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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    क्या निष्पक्ष, न्यायोचित और खुले चुनाव सुनिश्चित करने में चुनावी बांड प्रभावी हैं? चुनावी बांड से जुड़ी विभिन्न चिंताओं पर चर्चा कीजिये। (250 शब्द)

    15 Nov, 2022 सामान्य अध्ययन पेपर 2 राजव्यवस्था

    उत्तर :

    दृष्टिकोण:

    • चुनावी बॉण्ड का संक्षिप्त वर्णन करते हुए अपने उत्तर की शुरुआत करें।
    • चर्चा कीजिये कि वे किस प्रकार निष्पक्ष, न्यायपूर्ण और खुले चुनाव को सुनिश्चित करते हैं।
    • चुनावी बॉण्ड से संबंधित विभिन्न चिंताओं के बारे में बताइये।
    • उपयुक्त निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    • चुनावी बाॅण्ड प्रॉमिसरी नोट्स के रुप में मुद्रा के साधन होते हैं, जिन्हें भारत में कंपनियों और व्यक्तियों द्वारा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से खरीदा जा सकता है तथा इसे किसी राजनीतिक दल को दान किया जा सकता है, जो बाॅण्ड को भुना सकता है।
    • ये बाॅण्ड केवल एक पंजीकृत राजनीतिक दल के नामित खाते में ही भुनाए जा सकते हैं।
    • कोई व्यक्ति अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से बाॅण्ड खरीद सकता है।

    रूपरेखा:

    • चुनावी बाॅण्ड न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और खुले चुनाव सुनिश्चित करने में मदद करते हैं:
      • हम कह सकते हैं कि चुनाव बाॅण्ड नियमित लोगों के लिये अपनी पसंद के राजनीतिक दलों को धन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को न करना सरल बनाते हैं।
      • पारदर्शिता में वृद्धि: चुनावी बाॅण्ड कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य भारत के चुनावी वित्तपोषण में पारदर्शिता के स्तर को बढ़ाना था।
      • अनामता: प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि दाता की पहचान गुप्त रखी जाए।
      • जवाबदेहिता में वृद्धि: चूँकि निर्वाचन चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों की तरफ से चुनावी बाॅण्ड के माध्यम से किये गए योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। इससे भारत की चुनावी वित्तपोषण प्रणाली में सुधार करने में मदद मिलेगी।
    • चुनावी बाॅण्ड से संबंधित चिंताएँ:
      • जबरन वसूली की संभावना:
        • चूँकि इस तरह के बॉण्ड सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों (SBI) के माध्यम से बेचे जाते हैं, ऐसे में कई आलोचकों का मानना है कि सरकार इसके माध्यम से यह जान सकती है कि कौन लोग विपक्षी दलों को वित्तपोषण प्रदान कर रहे हैं।
        • परिणामस्वरूप यह प्रकिया केवल तत्कालीन सरकार को ही धन उगाही की अनुमति देती है और सत्ताधारी पार्टी को अनुचित लाभ प्रदान करती है।
      • लोकतंत्र के लिये चुनौती: वित्त अधिनियम 2017 में संशोधन के माध्यम से केंद्र सरकार ने राजनीतिक दलों को चुनावी बॉण्ड के ज़रिये प्राप्त राशि का खुलासा करने से छूट दी है।
        • इसका मतलब है कि मतदाता यह नहीं जान पाएंगे कि किस व्यक्ति, कंपनी या संगठन ने किस पार्टी को और किस हद तक वित्तपोषित किया है।
        • हालाँकि एक प्रतिनिधि लोकतंत्र में नागरिक उन लोगों के लिये अपना वोट डालते हैं जो संसद में उनका प्रतिनिधित्व करेंगे।
      • ‘जानने के अधिकार’ से समझौता:
        • भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्वीकार किया है कि ‘जानने का अधिकार’ विशेष रूप से चुनावों के संदर्भ में भारतीय संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 19) का एक अभिन्न अंग है।
      • क्रोनी कैपिटलिज़्म:
        • चुनावी बॉण्ड योजना राजनीतिक चंदे पर पहले से मौजूद सभी सीमाओं को हटा देती है और प्रभावी रूप से अच्छे संसाधन वाले निगमों को चुनावों के लिये धन देने की अनुमति देती है जिससे क्रोनी कैपिटलिज़्म का मार्ग प्रशस्त होता है।
          • क्रोनी कैपिटलिज़्म एक आर्थिक प्रणाली है जो व्यापारिक नेताओं और सरकारी अधिकारियों के बीच घनिष्ठ, पारस्परिक रूप से लाभप्रद संबंधों की विशेषता है।

    निष्कर्ष:

    • भ्रष्टाचार के दुष्चक्र को तोड़ने और लोकतांत्रिक राजनीति की गुणवत्ता की वृद्धि के लिये साहसिक सुधारों के साथ-साथ राजनीतिक वित्तपोषण के प्रभावी विनियमन की आवश्यकता है।
    • संपूर्ण शासनतंत्र को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने हेतु मौजूदा कानूनों में खामियों को दूर करना आवश्यक है।
    • मतदाता जागरूकता अभियानों की मांग कर पर्याप्त बदलाव लाने में भी मदद कर सकते हैं। यदि मतदाता उन उम्मीदवारों और पार्टियों को अस्वीकार करते हैं जो उन परअधिक खर्च करते हैं या उन्हें रिश्वत देते हैं तो लोकतंत्र एक कदम और आगे बढ़ जाएगा।

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