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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    नैतिकता और अभिक्षमता के बीच क्या संबंध है? किसी व्यक्ति का नैतिक चरित्र तर्कसंगत निर्णय लेने और समाज के सर्वोत्तम हित में कार्य करने की उसकी क्षमता को किस प्रकार प्रभावित करता है? (150 शब्द)

    30 Mar, 2023 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • नैतिकता और अभिक्षमता के बीच अंतर का संक्षिप्त परिचय देते हुए अपना उत्तर प्रारंभ कीजिये।
    • निर्णय लेने के साथ समाज के सर्वोत्तम हित के आलोक में नैतिक चरित्र की भूमिका पर चर्चा कीजिये।
    • तदनुसार निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान में नैतिकता और अभिक्षमता के बीच संबंध लंबे समय से चर्चा का विषय बना है। नैतिकता का संबंध नैतिक सिद्धांतों और मूल्यों से है जबकि अभिक्षमता का आशय कुछ करने की स्वाभाविक क्षमता या प्रतिभा से है। किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व और व्यवहार को आकार देने में नैतिकता और अभिक्षमता दोनों की ही महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

    मुख्य भाग:

    • नैतिकता और अभिक्षमता:
      • नैतिकता और अभिक्षमता परस्पर संबंधित हैं और दोनों का व्यक्ति के व्यवहार पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
      • नैतिकता उन सिद्धांतों और मूल्यों से संबंधित है जिनसे हमारे व्यवहार और निर्णय का मार्गदर्शन होता है जबकि अभिक्षमता का आशय कुछ कार्यों को अच्छी तरह से करने की स्वाभाविक क्षमता या प्रतिभा से है।
      • किसी व्यक्ति की अभिक्षमता उसके नैतिक व्यवहार को प्रभावित कर सकती है क्योंकि व्यक्ति की अपनी क्षमता और ताकत के अनुसार कार्य करने की अधिक संभावना हो सकती है।
      • इसी तरह से किसी व्यक्ति की नैतिकता उसकी अभिक्षमता को प्रभावित कर सकती है क्योंकि यह कुछ स्थितियों में अपनी प्राकृतिक क्षमताओं पर अपने नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दे सकता है।
      • नैतिकता और अभिक्षमता के बीच संबंध इस तथ्य से और जटिल हो जाता है कि व्यक्तियों के अलग-अलग नैतिक मूल्य और अभिक्षमताएँ हो सकती हैं।
      • उदाहरण के लिये किसी व्यक्ति की विज्ञान में मजबूत अभिक्षमता हो सकती है लेकिन उसके नैतिक मूल्य वैज्ञानिक प्रगति की तुलना में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे सकते हैं।
      • ऐसे मामलों में व्यक्ति को अपनी प्राकृतिक क्षमताओं का अपने नैतिक मूल्यों के साथ सामंजस्य स्थापित करने हेतु संघर्ष करना पड़ सकता है जिससे निर्णय लेने में कठिनाई हो सकती है।
    • नैतिक चरित्र और तर्कसंगत निर्णय लेना:
      • किसी व्यक्ति का नैतिक चरित्र तर्कसंगत निर्णय लेने की उसकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
      • तर्कसंगत निर्णय लेने में विभिन्न विकल्पों के गुण और दोषों पर विचार कर अधिकतम अनुकूल विकल्प को चुना जाता है।
      • कोई व्यक्ति अपने नैतिक चरित्र के कारण इन गुण और दोषों को विभिन्न दृष्टिकोण से देख सकता है।
      • उदाहरण के लिये जब कोई व्यक्ति ईमानदारी को अत्यधिक महत्त्व देता हो तब वह अपने प्रतिकूल होने पर भी सच बोलने का साहस करेगा।
      • इसके विपरीत जिस व्यक्ति में ऐसे नैतिक मूल्यों का अभाव होता है उसके झूठ बोलने की अधिक संभावना हो सकती है।
      • इस प्रकार से किसी व्यक्ति का नैतिक चरित्र उसके तर्कसंगत निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
    • नैतिक चरित्र और समाज का सर्वोत्तम हित:
      • किसी व्यक्ति का नैतिक चरित्र समाज के सर्वोत्तम हित में कार्य करने की उसकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
      • समाज के सर्वोत्तम हित में कार्य करने में ऐसे निर्णय लेना और ऐसे कार्य करना शामिल है जिससे समाज को समग्र रूप से लाभ हो। किसी व्यक्ति का नैतिक चरित्र समाज के सर्वोत्तम हित में कार्य करने के उसके दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकता है।
      • उदाहरण के लिये ऐसा व्यक्ति जो सामाजिक न्याय को अत्यधिक महत्त्व देता है वह उन नीतियों को प्राथमिकता दे सकता है जो उपेक्षित समूहों को लाभान्वित करती हों, भले ही इसका अर्थ अपने स्वयं के व्यक्तिगत लाभ का त्याग करना हो।
      • इसके विपरीत ऐसे नैतिक मूल्यों के अभाव वाला व्यक्ति ऐसी नीतियों को प्राथमिकता दे सकता है जो स्वयं को या स्वयं के समूह को लाभ पहुँचाती हों, भले ही यह हाशिये के समूहों के लिये प्रतिकूल हों।

    निष्कर्ष:

    • नैतिकता और अभिक्षमता के बीच जटिल और बहुआयामी संबंध होता है। नैतिकता और अभिक्षमता जैसे गुण परस्पर संबंधित होने के बावजूद कुछ स्थितियों में एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं।
      • किसी व्यक्ति का नैतिक चरित्र तर्कसंगत निर्णय लेने और समाज के सर्वोत्तम हित में कार्य करने की उसकी क्षमता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिये ऐसे मजबूत नैतिक मूल्यों और नैतिक चरित्र को विकसित करना आवश्यक है, जो किसी व्यक्ति की योग्यता और नैतिक व्यवहार को सकारात्मक बना सके।
      • अंततः नैतिक चरित्र को प्राथमिकता देने वाले समाज के विकसित होने और स्थायी प्रगति हासिल करने की संभावना अधिक होती है।

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