनात करूँगा ताकि त्वरित आवश्यकता आकलन किया जा सके और ग्रामों को गंभीरता के आधार पर (उच्च/मध्यम/निम्न) वर्गीकृत किया जा सके। धनराशि का आवंटन पूर्णतः इन्हीं वस्तुनिष्ठ आँकड़ों के आधार पर किया जायेगा।
- मैं विधायक को विनम्रतापूर्वक लेकिन स्पष्ट रूप से अवगत कराऊँगा कि राहत वितरण केंद्रीय ऑडिट के अधीन है और इसे क्षति-आँकड़ों के अनुरूप ही किया जा सकता है।
- औचित्य: यह नोलन के वस्तुनिष्ठता सिद्धांत का समर्थन करता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि निर्णय योग्यता के आधार पर लिये जाएँ, न कि पक्षपात के आधार पर। यह कर्त्तव्यपरायणता (कर्त्तव्य-आधारित नैतिकता: Deontology) के अनुरूप है, जहाँ मेरा प्राथमिक कर्त्तव्य संविधान और विधि के शासन के प्रति है, न कि राजनीतिक कार्यपालिका के व्यक्तिगत हितों के प्रति।
चरण 2: नवीन संसाधन संचयन (ग्राम B और लॉजिस्टिक्स संबंधी समस्याओं का समाधान)
- कार्यवाही: अवैध रूप से धन के दुरुपयोग के बिना लॉजिस्टिक्स संकट को हल करने के लिये मैं आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 और 65 लागू करूँगा, जो बचाव के लिये निजी वाहनों एवं नौकाओं को अधिगृहीत करने की अनुमति देती है।
- इसके साथ-साथ, स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों एवं नागरिक समाज संगठनों के साथ साझेदारी कर फील्ड स्टाफ के लिये ईंधन एवं भोजन की व्यवस्था कराई जायेगी।
- औचित्य: यह दृष्टिकोण जॉन रॉल्स के विभेद सिद्धांत (Difference Principle) के अनुरूप है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उच्च लागत के बावजूद सबसे कम सुविधा प्राप्त (दूरस्थ ग्राम B) को प्राथमिकता मिले। धन के हस्तांतरण के बजाय कानूनी प्रावधानों (DM अधिनियम) का उपयोग शासन में सत्यनिष्ठा और वित्तीय शुद्धता को बनाए रखता है।
चरण 3: करुणामय प्रशासनिक दृष्टिकोण (ग्राम C और प्रवासी श्रमिक)
- कार्यवाही: मैं बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासी श्रमिकों के लिये एक ‘अस्थायी लाभार्थी सूची’ को स्वीकृति प्रदान करूँगा।
- उनकी पहचान तथा क्षति का सत्यापन स्थानीय वृद्ध जनों, आशा कार्यकर्त्ताओं अथवा विद्यालय शिक्षकों द्वारा हस्ताक्षरित पंचनामा (साक्ष्य-विवरण) के माध्यम से किया जायेगा। पारदर्शी ऑडिट ट्रेल सुनिश्चित करने हेतु इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्ड भी किया जायेगा।
- औचित्य: यह गांधीजी के आदर्श वाक्य और अंत्योदय के सिद्धांत का पालन करता है, जिसके अनुसार सबसे कमज़ोर वर्ग की सेवा पहले की जानी चाहिये। यह प्रशासनिक औपचारिकता (लालफीताशाही) पर मानवाधिकारों (अनुच्छेद 21 - जीवन का अधिकार) को प्राथमिकता देता है और कागज़ी कार्रवाई की कमी के कारण प्रवासियों को नज़रअंदाज़ करने के बजाय उन्हें स्वयं में एक लक्ष्य (कांट की निरपेक्ष अनिवार्यता) के रूप में मानता है।
चरण 4: मीडिया और कर्मचारी प्रबंधन
- कार्यवाही: मैं प्रतिदिन शाम को प्रेस ब्रीफिंग आयोजित करूँगा जिसमें उन ग्रामों के संबंध में तथ्यात्मक आँकड़े प्रस्तुत किये जायेंगे जहाँ तक पहुँचना संभव हो सका है और वितरित की गई धनराशि के बारे में जानकारी दी जाएगी।
- मैं अपने फील्ड स्टाफ को यह भी आश्वासन दूँगा कि मैं पंचनामा निर्णय की पूरी प्रशासनिक ज़िम्मेदारी लेता हूँ, जिससे वे भविष्य में किसी भी प्रकार की पूछताछ के डर के बिना काम कर सकें।
- औचित्य: पारदर्शिता अफवाहों का निवारण करती है और जवाबदेही की नैतिक मांग को पूरा करती है। अधीनस्थों की सुरक्षा करना भावनात्मक बुद्धिमत्ता और नेतृत्व का प्रदर्शन करता है, जिससे निर्णय लेने के भय से उत्पन्न प्रशासनिक गतिरोध को रोका जा सकता है।
निष्कर्ष:
संसाधनों की कमी वाले संकट में, नैतिक मार्ग करुणा और वैधता के बीच संतुलन बनाए रखने तथा निष्पक्ष एवं पारदर्शी कार्रवाई के माध्यम से राजनीतिक दबाव का विरोध करने में निहित है। प्रक्रियात्मक अखंडता को बनाए रखते हुए सबसे कमज़ोर लोगों को प्राथमिकता देकर SDM न्याय और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित करता है। यह दृष्टिकोण सच्ची सार्वजनिक सेवा को दर्शाता है जहाँ नियम मानवता की सेवा करते हैं, न कि उसका स्थान लेते हैं।
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