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ध्यान दें:

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न. भारत-श्रीलंका संबंध ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक निकटता से विकसित होकर भू-राजनीतिक वास्तविकताओं से प्रभावित सामरिक साझेदारी के रूप में परिवर्तित हुए हैं। संबंधों में विद्यमान प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिये तथा पारस्परिक विश्वास को सुदृढ़ करने के उपाय प्रस्तावित कीजिये। (250 शब्द)

    18 Nov, 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 2 अंतर्राष्ट्रीय संबंध

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • भारत-श्रीलंका संबंधों की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और विकसित हो रहे रणनीतिक संदर्भ से उत्तर लेखन की शुरुआत कीजिये। 
    • भारत-श्रीलंका संबंधों में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की विवेचना कीजिये। 
    • दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को मज़बूत करने के उपाय प्रस्तावित कीजिये।  
    • उपयुक्त उद्धरण के साथ उचित निष्कर्ष दीजिये। 

    परिचय:

    भारत और श्रीलंका के बीच संबंध गहरे ऐतिहासिक एवं सभ्यतागत संबंधों पर आधारित हैं। साझा बौद्ध विरासत, शताब्दियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क तथा विशेष रूप से तमिलनाडु एवं उत्तरी श्रीलंका के बीच निकट भाषायी एवं जातीय संबंध इन संबंधों को मज़बूती प्रदान करते हैं। 

    • हालाँकि, हाल के दशकों में यह साझेदारी रणनीतिक, आर्थिक तथा सुरक्षा-उन्मुख सहयोग में विकसित हुई है। यह परिवर्तन श्रीलंका की महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों के समीप स्थित भौगोलिक स्थिति और हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भारत की रुचि को प्रतिबिंबित करता है।

    भारत-श्रीलंका संबंधों को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियाँ:

    • मत्स्यन विवाद: कच्चाथीवू द्वीप विवाद अभी भी जारी है, जहाँ संप्रभुता श्रीलंका के पास होने के कारण भारतीय मछुआरों को केवल गैर-मत्स्यन की सीमित गतिविधियों की अनुमति है।
      • श्रीलंका के जलक्षेत्र में मत्स्यन के कथित उल्लंघन के आरोप में अकेले वर्ष 2024 में श्रीलंकाई प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा 500 से अधिक भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया गया था। 
      • श्रीलंका में वर्ष 2017 से प्रतिबंधित पाक खाड़ी में भारतीय यांत्रिक नौकाओं द्वारा की जाने वाली बॉटम ट्रॉलिंग प्रवाल भित्तियों तथा झींगा आवासों को क्षति पहुँचाती है।
    • चीनी रणनीतिक प्रभाव: वर्ष 2017 से 99-वर्षीय पट्टे पर हंबनटोटा बंदरगाह पर चीन का नियंत्रण श्रीलंका के रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में उसकी गहन उपस्थिति का प्रतीक है। इससे चीन की संभावित सैन्य उद्देश्यों को लेकर भारत की सुरक्षा चिंताएँ बढ़ रही हैं।
    • श्रीलंका में घरेलू राजनीतिक अस्थिरता: वर्ष 2022 के आर्थिक संकट के बाद से श्रीलंकाई नेतृत्व में लगातार बदलाव से नीतिगत निरंतरता में अनिश्चितताएँ उत्पन्न हुई हैं, जो बंदरगाह विकास, कनेक्टिविटी पहल और ऊर्जा सहयोग जैसी द्विपक्षीय परियोजनाओं को प्रभावित करती हैं।
    • 13वाँ संशोधन तथा तमिल जातीय प्रश्न: गृहयुद्ध के बाद 13वें संशोधन का धीमा और आंशिक कार्यान्वयन तमिल-बहुसंख्यक उत्तरी एवं पूर्वी प्रांतों में सत्ता के सार्थक अंतरण को सीमित करता है।
    • व्यापार असंतुलन और आर्थिक सहयोग: वित्तीय वर्ष 2023–24 में श्रीलंका को भारत का वस्तु निर्यात 4.11 अरब अमेरिकी डॉलर रहा जबकि भारत को श्रीलंका का निर्यात 1.42 अरब अमेरिकी डॉलर था। इससे श्रीलंका में व्यापार घाटे को लेकर घरेलू आलोचना उत्पन्न होती है।
    • समुद्री सीमा सुरक्षा और तस्करी: खुली समुद्री सीमाएँ मादक पदार्थों की तस्करी, अनधिकृत आप्रवासन और अवैध तस्करी गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं, जिससे सुरक्षा खतरे उत्पन्न होते हैं।

    आपसी विश्वास सुदृढ़ करने के उपाय:

    • सतत मत्स्यन सहयोग को संस्थागत रूप देना: भारत को श्रीलंका के साथ एक मज़बूत द्विपक्षीय मात्स्यिकी प्रबंधन तंत्र स्थापित करना चाहिये, जिसमें संयुक्त गश्त, विनियमित साझा मत्स्यन के क्षेत्र और मछुआरों की आजीविका सहायता शामिल हो।
    • सामरिक रक्षा साझेदारी के माध्यम से बाह्य प्रभाव का प्रतिसंतुलन: वर्ष 2025 में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक 5-वर्षीय रक्षा समझौता ज्ञापन के आधार पर, भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिये श्रीलंका की नौसेना में संयुक्त समुद्री गश्ती, खुफिया जानकारी साझा करने और क्षमता निर्माण को बढ़ाना चाहिये। 
    • राजनीतिक और जातीय सुलह के लिये समर्थन में तीव्रता: भारत को कूटनीतिक माध्यमों से श्रीलंका के 13वें संशोधन के पूर्ण और वास्तविक कार्यान्वयन का समर्थन करना चाहिये और बहु-हितधारक सुलह मंचों का समर्थन करना चाहिये।
    • व्यापार और निवेश ढाँचे का पुनर्जीवन: भारत को श्रीलंका के साथ आर्थिक और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते (ETCA)  पर वार्ताओं को शीघ्र अंतिम रूप देना चाहिये। इसमें चरणबद्ध उदारीकरण तथा सुरक्षा प्रावधानों के माध्यम से श्रीलंकाई चिंताओं और व्यापार असंतुलन का समाधान किया जाना चाहिये।  
    • श्रीलंका की आर्थिक पुनर्प्राप्ति और अवसंरचना विकास में सहयोग: भारत को भारतीय आवास परियोजना और नवीकरणीय ऊर्जा पहलों जैसी चल रही परियोजनाओं में रियायती ऋण, अनुदान एवं तकनीकी सहायता के साथ मज़बूत विकास सहयोग जारी रखना चाहिये।
    • क्षमता निर्माण और डिजिटल गवर्नेंस सहयोग का विस्तार: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में भारत की उपलब्धियों का लाभ उठाते हुए श्रीलंका की यूनिक डिजिटल आइडेंटिटी (SLUDI) परियोजना और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्रियान्वयन में समर्थन को तीव्र किया जाना चाहिये।
    • जन-से-जन तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा: भारत को सांस्कृतिक कूटनीति को सुदृढ़ करना चाहिये। विरासत स्थलों के संरक्षण तथा पर्यटन संवर्धन को प्रोत्साहन देना चाहिये, क्योंकि भारत श्रीलंका का सबसे बड़ा पर्यटक स्रोत है।

    निष्कर्ष:

    जैसा कि विद्वान जोसेफ नाई ने कहा है, “सॉफ्ट पावर का अर्थ बाध्यता नहीं बल्कि आकर्षण, प्रेरणा और प्रभाव है।” 

    श्रीलंका के साथ भारत की सहभागिता कूटनीति, विकास सहायता तथा सांस्कृतिक साझेदारी के समन्वय के माध्यम से इस सिद्धांत का उदाहरण प्रस्तुत करती है। आगे की राह में भारत को सतत मात्स्यिकी प्रबंधन, आर्थिक एकीकरण एवं क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मज़बूत करना चाहिये तथा इसके साथ-साथ जातीय सुलह और जन-से-जन संपर्कों को भी प्रोत्साहित करना चाहिये।

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