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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    भारत में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की मुख्य विशेषताएँ और कार्य क्या हैं? सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा और जवाबदेही सुनिश्चित करने में यह कितना प्रभावी रहा है? (250 शब्द)

    20 Jun, 2023 सामान्य अध्ययन पेपर 2 राजव्यवस्था

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) का संक्षिप्त में परिचय देकर अपने उत्तर की शुरुआत कीजिये।
    • इसकी प्रमुख विशेषताओं एवं कार्यों की व्याख्या कीजिये।
    • कुछ ऐसे उदाहरण लिखिये जिनमें सीवीसी ने सत्यनिष्ठा और जवाबदेही सुनिश्चित करने में भूमिका निभाई हो।
    • उपयुक्त निष्कर्ष लिखिये।

    भूमिका:

    केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) भारत में शीर्ष भ्रष्टाचार विरोधी निकाय है, जो केंद्र सरकार और उसके संगठनों के सतर्कता प्रशासन पर अधीक्षण करता है। इसकी स्थापना एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा वर्ष 1964 में संथानम समिति की सिफारिश पर की गई थी तथा सीवीसी अधिनियम, 2003 द्वारा इसे वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था।

    मुख्य भाग:

    सीवीसी की मुख्य विशेषताएँ और कार्य:

    • संरचना:
      • सीवीसी में एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (अध्यक्ष) और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त (सदस्य) शामिल होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाती है जिसमें प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), गृह मंत्री (सदस्य) और लोकसभा में विपक्ष के नेता (सदस्य) शामिल होते हैं।
      • वे चार वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, पद धारण करते हैं।
    • क्षेत्राधिकार:
      • सशस्त्र बलों के सदस्यों और सभी केंद्र सरकार के संगठनों, निगमों, समाजों, स्थानीय प्राधिकरणों आदि को छोड़कर केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों सीवीसी के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते है।
      • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, राष्ट्रीयकृत बैंकों और बीमा कंपनियों के कर्मचारियों भी इसके क्षेत्राधिकार में शामिल है।
    • कार्य:
      • सतर्कता नीति, मानदंडों और प्रक्रियाओं से संबंधित मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देना।
      • लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार या कदाचार की शिकायतें प्राप्त करना और उनकी जाँच या निरीक्षणकरना।
      • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामलों के संबंध में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के कामकाज पर अधीक्षण का प्रयोग करना।
      • लोक सेवकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक मामलों की प्रगति की समीक्षा करना और उनके शीघ्र निपटान के लिये निर्देश जारी करना।
      • भ्रष्टाचार या कदाचार के दोषी पाए गए लोक सेवकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की सिफारिश करना।
      • भ्रष्टाचार का पता लगाने और रोकने के लिये निवारक सतर्कता उपाय जैसे निरीक्षण, लेखा परीक्षा, समीक्षा आदि करना।
      • लोक सेवकों और नागरिकों को भ्रष्टाचार के दुष्परिणामों और सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के महत्त्व के बारे में शिक्षित कर जागरूकता पैदा करना।

    सीवीसी लोक सेवकों से जुड़े भ्रष्टाचार और कदाचार के विभिन्न मामलों को उज़ागर करके और दंडित करके सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिसके कुछ निम्नलिखित उदाहरण हैं:

    • 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला:
      • सीवीसी द्वारा इसमामले को जाँच के लिये सीबीआई को भेज दिया और इसके मामले की निगरानी की, साथ ही सीवीसी द्वारा अपने निष्कर्षों और सिफारिशों पर सर्वोच्च न्यायालय को एक रिपोर्ट भी सौंपी गई।
    • कोयला आवंटन घोटाला:
      • सीवीसी द्वारा इसमामले को जाँच के लिये सीबीआई को भेज दिया और इसके मामले की निगरानी की, साथ ही सीवीसी द्वारा अपने निष्कर्षों और सिफारिशों पर सर्वोच्च न्यायालय को एक रिपोर्ट भी सौंपी गई।
    • राष्ट्रमंडल खेल घोटाला:
      • सीवीसी द्वारा खेलों के विभिन्न पहलुओं जैसे बुनियादी ढाँचे के विकास, खरीद, अनुबंध आदि में निरीक्षण, ऑडिट, पूछताछ और जाँच की गई, जिसके कारण सुरेश कलामाड़ी को दोषी ठहराया गया।

    निष्कर्ष:

    केंद्रीय सतर्कता आयोग के पास सीमित शक्तियाँ होती है क्योंकि यह एक सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करता है जिसके पास मामला दर्ज करने की कोई शक्ति नहीं होती है। भले ही यह एक स्वतंत्र एजेंसी है, इसके पास शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिये संसाधनों और शक्ति का अभाव है।

    अतः तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में भ्रष्टाचार को रोकने के लिये आयोग की ऐसी कमियों को दूर करने की ज़रूरत है।

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