आप एक बाढ़–प्रभावित ज़िले के उप-मण्डलीय दण्डाधिकारी (SDM) हैं। हाल ही में आयी बाढ़ के कारण हज़ारों लोग विस्थापित हो गये हैं। राज्य सरकार ने आपातकालीन राहत कोष भेजा है, जो आवश्यकतानुसार की तुलना में काफी कम है। आपको निर्देश दिया गया है कि इस कोष का वितरण “आपातकाल एवं संवेदनशीलता के आधार पर” कीजिये
किंतु आपके समक्ष निम्नलिखित परिस्थिति है:
ग्राम A राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है। स्थानीय विधायक आप पर दबाव डालते हैं कि राहत कोष का बड़ा हिस्सा वहाँ आवंटित किया जाए। वे संकेत करते हैं कि “भविष्य का सहयोग” आपके निर्णय पर निर्भर करेगा।
ग्राम B अत्यधिक रूप से प्रभावित है, परंतु वहाँ सड़क संपर्क अत्यंत कमज़ोर है। वहाँ राहत पहुँचाने में अतिरिक्त समय एवं संसाधन लगेंगे।
ग्राम C में जनहानि अपेक्षाकृत कम है, परंतु वहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर रहते हैं, जिनके पास आधिकारिक राहत वितरण के लिये आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं।
आपका क्षेत्रीय स्टाफ निजी तौर पर यह सुझाव देता है कि आप लॉजिस्टिक्स (वाहन, ईंधन, भोजन आदि) के लिये कुछ धनराशि कोष से ही निकाल लें। आधिकारिक दिशा-निर्देश ऐसा करने की अनुमति नहीं देते, परंतु इन व्ययों के बिना दूरदराज़ क्षेत्रों में राहत पहुँचने में विलंब होगा।
मीडिया यह रिपोर्ट कर रहा है कि प्रशासन “धीमा और लापरवाह” है, जिससे आप पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
आपको सीमित संसाधनों का निष्पक्ष, कुशल तथा नैतिक तरीके से उपयोग करते हुए इस राहत को आवंटित करना है, साथ ही राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक सीमाओं और मानवीय सरोकारों के बीच संतुलन भी बनाए रखना है।
प्रश्न:
प्रश्न 1. इस स्थिति में निहित प्रमुख नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिये।
प्रश्न 2. SDM के रूप में आपके पास उपलब्ध विकल्पों का उल्लेख कीजिये तथा प्रत्येक विकल्प का मूल्यांकन नैतिक सिद्धांतों के आलोक में कीजिये।
प्रश्न 3. आपका अंतिम कार्यपथ क्या होगा? अपने निर्णय को उपयुक्त तर्कों, नैतिक सिद्धांतों तथा लोकसेवा के मूल्यों का संदर्भ देते हुए न्यायोचित ठहराइये।
यह प्रकरण ‘संसाधनों की कमी की स्थिति में वितरणात्मक न्याय’ (Distributive Justice under Scarcity) की एक उत्कृष्ट प्रशासनिक दुविधा को दर्शाता है। उप-विभागीय दंडाधिकारी (SDM) के रूप में मूल चुनौती यह है कि सीमित संसाधनों और असीम आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित किया जाए, साथ ही राजनीतिक दबाव, प्रक्रियागत बाधाओं तथा मानवीय आपातकाल का प्रबंधन किया जाए। यह स्थिति अधिकारी की भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सत्यनिष्ठा तथा विधि की भावना के प्रति प्रतिबद्धता की परीक्षा लेती है।
प्रश्न 1. इस स्थिति में निहित प्रमुख नैतिक मुद्दों का अभिनिर्धारण कीजिये।
प्रश्न 2. SDM के रूप में आपके लिये उपलब्ध विकल्पों का उल्लेख कीजिये तथा नैतिक सिद्धांतों का उपयोग करते हुए प्रत्येक विकल्प का मूल्यांकन कीजिये।
विकल्प 1: सख्त अनुपालन और राजनीतिक सुरक्षा का मार्ग अपनाना।
कार्रवाई: विधायक की इच्छा के अनुसार ग्राम A को मुख्य धनराशि आवंटित करना, लॉजिस्टिक्स संबंधी लागतों के कारण ग्राम B को छोड़ देना और दस्तावेज़ों की कमी के कारण ग्राम C को सहायता से वंचित करना, लॉजिस्टिक्स संबंधी कार्यों के लिये राहत कोष का उपयोग करने के कर्मचारियों के अनुरोध को सख्ती से अस्वीकार करना।
|
मूल्यांकन |
विश्लेषण |
|
गुण |
1. कॅरियर सुरक्षा: कार्यपालिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखता है। 2. प्रक्रियात्मक सुरक्षा: निधि के दुरुपयोग या अनधिकृत लाभार्थियों के संबंध में कोई लेखापरीक्षा आपत्ति नहीं है। 3. गति: सुलभ क्षेत्रों में त्वरित वितरण दृश्यमान मापदंडों को पूरा करता है। |
|
अवगुण |
1. निष्पक्षता का उल्लंघन: राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से सिविल सेवा की निष्पक्षता कमज़ोर होती है। 2. अपवर्जन त्रुटियाँ: सर्वाधिक कमज़ोर वर्ग (ग्राम B और C) सहायता से वंचित रह जाते हैं, जो ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत के विपरीत है। 3. नैतिक असंगति: मानवीय कर्त्तव्य निभाने में विफल रहने के कारण ‘अंतरात्मा के संकट की स्थिति’ उत्पन्न होती है। |
|
नैतिक सिद्धांत |
विधिवाद (विधि के अक्षरशः पालन पर अड़े रहना) मानवतावाद पर हावी हो जाता है। यह करुणा की विफलता को दर्शाता है। |
विकल्प 2: ‘उद्देश्य साधन को उचित ठहराता है’ दृष्टिकोण
कार्ययोजना: विधायक को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करना, ग्राम B तक पहुँचने के लिये ईंधन एवं वाहनों पर अवैध रूप से राहत निधि का उपयोग करना, ग्राम C में बिना किसी दस्तावेज़ के सहायता वितरण करना।
|
मूल्यांकन |
विश्लेषण |
|
गुण |
1. सामाजिक न्याय: सहायता सबसे अधिक ज़रूरतमंद और दूरस्थ आबादी तक पहुँचती है। 2. करुणा: प्रशासनिक प्रक्रिया की तुलना में मानव जीवन को प्राथमिकता देता है। |
|
अवगुण |
1. वित्तीय अनियमितता: राहत के लिये निर्धारित धन को लॉजिस्टिक्स मद में उपयोग करना तकनीकी रूप से गबन है, जिससे विभागीय जाँच का रास्ता खुलता है। 2. जवाबदेही का अभाव: बिना दस्तावेज़ीकरण के सहायता वितरित करना (भले ही यह नेक उद्देश्य हो) भ्रष्टाचार और रिसाव के लिये खामियाँ उत्पन्न करता है। 3. अवज्ञा: राजनीतिक कार्यपालिका के साथ संघर्ष का जोखिम, जिससे भविष्य के प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। |
|
नैतिक सिद्धांत |
उपयोगितावाद (अधिकतम लोगों के लिये अधिकतम लाभ) लेकिन यह कर्त्तव्यशास्त्र (नियमों/प्रक्रिया का पालन करने का कर्त्तव्य) का उल्लंघन करता है। |
विकल्प 3: रचनात्मक और सैद्धांतिक दृष्टिकोण (चुनी गई कार्यप्रणाली)
कार्रवाई:
ग्राम A (राजनीतिक दबाव): त्वरित और पारदर्शी आवश्यकता का आकलन करें। धनराशि का आवंटन वास्तविक क्षति के अनुपात में ही करें। विधायक को विनम्रतापूर्वक लेकिन दृढ़ता से सूचित करें कि सख्त केंद्रीय निगरानी के कारण मनमानी धनराशि का आवंटन संभव नहीं है।
ग्राम B (लॉजिस्टिक्स): अवैध रूप से धन का दुरुपयोग करने के बजाय आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करके निजी वाहनों/नावों को अधिगृहीत करें। वैकल्पिक रूप से, स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों/CSR पहलों के साथ साझेदारी करके लॉजिस्टिक्स लागत (कर्मचारियों के लिये ईंधन/भोजन) को वहन करें।
ग्राम C (प्रवासी): अस्थायी पहचान की अनुमति देने के लिये विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करें। स्थानीय बुज़ुर्गों या स्कूल शिक्षकों द्वारा पंचनामा (गवाह बयान) के माध्यम से पहचान सत्यापित करें, यह सुनिश्चित करते हुए कि जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के तहत सहायता उन तक पहुँचे, साथ ही लेखापरीक्षा के लिये दस्तावेज़ी रिकॉर्ड बनाए रखें।
|
मूल्यांकन |
विश्लेषण |
|
गुण |
1. नैतिक सत्यनिष्ठा: वस्तुनिष्ठ आँकड़ों का उपयोग करके राजनीतिक दबाव का विरोध करता है। 2. समावेशिता: यह सुनिश्चित करती है कि ग्राम B और C को नवीन, कानूनी साधनों के माध्यम से सहायता प्राप्त हो। 3. शुचिता: लॉजिस्टिक्स संबंधी खर्चों के लिये दुरुपयोग की बजाय वैकल्पिक धन (NGO/अनुरोध) ढूंढकर वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करती है। |
|
अवगुण |
1. अधिक प्रयास: विकल्प 1 की तुलना में इसमें महत्त्वपूर्ण समन्वय और अतिरिक्त काम की आवश्यकता होती है। 2. राजनीतिक तनाव: विधायक भले ही असंतुष्ट हो सकते हैं, लेकिन यह निर्णय विधि के आधार पर उचित ठहराया जा सकता है। |
|
नैतिक सिद्धांत |
यह वेबर के तर्कसंगत सिद्धांतों (नियमों) और गांधीवादी आदर्श (सहानुभूति) के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह लोक सेवा में निष्पक्षता का समर्थन करता है। |
तीसरा विकल्प नैतिक दृष्टि से सबसे सही और प्रशासनिक रूप से उपयुक्त है। यह निष्पक्षता, दक्षता और नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रश्न की मांग को पूरा करता है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रक्रिया (नियम) उद्देश्य (राहत) की शत्रु न बन जाए।
प्रश्न 3. आपका अंतिम कार्यपथ क्या होगा? अपने निर्णय को उपयुक्त तर्कों, नैतिक सिद्धांतों तथा लोक सेवा के मूल्यों का संदर्भ देते हुए न्यायोचित ठहराइये।
चरण 1: त्वरित साक्ष्य-आधारित वर्गीकरण (ग्राम A एवं विधायक से संबंधित)
चरण 2: नवीन संसाधन संचयन (ग्राम B और लॉजिस्टिक्स संबंधी समस्याओं का समाधान)
चरण 3: करुणामय प्रशासनिक दृष्टिकोण (ग्राम C और प्रवासी श्रमिक)
चरण 4: मीडिया और कर्मचारी प्रबंधन
संसाधनों की कमी वाले संकट में, नैतिक मार्ग करुणा और वैधता के बीच संतुलन बनाए रखने तथा निष्पक्ष एवं पारदर्शी कार्रवाई के माध्यम से राजनीतिक दबाव का विरोध करने में निहित है। प्रक्रियात्मक अखंडता को बनाए रखते हुए सबसे कमज़ोर लोगों को प्राथमिकता देकर SDM न्याय और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित करता है। यह दृष्टिकोण सच्ची सार्वजनिक सेवा को दर्शाता है जहाँ नियम मानवता की सेवा करते हैं, न कि उसका स्थान लेते हैं।