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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    भारत में सतत् विकास को बढ़ावा देने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा कीजिये। सतत् एवं स्थायी तकनीकों को अपनाने से संबंधित चुनौतियों को बताते हुए चर्चा कीजिये कि उन्हें किस प्रकार दूर किया जा सकता है? (150 शब्द)

    26 Apr, 2023 सामान्य अध्ययन पेपर 3 विज्ञान-प्रौद्योगिकी

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित प्रौद्योगिकियों का संक्षिप्त परिचय देते हुए अपने उत्तर की शुरुआत कीजिये।
    • सतत् विकास को बढ़ावा देने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा कीजिये।
    • सतत् प्रौद्योगिकियों को अपनाने से संबंधित चुनौतियों पर चर्चा कीजिये।
    • इन चुनौतियों के समाधान हेतु कुछ उपाय सुझाइए।
    • तदनुसार निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    प्रौद्योगिकी द्वारा ऊर्जा, कृषि, परिवहन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सतत् विकास को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। प्रौद्योगिकी में संसाधन दक्षता को बढ़ावा देने, अपशिष्ट को कम करने और पर्यावरण तथा सामाजिक परिणामों में सुधार करके सतत् विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है।

    मुख्य भाग:

    भारत में सतत् विकास को बढ़ावा देने में प्रौद्योगिकी की भूमिका:

    • नवीकरणीय ऊर्जा:
      • नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित प्रौद्योगिकियाँ जैसे कि सौर, पवन और जल विद्युत, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करके, ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि करने एवं ग्रामीण विद्युतीकरण को बढ़ावा देकर भारत में सतत् विकास को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
    • ऊर्जा दक्षता:
      • ऊर्जा-कुशल उपकरणों और भवनों से संबंधित तकनीकी प्रगति से ऊर्जा की खपत में कमी आने के साथ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आ रही है।
      • उदाहरण के लिये स्मार्ट ग्रिड तकनीक, विद्युत के कुशल वितरण और प्रबंधन को सक्षम बनाती है, जिससे इसकी बर्बादी कम होने के साथ लागत में कमी आती है।
    • अपशिष्ट प्रबंधन:
      • उन्नत प्रौद्योगिकियाँ जैसे अपशिष्ट-से-ऊर्जा और पुनर्चक्रण, अपशिष्ट को कम करने और स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं।
    • जल संरक्षण:
      • ड्रिप सिंचाई और जल- उपयोग दक्षता उपकरणों से संबंधित तकनीकों के माध्यम से जल संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के साथ जल संरक्षण को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
    • सतत् कृषि:
      • वर्तमान में जल और उर्वरक जैसी आगतों को कम करते हुए फसल की पैदावार को बढ़ाने हेतु सेंसर, ड्रोन और जीपीएस मैपिंग सहित सटीक कृषि तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
      • इससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव को कम करते हुए कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है।
    • चक्रीय अर्थव्यवस्था:
      • प्रौद्योगिकी से रेखीय अर्थव्यवस्था को चक्रीय अर्थव्यवस्था के रूप में संक्रमण अवस्था में ले जाने की सुविधा मिल रही है, जिसमें अपशिष्ट को कम से कम करने के साथ संसाधनों के पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण पर बल दिया जाता है।
      • उदाहरण के लिये 3डी प्रिंटिंग तकनीक से मांग आधारित स्पेयर पार्ट्स का उत्पादन संभव हो पा रहा है, जिससे संसाधन दक्षता को बढ़ावा मिल रहा है।

    सतत् प्रौद्योगिकियों को अपनाने से संबंधित चुनौतियाँ:

    • उच्च कीमतें:
      • सतत् प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक इसके कार्यान्वयन में उच्च लागत का आना है।
      • उदाहरण के लिये सौर पैनल या पवन टर्बाइन स्थापित करना महंगा हो सकता है। इस उच्च लागत के कारण व्यक्ति और व्यवसाय स्थायी तकनीकों को अपनाने से हतोत्साहित हो सकते हैं।
    • सीमित विस्तार:
      • कुछ सतत् प्रौद्योगिकियाँ बड़ी आबादी या उद्योगों की मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हो सकती हैं।
      • उदाहरण के लिये कुछ नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के समान स्तर की ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।
    • जागरूकता की कमी:
      • बहुत से लोग सतत् तकनीकों और उनके लाभों से अवगत नहीं होते हैं।
      • वे यह नहीं जानते हैं कि उनका उपयोग कैसे करना है या उन्हें कैसे बनाए रखना है। इसके कारण इनके उपयोग में बाधा आ सकती है।
    • सहायक नीतियों का अभाव:
      • इस संदर्भ में अपर्याप्त नीति और नियामक ढाँचे से भी इन प्रौद्योगिकियों को अपनाने में बाधा होती है।

    इन चुनौतियों का समाधान:

    • वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना:
      • टैक्स क्रेडिट, सब्सिडी और कम ब्याज वाले ऋण जैसे वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने से सतत् प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
    • अवसंरचना में सुधार करना:
      • सरकारें और निजी संगठन सतत् प्रौद्योगिकियों जैसे इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन या नवीकरणीय ऊर्जा हेतु संचरण लाइनों को स्थापित करने हेतु आवश्यक बुनियादी ढाँचे में निवेश कर सकते हैं।
    • जागरूकता अभियान:
      • शिक्षा और जागरूकता अभियान हितधारकों के बीच सतत् प्रौद्योगिकियों की समझ और स्वीकृति को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं।
    • इस दिशा में सहयोग को तीव्र करना:
      • व्यवसायों, सरकारों और समुदायों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने से सतत् प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दिशा में प्रोत्साहन मिल सकता है।

    निष्कर्ष:

    जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय क्षरण के प्रभावों को कम करने की बढ़ती आवश्यकता के आलोक में सतत् प्रौद्योगिकियाँ बेहतर समाधान प्रस्तुत करती हैं जिससे पृथ्वी की रक्षा होने के साथ आर्थिक विकास सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

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