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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न. भारत विज्ञान और तकनीक संचालित कूटनीतिक क्षमता का उपयोग कैसे कर सकता है? (150 शब्द)

    25 Oct, 2022 सामान्य अध्ययन पेपर 2 अंतर्राष्ट्रीय संबंध

    उत्तर :

    हल करने के दृष्टिकोण:

    • तकनीक संचालित कूटनीति और इसके महत्त्व के बारे में संक्षेप में चर्चा कीजिये।
    • तकनीक-संचालित कूटनीति के समक्ष चुनौतियाँ।
    • तकनीक-संचालित कूटनीति का लाभ उठाने की भारत की क्षमता पर चर्चा कीजिये।
    • उचित निष्कर्ष प्रदान कीजिये।

    पृष्ठभूमि:

    कूटनीति किसी भी देश का महत्त्वपूर्ण उपकरण रहा है, जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र के उद्देश्यों को संबोधित करते हैं। समय के साथ, कूटनीति ने कूटनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये धीरे-धीरे कई विषयों को प्रभाव उत्पन्न करने वाले कारक के रूप में सहयोजित किया है। तकनीक-संचालित कूटनीति का अर्थ कूटनीति और विदेश नीति निर्माण में की जाने वाली वैज्ञानिक प्रविष्टि है।

    संघटन:

    • तकनीक-संचालित कूटनीति का महत्त्व:
      • सामूहिक विनाश के हथियार, जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, मानव स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण, बाह्य अंतरिक्ष आदि जैसी वैश्विक चुनौतियों को समझने और उनसे निपटने के लिये सभी को वैज्ञानिक दिशानिर्देश की आवश्यकता होती है।
      • ये चुनौतियाँ पार-सीमा होती हैं और इन्हें सामान्य राजनयिक प्रयासों के अतिरिक्त हल करने के लिये विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग की आवश्यकता होती है।
        • उदाहरण के लिये जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (IPCC)।
      • यह उन देशों के बीच जुड़ाव के वैकल्पिक आयोजन प्रदान करता है जिनमें राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं। इस प्रकार यह संप्रभु राष्ट्रों के बीच शक्ति-संतुलन की गतिशीलता को प्रभावित करके एक महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता हैं।
      • यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और क्षमता को मज़बूत करने और अंतर्राष्ट्रीय चर्चाओं में अधिक प्रभावी ढंग से भाग लेने के लिये विज्ञान और प्रौद्योगिकी ज्ञान प्राप्त करना चाहता है जहाँ विज्ञान और प्रौद्योगिकी शामिल है।
    • तकनीक-संचालित कूटनीति के समक्ष चुनौतियाँ:
      • साइबर-युद्ध और साइबर-सेनाओं का उदय: प्रौद्योगिकी ने युद्ध जैसी स्थिति में दुश्मन के सूचना वातावरण को पंगु बनाने के लिये बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई और हिंसा से युद्ध की प्रकृति को सूक्ष्म, अदृश्य लेकिन निर्णायक साइबर युद्ध में बदल दिया है।
      • जैविक-हथियारों का खतरा: जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ, सूक्ष्मजीव अभिकर्मकों (जैसे बैक्टीरिया, वायरस, या कवक) को जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि संघर्ष और युद्ध के समय जानबूझकर मनुष्यों, जानवरों या पौधों को नुकसान पहुँचाया जा सके।
      • डेटा गोपनीयता चिंता: बड़े डेटा को अक्सर 21वीं सदी के काले सोने के रूप में माना जाता है।
        • जैसा कि इंटरनेट, बाज़ारों और उपभोक्ताओं के एकत्रीकरण एवं वैश्वीकरण की अनुमति देता है, जिसके कारण सीमा पार डेटा प्रवाह डेटा गोपनीयता और वैश्विक शासन का एक विवादित मुद्दा बनता जा रहा है।
      • एक तकनीकी विद्युत् गृह के रूप में भारत के उदय के साथ, तकनीक-संचालित अवसंरचनात्मक ढाँचे पर सहयोग के माध्यम से इसकी क्षमता का लाभ उठाया जा सकता है जैसे:
        • एकीकृत भुगतान प्रणाली के साथ विश्व को एकीकृत करना: एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) ने भारत के लिये भुगतान प्रणाली में एक विवर्तनिक बदलाव को रेखांकित किया है।
          • भारत में विकसित की गई भुगतान की एक खुली और बहुपक्षीय डिजिटल प्रणाली को विभिन्न देशों में अपनाने के लिये प्रेरित किया जा सकता है। यह एक आदर्श मृदु शक्ति अवसर के रूप में काम कर सकता है।
          • एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक जीत तब होगी जब भारत की मौजूदा डिजिटल भुगतान प्रणाली विश्व स्तर पर स्वीकृत मानक बन जाये। यह पहले से ही चल रहा है, चार देशों (नेपाल, भूटान, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात) ने भारत की भुगतान प्रणाली को स्वीकार कर लिया है और उसका उपयोग कर रहे हैं।
        • सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र: वैश्विक सन्दर्भ में, भारत जेनेरिक दवाओं और औषधियों का विश्व का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जो वैश्विक मांग का 20% हिस्सा है। वैक्सीन निर्माण और वैक्सीन कूटनीति में भी भारत सबसे आगे रहा है।
          • इसने भारत को सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए संबंध स्थापित करने के लिये एक पथप्रदर्शक बना दिया है। अनुसंधान और विकास गतिविधियों के लिये अधिक प्रोत्साहन वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग के मामले में भारत की सौम्य शक्ति में सुधार कर सकता है।
      • विज्ञान पर्यटन: भारत राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, दिल्ली और बिरला विज्ञान संग्रहालय, हैदराबाद जैसे देश भर में वैज्ञानिक स्थानों को बढ़ावा देने वाले विज्ञान पर्यटन की अवधारणा कर सकता है, जहाँ विश्व भर के लोग विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान करके नए उन्मेष कर सकते हैं।
      • अन्य देशों के साथ सहयोग:
        • ब्रह्मोस: यह एक भारत-रूस संयुक्त उद्यम है, इसकी मारक सीमा 290 किलोमीटर है और यह मच 2.8 (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना) की शीर्ष गति के साथ विश्व की सबसे तेज क्रूज़ मिसाइल है।
        • कृत्रिम प्रज्ञता: भारत और अमेरिका ने भारत-अमेरिकी साइंस एंड टेक्नोलॉजी फोरम द्वारा यूएस इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (USIAI) पहल शुरू की है। यह संगठन दोनों देशों के बीच कृत्रिम प्रज्ञता नवाचार सहयोग को बढ़ावा देने और कृत्रिम प्रज्ञता कार्यबल विकसित करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेंगे।

    निष्कर्ष:

    भारत के सौम्य शक्तिशाली शस्त्रागार को नियोजित करने के लिये विज्ञान और प्रौद्योगिकी बहुत उपयोगी है। वैश्विक भू-राजनीति पर एक बहु-संरेखित रुख के साथ, भारत के लिये वैश्विक भू-अर्थशास्त्र में अपने विज्ञान और तकनीकी संबंधों को अधिक व्यापक और अच्छी तरह से विस्तारित करने का समय आ गया है।

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