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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न. नौकरशाहों पर भ्रष्टाचार के आरोप तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं. इस संदर्भ में सिविल सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारणों और लोगों तथा सार्वजनिक जीवन पर इसके प्रभाव की चर्चा कीजिये। (250 शब्द)

    20 Sep, 2022 सामान्य अध्ययन पेपर 2 राजव्यवस्था

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • भ्रष्टाचार के बारे में संक्षिप्त जानकारी देकर अपने उत्तर की शुरुआत कीजिये।
    • सिविल सेवा में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारणों की विवेचना कीजिये।
    • लोगों और सार्वजनिक जीवन पर भ्रष्टाचार के प्रभाव की चर्चा कीजिये।
    • आगे की राह बताते हुए अपना उत्तर समाप्त कीजिये।

    परिचय

    भ्रष्टाचार को निजी लाभ के लिये शक्ति के दुरुपयोग के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह देश के विकास को विभिन्न तरीकों से प्रभावित कर सकता है।

    भ्रष्टाचार में कई तरह की कार्रवाइयाँ, जैसे- रिश्वत देना या उसे स्वीकार करना या अनुचित उपहार देना, दोहरा व्यवहार करना और निवेशकों को धोखा देना आदि शामिल शामिल है।.

    सिविल सेवा में भ्रष्टाचार के प्रसार के कारण:

    • सिविल सेवा का राजनीतिकरण: जब सिविल सेवा पदों को राजनीतिक समर्थन के लिये पुरस्कार के रूप में उपयोग किया जाता है या रिश्वत के लिये स्थानांतरण किया जाता है, तो उच्च स्तर के भ्रष्टाचार के अवसर काफी बढ़ जाते हैं।
    • निजी क्षेत्र की तुलना में कम वेतन: निजी क्षेत्र की तुलना में सिविल सेवकों का वेतन।
      • वेतन में अंतर की भरपाई के लिये कुछ कर्मचारी रिश्वत का सहारा लेते हैं।
    • प्रशासनिक देरी: फाइलों की मंज़ूरी में देरी भ्रष्टाचार का मूल कारण है।
    • चुनौतीरहित सत्ता की औपनिवेशिक विरासत: सत्ता के उपासक वाले समाज में सरकारी अधिकारियों के लिये नैतिक आचरण से विचलित होना आसान होता है।
    • कानून का कमज़ोर प्रवर्तन: भ्रष्टाचार की बुराई को रोकने के लिये कई कानून बनाए गए हैं लेकिन उनके कमज़ोर प्रवर्तन ने भ्रष्टाचार को रोकने में एक बाधा के रूप में काम किया है।

    भ्रष्टाचार का प्रभाव

    • लोगों और सार्वजनिक जीवन पर:
      • सेवाओं में गुणवत्ता की कमी: भ्रष्टाचार वाली प्रणाली में सेवा की कोई गुणवत्ता नहीं है।
        • गुणवत्ता की मांग करने हेतु किसी को इसके लिये भुगतान करना पड़ सकता है। यह कई क्षेत्रों जैसे नगर पालिका, बिजली, राहत कोष के वितरण आदि में देखा जाता है।
      • उचित न्याय का अभाव: न्यायपालिका प्रणाली में भ्रष्टाचार अनुचित न्याय की ओर ले जाता है जिससे पीड़ित लोगों को भुगतना पड़ सकता है।
        • सबूतों की कमी या यहाँ तक कि मिटाए गए सबूतों के कारण एक अपराध संदेह के लाभ के रूप में साबित हो सकता है।
        • पुलिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार के कारण दशकों से जाँच प्रक्रिया चल रही है।
      • खराब स्वास्थ्य और स्वच्छता: अधिक भ्रष्टाचार वाले देशों में लोगों के बीच अधिक स्वास्थ्य समस्याएँ देखी जा सकती हैं। यहाँ स्वच्छ पेयजल, उचित सड़कें, गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न आपूर्ति आदि की कमी होती है।
        • ये निम्न-गुणवत्ता वाली सेवाएँ ठेकेदारों और इसमें शामिल अधिकारियों द्वारा पैसे बचाने के लिये की जाती हैं।

    आगे की राह

    • सिविल सेवा बोर्ड: सिविल सेवा बोर्ड की स्थापना कर सरकार अत्यधिक राजनीतिक नियंत्रण पर अंकुश लगा सकती है।
    • अनुशासनात्मक प्रक्रिया का सरलीकरण: अनुशासनात्मक प्रक्रिया को सरल बनाकर और विभागों के भीतर निवारक सतर्कता को मज़बूत करके, यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि भ्रष्ट सिविल सेवक संवेदनशील पदों पर काबिज न हों।
    • मूल्य आधारित प्रशिक्षण: सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये सभी सिविल सेवकों को मूल्य आधारित प्रशिक्षण पर ज़ोर देना महत्त्वपूर्ण है।
    • नैतिक और सार्वजनिक उत्साही सिविल सेवक की गणना:
      • नैतिक और लोक-उत्साही सिविल सेवक के गुणों की गणना करते हुए, आदर्श अधिकारी को अपने अधिकार क्षेत्र में मुद्दों की शून्य लंबितता सुनिश्चित करनी चाहिये और कार्यालय में ईमानदारी एवं अखंडता के उच्चतम गुणों को प्रदर्शित करना चाहिये, साथ ही सरकार के उपायों को लोगों तक ले जाने में सक्रिय होना चाहिये और सबसे बढ़कर हाशिये वर्गों के लोंगों के प्रति सहानुभूति रखे।
    • आधुनिक आकांक्षाओं के अनुरूप परिवर्तन:
      • शासन मॉडल लोगों की आधुनिक आकांक्षाओं के अनुरूप बदलना चाहिये और नौकरशाही व्यवस्था को 'संवेदनशील, पारदर्शी और मज़बूत ' रखना आवश्यक है।
        • सरकार ने राष्ट्र के लिये नागरिक-केंद्रित और भविष्य हेतु तैयार सिविल सेवा के निर्माण के उद्देश्य से 'मिशन कर्मयोगी' शुरू किया है।

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